**कहानी: भाग 38 – मदनलाल का आंतरिक तूफान**
सुबह की पहली किरण बालकनी में घुस आई थी, लेकिन मदनलाल जी के मन में अंधेरा अभी भी गहरा था। वो बिस्तर पर लेटे थे, लेकिन नींद आनी तो दूर, आँखें भी बंद नहीं हो पा रही थीं। रात भर वो खुद से लड़ते रहे – एक तरफ वो पुराना, सम्मानजनक ससुर, जो काम्या को बेटी जैसा...