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मेरा नाम मुकेश है. मैं 25 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ।.
मेरा जन्म गरीब घराने में हुआ था. मेरी मां शारदा और पिताजी पूरन की खुद की जमीन नहीं थी तो वे दूसरे के खेत में मजदूरी करके हमारा पेट भरते थे.मेहनत मजदूरी करके हमे खाने को रूखी सूखी रोटी ही मिलती थी.
मैं भी बड़ा होकर मां पिताजी के साथ खेतों में काम करने जाने लगा था.
एक दिन मैं मां के साथ काम कर रहा था कि मालिक वहां आया और उसने मेरी मां से कहा- सामने वाली कुटिया को साफ कर दो.
मां समझ गयी कि मालिक क्या चाहता है.पर वह मेरे सामने कैसे जा सकती थी.उसे मालूम था कि कुटिया के अन्दर जाते ही मालिक उसे पकड़ लेगा और चोद देगा.
वह अभी सोच ही रही थी कि मालिक की आवाज फिर से आयी.
‘शारदा जल्दी जाओ!’तब मम्मी चली गयी.
कुटिया में जाने के बाद 5 मिनट ही हुए थे कि मालिक भी कुटिया में चले गए.
इधर बाहर मैं अपने काम में मग्न था.
बहुत देर होने के बाद भी जब मेरी मां कुटिया से बाहर नहीं आयी, तो मैं अपनी मां को देखने के लिए कुटिया के पास चला गया.
कुटिया के अन्दर से मां की कामुक सिसकारियां सुनायी देने लगीं। मैंने कुटिया के अन्दर झाँका तो मैं हड़बड़ा गया.
मेरी मां पूरी नंगी थी, मालिक भी नीचे से नंगे थे.उन्होंने मां को अपनी कमर पर उठा रखा था और पीछे से वे मां की चुत में अपना लंड पेल रहे थे.
मुजे यह देख कर बड़ा गुस्सा आया.पर मैं कर भी क्या सकता था। में मालिक से डरता था.
मेरी मां मालिक के गले में बांहें डाल झूला झूलती हुई मजे से चुत चुदवा रही थी.मालिक का लंड माँ की चुत के अन्दर गोते खा रहा था.
मां के चेहेरे पर एक सुकून झलक रहा था.कुछ देर तक मेरी मां को नंगी चुदती हुई देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया था.
मैं न चाहते हुए भी मेरा लंड सहलाने लगा.अब मेरे मन में अपनी मां के प्रति कामभावना जाग चुकी थी.
मैंने अब तक अपनी मां को कभी निर्वस्त्र नहीं देखा था.उसके स्तन उसकी कमर उसकी टांगें उसका पिछवाड़ा सब मेरे लिए नया अनुभव था.
आज मुजे मन में अपनी मां के लिए गंदे ख्याल आ गए थे. मैं मालिक और मां की चुदायी देखने में खो गया था और उसका लंड कड़क होकर चड्डी फाड़ कर बाहर आने को बेताब था.
मैंने चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ा और सहलाने लगा.तब तक अन्दर का नजारा बदल गया था.
मालिक ने मेरी मां को खटिया पर पटक कर उसे घोड़ी बना दिया और अपने खड़े लंड को हाथ में लिए मालिक साब मां के पीछे आ गए थे.
अब वे मेरी मां की गांड के छेद पर थूक लगाने लगे थे.थोड़ा सा थूक अपने लंड पर भी लगा कर मालिक ने मां की गांड के छेद पर अपना लौड़ा टिका दिया.
उसके बाद मालिक ने मां की कमर कस कर पकड़ी और एक ही धक्के में अपना लंड मां की गांड में उतार दिया.
माँ ये झटका और दर्द सह न पायी और चिल्ला उठी- उइ मां मर गयी मालिक … छोड़ो … निकालो मैं मर गयी … मेरी गांड फट गयी!
यह देख कर मेरे मन में सवाल उठा कि कोई गांड़ में लंड कैसे डाल सकता है!
मैंने शायद यह नहीं देखा था कि मेरी मां की हालत खराब हो गई थी और वह मालिक से छूटने के लिए छटपटा रही थी.
पर मालिक की पकड़ मजबूत थी, उन्होंने मां को कसके पकड़ा हुआ था.
तभी उन्होंने एक और धक्का मारा, इस बार उनका पूरा लंड मां की गांड के अन्दर घुस गया था.
यह कामुक दृश्य देख कर मेरा बांध फूट पड़ा और मेरे लंड ने तत्काल पिचकारी छोड़ दी.
चूंकि लंड ने पतलून के अन्दर ही वीर्य फेंक दिया था तो मेरे लंड का लावा पैट से होते हुए पैरों पर बहने लगा.
मेरे मन में मां के शरीर को पाने की चाह जाग गई. मैंने मां को चोदते हुए मालिक में खुद को देखा कि में ख़ुद मां को पेल रहा हूँ.





