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इस अध्भुत कहानी के इस मोड़ पर मैं इस संशय में हूँ के कहानी को किधर ले जाया जाए ?


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deeppreeti

DEEP PREET
1,893
3,285
159
परिचय

आप सब से एक महिला की कहानी किसी न किसी फोरम में पढ़ी होगी जिसमे कैसे एक महिला जिसको बच्चा नहीं है एक आश्रम में जाती है और वहां उसे क्या क्या अनुभव होते हैं,

पिछली कहानी में आपने पढ़ा कैसे एक महिला बच्चे की आस लिए एक गुरूजी के आश्रम पहुंची और वहां पहले दो -तीन दिन उसे क्या अनुभव हुए पर कहानी मुझे अधूरी लगी ..मुझे ये कहानी इस फोरम पर नजर नहीं आयी ..इसलिए जिन्होने ना पढ़ी हो उनके लिए इस फोरम पर डाल रहा हूँ



GIF1

मेरा प्रयास है इसी कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाने का जिसमे परिकरमा, योनि पूजा , लिंग पूजा और मह यज्ञ में उस महिला के साथ क्या क्या हुआ लिखने का प्रयास करूँगा .. अभी कुछ थोड़ा सा प्लाट दिमाग में है और आपके सुझाव आमनत्रित है और मैं तो चाहता हूँ के बाकी लेखक भी यदि कुछ लिख सके तो उनका भी स्वागत है

अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है .


वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी स्वामी या महात्मा एक जैसा नही होता. मैं तो कहता हूँ कि 90% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर 10% खराब भी होते हैं. इन 10% खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.


1. इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा कही पर भी संभव है .

2. इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने अन्यत्र नहीं पढ़ी है .

Note : dated 1-1-2021

जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और अब कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का ।
Note dated 8-1-2024


इससे पहले कहानी में , कुछ रिश्तेदारों, दूकानदार और एक फिल्म निर्देशक द्वारा एक महिला के साथ हुए अजीब अनुभवो के बारे में बताया गया है , कहानी के 270 भाग से आप एक डॉक्टर के साथ हुए एक महिला के अजीब अनुभवो के बारे में पढ़ेंगे . जीवन में हर कार्य क्षेत्र में हर तरह के लोग मिलते हैं हर व्यक्ति एक जैसा नही होता. डॉक्टर भी इसमें कोई अपवाद नहीं है अधिकतर डॉक्टर या वैध या हकिम इत्यादि अच्छे होते हैं, जिनपर हम पूरा भरोसा करते हैं, अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं ...
वास्तव में ऐसा नहीं है की सब लोग ऐसे ही होते हैं ।

सभी को धन्यवाद,


कहानी का शीर्षक होगा


औलाद की चाह



INDEX

परिचय

CHAPTER-1 औलाद की चाह

CHAPTER 2 पहला दिन

आश्रम में आगमन - साक्षात्कार
दीक्षा


CHAPTER 3 दूसरा दिन

जड़ी बूटी से उपचार
माइंड कण्ट्रोल
स्नान
दरजी की दूकान
मेला
मेले से वापसी


CHAPTER 4 तीसरा दिन
मुलाकात
दर्शन
नौका विहार
पुरानी यादें ( Flashback)

CHAPTER 5- चौथा दिन
सुबह सुबह
Medical चेकअप
मालिश
पति के मामा
बिमारी के निदान की खोज

CHAPTER 5 - चौथा दिन -कुंवारी लड़की

CHAPTER 6 पांचवा दिन - परिधान - दरजी

CHAPTER 6 फिर पुरानी यादें

CHAPTER 7 पांचवी रात परिकर्मा

CHAPTER 8 - पांचवी रात लिंग पूजा

CHAPTER 9 -
पांचवी रात योनि पूजा

CHAPTER 10 - महा यज्ञ

CHAPTER 11 बिमारी का इलाज

CHAPTER 12 समापन



INDEX

औलाद की चाह 001परिचय- एक महिला की कहानी है जिसको औलाद नहीं है.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 002गुरुजी से मुलाकात.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 003पहला दिन - आश्रम में आगमन - साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 004दीक्षा से पहले स्नान.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 004Aदीक्षा से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 005आश्रम में आगमन पर साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 006आश्रम के पहले दिन दीक्षा.Mind Control
औलाद की चाह 007दीक्षा भाग 2.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 008दीक्षा भाग 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 009दीक्षा भाग 4.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 010जड़ी बूटी से उपचार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 011जड़ी बूटी से उपचार.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 012माइंड कण्ट्रोल.Mind Control
औलाद की चाह 013माइंड कण्ट्रोल, स्नान. दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 014दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 015टेलर की दूकान में सामने आया सांपो का जोड़ा.Erotic Horror
औलाद की चाह 016सांपो को दूध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 017मेले में धक्का मुक्की.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 018मेले में टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 019मेले में लाइव शो.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 020मेले से वापसी में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 021मेले से औटो में वापसीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 022गुरुजी से फिर मुलाकातNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 023लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 024लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 025नदी के किनारे.Mind Control
औलाद की चाह 026ब्रा का झंडा लगा कर नौका विहार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 027अपराध बोध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 028पुरानी यादें-Flashback.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 029पुरानी यादें-Flashback 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 030पुरानी यादें-Flashback 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 031चौथा दिन सुबह सुबह.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 032Medical Checkup.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 033मेडिकल चेकअप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 034मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 035मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 036मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 037ममिया ससुर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 038बिमारी के निदान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 039बिमारी के निदान 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 040कुंवारी लड़की.First Time
औलाद की चाह 041कुंवारी लड़की, माध्यम.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 042कुंवारी लड़की, मादक बदन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 043दिल की धड़कनें .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 044कुंवारी लड़की का आकर्षण.First Time
औलाद की चाह 045कुंवारी लड़की कमीना नौकर.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 046फ्लैशबैक–कमीना नौकर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 047कुंवारी लड़की की कामेच्छायें.First Time
औलाद की चाह 048कुंवारी लड़की द्वारा लिंगा पूजा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 049कुंवारी लड़की- दोष अन्वेषण और निवारण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 050कुंवारी लड़की -दोष निवारण.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 051कुंवारी लड़की का कौमार्य .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 052कुंवारी लड़की का मूसल लंड से कौमार्य भंग.First Time
औलाद की चाह 053ठरकी लंगड़ा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 054उपचार की प्रक्रिया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 055परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 056परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 057परिधान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 058टेलर का माप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 059लेडीज टेलर-टेलरिंग क्लास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 060लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 061लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 062लेडीज टेलर की बदमाशी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 063बेहोशी का नाटक और इलाज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 064बेहोशी का इलाज़-दुर्गंध वाली चीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 065हर शादीशुदा औरत इसकी गंध पहचानती है, होश आया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 066टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 067स्कर्ट की नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 068मिनी स्कर्ट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 069मिनी स्कर्ट एक्सपोजरNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 070मिनी स्कर्ट पहन खड़े होना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 071मिनी स्कर्ट पहन बैठनाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 072मिनी स्कर्ट पहन झुकना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 073मिनी स्कर्ट में ऐड़ियों पर बैठना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 074फोन सेक्स.Erotic Couplings
औलाद की चाह 075अंतर्वस्त्र-पैंटी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 076पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 077ड्रेस डॉक्टर पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 078परिक्षण निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 079आपत्तिजनक निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 080कुछ पल विश्राम.How To
औलाद की चाह 081योनि पूजा के बारे में ज्ञान.How To
औलाद की चाह 082योनि मुद्रा.How To
औलाद की चाह 083योनि पूजा.How To
औलाद की चाह 084स्ट्रैप के बिना वाली ब्रा की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 085परिधान की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 086एक्स्ट्रा कवर की आजमाईश.How To
औलाद की चाह 087इलाज के आखिरी पड़ाव की शुरुआत.How To
औलाद की चाह 088महिला ने स्नान करवाया.How To
औलाद की चाह 089आखिरी पड़ाव से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 090शरीर पर टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 091योनि पूजा का संकल्प.How To
औलाद की चाह 092योनि पूजा आरंभ.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 093योनि पूजा का आरम्भ में मन्त्र दान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 094योनि पूजा का आरम्भ में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 095योनि पूजा का आरम्भ में माइक्रोमिनी में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 096काँटा लगा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 097काँटा लगा-आपात काले मर्यादा ना असते.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 098गोद में सफर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 099परिक्रमा समापन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 100चंद्रमा आराधना-टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 101उर्वर प्राथना सेक्स देवी बना दीजिये।NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 102चंद्र की रौशनी में स्ट्रिपटीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 103चंद्रमा आराधना दुग्ध स्नान की तयारी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 104समुद्र के किनारेIncest/Taboo
औलाद की चाह 105समुद्र के किनारे तेज लहरIncest/Taboo
औलाद की चाह 106समुद्र के किनारे अविश्वसनीय दृश्यNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 107एहसास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 108भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 109भाभी का मेनोपॉजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 110भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 111भाबी का मेनोपॉज- भीड़ में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 112भाबी का मेनोपॉज - कठिन परिस्थिति.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 113बहन के बेटे के साथ अनुभव.Incest/Taboo
औलाद की चाह 114रजोनिवृति के दौरान गर्म एहसास.Incest/Taboo
औलाद की चाह 115रजोनिवृति के समय स्तनों से स्राव.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 116जवान लड़के का आकर्षणIncest/Taboo
औलाद की चाह 117आज गर्मी असहनीय हैNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 118हाय गर्मीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 119गर्मी का इलाजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 120तिलचट्टा कहाँ गया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 121तिलचट्टा कहाँ गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 122तिलचट्टे की खोजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 123नहलाने की तयारीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 124नहलाने की कहानीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 125निपल्स-आमों जितने बड़े नहीं हो सकते!How To
औलाद की चाह 126निप्पल कैसे बड़े होते हैं.How To
औलाद की चाह 127सफाई अभियान.Incest/Taboo
औलाद की चाह 128तेज खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 129सोनिआ भाभी की रजोनिवृति-खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 130सोनिआ भाभी की रजोनिवृति- मलहमNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 131स्तनों की मालिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 132युवा लड़के के लंड की पहली चुसाई.How To
औलाद की चाह 133युवा लड़के ने की गांड की मालिश .How To
औलाद की चाह 134विशेष स्पर्श.How To
औलाद की चाह 135नंदू का पहला चुदाई अनुभवIncest/Taboo
औलाद की चाह 136नंदू ने की अधिकार करने की कोशिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 137नंदू चला गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 138भाभी भतीजे के साथExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 139कोई देख रहा है!Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 140निर्जन समुद्र तटExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 141निर्जन सागर किनारे समुद्र की लहरेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 142फ्लैशबैक- समुद्र की लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 143समुद्र की तेज और बड़ी लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 144फ्लैशबैक- सागर किनारे गर्म नज़ारेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 145सोनिआ भाभी रितेश के साथMature
औलाद की चाह 146इलाजExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 147सागर किनारे चलो जश्न मनाएंExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 148सागर किनारे गंदे फर्श पर मत बैठोNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 149सागर किनारे- थोड़ा दूध चाहिएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 150स्तनों से दूधNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 151त्रिकोणीय गर्म नजाराExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 152अब रिक्शाचालक की बारीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 153सागर किनारे डबल चुदाईExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 154पैंटी कहाँ गयीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 155तयारी दुग्ध स्नान की ( फ़्लैश बैक से वापसी )Mind Control
औलाद की चाह 156टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 157दूध सरोवर स्नान टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 158दूध सरोवर स्नानMind Control
औलाद की चाह 159दूध सरोवर में कामुक आलिंगनMind Control
औलाद की चाह 160चंद्रमा आराधना नियंत्रण करोMind Control
औलाद की चाह 161चंद्रमा आराधना - बादल आ गएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 162चंद्रमा आराधना - गीले कपड़ों से छुटकाराNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 163चंद्रमा आराधना, योनि पूजा, लिंग पूजाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 164बेडरूमHow To
औलाद की चाह 165प्रेम युक्तियों- दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक माहौलHow To
औलाद की चाह 166प्रेम युक्तियाँ-दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक -फोरप्ले, रंगीलेHow To
औलाद की चाह 167प्रेम युक्तियाँ- कामसूत्र -संभोग -फोरप्ले, रंग का प्रभावHow To
औलाद की चाह 168प्रेम युक्तियाँ- झांटो के बालHow To
औलाद की चाह 169योनि पूजा के लिए आसनHow To
औलाद की चाह 170योनि पूजा - टांगो पर बादाम और जजूबा के तेल का लेपनHow To
औलाद की चाह 171योनि पूजा- श्रृंगार और लिंग की स्थापनाHow To
औलाद की चाह 172योनि पूजा- लिंग पू जाHow To
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औलाद की चाह 175योनि पूजा- दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 176योनि पूजा - दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 177दूसरी सुहागरात - चुम्बन Group Sex
औलाद की चाह 178 दूसरी सुहागरात- मंत्र दान -चुम्बन आलिंगन चुम्बन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 179 यौनि पूजा शुरू-श्रद्धा और प्रणाम, स्वर्ग के द्वार Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 180 यौनि पूजा योनि मालिश योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 181 योनि पूजा मंत्र दान और कमल Group Sex
औलाद की चाह 182 योनि पूजा मंत्र दान-मेरे स्तनो और नितम्बो का मर्दन Group Sex
औलाद की चाह 183 योनि पूजा मंत्र दान- आप लिंग महाराज को प्रसन्न करेंगी Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 184 पूर्णतया अश्लील , सचमुच बहुत उत्तेजक, गर्म और अनूठा अनुभव Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 185 योनि पूजा पूर्णतया उत्तेजक अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 186 उत्तेजक गैंगबैंग अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 187 उत्तेजक गैंगबैंग का कारण Group Sex
औलाद की चाह 188 लिंग पूजा Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 189 योनि पूजा में लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 190 योनि पूजा लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 191 लिंग पूजा- लिंगा महाराज को समर्पण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 192 लिंग पूजा- लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 193 साक्षात मूसल लिंग पूजा लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 194योनी पूजा में परिवर्तन का चरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 195 योनि पूजा- जादुई उंगलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 196योनि पूजा अपडेट-27 स्तनपान NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 197 7.28 पांचवी रात योनि पूजा मलाई खिलाएं और भोग लगाएं NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 198 7.29 -पांचवी रात योनि पूजा योनी मालिश NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 199 7.30 योनि पूजा, जी-स्पॉट, डबल फोल्ड मालिश का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 200 7.31 योनि पूजा, सुडोल, बड़े, गोल, घने और मांसल स्त NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 201 7.32 योनि पूजा, स्तनों नितम्बो और योनि से खिलवाड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 202 7. 33 योनि पूजा, योनि सुगम जांच NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 203 7.34 योनि पूजा, योनि सुगम, गर्भाशय में मौजूद NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 204 7.35 योनि सुगम-गुरूजी का सेक्स ट्रीटमेंट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 205 7.36 योनि सुगम- गुरूजी के सेक्स ट्रीटमेंट का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 206 7.37 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों को आपसी बातचीत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 207 7.38 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों के पुराने अनुभव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 208 7.39 योनि सुगम- बहका हुआ मन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 209 7.40 बहका हुआ मन -सपना या हकीकत Mind Control
औलाद की चाह 210 7.41 योनि पूजा, स्पष्टीकरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 211 7.42 योनि पूजा चार दिशाओ को योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 212 7.43 योनि पूजा नितम्बो पर थप्पड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 213 7.44 नितम्बो पर लाल निशान का धब्बा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 214 7.45 नितम्ब पर लाल निशान के उपाए Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 215 7.46 बदन के हिस्से को लाल करने की ज़रूरत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 216 7.47 आश्रम का आंगन - योनि जन दर्शब Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 217 7.48 योनि पूजा अपडेट-योनि जन दर्शन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 218 7.49 योनि पूजा अपडेट योनी पूजा के बाद विचलित मन, आराम! NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 219 CHAPTER 8- 8.1 छठा दिन मामा-जी मिलने आये Incest/Taboo
औलाद की चाह 220 8.2 मामा-जी कार में अजनबियों को लिफ्ट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 221 8. 3 मामा-जी की कार में सफर NonConsent/Reluctance

https://xforum.live/threads/औलाद-की-चाह.38456/page-8
 
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औलाद की चाह

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CHAPTER 8-छठा दिन

भेद खोलने की घमकी ( ब्लैकमेल) से निकलने का प्लान

अपडेट-12


सेक्स मैगज़ीन, सविता भाभी का मुझ पर दुष्प्रभाव

महेश: ठीक है... टीनएजर्स (किशोरों) को सिखाने के लिए हम अक्सर एक तरीका इस्तेमाल करते हैं... जिससे उनमें कॉन्फिडेंस, मज़ा और खुद पर भरोसा आता है...

मैंने सवालिया नज़रों से उसकी ओर देखा।

महेश: हाँ... लेकिन रश्मि, यह सीखने वाले की प्रैक्टिस और टेस्ट के लिए बस एक मज़ेदार तरीका है... तुम्हें इसे उसी तरह लेना होगा... ठीक है?

मैंने एक बेवकूफ की तरह उत्साह से सिर हिलाया, जबकि मुझे उस "तरीके" के बारे में कुछ नहीं पता था; मैं बस बातचीत खत्म होने से खुश थी।

महेश: यह एक बिल्कुल नया और अलग तरीका है... वैसे तो यह ज़्यादातर टीनएजर्स के लिए होता है... लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हें स्टीयरिंग व्हील पर सहज बनाने के लिए... मैं इसे तुम्हारे लिए इस्तेमाल कर सकता हूँ!

मैं: अच्छा... (मैंने धीरे से कहा; अपनी हालत के बारे में सोचकर मेरा गला बार-बार सूख रहा था - एक समझदार पुरुष के सामने खुली ब्रा और बिना बँधे पजामे के साथ बैठी थी!)

महेश: सीखने वालों के लिए इस खास तरीके को 'लैप ड्राइविंग' कहते हैं...

मैं: लैप ड्राइविंग! ऐसा कुछ कभी नहीं सुना!

महेश (मुस्कुराते हुए): लगता है नाम सुनकर हैरान हो गई!

"लैप ड्राइविंग!" मैं सच में उस नाम से हैरान थी, लेकिन अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती थी कि इस नई सीखने की प्रक्रिया के दौरान मेरा क्या हाल होने वाला था।

महेश: रश्मि, देखो... लैप का मतलब है घुटने और पैर... सीखने वाला ट्रेनर के पैरों के बीच बैठकर गाड़ी चलाता है... इससे सीखने वाले को बहुत कॉन्फिडेंस मिलता है...

मैं अभी भी उसकी बात समझ नहीं पा रही थी और बस बेवकूफों की तरह देख रही थी!

महेश: इससे तेज़ी से सीखने के साथ-साथ मज़ा और रोमांच भी आता है... हे हे हे...

मेरा शरीर अभी भी उत्तेजित था और मेरा दिमाग 'सविता भाभी' मैगज़ीन के असर से बाहर नहीं आया था - मैं पूरी तरह समझ नहीं पा रही थी कि मेरे ड्राइविंग टीचर का क्या इरादा है और बस सिर हिला दिया।

महेश: ठीक है! रश्मि... तुम्हें बस अपनी सीट पर थोड़ा ऊपर खिसकना होगा... ताकि मैं वहाँ फिट हो सकूँ...

उसका क्या मतलब था? हम दोनों एक ही सीट शेयर करेंगे?

महेश ने मुझे लैप ड्राइविंग के इस नए विचार के बारे में सोचने का ज़्यादा समय नहीं दिया और मुझे आगे बढ़ाने के लिए लगभग मेरे कंधे को धक्का दिया। मैंने अपने भारी शरीर को ऊपर उठाया और सीट पर स्टीयरिंग व्हील की तरफ थोड़ा खिसकी। मेरे पीछे और सीट के बैकरेस्ट के बीच जो जगह बनी, उसमें वह लगभग कूदकर बैठ गया।

महेश: हाँ! एकदम सही!

मैं: अरे! महेश... तुम क्या कर रहे हो? हम ऐसे कैसे बैठ सकते हैं?

महेश: मैंने कहा था न रश्मि... इसे 'लैप ड्राइविंग' कहते हैं। इसमें सीखने वाला ट्रेनर की गोद में बैठकर गाड़ी चलाता है... ठीक है? और तुम्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है डियर... मुझे इंजन स्टार्ट करने दो... और तुम देखोगी कि लैप ड्राइविंग में आगे बढ़ना कितना आसान होता है।

मुझे इस पोजीशन और नज़दीकी पर कोई प्रतिक्रिया देने या विरोध करने का मौका भी नहीं मिला और उसने जल्दी से कार का इंजन चालू कर दिया और अपने पैर क्लच और एक्सेलेरेटर पैडल पर रख दिए। जैसे ही उसने गियर बदलकर कार आगे बढ़ाई, मेरे पैर सचमुच उसके मज़बूत और गठीले पैरों के बीच दब गए।

महेश: अरे रश्मि... तुम इतनी अकड़ी हुई क्यों हो! रिलैक्स करो और ड्राइविंग का मज़ा लो!

मुझे पहले ही अपने कूल्हों के पास कुछ बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था और वह उसका खड़ा हुआ लिंग था! ज़ाहिर है, मैं तुरंत उत्तेजित हो गई, खासकर इसलिए क्योंकि उस पोर्न मैगज़ीन की वजह से मैं पहले से ही 'गर्म' हो चुकी थी और मेरी खुली ब्रा में मेरे स्तन आज़ादी से उछल रहे थे।

महेश ठीक मेरे पीछे बैठा था - उसके पैर मेरी भरी-पूरी जांघों को घेरे हुए थे, उसके हाथ स्टीयरिंग पर थे और लगभग मेरे हाथों के ऊपर से मुझे गले लगा रहे थे, उसका चेहरा मेरे सिर के ठीक पीछे था और उसकी ठुड्डी मेरे कंधे पर थी; इस तरह मैं अपने चेहरे और गर्दन के किनारे पर उसकी साँसों को बहुत साफ़ महसूस कर सकती थी, और सबसे बुरी बात यह थी कि उसका प्राइवेट पार्ट सीधे और बहुत अश्लील तरीके से मेरे बड़े और टाइट कूल्हों पर दबाव डाल रहा था, जैसे वह पीछे से मेरे साथ सेक्स कर रहा हो!

महेश: ठीक है... अब तुम कंट्रोल लो रश्मि... मैं बस मदद करूँगा...

मेरे पास कोई चारा नहीं था और मुझे अपने इंस्ट्रक्टर की बात माननी पड़ी। मैंने अपने पैर क्लच-एक्सेलेरेटर-ब्रेक पैडल पर रखे और स्टीयरिंग को मज़बूती से पकड़ा। शुक्र है कि सड़क लगभग सीधी थी, लेकिन फिर भी उस गठीले आदमी के अंतरंग स्पर्श से मेरा ध्यान बार-बार भटक रहा था। महेश: अच्छा... अब तुम धीरे-धीरे गाड़ी चलाओ रश्मि... मैं एक छोटा सा टेस्ट लूँगा... हे हे हे... बस यह पक्का करने के लिए कि तुमने सब कुछ ठीक से समझ लिया है।

मैं: टे... मतलब टेस्ट??

महेश: अरे! घबराओ मत रश्मि! मैं तुम्हारे साथ हूँ ना... लैप ड्राइविंग का मज़ा यही तो है... ट्रेनर हमेशा साथ होता है... मदद के लिए ठीक तुम्हारे पीछे! हे हे...

मैं सच में और कुछ सोच ही नहीं पा रही थी क्योंकि स्टीयरिंग व्हील को दोनों तरफ से पकड़ने के बहाने उसके पैर मेरे पैरों पर पड़ रहे थे और उसका मुझे गले लगाना मुझे बहुत असहज महसूस करा रहा था; ऐसा लग रहा था जैसे मैं मुसीबत से निकलकर और बड़ी मुसीबत में फँस गई हूँ।

महेश: मुझे यकीन है कि मेरे एक ही सीट पर होने से... अब तुम नर्वस नहीं हो रश्मि...

मैं: हाँ... नहीं... मतलब नहीं... मैं नहीं हूँ! लेकिन...

महेश: बहुत बढ़िया! मुझे तुम्हारी आवाज़ में अभी से आत्मविश्वास महसूस हो रहा है रश्मि!

मुझे हैरानी हुई कि उसे मेरी आवाज़ में आत्मविश्वास कैसे सुनाई दिया! असल में, मैं पहले से ज़्यादा घबराई हुई थी क्योंकि मेरा पूरा शरीर गर्म हो गया था और मेरी साँसें तेज़ी से चल रही थीं। साथ ही, मुझे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी क्योंकि मेरी ब्रा का हुक खुला था और कार के झटकों के साथ मेरे बड़े, गोल ब्रेस्ट ड्रेस के अंदर बहुत सेक्सी अंदाज़ में उछल-कूद रहे थे। मैं इसे छिपा नहीं सकती थी; और भारी ब्रेस्ट वाली महिला होने के नाते, यह और भी शर्मनाक था कि मेरे बड़े, भरे-पूरे ब्रेस्ट ड्रेस के अंदर आज़ादी से हिल रहे थे, जबकि एक पुरुष की साँसें मेरी गर्दन के ठीक पास महसूस हो रही थीं!

महेश की नज़र इस पर ज़रूर पड़ी होगी; वह यकीनन मेरे चूड़ीदार सूट के अंदर मेरे ब्रेस्ट के सेक्सी उछाल को देख रहा होगा। अच्छी बात यह थी कि मैं उसकी आँखें नहीं देख पा रही थी क्योंकि वह मेरे ठीक पीछे था। कुछ ही देर में मुझे अपने हिप्स के पास कोई सख्त चीज़ चुभती हुई महसूस हुई... और साफ़ तौर पर वह महेश का उत्तेजित लिंग ही था! उसने जल्दी से अपने बैठने का तरीका बदला, शायद आराम महसूस करने के लिए; लेकिन इससे उसका लिंग उसकी पैंट के ऊपर से मेरे बड़े, गोल और मुलायम बटक्स पर और ज़ोर से दबने लगा।

हे भगवान! वह क्या करने की कोशिश कर रहा था!

महेश: देखो, 'लैप ड्राइविंग टेस्ट' का नियम बहुत आसान है! न तुम बात करोगी और न ही मैं। मैं तुम्हें गाड़ी चलाते समय अलग-अलग काम करने के लिए सिर्फ़ इशारों से निर्देश दूँगा... और तुम्हें बस उन्हें करना होगा।

मैं: आ... उम्... ठीक है!

महेश: चीज़ों को आसान रखने के लिए मैं सिर्फ़ छह इशारों का इस्तेमाल करूँगा जिन्हें तुम्हें याद रखना होगा और उन पर अमल करना होगा। लेकिन याद रखना... मेरे हाथ स्टीयरिंग व्हील पर नहीं होंगे। हाँ, ज़रूरत पड़ने पर मैं ब्रेक, क्लच और गियर में तुम्हारी मदद ज़रूर करूँगा। ठीक है?

मैंने बस सिर हिलाया। कार धीरे-धीरे आगे बढ़ी। हम शाम के धुंधलके वाले समय में थे क्योंकि सूरज डूबने वाला था और बाहर रोशनी काफ़ी कम हो गई थी।




जारी रहेगी
 

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DEEP PREET
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औलाद की चाह

362

CHAPTER 8-छठा दिन

भेद खोलने की घमकी ( ब्लैकमेल) से निकलने का प्लान

अपडेट-13a

सीखाने के बहाने - लैप ड्राइविंग


मैंने एक पल के लिए ऊपर देखा और उसकी आँखों में झाँका, लेकिन तुरंत नज़रें झुका लीं क्योंकि मैंने देखा कि महेश सीधे मेरे बड़े, गोल स्तनों को घूर रहा था। मुझे अच्छी तरह एहसास हो रहा था कि साँस लेने पर मेरे बड़े, कसे हुए स्तनों का ऊपर-नीचे होना साफ़ दिख रहा था क्योंकि मेरी ब्रा का हुक खुला हुआ था, जिससे महेश का ध्यान मेरे स्तनों पर और भी ज़्यादा जा रहा था। मैं इसे छिपा भी नहीं सकती थी! मैंने अपने होंठ काटे और मुझे बेचैनी महसूस होने लगी।

महेश: ठीक है... एक तरीका है जो हम अक्सर टीनएज सीखने वालों के लिए इस्तेमाल करते हैं... ताकि उनमें आत्मविश्वास, मज़ा और खुद पर भरोसा जगे।

मैंने सवालिया नज़रों से उसकी ओर देखा।

महेश: हाँ... लेकिन रश्मि, यह सीखने वाले की प्रैक्टिस और टेस्ट के लिए बस एक मज़ेदार तरीका है... तुम्हें इसे उसी तरह लेना होगा... ठीक है?

मैंने एक बेवकूफ की तरह उत्साह से सिर हिलाया, जबकि मुझे उस "तरीके" के बारे में कुछ नहीं पता था; मैं बस इस बातचीत के खत्म होने से खुश थी।

महेश: यह एक बिल्कुल नया और अलग तरीका है... हालाँकि यह ज़्यादातर टीनएजर्स तक ही सीमित रहता है... लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हें स्टीयरिंग व्हील पर सहज बनाने के लिए... मैं इसे तुम्हारे लिए इस्तेमाल कर सकता हूँ!

मैं: अच्छा... (मैंने धीरे से कहा; अपनी हालत के बारे में सोचकर मेरा गला बार-बार सूख रहा था - एक परिपक्व पुरुष के सामने खुली ब्रा और बिना बंधे पजामे के साथ बैठी थी!)

महेश: सीखने वालों के लिए इस खास तरीके को 'लैप ड्राइविंग' कहते हैं।

मैं: लैप ड्राइविंग! ऐसा कुछ कभी नहीं सुना!

महेश (मुस्कुराते हुए): लगता है तुम नाम सुनकर हैरान हो!

"लैप ड्राइविंग!" मैं सच में उस नाम से हैरान थी, लेकिन अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती थी कि इस नई सीखने की प्रक्रिया के दौरान मुझे किस तरह की हैरानी का सामना करना पड़ेगा।

महेश: रश्मि, देखो... लैप का मतलब असल में घुटने और पैर होता है... सीखने वाला ट्रेनर के पैरों के बीच बैठकर गाड़ी चलाता है... इससे सीखने वाले को बहुत आत्मविश्वास मिलता हैं ।

मैं अभी भी उसकी बात समझ नहीं पा रही थी और बिल्कुल बेवकूफ लग रही थी! महेश: इससे जल्दी सीखने के साथ-साथ मज़ा और रोमांच भी आता है... हे हे हे!

मेरा शरीर अभी भी उत्तेजित था और मेरा दिमाग 'सविता भाभी' मैगज़ीन के असर से पूरी तरह बाहर नहीं आया था - मैं समझ नहीं पा रही थी कि मेरे ड्राइविंग टीचर का क्या मतलब है, बस मैंने सिर हिला दिया।

महेश: ठीक है! रश्मि... तुम्हें बस अपनी सीट पर थोड़ा ऊपर उठना होगा... ताकि मैं वहाँ घुस सकू।

उसका क्या मतलब था? हम दोनों एक ही सीट शेयर करेंगे?

महेश ने मुझे 'लैप ड्राइविंग' के इस नए आइडिया के बारे में सोचने का ज़्यादा समय नहीं दिया और मुझे आगे बढ़ाने के लिए लगभग मेरे कंधे को धक्का दिया। मैंने अपने भारी कूल्हों को ऊपर उठाया और सीट पर स्टीयरिंग व्हील की तरफ थोड़ा खिसकी, और वह मेरी पीठ और सीट के बैकरेस्ट के बीच बनी जगह में लगभग कूदकर घुस गया।

महेश: हाँ! यह एकदम सही है!

मैं: ईईई! महेश... तुम क्या कर रहे हो? हम ऐसे कैसे बैठ सकते हैं?

महेश: मैंने कहा था न रश्मि... इसे 'लैप ड्राइविंग' कहते हैं और सीखने वाला ट्रेनर की गोद में बैठकर गाड़ी चलाता है... ठीक है? और तुम्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है डियर... मुझे इंजन चालू करने दो... और तुम देखोगी कि लैप ड्राइविंग में आगे बढ़ना कितना आसान हो जाता है।

मुझे इस पोज़िशन और नज़दीकी पर कोई प्रतिक्रिया देने या विरोध करने का मौका भी नहीं मिला और उसने जल्दी से कार का इंजन चालू किया और अपने पैर क्लच और एक्सीलरेटर प्लेट्स पर रख दिए। जब उसने गियर बदलकर कार आगे बढ़ाई, तो मेरे पैर सचमुच उसके मज़बूत और मस्कुलर पैरों के बीच दब गए।

महेश: अरे रश्मि... तुम इतनी अकड़ी हुई क्यों हो! रिलैक्स करो और ड्राइविंग का मज़ा लो!

मुझे पहले ही अपने कूल्हों के पास कुछ बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था और वह उसका खड़ा हुआ लिंग था! ज़ाहिर है, मैं तुरंत और ज़्यादा उत्तेजित हो गई क्योंकि मैं पहले से ही उस पोर्न मैगज़ीन की वजह से "गर्म" हो चुकी थी और मेरी खुली ब्रा में मेरे स्तन आज़ादी से उछल रहे थे।

महेश ठीक मेरे पीछे बैठा था - उसके पैर मेरी भरी-पूरी जांघों को घेरे हुए थे, उसके हाथ व्हील पर थे और लगभग मेरे हाथों के ऊपर से मुझे गले लगा रहे थे, उसका चेहरा ठीक मेरे सिर के पीछे था और उसकी ठुड्डी मेरे कंधे पर थी; इस वजह से मुझे अपने चेहरे और गर्दन के पास उसकी साँसें बहुत साफ़ महसूस हो रही थीं, और सबसे बुरी बात यह थी कि उसका प्राइवेट पार्ट सीधे और बहुत अश्लील तरीके से मेरे बड़े और टाइट कूल्हों पर दब रहा था, जैसे वह पीछे से मेरे साथ सेक्स कर रहा हो!

महेश: ठीक है... अब तुम कंट्रोल लो रश्मि... मैं बस मदद करूँगा।

मेरे पास कोई चारा नहीं था और मुझे अपने इंस्ट्रक्टर की बात माननी ही थी। मैंने अपने पैर क्लच-एक्सेलरेटर-ब्रेक पैडल पर रखे और स्टीयरिंग को मज़बूती से पकड़ा। शुक्र है कि सड़क लगभग सीधी थी, लेकिन फिर भी उस मस्कुलर आदमी के करीबी स्पर्श से मेरा ध्यान बार-बार भटक रहा था।

महेश: अच्छा... अब तुम धीरे-धीरे गाड़ी चलाओ रश्मि... मैं एक छोटा सा टेस्ट लूँगा... हे हे हे... बस यह पक्का करने के लिए कि तुमने सब कुछ ठीक से समझ लिया है।

मैं: टे... मतलब टेस्ट??

महेश: अरे! घबराओ मत रश्मि! मैं तुम्हारे साथ हूँ ना... लैप ड्राइविंग का मज़ा यही तो है... ट्रेनर हमेशा साथ होता है... मदद के लिए ठीक तुम्हारे पीछे! हे हे...

मैं सच में आगे कुछ सोच नहीं पा रही थी क्योंकि उसके पैरों का मेरे पैरों पर दबाव और स्टीयरिंग व्हील को दोनों तरफ से पकड़ने के बहाने मुझे गले लगाना, मुझे बहुत असहज महसूस करा रहा था और मेरी हालत 'आसमान से गिरे और खजूर में अटके' जैसी हो गई थी।

महेश: मुझे यकीन है कि मेरे एक ही सीट पर होने से... अब तुम नर्वस नहीं हो रश्मि।

मैं: हाँ... नहीं... मतलब नहीं... मैं नहीं हूँ! लेकिन।

महेश: बहुत बढ़िया! रश्मि, तुम्हारी आवाज़ में मुझे अभी से आत्मविश्वास महसूस हो रहा है!

मुझे हैरानी हुई कि उसे मेरी आवाज़ में आत्मविश्वास कैसे महसूस हुआ! असल में, मैं पहले से ज़्यादा घबराई हुई थी क्योंकि मेरा पूरा शरीर गर्म हो गया था और मेरी साँसें तेज़ चल रही थीं। साथ ही, मुझे शर्म भी आ रही थी क्योंकि मेरी ब्रा का हुक खुला हुआ था और कार के झटकों के साथ मेरे बड़े गोल ब्रेस्ट ड्रेस के अंदर बहुत सेक्सी अंदाज़ में उछल और हिल रहे थे। मैं उन्हें छिपा नहीं सकती थी और भारी ब्रेस्ट वाली महिला होने के नाते, मेरे लिए यह और भी शर्मनाक था कि मेरे बड़े, भरे-पूरे ब्रेस्ट ड्रेस के अंदर आज़ादी से उछल रहे थे और एक पुरुष की साँसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थीं!

महेश की नज़र ज़रूर इस पर पड़ी होगी और वह यकीनन मेरे चूड़ीदार सूट के अंदर मेरे ब्रेस्ट के सेक्सी उछाल को देख रहा होगा; अच्छी बात यह थी कि मैं उसकी आँखें नहीं देख पा रही थी क्योंकि वह मेरे ठीक पीछे था। कुछ ही देर में मुझे अपने हिप्स के पास कोई सख्त चीज़ चुभती हुई महसूस हुई और साफ़ तौर पर वह महेश का खड़ा हुआ लिंग था! उसने आराम से बैठने के लिए जल्दी से अपना पोस्चर बदला, जिससे उसका लिंग उसकी ट्राउज़र के ऊपर से मेरे बड़े गोल बटक्स की नरमी पर और ज़ोर से दबने लगा।

हे भगवान! वह क्या करने वाला था!

महेश: तो, लैप ड्राइविंग टेस्ट के लिए नियम बहुत आसान है! न तुम बात करोगी और न ही मैं। मैं तुम्हें ड्राइविंग के दौरान अलग-अलग काम करने के लिए सिर्फ़ इशारों से निर्देश दूँगा... और तुम्हें बस उन्हें करना होगा।

मैं: आ... अह... ओ... ओके!

महेश: चीज़ों को आसान बनाने के लिए मैं सिर्फ़ छह इशारों का इस्तेमाल करूँगा जिन्हें तुम्हें याद रखना होगा और उन पर अमल करना होगा। लेकिन याद रखना... मेरे हाथ स्टीयरिंग व्हील पर नहीं होंगे। हाँ, ज़रूरत पड़ने पर मैं ब्रेक, क्लच और गियर में तुम्हारी मदद ज़रूर करूँगा। ठीक है?

मैंने बस सिर हिलाया। कार धीरे-धीरे आगे बढ़ी। हम शाम के धुंधलके वाले समय में थे क्योंकि सूरज डूबने वाला था और बाहर रोशनी काफ़ी कम हो गई थी। महेश: मेरे #1 सिग्नल का मतलब होगा कि तुम्हें बाईं ओर मुड़ना है... तो अगर तुम्हें सिग्नल #1 मिले, तो तुम्हें कार बाईं ओर मोड़नी होगी... ठीक है?

मैं: ठीक है... लेकिन... लेकिन सिग्नल क्या है?

मैंने लगभग फुसफुसाते हुए कहा। महेश ने स्टीयरिंग व्हील पर मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और अपना चेहरा मेरे कान के बहुत पास लाकर मेरी ही तरह फुसफुसाते हुए बोला।

महेश: यह रहा पहला सिग्नल... अगर मैं तुम्हारे पेट के बाईं ओर छूता हूँ, तो तुम्हें बाईं ओर मुड़ना है। मुझे लगता है कि यह काफी आसान है?

सिग्नल का तरीका सुनकर मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी! महेश थोड़ा बाईं ओर झुका और मेरे चेहरे की ओर देखा।

महेश: तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखकर अच्छा लगा... तुम मुस्कुराते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो... मुझे लगता है कि तुम्हें अक्सर मुस्कुराते रहना चाहिए!

सीधी तारीफ और दिल को छू लेने वाली बात - मैं शरमाते हुए हंसी और जाहिर है, मुझे उसकी बात अच्छी लगी।

महेश: रश्मि... अब प्लीज़ थोड़ा रिलैक्स हो जाओ... तुम अभी भी बहुत अकड़ी हुई हो!

मैं: मैं रिलैक्स होने की कोशिश कर रही हूँ... यकीन मानो।

मैंने अपनी कुछ मसल्स को ढीला छोड़ा, लेकिन ऐसा करने से मेरा शरीर उसके शरीर से और ज़्यादा सट गया। चलती कार के अंदर माहौल वाकई काफी हॉट और सेक्सी होता जा रहा था! मुझे तुरंत महसूस हुआ कि उसका लिंग और भी सख्त हो रहा था और मुझे चुभ रहा था! उसका स्पर्श और एहसास बहुत साफ़ था!

महेश: अगर मैं तुम्हारे पेट के दाईं ओर छूता हूँ, तो तुम्हें दाईं ओर मुड़ना है... यह सिग्नल #2 है... याद रखना काफी आसान है... है ना?

मुझे यह काफी मज़ेदार, आसान और रोमांचक भी लगा! तब तक मैं उसके शरीर की गर्माहट और नज़दीकी का भरपूर मज़ा ले रही थी। मैंने महसूस किया कि महेश के बिल्कुल अजनबी होने की वजह से मेरे मन में जो झिझक थी, वह तेज़ी से गायब हो रही थी!

मैं: ठीक है... यह आसान और सीधा-सादा लगता है।
जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

भेद खोलने की घमकी ( ब्लैकमेल) से निकलने का प्लान

अपडेट-14


सीखाने के बहाने - लैप ड्राइविंग-सिग्नल

महेश: मेरे #1 सिग्नल का मतलब होगा कि तुम्हें बाईं ओर मुड़ना है... तो अगर तुम्हें सिग्नल #1 मिले, तो तुम्हें कार बाईं ओर मोड़नी होगी... ठीक है?

मैं: ठीक है... लेकिन... लेकिन सिग्नल क्या है?

मैंने लगभग फुसफुसाते हुए कहा। महेश ने स्टीयरिंग व्हील पर मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और अपना मुँह मेरे कान के बहुत पास लाकर मेरी ही तरह फुसफुसाते हुए बोला।

महेश: यह रहा पहला सिग्नल... अगर मैं तुम्हारे पेट के बाईं ओर छूता हूँ तो तुम्हें बाईं ओर मुड़ना है। मुझे लगता है कि यह काफी आसान है?

सिग्नल का तरीका सुनकर मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी! महेश थोड़ा बाईं ओर झुका और मेरे चेहरे की ओर देखा।

महेश: तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखकर अच्छा लगा... तुम मुस्कुराते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो... मुझे लगता है कि तुम्हें अक्सर मुस्कुराते रहना चाहिए!

सीधी तारीफ और दिल को छू लेने वाली बात - मैं शरमाते हुए हंसी और जाहिर है, मुझे उसकी बात अच्छी लगी।

महेश: रश्मि... अब प्लीज़ थोड़ा रिलैक्स हो जाओ... तुम अभी भी बहुत अकड़ी हुई हो!

मैं: मैं रिलैक्स होने की कोशिश कर रही हूँ... यकीन मानो...

मैंने अपनी कुछ मांसपेशियों को ढीला किया, लेकिन ऐसा करने से मेरा शरीर उसके शरीर से और ज़्यादा सट गया। चलती कार के अंदर माहौल वाकई काफी हॉट और सेक्सी होता जा रहा था! मुझे तुरंत महसूस हुआ कि उसका लिंग और भी सख्त हो रहा था और मुझे चुभ रहा था! वह स्पर्श और एहसास बहुत ही साफ़ था!

महेश: अगर मैं तुम्हारे पेट के दाईं ओर छूता हूँ तो तुम्हें दाईं ओर मुड़ना है... यह सिग्नल #2 है... याद रखना काफी आसान है... है ना?

मुझे यह काफी मज़ेदार, आसान और रोमांचक भी लगा! तब तक मैं उसके शरीर की गर्माहट और नज़दीकी का भरपूर मज़ा ले रही थी। मैंने महसूस किया कि महेश के बिल्कुल अजनबी होने की वजह से मेरे मन में जो झिझक थी, वह तेज़ी से गायब हो रही थी!

मैं: ठीक है... यह आसान और सीधा-सादा लगता है।

महेश: हाँ, यही तो मकसद है! सिग्नल #3 और #4 एक-दूसरे से जुड़े हैं... सिग्नल #3 का मतलब है स्पीड बढ़ाना और तब मैं अपना हाथ तुम्हारे बाएं पैर पर रखूँगा... तो तुम्हें पता चल जाएगा कि जब मैं अपना हाथ तुम्हारे बाएं पैर पर रखूँ तो तुम्हें स्पीड बढ़ानी है। हालांकि वह मेरे "पैर" की बात कर रहे थे, लेकिन असल में वह मेरे पैर के जिस हिस्से को छूने वाले थे, वह मेरी मुलायम और भरी-पूरी जांघें थीं। ड्राइविंग ट्रेनर की इस हिम्मत को देखकर मैं मन ही मन मुस्कुराई।

महेश: सिग्नल #4 तब होता है जब मैं आपके दाहिने पैर को छूता हूँ... तब आपको गाड़ी की रफ़्तार कम करनी होती है। ठीक है?

मैं: हम्म... सही लग रहा है! दाहिना पैर रफ़्तार बढ़ाने के लिए और बायाँ पैर रफ़्तार कम करने के लिए।

महेश: सही! है ना मज़ेदार?

मैं: सुनने में काफी हॉट... मेरा मतलब है... दिलचस्प लग रहा है।

महेश (अब धीरे-धीरे अपने हाथ मुझ पर रखते हुए और स्टीयरिंग व्हील पर मेरे दोनों हाथों को पकड़ते हुए): हाँ, यह 'लैप ड्राइविंग' का तरीका सीखने और प्रैक्टिस करने के साथ-साथ मज़े करने के लिए बनाया गया है। लेकिन आखिरी हिस्सा कभी-कभी महिलाओं के लिए थोड़ा असहज होता है... पर मुझे लगता है कि कोई और सही विकल्प नहीं बचा था... इसलिए इसे ऐसे ही डिज़ाइन किया गया है!

मैं: मतलब...?? आखिरी दो सिग्नल क्या हैं?

महेश (अपनी आवाज़ धीमी करते हुए और अपने होंठ मेरे बाएँ कान के बहुत पास लाते हुए; उनकी गर्म उंगलियाँ पहले से ही व्हील पर मेरी कोमल उंगलियों के साथ खेल रही थीं): चूँकि सिग्नल 1, 2, 3 और 4 के लिए पैरों और पेट के हिस्सों का इस्तेमाल होता है, इसलिए 'लैप ड्राइविंग' में हॉर्न बजाने का तरीका थोड़ा अलग और खास होता है।

महेश थोड़ी देर के लिए रुके। मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था क्योंकि जब वह मेरी उंगलियों को सहला रहे थे और साथ ही अपने शरीर का अगला हिस्सा मेरे शरीर से दबा रहे थे, तो मुझे अपने ब्रेस्ट में उभार और निप्पल्स के सख्त होने का एहसास हो रहा था। उनकी ठुड्डी कभी-कभी लगभग मेरे कंधे पर टिकी होती थी। उनके गले लगाने वाले हाथ मेरे शरीर के किनारों को दबा रहे थे, जिससे मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई पीछे से मुझे गले लगा रहा हो!

महेश: जैसे पुराने दिनों में कार का हॉर्न लॉरी के हॉर्न जैसा होता था... आपने देखा होगा... लॉरी ड्राइवर के दबाने के लिए एक उभरा हुआ गोल रबर का हिस्सा होता था... वह काफी हद तक महिला के ब्रेस्ट जैसा दिखता है, आप जानती ही हैं... तो 'लैप ड्राइविंग' में इंस्ट्रक्टर सीखने वाले को उसी तरह हॉर्न बजाने का इशारा करता है...

मैं पहले ही पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी थी - पहले तो सविता भाभी की कहानी के बहुत ही सेक्सी चित्रण से, फिर 'लैप ड्राइविंग' के इस विचार को सुनकर, और अब महेश द्वारा मेरे कानों में फुसफुसाकर बताए जा रहे पाँचवें सिग्नल के बारे में सुनकर; सच कहूँ तो, आने वाले सुखद एहसास की उम्मीद में मेरा मन आँखें बंद कर लेने का कर रहा था! महेश: मुझे पता है कि यह थोड़ा अजीब लग सकता है... लेकिन अगर आप इसे मज़ेदार एक्टिविटी की तरह लेंगी, तो मुझे लगता है कि आप इसे बेहतर समझ पाएँगी... हाँ, बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए यह एक समस्या है... खासकर शादीशुदा महिलाओं के लिए... शादीशुदा महिलाएँ ज़्यादा शर्मीली और दबी-दबी होती हैं... अगर 'लैप ड्राइविंग' के दौरान मैं उनके ब्रेस्ट को छूकर हॉर्न बजाने का इशारा करूँ, तो वे इसे गलत समझ सकती हैं... उनकी सोच बहुत पुरानी होती है, आप तो जानती ही हैं... वे आप जैसी जोशीली कॉलेज गर्ल का मुकाबला कभी नहीं कर सकतीं! है ना रश्मि?

मैं क्या कहती? महेश ने बड़ी चालाकी से अपनी बात रखी थी! 'जोशीली कॉलेज गर्ल' जैसा दिखने के लिए मुझे सिर हिलाना ही पड़ा! ज़ाहिर है, मैं चुप थी और शर्म के मारे पूरी तरह लाल हो गई थी।

इस घटिया और गंदे विचार के लिए इस आदमी को ज़ोरदार थप्पड़ मारने के बजाय, मेरा दिल रोमांच और उम्मीद से ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था!

महेश: देखो रश्मि... जैसे पेट का बायाँ और दायाँ हिस्सा होता है... वैसे ही 5वाँ और 6वाँ सिग्नल भी बाएँ और दाएँ ब्रेस्ट पर आधारित होते हैं। ठीक है?

तो पाँचवाँ सिग्नल है हॉर्न बजाना... अगर मैं तुम्हारे दाहिने ब्रेस्ट को छूता हूँ... तो इसका मतलब है कि तुम्हें हॉर्न बजाना है और अगर मैं तुम्हारे बाएँ ब्रेस्ट को छूता हूँ, तो तुम्हें गियर बदलना है। ज़रा लॉजिक तो देखो रश (थोड़ा रुककर; उसने स्टीयरिंग व्हील को सीधा किया ताकि कार सड़क पर ठीक से चलती रहे, और फिर मेरी उंगलियों को और ज़्यादा प्यार से सहलाने लगा और अपनी ठुड्डी को मेरे कंधे पर टिका दिया)... क्योंकि गियर स्टीयरिंग के बाईं ओर होता है, इसलिए बाएँ ब्रेस्ट का मतलब है गियर बदलना! सच में बहुत अच्छा सोचा है... है ना?

मैं: हूँ!

ऐसे नियम सुनकर मुझे इतना अजीब और असहज महसूस हुआ कि मेरे कान गर्म हो गए! मैंने बस सिर हिलाया और ज़ाहिर है कि मैं कोई प्रतिक्रिया देने की हालत में नहीं थी। महेश ने बहुत चालाकी से मेरे प्राइवेट पार्ट्स को छूने की इजाज़त ले ली और मेरी हालत ऐसी थी कि मुझमें इसका विरोध करने की मानसिक हिम्मत भी नहीं थी!

महेश: तो सब साफ़ है रश्मि? क्या हम शुरू करें?

मैं: ओ... ठीक है...

महेश: ध्यान रहे... जब तक मैं तुम्हारा टेस्ट पूरा न कर लूँ, कोई बात नहीं होगी... अगर किसी इमरजेंसी के लिए मुझे ब्रेक लगाने पड़े तो मैं लगाऊँगा... इसलिए चिंता मत करो... बस आराम से रहो और ड्राइविंग का मज़ा लो।

ऐसा कहते हुए उसने सीट पर अपनी पोज़िशन फिर से ठीक की, जिसका मतलब था कि उसके क्रॉच से मेरे टाइट बटक्स की तरफ़ एक दबाव बना और साथ ही स्टीयरिंग व्हील से हाथ हटाने से पहले उसने मुझे 'गले लगाने' के अंदाज़ में मेरे शरीर के किनारों को दबाया।

महेश: तो अब कोई बात नहीं होगी, रश्मि!

मैंने बस फीकी सी मुस्कान दी और उसने तुरंत गाड़ी शुरू कर दी!

हमारे सामने एक मोड़ था और महेश ने मेरे पेट के बाईं ओर के हिस्से को पकड़कर मेरा ड्राइविंग टेस्ट शुरू किया, जिससे मुझे बाईं ओर मुड़ने का इशारा मिला। शुरू में उसने मेरे कपड़ों के ऊपर से मेरी त्वचा को धीरे से छुआ, लेकिन कुछ ही पलों में वह वहाँ मेरे मांस को दबाने और महसूस करने लगा। चूँकि मैंने इस चूड़ीदार सूट के नीचे कोई इनर नहीं पहना था, इसलिए महेश आसानी से मेरी कमीज़ के नीचे मेरी गर्म, मुलायम त्वचा को महसूस कर सकता था और जैसे ही उसने मेरी त्वचा को दबाया, उत्तेजना से मेरा पूरा शरीर सिहर उठा। जब तक उसका हाथ मेरे पेट के पास रहा, वह अपनी पूरी हथेली से मेरे कपड़ों के ऊपर से मेरे गर्म, मुलायम पेट को सहलाता और महसूस करता रहा। मैंने हिम्मत जुटाई, स्टीयरिंग व्हील को कसकर पकड़ा और बाईं ओर मुड़ गई।

महेश: बहुत बढ़िया! शानदार काम रश्मि! लगता है तुम लैप ड्राइविंग बहुत जल्दी सीख रही हो!

उसने अपना हाथ मेरे पेट से हटाया और मुझे थोड़ी राहत मिली, लेकिन बदकिस्मती से यह राहत ज़्यादा देर तक नहीं रही क्योंकि कुछ ही पल में महेश ने अपना अगला सिग्नल दिया। उसने अपना बायां हाथ सीधे मेरी बाईं जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि इस सिग्नल का मतलब है स्पीड बढ़ाना, लेकिन मेरी चूड़ीदार का कपड़ा बहुत पतला था, इसलिए मुझे बहुत अजीब और असहज महसूस हो रहा था; मैं महेश की गर्म हथेली और उंगलियों को अपनी चिकनी जांघ के ऊपरी हिस्से पर रेंगते हुए महसूस कर रही थी!

मेरे मुँह से धीरे से "आह" निकल गई क्योंकि जैसे ही मैंने धीरे-धीरे एक्सीलरेटर दबाया, मेरा शरीर खिंचाव महसूस कर रहा था। मुझे महसूस हो रहा था कि महेश अपना हाथ मेरी जांघ पर घुमा रहा है और वहाँ मेरी कसी हुई त्वचा को महसूस कर रहा है! और फिर जैसे ही मैंने कार की स्पीड बढ़ाई, उसने अपना हाथ ऊपर की ओर धकेलना शुरू कर दिया, जिससे एक अजीब सी सिहरन हुई और मेरी पैंटी के अंदर एक जानी-पहचानी खुजली सी महसूस हुई! मेरे पूरे शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि मैं महसूस कर रही थी कि महेश धीरे-धीरे अपनी हथेली मेरी जांघ पर घुमा रहा है और मेरी चूड़ीदार के ऊपर उस "हॉट" हिस्से को सहला रहा है। मैंने अपने होंठ चाटे और खुद को शांत रखने के लिए थोड़ी देर के लिए आँखें बंद कर लीं। इस लैप ड्राइविंग के दौरान अपने ट्रेनर ड्राइवर की नज़दीकी और गंदे स्पर्श से मैं सचमुच बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो रही थी!

महेश: वाह! रश्मी... बहुत बढ़िया... तुम्हें सारे सिग्नल अच्छी तरह याद हैं!

तभी मैंने देखा कि थोड़ी दूर पर एक गाय सड़क पार कर रही थी। जिस स्पीड से हमारी कार चल रही थी, गाय आराम से निकल जाती, लेकिन महेश ने इस मौके का फ़ायदा उठाने की चालाकी दिखाई!

कितना शरारती और बदमाश है! या मुझे उसे "प्यारा शरारती बदमाश" कहना चाहिए, क्योंकि मुझे उसके स्पर्श का मज़ा आने लगा था और मैं उसका इंतज़ार भी करने लगी थी!

महेश ने फुर्ती दिखाते हुए अपना बायां हाथ (जो तब तक खाली था) मेरी बाईं उभरी हुई छाती के पास रख दिया! जैसे ही उसकी उंगलियां मेरे भरे हुए ब्रेस्ट को छुईं, मैं एक पल के लिए जम गई और बिल्कुल अकड़ गई! ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर की सारी मांसपेशियां लॉक हो गई हों!

इस वजह से मेरे लिए स्थिति और भी मुश्किल हो गई!

यह देखकर कि मैं हॉर्न नहीं बजा रही हूँ, महेश ने अपनी उंगलियों से मेरी छाती को दबाना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे मेरे स्तनों पर दबाव बढ़ा रहा था और बड़ी सावधानी से मेरे भरे-पूरे स्तनों को सहला रहा था! मेरी ब्रा कमीज़ के अंदर खुली हुई थी, इसलिए उसने अपनी उंगलियों से मेरे स्तनों की "अति जीवंत" प्रकृति को महसूस किया होगा और तुरंत ही उसकी हरकतें तेज़ हो गईं। मैं आसानी से समझ गई कि वह वास्तव में मेरी ब्रालेस छाती को बगल से दबा रहा था और सहला रहा था! शुरू में कुछ क्षणों के लिए उसकी उंगलियां मेरे बाएं स्तन के उभार पर सीधी रहीं, लेकिन अब मुझे अनुत्तरदायी और ब्रा खुली पाकर, उसने अपनी उंगलियों को मोड़ना शुरू कर दिया और वास्तव में मेरे स्तन को पकड़ने की कोशिश कर रहा था!


जारी रहेगी
 
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औलाद की चाह

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CHAPTER 8-छठा दिन

भेद खोलने की घमकी ( ब्लैकमेल) से निकलने का प्लान

अपडेट-15


प्यारा शरारती बदमाश - लैप ड्राइविंग-सिग्नल

कितना शरारती और बदमाश है! या मुझे उसे "प्यारा शरारती बदमाश" कहना चाहिए, क्योंकि मुझे उसके स्पर्श का मज़ा आने लगा था और मैं उसका इंतज़ार भी करने लगी थी!

महेश ने फुर्ती दिखाते हुए अपना बायां हाथ (जो तब तक खाली था) मेरी बाईं उभरी हुई छाती के पास रख दिया! जैसे ही उसकी उंगलियां मेरे भरे हुए ब्रेस्ट को छुईं, मैं एक पल के लिए जम गई और बिल्कुल अकड़ गई! ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर की सारी मांसपेशियां लॉक हो गई हों!

इस वजह से मेरे लिए स्थिति और भी मुश्किल हो गई!

यह देखकर कि मैं हॉर्न नहीं बजा रही हूँ, महेश ने अपनी उंगलियों से मेरी छाती को दबाना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे मेरे स्तनों पर दबाव बढ़ा रहा था और बड़ी सावधानी से मेरे भरे-पूरे स्तनों को सहला रहा था! मेरी ब्रा कमीज़ के अंदर खुली हुई थी, इसलिए उसने अपनी उंगलियों से मेरे स्तनों की "अति जीवंत" प्रकृति को महसूस किया होगा और तुरंत ही उसकी हरकतें तेज़ हो गईं। मैं आसानी से समझ गई कि वह वास्तव में मेरी ब्रालेस छाती को बगल से दबा रहा था और सहला रहा था! शुरू में कुछ क्षणों के लिए उसकी उंगलियां मेरे बाएं स्तन के उभार पर सीधी रहीं, लेकिन अब मुझे अनुत्तरदायी और ब्रा खुली पाकर, उसने अपनी उंगलियों को मोड़ना शुरू कर दिया और वास्तव में मेरे स्तन को पकड़ने की कोशिश कर रहा था!


मैं अपने मुंह से एक लंबी, कोमल आह को रोक नहीं पाई, जो "श्शहहहहआआआआअह्हह्ह्हह्हह्ह्ह्ह !” थी।

महेश ने मेरी धीमी, कामुक आह को ज़रूर सुना और तुरंत अपना बायाँ हाथ मेरे सामने की तरफ़ खिसका लिया ताकि उसे मेरे स्तनों पर बेहतर पकड़ मिल सके! उसकी हथेली अब सीधे मेरी कमीज़ के ऊपर मेरे निप्पल के आस-पास के हिस्से (एरिओला) पर थी और उसकी उंगलियाँ मेरे भरे-पूरे मांसल स्तनों को दबा रही थीं! इससे वह काफ़ी उत्तेजित हो रहा था; मैं महसूस कर सकती थी कि उसकी पैंट के अंदर उसका लिंग आकार में बढ़ रहा था और मेरे मांसल पिछले हिस्से पर अश्लील तरीके से टकरा रहा था!

मैं अब और चुपचाप या बेसुध नहीं रह सकती थी, मुझे होश में आना ही था!

“पॉम! पॉम! पॉम!”

मैंने खाली सड़क पर हॉर्न बजाया क्योंकि गाय सड़क पार कर चुकी थी! तब तक महेश मुझ जैसी एक परिपक्व हाउसवाइफ़ के भरे-पूरे स्तनों को छूने का भरपूर मज़ा ले चुका था। उसने धीरे से अपना हाथ मेरे स्तन से हटाया और मेरे कान में फुसफुसाया, “ओह रश्मीीीेई !.. तुम सच में बहुत अच्छा कर रही हो!”

लैप ड्राइविंग टेस्ट के नियमों के अनुसार मुझे चुप रहना था। वैसे भी, मैं बात करने की हालत में नहीं थी – मेरी साँसें तेज़ चल रही थीं, मेरे बड़े स्तन मेरे चूड़ीदार सूट के अंदर बहुत सेक्सी अंदाज़ में ऊपर-नीचे हो रहे थे, कार के झटकों और मेरी तेज़ साँसों की वजह से मेरी ब्रा के कप मेरे स्तनों से ढीले पड़ रहे थे, और मेरे पैर अपने-आप फैल रहे थे क्योंकि मैं अंदर से 'उबलने' लगी थी।

महेश: रश्मि , तुमने टेस्ट का शुरुआती हिस्सा पास कर लिया है... और सच कहूँ तो बहुत शानदार तरीके से... बहुत बढ़िया डियर... अब अगले हिस्से की ओर बढ़ते है।

उसने मेरी बाईं जांघ से अपना हाथ हटाया और मेरे कान में वही बात फुसफुसाई; इस बार उसके गीले होंठ और गर्म सांसें सचमुच मेरे बाएं कान को छू गईं! मुझे एहसास हो रहा था कि मेरी कोई प्रतिक्रिया न देने की वजह से हालात तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे और चीज़ें मेरे काबू से बाहर होती जा रही थीं, लेकिन सच कहूं तो मैं बहुत ज़्यादा उत्तेजित होने के कारण कोई प्रतिक्रिया देने की हालत में नहीं थी। मैं कोई हंगामा भी नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरा मकसद इस आदमी को यहीं उलझाए रखना था, जबकि मीनाक्षी उसके घर में ब्लैकमेलिंग का सामान ढूंढ रही थी। और इस मकसद के लिए मुझे पता था कि मुझे थोड़ी बेशर्मी दिखानी होगी और इस बदमाश को अपनी शारीरिक खूबसूरती में उलझाए रखने के लिए समझौता करना होगा।

महेश: यह हिस्सा थोड़ा मुश्किल है... क्योंकि तुम्हें यहां एक साथ कई काम करने होंगे... तुम्हें एक से ज़्यादा संकेतों पर ध्यान देना होगा... अगर मेरी बात समझ रही हो तो सिर हिलाओ, रश्मि?

मैं बोलने की हालत में भी नहीं थी, इसलिए बस सिर हिला दिया; चलती कार के इंजन की आवाज़ के बावजूद मैं अपनी धड़कनें सुन सकती थी! बाहर रोशनी तेज़ी से कम हो रही थी क्योंकि सूरज लगभग डूब चुका था; हवा भी ठंडी हो गई थी। मुझे एहसास हुआ कि बाहरी हालात भी इस कामुक 'लैप ड्राइविंग' के अनुभव को और मज़ेदार बना रहे थे!

महेश ने अब अपना दाहिना हाथ मेरी दाहिनी जांघ पर रखा; यह उसके द्वारा बताया गया गति धीमी करने का संकेत था। मैंने धीरे-धीरे अपने पैर से एक्सीलरेटर से दबाव कम करना शुरू किया, लेकिन वह वहीं नहीं रुका; उसने साथ ही अपना बायां हाथ पहले मेरी बगल के नीचे और फिर मेरे बाएं स्तन पर रखा; यह गियर बदलने का संकेत था। हालांकि उसका स्पर्श बहुत हल्का था, लेकिन जैसे ही उसने दोबारा मेरे स्तन को छुआ, मेरी धड़कनें मानो 200 की रफ़्तार से चलने लगीं! इसके अलावा, कार चल रही थी और मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए मेरे स्तन कमीज़ के अंदर बहुत आकर्षक ढंग से ऊपर-नीचे हो रहे थे और उसकी उंगलियों से टकरा रहे थे - किसी भी पुरुष के लिए यह वाकई बहुत कामुक एहसास था! मेरे लिए भी यह बहुत शानदार एहसास था और मुझे महसूस हुआ कि उत्तेजना में मेरे पैर अपने आप फैल रहे थे, जिससे मेरे निप्पल सख्त होते जा रहे थे और मेरी पैंटी के किनारे मेरी जांघों के जोड़ में और गहरे धंस रहे थे। मैंने फिर से हल्की-हल्की कराहें और आहें भरीं, जिससे महेश के सामने मेरी बढ़ती हुई कामुक उत्तेजना ज़ाहिर हो रही थी। सच कहूँ तो मेरा मन कर रहा था कि स्टीयरिंग छोड़ दूँ और... और शायद अपने ट्रेनर को गले लगा लूँ, लेकिन शुक्र है कि मेरा दिमाग़ अभी भी काम कर रहा था और उसने मुझे ऐसी बेवकूफ़ी करने से रोक लिया!

जैसे ही मैंने गाड़ी की रफ़्तार कम की और गियर बदलने वाली थी, महेश ने मेरे लिए स्थिति और मुश्किल कर दी। यह दूसरी बार था जब वह सीधे मेरे भरे-पूरे स्तनों को छू रहा था, इसलिए ज़ाहिर है कि इस बार वह ज़्यादा आत्मविश्वास और बेबाकी के साथ ऐसा कर रहा था। पहले तो उसने बस मेरे स्तनों के किनारे को छुआ था, फिर मांस को दबाया और बाद में पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस बार, दाहिने स्तन को किनारे से छूने के कुछ ही सेकंड बाद, उसकी उंगलियाँ कहीं ज़्यादा तेज़ी और आक्रामकता से हरकत करने लगीं! हालाँकि, गियर बदलने का संकेत समझने के लिए मेरे लिए उसका बस एक बार हल्का सा छूना ही काफ़ी था, लेकिन उसने न सिर्फ़ मेरे निजी और संवेदनशील अंग को छूना जारी रखा, बल्कि उसे अपनी हथेली में भरकर दबाने भी लगा!

कुछ ही पल में मुझे एहसास हुआ कि उसकी उंगलियां फैल गई थीं और वह सामने से मेरे पूरे ब्रेस्ट को पकड़ने की कोशिश कर रहा था! गियर बदलने का इशारा करने के बहाने उसकी फैली हुई हथेली बेशर्मी से मेरे ब्रेस्ट को अंदर की तरफ दबा रही थी! हालांकि मुझे मज़ा आ रहा था, लेकिन उसकी हिम्मत देखकर मैं हैरान रह गई और जल्दी से गियर बदलने की कोशिश की ताकि वह मेरे ब्रेस्ट से अपना हाथ हटा ले।

गाओ... ग्र्रोओओओ... गोओओओओ...

क्योंकि मैं नई थी, इसलिए मैं एक बार में गियर नहीं बदल पाई और कार से अजीब-अजीब आवाज़ें आने लगीं! मैं थोड़ी घबरा गई और समझ नहीं पा रही थी कि अब क्या करूँ।

महेश: बेबी, टेस्ट के दौरान मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता... वरना मुझे सब कुछ शुरू से करना होगा... क्या तुम खुद ठीक नहीं कर सकती?
हालांकि मेरी हालत बहुत खराब थी, फिर भी मैंने जल्दी से सिर हिलाकर उसे भरोसा दिलाया कि मैं खुद कर लूँगी क्योंकि मुझे बिल्कुल भी मन नहीं था कि सब कुछ शुरू से करना पड़े। शुक्र है कि सड़क खाली थी और कार भी धीमी गति से चल रही थी, इसलिए मुझे गियर बदलने की कोशिश करने के लिए ज़रूरी समय मिल गया। लेकिन इस दौरान महेश का हाथ मेरे दाहिने ब्रेस्ट पर ही रहा क्योंकि इशारा पूरा नहीं हुआ था!

बदमाश!

उसे तब तक पता चल गया होगा कि मेरी ड्रेस के अंदर मेरी ब्रा खुली हुई थी, क्योंकि मैंने देखा कि वह मेरे दाहिने ब्रेस्ट को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहा था, जैसे कि वह उसे तौल रहा हो और मेरे ब्रेस्ट को अपनी हथेली में दबा रहा हो! चूंकि मैंने तब तक किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया था, इसलिए मेरी उम्र के हिसाब से मेरे ब्रेस्ट स्वाभाविक रूप से बहुत टाइट और उभरे हुए थे, बिना ब्रा के भी, और शायद इसी बात ने महेश को सबसे ज़्यादा हैरान और आकर्षित किया!

गियर बॉक्स भी मेरा साथ नहीं दे रहा था; जब भी मैं गियर बदलने की कोशिश करती, वह बार-बार न्यूट्रल मोड में आ जाता था, और उस दौरान वह बदमाश मेरी कमीज़ के पतले कपड़े के ऊपर से मेरे टाइट ब्रेस्ट को सहलाने में पूरी तरह से लगा हुआ था। मैं महसूस कर सकती थी कि मेरे सख्त निप्पल ढीली ब्रा के कप के अंदर चुभ रहे थे और उसकी उंगलियों से टकरा रहे थे, क्योंकि उसकी बड़ी हथेली मेरे पूरे दाहिने ब्रेस्ट को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, जिससे मैं इतनी अजीब स्थिति में भी शरमा गई!

आखिरकार मैं गियर बदलने में कामयाब हो गई और कार की आवाज़ और झटके बंद हो गए और वह ठीक से आगे बढ़ने लगी। महेश: अरे... तुम सच में कमाल हो रश्मीीीे... हम्म... बहुत बढ़िया!

वह रुका; शुक्र है कि उसने मेरे शरीर से अपने हाथ हटा लिए थे। मैं अपनी गर्दन पर उसकी गर्म साँसें और हल्की-हल्की आहें महसूस कर सकती थी, और मेरी गांड पर उसके सख्त लंड का दबाव अब साफ़ महसूस हो रहा था! मेरे जैसी शादीशुदा औरत के लिए यह सब बहुत ही अश्लील और असहज होता जा रहा था।

महेश: सच कहूँ तो तुमने चीज़ें बहुत अच्छे से सीखी हैं... गियर बदलना मुश्किल काम है, डियर... इसलिए अगर पहली बार में न हो पाए तो घबराना मत। यह बिल्कुल नॉर्मल है... ठीक है?

वह रुका और पक्का अपनी अगली शरारत के बारे में सोच रहा होगा! मुझे बहुत सेक्सी महसूस हो रहा था कि एक घंटे पहले तक यह आदमी मेरे लिए बिल्कुल अजनबी था और अब हालात की वजह से मुझे उसे अपने प्राइवेट पार्ट्स छूने देने पड़े!

उस 'सविता भाभी' मैगज़ीन से मिली शुरुआती "गर्मी" के बाद, अब मैं अपने ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर महेश के साथ सचमुच "ओवन में पक" रही थी! मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकती थी कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन उसने जो अगली हरकत की, उससे मुझे तुरंत अपने टीनएज के दिनों की याद आ गई! उसकी हरकत इतनी स्मूथ थी और पुरानी यादें इतनी तेज़ी से दिमाग में आईं कि मैं एक पल के लिए चौंक गई; शुक्र है कि मैं जल्दी ही संभल गई।

महेश (मेरे कान में फुसफुसाते हुए): अगले लेवल पर जाने से पहले... मैं चाहता हूँ कि तुम अभी के लिए गाड़ी सीधी चलाओ... लेकिन... लेकिन हेडलाइट जला लो... बाहर थोड़ा अंधेरा हो रहा है... डैशबोर्ड पर तुम्हारे दाईं ओर हरा स्विच है... हाँ, वहीं... वहीं... सही!

मैंने हेडलाइट जला दी। गाड़ी तीसरे गियर में धीमी रफ़्तार से चल रही थी। सड़क बिल्कुल खाली थी, इसलिए गाड़ी संभालना मेरे लिए आसान था। कभी-कभी मैं गाड़ी को सड़क पर सीधा नहीं रख पाती थी और ऐसे मौकों पर महेश तुरंत अपना एक्सपर्ट टच देता था।

महेश: मैं ऐसे हाथ ऊपर करके नहीं बैठ सकता रश्मी... मेरे हाथों में दर्द हो रहा है... उफ़... लगता है ट्रेनर के लिए लैप ड्राइविंग की यही एक दिक्कत है! मैं: हाँ… सच है… उस तरह बैठना… थोड़ा अजीब भी लगता है…

महेश: क्या मैं कुछ देर के लिए उन्हें तुम्हारे पैरों पर रख सकता हूँ… प्लीज़…

मेरे हाँ कहने से पहले ही, मुझे अपनी भरी-पूरी जाँघों पर उसके बड़े-बड़े हाथ महसूस हुए और अगले ही पल उसने फुसफुसाती हुई आवाज़ में मेरे कान के पास कहा…

महेश: ऊऊऊऊ… तुम्हारे पैर कितने गर्म हैं रश्मी… बिल्कुल गर्म तवे की तरह!

जैसे ही महेश ने मेरे कान में तवे वाली बात फुसफुसाई... वैसे ही मेरे दिमाग में टीनएज के दिनों की एक याद ताज़ा हो गई! जैसे ही उन्होंने अपनी बात पूरी की और अपना बायां हाथ मेरी जांघ पर रखा, मेरे सामने कार की विंडशील्ड पर जैसे कोई पुरानी याद उभर आई! घटना का क्रम लगभग वैसा ही था, हालांकि हालात बिल्कुल अलग थे।

ये शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं, भले ही यह घटना तब की है जब मैं एक किशोरी थी !

मेरी पूनम-दीदी और जीजा-जी कुछ दिनों के लिए हमारे साथ रहने आए थे; वे दक्षिण में रहते थे और उन्हें हमारे यहां आने का मौका बहुत कम मिलता था। पूनम मेरी सगी बहन नहीं थी, बल्कि मेरी मां की बड़ी बहन की बेटी थी। उनका एक बच्चा था, जो मुश्किल से एक साल का था। पूनम-दीदी के पति, राजपाल, जिन्हें मैं "जीजा-जी" कहता था, एक खुशमिजाज और मिलनसार इंसान थे, जो हमेशा परिवार वालों के साथ मज़ाक-मस्ती करते रहते थे। हालांकि वे मेरे लिए काफी अनजान थे, लेकिन अपने मिलनसार स्वभाव और मज़ाकिया अंदाज़ की वजह से जल्द ही मेरे काफी करीब आ गए।

जीजा-जी ने फिल्म देखने का प्लान बनाया क्योंकि उन्हें अगले ही दिन निकलना था, और उन्होंने पूनम-दीदी को बच्चे के साथ सिनेमा जाने के लिए मना लिया। मैं और हर्ष भी उस टीम में शामिल थे; हर्ष पूनम-दीदी का भाई था और लगभग मेरी ही उम्र का था।

जीजा-जी: तो हुज़ूर (हर्ष की ओर इशारा करते हुए), आप क्या देखना चाहेंगे? हिंदी या इंग्लिश?

हर्ष: इंग्लिश जीजा-जी... मेरे माता-पिता मुझे इंग्लिश फिल्में बिल्कुल भी नहीं देखने देते।


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CHAPTER 8-छठा दिन

भेद खोलने की घमकी ( ब्लैकमेल) से निकलने का प्लान

अपडेट-16

तुम्हारी टाँगे कितनी गर्म है... बिल्कुल गर्म तवे की तरह
मैंने हेडलाइट जला दी। गाड़ी तीसरे गियर में धीमी रफ़्तार से चल रही थी। सड़क बिल्कुल खाली थी, इसलिए गाड़ी संभालना मेरे लिए आसान था। कभी-कभी मैं गाड़ी को सड़क पर सीधा नहीं रख पाती थी और ऐसे मौकों पर महेश तुरंत अपना एक्सपर्ट टच देता था।

महेश: मैं ऐसे हाथ ऊपर करके नहीं बैठ सकता रश्मि .. मेरे हाथों में दर्द हो रहा है... उफ़... लगता है ट्रेनर के लिए लैप ड्राइविंग की यही एक दिक्कत है! मैं: हाँ… सच है… उस तरह बैठना… थोड़ा अजीब भी लगता है…

महेश: क्या मैं कुछ देर के लिए उन्हें तुम्हारे पैरों पर रख सकता हूँ… प्लीज़…

मेरे हाँ कहने से पहले ही, मुझे अपनी भरी-पूरी जाँघों पर उसके बड़े-बड़े हाथ महसूस हुए और अगले ही पल उसने फुसफुसाती हुई आवाज़ में मेरे कान के पास कहा…

महेश: ऊऊऊऊ… तुम्हारी टाँगे कितनी गर्म हैं रश्मि … बिल्कुल गर्म तवे की तरह!

जैसे ही महेश ने मेरे कान में तवे वाली बात फुसफुसाई... वैसे ही मेरे दिमाग में टीनएज के दिनों की एक याद ताज़ा हो गई! जैसे ही उन्होंने अपनी बात पूरी की और अपना बायां हाथ मेरी जांघ पर रखा, मेरे सामने कार की विंडशील्ड पर जैसे कोई पुरानी याद उभर आई! घटना का क्रम लगभग वैसा ही था, हालांकि हालात बिल्कुल अलग थे।

ये शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं, भले ही यह घटना तब की है जब मैं एक किशोरी थी !

मेरी पूनम-दीदी और जीजा-जी कुछ दिनों के लिए हमारे साथ रहने आए थे; वे दक्षिण में रहते थे और उन्हें हमारे यहां आने का मौका बहुत कम मिलता था। पूनम मेरी सगी बहन नहीं थी, बल्कि मेरी मां की बड़ी बहन की बेटी थी। उनका एक बच्चा था, जो मुश्किल से एक साल का था। पूनम-दीदी के पति, राजपाल, जिन्हें मैं "जीजा-जी" कहता था, एक खुशमिजाज और मिलनसार इंसान थे, जो हमेशा परिवार वालों के साथ मज़ाक-मस्ती करते रहते थे। हालांकि वे मेरे लिए काफी अनजान थे, लेकिन अपने मिलनसार स्वभाव और मज़ाकिया अंदाज़ की वजह से जल्द ही मेरे काफी करीब आ गए।

जीजा-जी ने फिल्म देखने का प्लान बनाया क्योंकि उन्हें अगले ही दिन निकलना था, और उन्होंने पूनम-दीदी को बच्चे के साथ सिनेमा जाने के लिए मना लिया। मैं और हर्ष भी उस टीम में शामिल थे; हर्ष पूनम-दीदी का भाई था और लगभग मेरी ही उम्र का था।

जीजा-जी: तो हुज़ूर (हर्ष की ओर इशारा करते हुए), आप क्या देखना चाहेंगे? हिंदी या इंग्लिश?

हर्ष: इंग्लिश जीजा-जी... मेरे माता-पिता मुझे इंग्लिश फिल्में बिल्कुल भी नहीं देखने देते।

जीजा-जी: बेचारा बच्चा! ठीक है... चलो कोई इंग्लिश फ़िल्म देखते हैं! और तुम, मेरी प्रिंसेस (मेरी तरफ़ इशारा करते हुए)?

मैं: मेरे पास कोई चॉइस नहीं है... कुछ भी चलेगा जीजा-जी... क्योंकि मुझे थिएटर जाने का मौका बहुत कम मिलता है।

जीजा-जी: समझ सकता हूँ... तो चलो 'डीप ब्लू सी' का प्लान बनाते हैं... यहाँ आते हुए मैंने उसका पोस्टर देखा था।

हर्ष: हाँ, हाँ... वो 'जॉज़' जैसी फ़िल्म है... लीलावती में चल रही है।

पूनम-दीदी: लेकिन मैं उसे कैसे ले जाऊँगी राजपाल... इतनी देर के लिए...

जीजा-जी: अरे पूनम... वो रोएगा नहीं... इतनी सारी गोद हैं... तुम्हारी, मेरी, हर्ष की और रश्मि की... उसे कोई न कोई पसंद आ ही जाएगी और वो चुप रहेगा... हा हा हा...

जीजा-जी की बात सुनकर पूनम-दीदी को ज़्यादा मज़ा नहीं आया, जबकि हर्ष और मैं हँस रहे थे।

पूनम-दीदी: और उसके खाने का क्या? वो अभी गहरी नींद में है... तुम तो बस प्लान बना रहे हो ना... मुझे उसे खिलाना है... नैपीज़ भी लेनी हैं...

जीजा-जी: ओए पूनम... इंग्लिश फ़िल्म है तो बस दो घंटे की बात है... कोई सामान ले जाने की ज़रूरत नहीं है... और वैसे भी उसके लिए खाना तो हमेशा तैयार रहता है ना... (जीजा-जी ने पूनम-दीदी की तरफ़ आँखों ही आँखों में इशारा करते हुए मुस्कुराया)

पूनम-दीदी मुस्कुराईं और उन्हें मुँह चिढ़ाया। हर्ष का चेहरा भावहीन था, लेकिन मैं समझ गई कि जीजा-जी का क्या मतलब था; शायद उनका इशारा इस बात की तरफ़ था कि ज़रूरत पड़ने पर पूनम-दीदी थिएटर में कभी भी उसे ब्रेस्ट-फ़ीड करा सकती थीं।

पूनम-दीदी: ठीक है, अगर तुम सच में मैटिनी शो के लिए जाना चाहते हो तो मेरी मदद भी करो ना... बस बातें मत करो और हुक्म मत चलाओ!

जीजा-जी: अरे हाँ, बिल्कुल। मैं तैयार हूँ! देखो, मैं नहा भी चुका हूँ! हर्ष भी! रश्मि ... तुम क्यों खाली बैठी हो... सुना नहीं दीदी ने क्या कहा... बातें मत करो... नहाने जाओ... जाओ! हम सब जीजा-जी की बातों पर हंस रहे थे और मुझे टॉयलेट की तरफ जाना था क्योंकि पूनम-दीदी, जीजा-जी और हर्ष नहा चुके थे।

पूनम-दीदी: रश्मि! तुम वो ड्रेस पहनो जो हम तुम्हारे लिए लाए थे... और हर्ष... तुम भी। जाओ, जाओ... तैयार हो जाओ... तब तक मैं अपने राजकुमार के लिए ज़रूरी चीज़ें एक बैग में रख लेती हूँ।

और राजपाल... तुम जाकर डैडी से बातें मत करने लगना... तुम बच्चे पर नज़र रखना जब तक मैं ज़रूरी चीज़ें तैयार करती हूँ।

जीजा-जी: जैसी आपकी मर्ज़ी।

पूनम-दीदी और जीजा-जी ने इस बार मुझे फूलों के प्रिंट वाली बहुत अच्छी स्कर्ट-ब्लाउज़ दी थी। असल में मैं इसे पहनने के लिए बेताब थी और मुझे तुरंत यह मौका मिल गया। मैंने ड्रेस के साथ अपने अंडरगारमेंट्स और तौलिया लिया और टॉयलेट चली गई। मैंने जल्दी से नहा लिया क्योंकि मुझे नई ड्रेस पहननी थी। जब मैंने अपने नंगे शरीर को मुलायम तौलिए से पोंछा, तो मैंने पहली बार अपनी नई ड्रेस को ध्यान से देखा।

पूनम-दीदी और जीजा-जी ने मुझे पिछले 1-2 सालों से नहीं देखा था क्योंकि वे उस दौरान कभी हमारे घर नहीं आए थे और शायद उन्होंने मेरी लंबाई को याद करते हुए यह ड्रेस खरीदी थी जब उन्होंने मुझे आखिरी बार देखा था। मैं अब व्यस्क हो रही थी और स्वाभाविक रूप से तेज़ी से बढ़ और विकसित हो रही थी। मेरे कंधे एक परिपक्व महिला जैसे आकार में आ रहे थे और मेरे छोटे स्तन भी, जो अब दो चाय के कप जितने बड़े हो गए थे। हाल ही में मेरे कूल्हों पर काफी मांस आ गया था और वे बहुत गोल आकार ले रहे थे। मेरी टाँगे काफी आकर्षक लगने लगी थी ; जांघें चौड़ी और मांसल हो गई थीं और उन पर बाल नहीं थे, और नीचे की ओर पैर पतले होते जा रहे थे।

हालांकि ड्रेस का प्रिंट और उसका मुलायम कपड़ा मुझे बहुत पसंद आया, लेकिन मुझे थोड़ी चिंता हुई जब मैंने देखा कि टॉप और स्कर्ट दोनों की लंबाई थोड़ी कम थी और जब मैंने उन्हें अपने शरीर पर लगाकर देखा तो वे मेरे घुटनों तक नहीं पहुँच रहे थे। बिना और समय बर्बाद किए मैंने जल्दी से अपने इनरवियर पहने और ड्रेस पहन ली और बाथरूम में लगे छोटे से शीशे में खुद को देखा। मुझे खुशी हुई कि ड्रेस मेरे शरीर पर बहुत अच्छी तरह फिट हो रही थी; टॉप में मेरे ब्रेस्ट बहुत ज़्यादा उभरकर नहीं दिख रहे थे, लेकिन नीचे देखने पर मुझे थोड़ी असहजता महसूस हुई। टॉप शरीर पर बहुत टाइट तो नहीं था, लेकिन उसकी लंबाई थोड़ी कम थी—वह स्कर्ट की कमरबंद तक नहीं पहुँच रहा था, जिससे मेरे पेट की गोरी और सपाट त्वचा का लगभग एक इंच हिस्सा दिख रहा था। यह स्टाइल मेरे लिए बिल्कुल नया था और मुझे पसंद आया। उस स्कर्ट में मैं काफी स्मार्ट लग रही थी, हालाँकि वह मेरे घुटनों तक नहीं पहुँच रही थी और उनसे कुछ इंच ऊपर ही खत्म हो रही थी। मुझे पता था कि माँ को ऐसी ड्रेस पसंद नहीं आएगी, लेकिन इस नई ड्रेस को पहनकर मुझे खुद काफी अच्छा लग रहा था। टॉप की आस्तीनों और स्कर्ट के निचले हिस्से पर हल्की-फुल्की झालरें (frills) थीं, जो उस पूरे पहनावे को और भी आकर्षक बना रही थीं।

अच्छी बात यह रही कि माँ ने ड्रेस के इस नए स्टाइल पर ज़्यादा आपत्ति नहीं जताई; उनका पूरा ध्यान पूनम-दीदी के बच्चे की देखभाल में लगा था। एक घंटे के भीतर ही हम मैटीनी शो के लिए निकल पड़े। ज़ाहिर है, हमारी टोली में हर्ष और मैं सबसे ज़्यादा उत्साहित थे, क्योंकि हमें थिएटर जाने का मौका बहुत कम ही मिलता था—और वह भी बिना माता-पिता के। जब हम लीलावती पहुँचे, तो बच्चा पूनम-दीदी की गोद में शांति से सो रहा था। लेकिन जीजा-जी टिकट काउंटर से सबसे बुरी खबर लेकर लौटे कि मैटीनी शो 'हाउसफुल' हो चुका था। एक ही पल में जैसे किसी ने मेरे चेहरे से सारा उत्साह और खुशी छीन ली हो; मैंने उदास नज़रों से पूनम-दीदी की ओर देखा।

पूनम-दीदी: अरे राजपाल… कुछ तो करो… ये लोग फ़िल्म देखने आए हैं… तुम इनका दिल नहीं तोड़ सकते!

जीजा-जी: ओहो पूनम… क्या मुझे ये नहीं पता! अब शो हाउस-फुल है तो मैं क्या कर सकता हूँ!
हूँ! साला, एक भी 'ब्लैकर' (टिकट ब्लैक करने वाला) नहीं मिल रहा! सोचो ज़रा! …किसी ने कहा कि कल पुलिस का छापा पड़ा था… इसलिए…

पूनम-दीदी: तो फिर क्या करें?

हर्ष: जीजा-जी, इस सड़क के पीछे एक और हॉल है… 'मिनी लीलावती'… छोटा थिएटर है… बिल्कुल बगल में ही है!

जीजा-जी: ठीक है, चलो… वहाँ कोशिश करते हैं। पर वहाँ कौन सी फ़िल्म चल रही है?

पूनम-दीदी: अरे कोई भी चलेगी… तुम जाकर कोशिश तो करो ना…

जीजा-जी: ठीक है, ठीक है… तुम और रश्मि रिक्शा लेकर आओ… हम तब तक तेज़ी से पैदल पहुँच जाएँगे।

जीजा-जी और हर्ष तेज़ी से एक गली से निकल गए और मैं और पूनम-दीदी एक साइकिल-रिक्शा पर बैठ गए। पूनम-दीदी थोड़ी मोटी थीं और गोद में बच्चे के साथ, उन्होंने बहुत ज़्यादा जगह घेर रखी थी; मैं बमुश्किल अपनी सीट पर बैठ पाई थी। जब रिक्शा मुख्य सड़क से गुज़रा, तो मैंने महसूस किया कि वहाँ से गुज़रने वाले मर्द सीधे मेरे पैरों को देख रहे थे। मैंने जल्दी से अपने पैर सिकोड़ लिए, लेकिन मैं सीट के किनारे पर बैठी थी और मेरे पैर नीचे की ओर मुड़े हुए थे; साथ ही मेरी स्कर्ट छोटी और कमर के नीचे से फूली हुई थी, इसलिए देखने वालों को मेरी स्कर्ट के नीचे का नज़ारा साफ़ दिख रहा था। मुझे इसका एहसास तो था, पर मैं कुछ कर नहीं सकती थी! मैं स्वाभाविक रूप से अकड़ गई थी और शर्म से लाल हो रही थी; मैंने अपने पैरों को जितना हो सके सिकोड़ने और स्कर्ट को नीचे खींचने की पूरी कोशिश की, लेकिन यह सब बेकार की कोशिश थी। शुक्र है कि सफ़र छोटा था और हम जल्द ही रिक्शे से उतर गए।

जीजा-जी: पूनम… यहाँ एक हॉरर फ़िल्म चल रही है…

पूनम-दीदी: हिंदी?

जीजा-जी: नहीं, नहीं… इंग्लिश… 'रिवेंज ऑफ़ द डेड'! पूनम-दीदी: शुक्र है... हिंदी रामसे वाली फ़िल्में बहुत भद्दी होती हैं... इसे तो हम देख ही सकते हैं, है ना...?

जीजा-जी: हाँ, हाँ... यह वैम्पायर वाली फ़िल्म है... मैंने कोई रिस्क नहीं लिया... टिकट पहले ही खरीद लिए थे!

पूनम-दीदी: वैम्पायर फ़िल्म... पक्का पुरानी होगी... डरावनी होनी चाहिए... तो रश्मि ... खुश हो जाओ! एक मिनट पहले तो तुम बहुत निराश लग रही थीं!

मैं ज़ोर से मुस्कुरा रही थी और हर्ष भी। शो शुरू होने का समय हो गया था और हम थिएटर के अंदर गए। मैंने देखा कि ज़्यादा भीड़ नहीं थी और जो लोग आए थे, वे ज़्यादातर निचले तबके के थे और नीचे वाले स्टॉल में जा रहे थे। कुछ जोड़े थे, युवा और बुज़ुर्ग दोनों, जो हमारे साथ ऊपर जा रहे थे। जीजा-जी ने बालकनी में सबसे पिछली लाइन के टिकट खरीदे थे। हम सीढ़ियाँ चढ़े; जीजा-जी आगे थे और पूनम-दीदी की बच्चे के साथ ऊपर चढ़ने में मदद कर रहे थे। थिएटर के लाइट-मैन ने अपनी टॉर्च की रोशनी से पिछली लाइन में हमारी सीटें ढूँढ़ने में मदद की। जीजा-जी हमें रास्ता दिखा रहे थे; पूनम-दीदी सबसे पहले अंदर गईं और दीवार की तरफ़ वाली सीट पर बैठ गईं, फिर हर्ष गया, फिर मैं, और आखिर में जीजा-जी।

हम अभी अपनी सीटों पर बैठे ही थे कि विज्ञापन शुरू हो गए। हम सब थोड़े परेशान थे कि कहीं थिएटर के शोर से बच्चा जाग न जाए, लेकिन जीजा-जी ने उसके कानों में पहले ही रुई के फाहे डाल दिए थे, और शुक्र है कि उसने काम किया!

जैसे-जैसे मेरी आँखें थिएटर के अंधेरे की आदी हुईं, मैंने देखा कि ऊपर वाले स्टॉल में ज़्यादातर सीटें खाली थीं और हमारे आगे की 3-4 लाइनें पूरी तरह खाली थीं; और जिस पिछली लाइन में हम बैठे थे, वहाँ भी कोई नहीं था! जब मैं ऊपर वाले स्टॉल की ओर गई, तो मैंने हॉलवे में इस फ़िल्म की कुछ तस्वीरें लगी देखीं; वे सभी बहुत डरावनी थीं—उनमें भयानक, बिगड़े हुए इंसानी चेहरे थे जिनके बड़े-बड़े दाँत, लाल उभरी हुई आँखें और डरावने हाव-भाव थे; साथ ही खून से लथपथ कम कपड़ों वाली औरतें और भयानक नुकीले दाँतों वाली डरावनी औरतें भी दिख रही थीं। चूँकि मैंने पहले कभी हॉरर फ़िल्म नहीं देखी थी, इसलिए मुझे इन फ़िल्मों में दिखाए जाने वाले न्यूडिटी और इंटीमेट सीन्स के बारे में बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था।


जारी रहेगी
 
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