सुलू और चंद्रकांत का रिश्ता कुछ गलत नहीं था। ऊपरी तौर पर आपत्ति जताने जैसा भी कुछ नहीं था। चंद्रकांत का साथ मिलना मतलब वह सही घर ही जाएगी, ऐसा होने पर भी, समाज-व्यवस्था, जाति-व्यवस्था इसे नहीं मानेगी, यह बिल्कुल पत्थर की लकीर थी। फिर भी चंद्रकांत की नौकरी, रहन-सहन, आर्थिक स्थिति देखकर माता-पिता...