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Chapter - 11
रात की चुदाई के बाद दोनो माँ बेटे एक दूसरे के ऊपर तो गाए उन्होंने।
अगले दिन सुबह
राधा अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, नंगी, पसीने से तर। कल रात का वीर्य अभी भी उसकी जाँघों के बीच चिपका हुआ था — राहुल का, जो उसने अपनी जीभ से साफ किया था, लेकिन फिर भी कुछ बचा था।
वो अभी आँखें खोलने ही...
Chapter 10
दोपहर के २:३० बजे थे। घर में सन्नाटा था, खिड़कियाँ बंद थीं, और बाहर अहमदाबाद की गर्मी ४५ डिग्री पार कर चुकी थी। अंदर का माहौल और भी गर्म था।
राधा अपने बेडरूम में एक चौड़ी कुर्सी पर बैठी थी, जैसे कोई रानी अपने तख्त पर। उसने सिर्फ एक पारदर्शी, काले रंग की नाइटी पहनी थी जो उसके...
Chapter 9
सुबह के ६:१५ बजे थे। राधा अपनी आँखों में काजल लगा चुकी थी। उसने एक छोटी, टाइट, गहरी लाल कमीज़ और एक ढीला सलवार पहन रखा था – जिसमें उसकी कमर और नितंब की लकीरें पूरी तरह उभर कर आ रही थीं, और ऊपर से ब्रा तक नहीं पहनी थी, ताकि उसके भारी स्तनों के निप्पल कमीज़ के अंदर साफ दिखें।
उसने रसोई...
अध्याय 8
गलियारे में बिजली जैसी खामोशी थी। नेहा का गिलास उसके काँपते हाथ से लगभग गिरने को था। उसकी आँखें राहुल के उल्टे बॉक्सर पर, फिर अंदर राधा की तरफ, फिर वापस राहुल पर जमी हुई थीं।
"भैया… तुम… तुम्हारा बॉक्सर… और मॉम की नाइटी… वो फटी हुई क्यों है?" नेहा की आवाज़ में अब चीख थी, पर फुसफुसाहट...