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Meesa
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  • यह शाम चुपके से आई, लेकर ठंडा सा सन्नाटा।
    हर याद की चिंगारी फिर जल उठी, कहाँ गया वो दाता?
    देखो, उस चाँद को भी मेरे जैसा रोग है,
    बस अकेलापन ही रह गया, प्रेम का हर किस्सा आधा।
    जब शाम ढली, और रात हुई ठंड।
    विरह की लौ फिर से तेज़ हुई, मंद।
    यह चाँद जो छत पर अकेला है ठहरा,
    शायद जानता है मेरे दिल की हर पाबन्दी।
    अभी भोर हुई भी न थी, ख़्याल तेरा आ गया।
    चाँद छुपने से पहले ही, दिल मेरा जगमगा गया।
    इकतरफ़ा है यह सफ़र, मालूम है मुझको,
    फिर भी हर सुबह तेरी याद में यह फूल खिलता है।
    कोई किताब में नहीं लिखा, न कोई क़िस्सा है इसका,
    ये प्यार मेरा बस तुम्हारी ही नज़र का हिस्सा है।
    तुम नज़र न आओ तो हर शायरी अधूरी लगे,
    तुम्हारे नाम से ही मुकम्मल मेरी हर कहानी है, हर लम्हा है मेरा।
    ये कैसा बंधन है सनम, न बाँधे, न आज़ाद करे,
    तुम्हारे बिना हर रंग फीका है, न कोई खुशी दिल को शाद करे।

    मेरी दुनिया का हर सवेरा तुम्हारी आँखों से शुरू होता है,
    तुम दूर हो तो ये धड़कन भी कहाँ ठीक से चलती, बस तुम्हें फ़रियाद करे।
    तुम्हारे लम्स का जादू है या मेरे इश्क़ की कहानी,
    हर पल तुम्हारी चाहत में गुज़रे, यही ज़िंदगानी।
    तुम इबादत हो मेरी, तुम ही मेरी आख़िरी मंज़िल भी,
    तुमसे मिल कर ही मिली है इस रूह को सच्ची रवानी।
    कोई मौसम नहीं जो तुम्हारे बिना भा जाए मुझे, हर पल बस तुम्हारी आहट ही बुलाए मुझे।
    तुम मेरी ज़िंदगी की वो धुन हो प्यारे, जिसे सुन कर ये रूह मुस्कुराए मुझे।
    सारा जग देखे चाँद, मैं तुम्हारा मुख निहारूँ, हर साँस से पहले तुम्हारा ही नाम पुकारूँ।
    तुम साथ हो तो फिर किस बात की परवाह मुझे? ये ज़िंदगी भी तुम्हारी है, तुम पर ही वारूँ।
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