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ThanksMaza aa gaya lekhak ko dhanyawad

ThanksMaza aa gaya lekhak ko dhanyawad

झडने के बाद देखा तो मौसी सो गई थी और खर्राटे ले रही थी. पर मैंने और मजा लेने की सोची और तीसरी बार हचक हचक कर रुक रुक कर घंटे भर मौसी की गांड चोदी तब जाकर मेरी वासना शांत हुई. गांड मारते हुए मैंने मौसी की चूचियाँ भी मन भर कर जैसा मेरा मन चाहा दबाई और मसली. मौसी सोती ही रही. आखिर आधी रात को मैं अपना पूरा वीर्य उसके गुदा में निकालकर फ़िर ही सोया.
--- आगे ---
मौसी के साथ गर्मी की छुट्टी में मैंने अकेले में मस्त चुदाई शुरू कर दी थी. मौसाजी तब दौरे पर थे. मैंने मौसी से पूछा कि उसके और रंजन के बारे में क्या मौसाजी को मालूम है?
उसने हाँ कहा और पूरी बात बता दी. "अरे तेरे मौसाजी भी कम नहीं हैं. दूसरे शहर में उनकी भी एक दो दोस्त है जिनके संग वह गुलछर्रे उड़ाते है. पर मैंने तेरे सिवा किसी और पुरुष से नहीं चुदवाया. हाँ रंजन जैसी गर्ल फ़्रेन्ड जरूर बना ली. असल में हम दोनों बाइ-सेक्सुअल हैं. इसीलिये हमने शादी की और एक दूसरे पर कोई बंधन नहीं रखा है. वैसे उन्हें यह भी मालूम है कि मैं तेरे साथ क्या कर रही हूँ. मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था. वे भी बोले कि हाँ घर का ही प्यारा लड़का है, मैं जो चाहे कर लूँ"
सुनकर मुझे बडा मजा आया. पर जब मौसाजी वापस आए तो मैं जरा उदास हो गया. मुझे लगा कि अब मौसी के गदराये शरीर का भोग करना मेरे नसीब में नहीं है. पर हुआ बिल्कुल उल्टा. तीन शरीरों की जुगलबंदी शुरू हो गई.
हुआ यह कि जब मौसाजी वापस आये तो उन्हों ने जरा भी जाहिर नहीं किया कि उन्ह्मे मेरे और मौसी के संबंध के बारे में मालूम है. मैं भी चुप रहा. उस रात मैं एक दूसरे कमरे में सोया. बड़ी रात तक सोने की कोशिश कर रहा था. रात को मौसी से संभोग की आदत हो जाने से मुझे अकेले नींद नहीं आ रही थी और इसलिये एक चुदाई की किताब पढ़ रहा था. मौसाजी और मौसी अपने कमरे में थे. वहाँ से हंसने खेलने की आवाजें आ रही थीं.
अंत में लंड बुरी तरह खड़ा हो गया. मैं बस बत्ती बुझा कर मुठ्ठ मार कर सोने ही वाला था कि मौसी ने मुझे आवाज दी. "विजय, अकेला क्या कर रहा है बेटा? यहाँ आ जा."
मुझे समझ में नहीं आया कि आज की रात तो मौसी अपने पति की बाँहों मैं है तो मुझे क्यों कबाब में हड्डी बनने को बुला रही है. मैंने दरवाजा खटखटाया. मौसी चिल्लाई. "आ जा बेटे, दरवाजा खुला है".
मैं अंदर आया तो देखता ही रह गया. आँखें फ़टी रह गईं और लंड और खड़ा हो गया. अजय अंकल आराम कुर्सी में बैठे थे और मौसी उनकी गोद में बैठी थी. दोनों मादरजात नंगे थे. मौसी की टांगें पसरी हुई थीं और मौसाजी का मोटा लंड मौसी के गुदा में जड तक धंसा हुआ था. मौसाजी का एक हाथ अपनी पत्नी की चूत में दो उँगलियाँ अंदर बाहर कर रहा था और दूसरे हाथ से वे मौसी के मम्मे दबा रहे थे. आपस में चूमा चाटी भी चल रही थी.
मौसी मेरी ओर देख कर बोली. "तुझे क्या लगा बेटे, तेरे को अकेले तडपते हुए छोड देंगे हम?" अंकल भी मुझे आँख मार कर बोले. "विजय, तेरी मौसी की चूत को तेरे मुंह की बहुत याद आ रही है. देख कितना रस बहा रही है तेरे लिये. तेरी मौसी भी अड़ी है, बोली चूत का रस पिलाऊँगी तो सिर्फ़ अपने प्यारे भांजे को!"
मौसी ने अपनी जांघें और फ़ैला दीं और बाँहें पसार कर मुझे पास बुलाया. "विजय, नंगा हो जा और जल्दी से मौसी की जांघों में समा जा बेटे, चूस ले अपनी मौसी की बुर. तुझे रस पिलाये बिना यह चूत ठंडी नहीं होगी."
मैंने काँपते हाथों से कपड़े उतारे और दौड कर मौसी के सामने उसकी जांघों के बीच बैठ कर मौसी की टपकती बुर में मुंह डाल दिया. मौसी की गांड का छेद मेरे मुंह से बस दो तीन इंच दूर था और मौसी का तनकर खुला गुदाद्वार और उसमें फंसा मोटा ताजा लंड देखकर मैं और उत्तेजित हो रहा था. चूत का स्वाद लेते हुए मेरी जीभ कभी कभी गांड और लंड तक पहुँच जाती थी.
मौसाजी नीचे से ही मौसी की गांड मार रहे थे और लंड गुदा में से एक दो इंच अंदर बाहर हो रहा था. मौसाजी ने अब दोनों हाथों से मौसी की चूचियाँ मसलना शुरू कर दी थीं और मैं अपनी जीभ उसके क्लिट पर रगड रहा था. मौसी ने मेरे सिर को कस कर अपनी बुर पर दबाया और हुमक कर झड गई. बाहर उबल उबल कर निकलते उस चिपचिपे पानी को मैंने चाट चाट कर साफ़ किया और फ़िर मौसी की झांटों से ढके भगोष्ठों का प्रेम से चुंबन लेने लगा.
बुर चटवाकर मौसी ने मुझे ऊपर खींच कर अपने सामने खड़ा कर लिया. मेरा खड़ा लंड बिलकुल मौसी के चेहरे के सामने मचल रहा था. उसे पकड कर मौसी ने चूमा और फ़िर मौसाजी को दिखाया. "देखो, कितना प्यारा रसीला लंड है मेरे भांजे का. अभी पूरा जवान भी नहीं है लड़का, एकदम कमसिन है. पर मुझ पिछले दो हफ्तों में बहुत सुख दिया है इसने"
मौसाजी बोले "अरे, फ़िर इसे शुक्रिया तो जरूर कहना चाहिये"
मैं लंड में होते मीठे आनंद का मजा लेते हुए सांस लेने को पलंग पर बैठ गया. मौसाजी गरमा गये थे. मौसी को बोले. "चल प्रिया रानी, पलंग पर लेट जा, तेरी गांड मारूँगा अब."
मौसी को कमर से पकड़ कर वैसे ही लंड गांड में घुसाये हुए उन्हों ने उठाया और लाकर पलंग पर पटक दिया. मौसी ने सरककर प्यार से अपना सिर मेरी गोद में रख दिया और मेरे लंड का चुंबन लेने लगी. उधर मौसाजी अब तक मौसी पर चढ़कर उसकी गांड मारने में जुट गये थे. ऐसी जोरदार गांड चोदने की क्रिया मैंने पहली बार देखी थी. मौसाजी का कडा मोटा लंड मौसी की कोमल गांड के छेद को चौडा करता हुआ सटासट अंदर बाहर हो रहा था.
जब लंड बाहर निकलता तो उस की साइज़ देखकर मैं हैरान रह जाता कि आखिर कैसे मौसी इतने बड़े लंड को अंदर लेती है. मौसी धीरे धीरे कराह रही थी और मुझे लगा कि उसे दर्द हो रहा होगा पर उसके चेहरे पर तो बड़े तृप्त भाव थे. अब मैं समझ गया कि पहली बार जब मैंने मौसी की गांड मारी थी तो कैसे मेरा लंड आराम से मौसी की गांड में चला गया था. मौसाजी का हलब्बी लंड लेने के बाद मेरा कमसिन लंड तो उसके लिये बच्चों का खेल था.
मौसी ने अब तक मेरे लंड को चूम चूम कर फ़िर खड़ा कर दिया था. गांड मरवाते हुए पूरा लंड मुंह में लेकर वह आराम से चूस रही थी. मौसाजी अब झडने के करीब आ गये थे और तैश में आकर गंदी गंदी बातें कहते हुए पूरे जोर से मौसी की गांड मार रहे थे. "तेरी गांड मारूँ मेरी चुदैल रानी, तेरे मस्त मोटे चूतड़ों को चोदूँ. साली चुदैल, रंडी, क्या गांड है तेरी मेरी जान!"
मौसाजी पूरे जोर से हचक हचक कर मौसी की गांड मारने लगे. मैं भी उचक उचक कर नीचे से ही मौसी के मुंह को चोदने की कोशिश करने लगा. उधर मौसाजी ने चार पाँच करारे धक्के लगाये और झड गये. उनकी गरम गरम सांसें जोर जोर से चल रही थीं.
आखिर तृप्त होकर मौसाजी धीरे से मुस्कराते हुए मौसी पर लेट गये और सुस्ताने लगे. मैं अब बहुत उत्तेजित था और किसी भी तरह संभोग करना चाहता था. बहुत देर से मौसी की चूत चूसने की भी मुझे तीव्र इच्छा हो रही थी. मौसी को मैंने कहा कि पलट कर सीधी हो जाए जिससे मैं उसकी चूत चूस सकूँ. मौसी मुस्कराकर बोली. "विजय, मेरी बुर का पानी बहुत पिया है, आज मेरी गांड चूस कर देख ले”
यह कल्पना ही इतनी मादक थी कि मैं तुरंत मौसी के चूतड़ों पर लपक पड़ा और गांड पर मुंह लगाकर चूसने लगा. मौसी की गांड का स्वाद का क्या कहना. मैं चूस चूस कर चटकारे लगाने लगा. मौसाजी ने अपनी पत्नी के चूतड फ़ैला कर रखे जिससे मैं आसानी से माल चूस सकूँ. वे बोले. "बडा प्यारा और चिकना लड़का है. उसका लंड कैसा तन्ना कर खड़ा है देख"
अंत में मैंने जीभ अंदर डाल कर पूरी गांड के छेद को चाट लिया. मौसी हंस कर उठ बैठी. "बहुत हो गया बेटे, अब कुछ नहीं बचा मेरी गांड के अंदर" अपनी टांगें फ़ैला कर वह लेट गयी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया."चल अब चोद मुझे जल्दी से."
मैं हचक हचक कर प्रिया मौसी को चोदने लगा. मौसाजी ने सिरहाने बैठकर अपना लंड मौसी के मुंह पर दे दिया और वह उसे अपने गालों और आँखों पर प्यार से रगडने लगी. लंड मेरे ठीक सामने था और इतने पास से मैंने पहली बार उसे ठीक से देखा. करीब सात इंच लम्बा बड़े गाजर जैसा मोटा गोरा लंड और उस पर लाल लाल टमाटर जैसा सुपाडा!!
मौसाजी अब जोश में थे और मौसी की चूत चूसने को अधीर थे. अब वह मौसी की बुर को चूसने लगे. मौसी ने भी उनका सिर अपनी जांघों में कैद कर लिया और खिलखिलाती हुई चुत चुसवाने लगी.
जब तक उन्हों ने मौसी की चूत खाली की, मौसी एक बार और झड चुकी थी. तैश में आये मौसाजी अब मौसी पर चढ़ कर उसे चोदने लगे. उनकी इस रति क्रीडा को देखकर मैं धीरे धीरे फ़िर मस्ती में आ गया. मेरा लंड खड़ा देखकर अंकल बोले." यह लड़का तो बडा काम का है प्रिया, देख कैसा खड़ा है इसका दो बार झड कर भी. विजय, तू मौसी की गांड मार ले, दोनों एक साथ इस चुदैल को सेन्डविच बना कर आगे पीछे से चोदते हैं."
मौसी के चूत में अपना लंड वैसा ही घुसाये रखकर पलट कर वे नीचे हो गये और मौसी को ऊपर कर दिया. मौसी के मोटे गोरे चूतड मेरे सामने थे. अंकल ने मेरी आसानी के लिये अपनी पत्नी के चूतड पकड़ कर फ़ैलाये और मैंने एक की वार में घच्च से पूरा लंड मौसी की गांड में उतार दिया. अब मैं ऊपर से मौसी की गांड मारने लगा और मौसाजी उसे नीचे से ही धक्के दे दे कर चोदने लगे. मौसी को तो इस दोहरी चुदाई में ऐसा मजा आया कि वह सिसकारियाँ भरने लगी. चूत और गांड के बीच की बारीक दीवार में से हम दोनों को एक दूसरे के लंडों का दबाव ऐसा महसूस हो रहा था जैसे बीच में कुछ न हो.
"विजय बेटे, मौसी की गांड मस्त हो कर मारो, पर झडना मत जब तक मैं न कहूँ, दोनों एक साथ झड़ेंगे" अंकल बोले. अब हम दोनों अपनी पूरी ताकत से मौसी के दोनों छेद चोदने लगे. बार बार पलट कर कभी मौसाजी नीचे होते कभी मैं. इससे बारी बारी से हम दोनों को ऊपर चढ़ कर कस कर ठुकाई करने का मौका मिलता. बीस मिनिट हमने इसी तरह मौसी को भोगा और वह तीन बार झड़ी. अब तो वह मस्ती में किसी नई नवेली दुल्हन जैसे चिल्ला रही थी." ऊऽई माँऽ, मर गईऽऽ, हाऽय रेऽ, मार डाऽलाऽ रे दोनों ने मिलकर, अरे हरामियो, दया करो, क्या फ़ाड दोगे मेरे दोनों छेद!"
आखिर जब मैं ऊपर था तब मौसाजी ने इशारा किया और मैंने उछल उछल कर मौसी की गांड बेतहाशा चोद डाली और झड गया. पलट कर अब मैं नीचे हो गया और मौसाजी ऊपर से चोदने लगे. मौसी ने अब अपनी एक उंगली मौसाजी के गुदा में घुसेड़ दी और इसके साथ ही मौसाजी इतनी जोर से झड़े कि चिल्ला उठे.
कुछ देर पड़े पड़े हम तीनों इस सुख का आनंद लेते रहे. फ़िर रस चूसने का एक और कार्यक्रम हुआ. मैंने मौसी की चूत चूसी और उसमें से मौसी के बुर के पानी और अंकल के वीर्य का मिश्रण पिया. मौसाजी ने अपनी पत्नी की गांड चूस कर उसमें से मेरे वीर्य का पान किया. अब हम तीनों थक गये थे और बिलकुल तृप्त भी हो गये थे. तीनों लिपट कर सो गये. ऐसी गहरी नींद लगी कि पता ही नहीं चला कि कब सबेरा हुआ.
मेरी नींद बहुत देर से खुली. मौसी और मौसाजी के हंसने और बोलने की आवाज बाथरूम से आ रही थी. मुझे लगा कि शायद नहा रहे होंगे पर कुछ देर बाद दोनों बिलकुल नंगे बाहर आये तो बिना नहाये. मुझे अचरज लगा कि वे अंदर क्या कर रहे थे. कल भी मौसाजी वापस आने के बाद मौसी को लेकर बाथरूम में चले गये थे. दोनों काफ़ी देर एक साथ बाथरूम में थे. वे वहाँ क्या करते हैं, इस रहस्य का पता मुझे काफ़ी देर बाद चला.
चाय पीकर हम तीनों एक साथ नहाने गये.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाझडने के बाद देखा तो मौसी सो गई थी और खर्राटे ले रही थी. पर मैंने और मजा लेने की सोची और तीसरी बार हचक हचक कर रुक रुक कर घंटे भर मौसी की गांड चोदी तब जाकर मेरी वासना शांत हुई. गांड मारते हुए मैंने मौसी की चूचियाँ भी मन भर कर जैसा मेरा मन चाहा दबाई और मसली. मौसी सोती ही रही. आखिर आधी रात को मैं अपना पूरा वीर्य उसके गुदा में निकालकर फ़िर ही सोया.
--- आगे ---
मौसी के साथ गर्मी की छुट्टी में मैंने अकेले में मस्त चुदाई शुरू कर दी थी. मौसाजी तब दौरे पर थे. मैंने मौसी से पूछा कि उसके और रंजन के बारे में क्या मौसाजी को मालूम है?
उसने हाँ कहा और पूरी बात बता दी. "अरे तेरे मौसाजी भी कम नहीं हैं. दूसरे शहर में उनकी भी एक दो दोस्त है जिनके संग वह गुलछर्रे उड़ाते है. पर मैंने तेरे सिवा किसी और पुरुष से नहीं चुदवाया. हाँ रंजन जैसी गर्ल फ़्रेन्ड जरूर बना ली. असल में हम दोनों बाइ-सेक्सुअल हैं. इसीलिये हमने शादी की और एक दूसरे पर कोई बंधन नहीं रखा है. वैसे उन्हें यह भी मालूम है कि मैं तेरे साथ क्या कर रही हूँ. मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था. वे भी बोले कि हाँ घर का ही प्यारा लड़का है, मैं जो चाहे कर लूँ"
सुनकर मुझे बडा मजा आया. पर जब मौसाजी वापस आए तो मैं जरा उदास हो गया. मुझे लगा कि अब मौसी के गदराये शरीर का भोग करना मेरे नसीब में नहीं है. पर हुआ बिल्कुल उल्टा. तीन शरीरों की जुगलबंदी शुरू हो गई.
हुआ यह कि जब मौसाजी वापस आये तो उन्हों ने जरा भी जाहिर नहीं किया कि उन्ह्मे मेरे और मौसी के संबंध के बारे में मालूम है. मैं भी चुप रहा. उस रात मैं एक दूसरे कमरे में सोया. बड़ी रात तक सोने की कोशिश कर रहा था. रात को मौसी से संभोग की आदत हो जाने से मुझे अकेले नींद नहीं आ रही थी और इसलिये एक चुदाई की किताब पढ़ रहा था. मौसाजी और मौसी अपने कमरे में थे. वहाँ से हंसने खेलने की आवाजें आ रही थीं.
अंत में लंड बुरी तरह खड़ा हो गया. मैं बस बत्ती बुझा कर मुठ्ठ मार कर सोने ही वाला था कि मौसी ने मुझे आवाज दी. "विजय, अकेला क्या कर रहा है बेटा? यहाँ आ जा."
मुझे समझ में नहीं आया कि आज की रात तो मौसी अपने पति की बाँहों मैं है तो मुझे क्यों कबाब में हड्डी बनने को बुला रही है. मैंने दरवाजा खटखटाया. मौसी चिल्लाई. "आ जा बेटे, दरवाजा खुला है".
मैं अंदर आया तो देखता ही रह गया. आँखें फ़टी रह गईं और लंड और खड़ा हो गया. अजय अंकल आराम कुर्सी में बैठे थे और मौसी उनकी गोद में बैठी थी. दोनों मादरजात नंगे थे. मौसी की टांगें पसरी हुई थीं और मौसाजी का मोटा लंड मौसी के गुदा में जड तक धंसा हुआ था. मौसाजी का एक हाथ अपनी पत्नी की चूत में दो उँगलियाँ अंदर बाहर कर रहा था और दूसरे हाथ से वे मौसी के मम्मे दबा रहे थे. आपस में चूमा चाटी भी चल रही थी.
मौसी मेरी ओर देख कर बोली. "तुझे क्या लगा बेटे, तेरे को अकेले तडपते हुए छोड देंगे हम?" अंकल भी मुझे आँख मार कर बोले. "विजय, तेरी मौसी की चूत को तेरे मुंह की बहुत याद आ रही है. देख कितना रस बहा रही है तेरे लिये. तेरी मौसी भी अड़ी है, बोली चूत का रस पिलाऊँगी तो सिर्फ़ अपने प्यारे भांजे को!"
मौसी ने अपनी जांघें और फ़ैला दीं और बाँहें पसार कर मुझे पास बुलाया. "विजय, नंगा हो जा और जल्दी से मौसी की जांघों में समा जा बेटे, चूस ले अपनी मौसी की बुर. तुझे रस पिलाये बिना यह चूत ठंडी नहीं होगी."
मैंने काँपते हाथों से कपड़े उतारे और दौड कर मौसी के सामने उसकी जांघों के बीच बैठ कर मौसी की टपकती बुर में मुंह डाल दिया. मौसी की गांड का छेद मेरे मुंह से बस दो तीन इंच दूर था और मौसी का तनकर खुला गुदाद्वार और उसमें फंसा मोटा ताजा लंड देखकर मैं और उत्तेजित हो रहा था. चूत का स्वाद लेते हुए मेरी जीभ कभी कभी गांड और लंड तक पहुँच जाती थी.
मौसाजी नीचे से ही मौसी की गांड मार रहे थे और लंड गुदा में से एक दो इंच अंदर बाहर हो रहा था. मौसाजी ने अब दोनों हाथों से मौसी की चूचियाँ मसलना शुरू कर दी थीं और मैं अपनी जीभ उसके क्लिट पर रगड रहा था. मौसी ने मेरे सिर को कस कर अपनी बुर पर दबाया और हुमक कर झड गई. बाहर उबल उबल कर निकलते उस चिपचिपे पानी को मैंने चाट चाट कर साफ़ किया और फ़िर मौसी की झांटों से ढके भगोष्ठों का प्रेम से चुंबन लेने लगा.
बुर चटवाकर मौसी ने मुझे ऊपर खींच कर अपने सामने खड़ा कर लिया. मेरा खड़ा लंड बिलकुल मौसी के चेहरे के सामने मचल रहा था. उसे पकड कर मौसी ने चूमा और फ़िर मौसाजी को दिखाया. "देखो, कितना प्यारा रसीला लंड है मेरे भांजे का. अभी पूरा जवान भी नहीं है लड़का, एकदम कमसिन है. पर मुझ पिछले दो हफ्तों में बहुत सुख दिया है इसने"
मौसाजी बोले "अरे, फ़िर इसे शुक्रिया तो जरूर कहना चाहिये"
मैं लंड में होते मीठे आनंद का मजा लेते हुए सांस लेने को पलंग पर बैठ गया. मौसाजी गरमा गये थे. मौसी को बोले. "चल प्रिया रानी, पलंग पर लेट जा, तेरी गांड मारूँगा अब."
मौसी को कमर से पकड़ कर वैसे ही लंड गांड में घुसाये हुए उन्हों ने उठाया और लाकर पलंग पर पटक दिया. मौसी ने सरककर प्यार से अपना सिर मेरी गोद में रख दिया और मेरे लंड का चुंबन लेने लगी. उधर मौसाजी अब तक मौसी पर चढ़कर उसकी गांड मारने में जुट गये थे. ऐसी जोरदार गांड चोदने की क्रिया मैंने पहली बार देखी थी. मौसाजी का कडा मोटा लंड मौसी की कोमल गांड के छेद को चौडा करता हुआ सटासट अंदर बाहर हो रहा था.
जब लंड बाहर निकलता तो उस की साइज़ देखकर मैं हैरान रह जाता कि आखिर कैसे मौसी इतने बड़े लंड को अंदर लेती है. मौसी धीरे धीरे कराह रही थी और मुझे लगा कि उसे दर्द हो रहा होगा पर उसके चेहरे पर तो बड़े तृप्त भाव थे. अब मैं समझ गया कि पहली बार जब मैंने मौसी की गांड मारी थी तो कैसे मेरा लंड आराम से मौसी की गांड में चला गया था. मौसाजी का हलब्बी लंड लेने के बाद मेरा कमसिन लंड तो उसके लिये बच्चों का खेल था.
मौसी ने अब तक मेरे लंड को चूम चूम कर फ़िर खड़ा कर दिया था. गांड मरवाते हुए पूरा लंड मुंह में लेकर वह आराम से चूस रही थी. मौसाजी अब झडने के करीब आ गये थे और तैश में आकर गंदी गंदी बातें कहते हुए पूरे जोर से मौसी की गांड मार रहे थे. "तेरी गांड मारूँ मेरी चुदैल रानी, तेरे मस्त मोटे चूतड़ों को चोदूँ. साली चुदैल, रंडी, क्या गांड है तेरी मेरी जान!"
मौसाजी पूरे जोर से हचक हचक कर मौसी की गांड मारने लगे. मैं भी उचक उचक कर नीचे से ही मौसी के मुंह को चोदने की कोशिश करने लगा. उधर मौसाजी ने चार पाँच करारे धक्के लगाये और झड गये. उनकी गरम गरम सांसें जोर जोर से चल रही थीं.
आखिर तृप्त होकर मौसाजी धीरे से मुस्कराते हुए मौसी पर लेट गये और सुस्ताने लगे. मैं अब बहुत उत्तेजित था और किसी भी तरह संभोग करना चाहता था. बहुत देर से मौसी की चूत चूसने की भी मुझे तीव्र इच्छा हो रही थी. मौसी को मैंने कहा कि पलट कर सीधी हो जाए जिससे मैं उसकी चूत चूस सकूँ. मौसी मुस्कराकर बोली. "विजय, मेरी बुर का पानी बहुत पिया है, आज मेरी गांड चूस कर देख ले”
यह कल्पना ही इतनी मादक थी कि मैं तुरंत मौसी के चूतड़ों पर लपक पड़ा और गांड पर मुंह लगाकर चूसने लगा. मौसी की गांड का स्वाद का क्या कहना. मैं चूस चूस कर चटकारे लगाने लगा. मौसाजी ने अपनी पत्नी के चूतड फ़ैला कर रखे जिससे मैं आसानी से माल चूस सकूँ. वे बोले. "बडा प्यारा और चिकना लड़का है. उसका लंड कैसा तन्ना कर खड़ा है देख"
अंत में मैंने जीभ अंदर डाल कर पूरी गांड के छेद को चाट लिया. मौसी हंस कर उठ बैठी. "बहुत हो गया बेटे, अब कुछ नहीं बचा मेरी गांड के अंदर" अपनी टांगें फ़ैला कर वह लेट गयी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया."चल अब चोद मुझे जल्दी से."
मैं हचक हचक कर प्रिया मौसी को चोदने लगा. मौसाजी ने सिरहाने बैठकर अपना लंड मौसी के मुंह पर दे दिया और वह उसे अपने गालों और आँखों पर प्यार से रगडने लगी. लंड मेरे ठीक सामने था और इतने पास से मैंने पहली बार उसे ठीक से देखा. करीब सात इंच लम्बा बड़े गाजर जैसा मोटा गोरा लंड और उस पर लाल लाल टमाटर जैसा सुपाडा!!
मौसाजी अब जोश में थे और मौसी की चूत चूसने को अधीर थे. अब वह मौसी की बुर को चूसने लगे. मौसी ने भी उनका सिर अपनी जांघों में कैद कर लिया और खिलखिलाती हुई चुत चुसवाने लगी.
जब तक उन्हों ने मौसी की चूत खाली की, मौसी एक बार और झड चुकी थी. तैश में आये मौसाजी अब मौसी पर चढ़ कर उसे चोदने लगे. उनकी इस रति क्रीडा को देखकर मैं धीरे धीरे फ़िर मस्ती में आ गया. मेरा लंड खड़ा देखकर अंकल बोले." यह लड़का तो बडा काम का है प्रिया, देख कैसा खड़ा है इसका दो बार झड कर भी. विजय, तू मौसी की गांड मार ले, दोनों एक साथ इस चुदैल को सेन्डविच बना कर आगे पीछे से चोदते हैं."
मौसी के चूत में अपना लंड वैसा ही घुसाये रखकर पलट कर वे नीचे हो गये और मौसी को ऊपर कर दिया. मौसी के मोटे गोरे चूतड मेरे सामने थे. अंकल ने मेरी आसानी के लिये अपनी पत्नी के चूतड पकड़ कर फ़ैलाये और मैंने एक की वार में घच्च से पूरा लंड मौसी की गांड में उतार दिया. अब मैं ऊपर से मौसी की गांड मारने लगा और मौसाजी उसे नीचे से ही धक्के दे दे कर चोदने लगे. मौसी को तो इस दोहरी चुदाई में ऐसा मजा आया कि वह सिसकारियाँ भरने लगी. चूत और गांड के बीच की बारीक दीवार में से हम दोनों को एक दूसरे के लंडों का दबाव ऐसा महसूस हो रहा था जैसे बीच में कुछ न हो.
"विजय बेटे, मौसी की गांड मस्त हो कर मारो, पर झडना मत जब तक मैं न कहूँ, दोनों एक साथ झड़ेंगे" अंकल बोले. अब हम दोनों अपनी पूरी ताकत से मौसी के दोनों छेद चोदने लगे. बार बार पलट कर कभी मौसाजी नीचे होते कभी मैं. इससे बारी बारी से हम दोनों को ऊपर चढ़ कर कस कर ठुकाई करने का मौका मिलता. बीस मिनिट हमने इसी तरह मौसी को भोगा और वह तीन बार झड़ी. अब तो वह मस्ती में किसी नई नवेली दुल्हन जैसे चिल्ला रही थी." ऊऽई माँऽ, मर गईऽऽ, हाऽय रेऽ, मार डाऽलाऽ रे दोनों ने मिलकर, अरे हरामियो, दया करो, क्या फ़ाड दोगे मेरे दोनों छेद!"
आखिर जब मैं ऊपर था तब मौसाजी ने इशारा किया और मैंने उछल उछल कर मौसी की गांड बेतहाशा चोद डाली और झड गया. पलट कर अब मैं नीचे हो गया और मौसाजी ऊपर से चोदने लगे. मौसी ने अब अपनी एक उंगली मौसाजी के गुदा में घुसेड़ दी और इसके साथ ही मौसाजी इतनी जोर से झड़े कि चिल्ला उठे.
कुछ देर पड़े पड़े हम तीनों इस सुख का आनंद लेते रहे. फ़िर रस चूसने का एक और कार्यक्रम हुआ. मैंने मौसी की चूत चूसी और उसमें से मौसी के बुर के पानी और अंकल के वीर्य का मिश्रण पिया. मौसाजी ने अपनी पत्नी की गांड चूस कर उसमें से मेरे वीर्य का पान किया. अब हम तीनों थक गये थे और बिलकुल तृप्त भी हो गये थे. तीनों लिपट कर सो गये. ऐसी गहरी नींद लगी कि पता ही नहीं चला कि कब सबेरा हुआ.
मेरी नींद बहुत देर से खुली. मौसी और मौसाजी के हंसने और बोलने की आवाज बाथरूम से आ रही थी. मुझे लगा कि शायद नहा रहे होंगे पर कुछ देर बाद दोनों बिलकुल नंगे बाहर आये तो बिना नहाये. मुझे अचरज लगा कि वे अंदर क्या कर रहे थे. कल भी मौसाजी वापस आने के बाद मौसी को लेकर बाथरूम में चले गये थे. दोनों काफ़ी देर एक साथ बाथरूम में थे. वे वहाँ क्या करते हैं, इस रहस्य का पता मुझे काफ़ी देर बाद चला.
चाय पीकर हम तीनों एक साथ नहाने गये.
मेरी नींद बहुत देर से खुली. मौसी और मौसाजी के हंसने और बोलने की आवाज बाथरूम से आ रही थी. मुझे लगा कि शायद नहा रहे होंगे पर कुछ देर बाद दोनों बिलकुल नंगे बाहर आये तो बिना नहाये. मुझे अचरज लगा कि वे अंदर क्या कर रहे थे. कल भी मौसाजी वापस आने के बाद मौसी को लेकर बाथरूम में चले गये थे. दोनों काफ़ी देर एक साथ बाथरूम में थे. वे वहाँ क्या करते हैं, इस रहस्य का पता मुझे काफ़ी देर बाद चला.
चाय पीकर हम तीनों एक साथ नहाने गये.
नहाने के बाद हमने नंगे ही नाश्ता किया. उसके बाद हमने मौसी को सोफ़े पर लिटा दिया और बारी बारी से उसकी चूत चूसकर उन्हे दो बार झडा दिया.
मौसाजी को काम पर जाना था इसलिये रति यहीं रोक दी गयी. उन्होंने मुझे सूचित किया की आज का पूरा दिन में चुदाई ना करूँ। उन्हों ने यह भी कहा कि मैं आज कपड़े पहना रहूँ ताकि मेरे लंड को पूरा आराम मिले. जब मौसी इस बात पर चिढ़कर चिल्लाने लगी तो अंकल उसे चूमते हुए मुस्कराकर बोले. "मेरी रानी, तुझे कोई तकलीफ़ नहीं होगी, तेरा प्यारा भाँजा तो दिन भर तेरी चूत चूस सकता है. तू मजा कर, वैसे भी तेरी बुर में इतना रस है कि चाहे जितना पियो, खतम नहीं होता."
मौसी का प्यार से चुंबन लेकर मौसाजी काम पर निकल गये. काफ़ी दिन बाद मैं घर में दिन भर कपड़े पहन कर रहा. एक तंग पेन्ट मैंने पहनी थी कि लंड दबा रहे. मौसी ने भी साड़ी और ब्लाउज़ पहन लिया, ब्रा और पेन्टी छोड दी. इससे उसकी चूत और चूचियाँ मेरे लिये हमेशा खुले थे. दिन भर मैंने कई बार उसकी बुर चूसी और मम्मे दबाकर निप्पल चूसे.
दोपहर को हम सो गये क्यों की जाते जाते अंकल यह कह गये थे कि हम खूब आराम कर ले जिससे रात को ताजे दम से रति की जा सके. हम इतनी गाढ़ी नींद सोये कि जब हम उठे तो रात हो चुकी थी. देखा कि अंकल भी सोफ़े पर सो रहे थे. काम से जल्दी आकर उन्हों ने भी एक गहरी नींद ले ली थी. खाना खाने हम बाहर गये जिससे आकर बस अपना काम शुरू किया जा सके. वापस आकर हमने साथ साथ स्नान किया
शुरू में तो मौसी और अंकल सोफ़े पर मुझे बच्चे जैसे गोद में लेकर बैठ गये और मुझे खिलाने लगे. मुझसे तो वे ऐसे खेल रहे थे जैसे मैं कोई गुड्डा हूँ. मौसी मेरे लंड को हथेली में लकर मुठिया रही थी फ़िर मौसी मेरा चुंबन लेने लगी
अब मौसाजी मौसाजी ने तुरंत उसे पकड कर उसकी जांघें खोली और उसकी बुर चूसने लगे. मौसी चुदवाना चाहती थी. "डार्लिंग, इतना मस्त खड़ा है तुम्हारा लंड, जरा चोद तो दो." अंकल नहीं माने और चूत चूसते रहे. "सब्र कर, चूत चुसवा ले पहले."
मौसी मान गयी और मौसाजी के मुंह पर बैठ कर अपनी बुर चुसवाने लगी. जब मौसी उनके मुंह पर बैठ कर चोद रही थी और मौसाजी चूतरस पी रहे थे तब उनका लौडा एकदम तन कर खड़ा हो कर हवा में हिल रहा था.
मौसी आखिर झड़ी और लस्त होकर उनके मुंह पर बैठी रही. में अपना तन्नाया लंड मुठ्ठी में लेकर उन दोनों को देखता रहा... मौसी अब धीरे से मौसाजी के मुंह से उतर गई और टांगें फैलाकर मुझे न्योता देने लगी... मैंने आव देखा न ताव... योनि रस से लसलसित मार्गे में पुचुक की आवाज के साथ मेरा लंड मौसी की चुत में घुस गया... में उनकी निप्पलों को बारी बारी चूसते हुए धनाधन धक्के लगाने लगा... मौसी की चुत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को अंदर से निचोड़ते हुए पकड़ रखा था... ऐसी स्थिति में मेरा ओर टीक पाना संभव न था... में कराहते हुए उनकी चुत के अंदर झड़ गया... हांफते हुए मैंने लंड बाहर निकाला और उनके बगल में लेट गया। थका होने से मेरी आँख लग गयी. सोते सोते मुझे याद है कि अब मौसाजी मौसी पर चढ़ कर उसे चोद रहे थे.
सुबह जब मैं उठा तो सूरज काफ़ी ऊपर आ गया था. मौसाजी उठ कर जा चुके थे, बिस्तर में मैं और मौसी ही थे. उनकी नींद पहले ही खुल गयी थी और वे मुझे बाँहों में लेकर चूम रही थी और मेरा शिश्न रगड कर उसे खड़ा कर रही थी. उनकी निप्पल तनकर खड़ी हो गई थी. बडा अच्छा लग रहा था और उनके चूमने के जवाब में मैं भी उनकी चुम्मी लेने लगा. पलट कर वे उलटी बाजू से सो गई और सिक्सटी नाइन का पोज़ बना लिया. चूसते हुए उनकी जीभ मेरे लंड को पागल कर रही थी. मैंने भी मुंह खोल कर जितना हो सकता था, उतना चुत के अंदर जीभ घुसेड़कर चूसने लगा.
मेरा लंड मस्त होकर खड़ा था और मौसी के चूसने के बाद करीब करीब कल रात जितना ही बडा हो गया था. आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेकर चूसने में मौसी को बडा मजा आ रहा था. अब उन्हों ने जरा गर्दन लम्बी की और मेरी जांघों के बीच सिर डाल कर मेरी गांड को चाटने लगी। उनकी तपती गीली जीभ मेरी गांड में घुसी और मैं आनंद से हुमक उठा. मौसी पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था. मुझे यही लगा कि शायद अब हम एक दूसरे का शरीर का रस पी कर ही उठेंगे। प्यार के अलावा मौसी के दिमाग पर वासना का शैतान भी सवार था.
सहसा मुझे सीधा लिटा कर वे मुझ पर चढ़ बैठी. मेरी समझ में आने के पहले ही उन्हों ने मेरा सुपाड़ा अपनी चुत के होंठों के बीच रखा और अपने शरीर का पूरा वज़न डाल दिया. उनकी चुत मेरी लार से पहले ही काफी चिपचिपी थी, इसलिये मेरा सुपाडा सट करके उनकी चुत में घुस गया. अब मौसी पागलों की तरह उछल उछल कर मेरे लँड पर इतनी जोर से कूदने लगी की उत्तेजित होने के बावजूद मेरे लंड में दर्द होने लगा... में चीखते हुए उन्हे रुकने के लिए कहने लगा पर उन्होंने मेरी एक न सुनी...
मौसाजी ने हल्ला सुना तो देखने को आए कि क्या गडबड चल रही है. मैंने चिल्लाते हुए उससे मौसाजी को शिकायत की. "मौसाजी, मौसी को जरा डाँटिए ना, देखो मना कर रहा हूँ फिर भी लंड पर कूदती जा रही है, बहुत दर्द हो रहा है मौसी, मैं मर जाऊंगा. "
मौसाजी ने अपने पत्नी का ही साथ दिया. वासना से भरी उनकी आँखों को चूम कर वह मेरे पास बैठ गए. वह पूरे नग्न थे. "कूदने दे बेटे, इतना चिकना लंड जब मिली है तो पूरा मजा लेंगी ही. मजे करने की चीज़ है तो मजे तो करेंगी ही ना!! चल में इसे ठंडा करने में तेरी मदद करता हूँ..” उन्होंने बैठे बैठे मौसी की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और मौसी से कहा. “पूरा मजा वसूल करना मेरी रानी. इतना मस्त छोकरा है, चुदवाकर अपनी चुत को ठंडी कर ले."
रोते बच्चों को चुप कराने के लिये जैसे औरतें करती हैं वैसे मौसी ने झुक कर मेरे मुंह में अपनी एक निप्पल दे दी ताकि मैं शांत हो जाऊँ. अब वह थोड़ा धीरे धीरे कूद रही थी इसलिए मेरा दर्द भी कम हो गया था और मुझे मजा आने लगा था. रोना बंद करके अब मैं अपने चूतड उछाल कर और जोर से मौसी की चुत मारने की कोशिश कर रहा था.
मौसाजी मेरे इस उतावलेपन पर लाड से हंसने लगे. "देख रानी, अभी तक रो रहा था बदमाश, अब कैसा मस्ती से चोद रहा है, अपने चूतड उछाल उछाल के. डार्लिंग, आज तो मैं छुट्टी ले लेता हूँ, दिन भर हम तीनों चुदाई करेंगे."
पंद्रह मिनिट तक यूं उछलने के बाद वे झड़ी और बिस्तर पर ढेर हो गई.
थोड़ी देर आराम करने के बाद मौसी ने कहा कि सब अब नहाने को चले. हम तीनों मिलकर गरम शावर लेने लगे।
मौसी अब झुक कर टब का किनारा पकड कर खड़ी हो गई. उसे कुतिया स्टाइल में चुदाना था. अंकल ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी बुर में लंड डाला और चोदने लगे. उसे उन्हों ने आधे घंटे तक चोदा और तीन चार बार झडा कर खुश कर दिया. सारे समय मैं मौसी के सामने खड़ा था और वह मेरा लंड चूस रही थी. अंकल के कहने पर मैंने उसके लटकते स्तन भी खूब दबाये. वे अंकल के झटकों से पेंडुलम जैसे हिल रहे थे.
मैं इतना उत्तेजित था कि वासना से सिसकने लगा. "मौसी, चूस ले मेरा लंड, प्लीज़, मुझसे नहीं रहा जाता." मौसी के स्तन पकड़े पकड़े ही मैं ऐसा झडा कि किलकारिया मारने लगा.
मौसी ने मन लगाकर मेरा वीर्य पान किया और इस बीच अंकल ने उसे एक बार और चोद डाला और अपना लंड बाहर निकालकर मौसी की गोल चूतड़ों पर लंड की पिचकारी दे मारी... . हम तीनों को फिर से शावर लेना पड़ा।
नहाने के बाद हम नाश्ते पर बैठे. नाश्ता खतम करके हम ड्रॉइंग रूम में गये. मुझे बाँहों में लेकर चूमते हुए वे दोनों सलाह मशवरा करने लगे कि मेरे साथ अब क्या किया जाये, जैसे मैं कोई जिंदा किशोर नहीं, उनका खिलौना हूँ जिससे चाहे जैसे खेला जा सकता है. आखिर मौसी मेरी तरफ़ दुष्ट निगाह से देखती हुई बोली. "उस दिन वीडीओ पर देखा था वही ब्लू फिल्म देखते है."
मौसाजी ने तुरंत वह वीडीओ लगाई और हम साथ बैठ कर मजा लेने लगे. फ़िल्म बिलकुल हमारी रति जैसी ही थी, फ़रक इतना था कि एक लडके के बजाय एक उन्नीस साल की लड़की अपने डैडी के साथ मजे ले रही थी. वह एक परिवार प्यार या इन्सेस्ट की कथा थी और उसमें पति-पत्नी मिलकर अपनी ही जवान किशोर बेटी को भोग रहे थे.
मौसी की चूत अब ऐसे पसीज रही थी कि पानी बाहर बहने लगा था. फ़िल्म का का सीन खतम होने पर वह हमारे सामने खड़ी हो गयी और मेरा सिर खींच कर अपनी झांटों में मेरा मुंह दबा दिया. मुझे उसने आदेश दिया कि उसकी बुर चुसूँ और वह बड़ी खुशी से मैंने किया. मेरे मुंह को वह चोदने लगी और मौसाजी उसके मम्मे दबाने लगे.
उधर पिक्चर में उस किशोरी की अम्मा आखरी सीन में अपनी बेटी से चूत चुसवा रही थी और उसके डैडी कुतिया स्टाइल मे उसकी गांड मार रहे थे. पिक्चर खतम होने तक मौसाजी ने धीरज रखा. फ़िर खिसक कर मौसी को लिये वे फ़र्श पर आ गये जहाँ पहले ही प्रिया मौसी ने इस काम के लिये एक गद्दी बिछा रखी थी. मौसी को गद्दी पर लिटाकर वे उस पर चढ़ गये और बेतहाशा उसकी चुत को चोदने लगे.
उनका लौडा अब बड़ी आसानी से उसकी मख्खन सी चिकनी और फ़ुकला हुई चुत में अंदर बाहर हो रहा था. उस मोटे लंड और सूजे सुपाड़े के घर्षण से उन्हे असहनीय सुख मिल रहा था. मेंने अपना लंड मौसी के मुंह में दे दिया और वह बड़े मजे से मेरे सुपाड़े को चूसने लगी।
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थोड़ी देर में मौसा जी झड़कर सोफ़े पर बैठ गए और अब मेरी बारी आई.. मैंने मौसी की जांघों को फैलाकर उनकी वीर्य से सनी चुत में पेल दिया... बार बार झड़ने के बावजूद मौसी की भूख कम नहीं हो रही थी... मैंने अंगूठे से उनके भगोष्ठ को रगड़ते हुए चोदना जारी रखा... कुछ ही देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए और में मौसी के दोनों स्तनों के बीच सिर रखकर लेट गया।
कुछ देर बाद सुस्ता कर जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ की हम फ़िर शुरू हो गये. दिन भर मौसी की चुदाई चलती रही. कभी में उन्हे चोदता तो कभी मौसा जी.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयामेरी नींद बहुत देर से खुली. मौसी और मौसाजी के हंसने और बोलने की आवाज बाथरूम से आ रही थी. मुझे लगा कि शायद नहा रहे होंगे पर कुछ देर बाद दोनों बिलकुल नंगे बाहर आये तो बिना नहाये. मुझे अचरज लगा कि वे अंदर क्या कर रहे थे. कल भी मौसाजी वापस आने के बाद मौसी को लेकर बाथरूम में चले गये थे. दोनों काफ़ी देर एक साथ बाथरूम में थे. वे वहाँ क्या करते हैं, इस रहस्य का पता मुझे काफ़ी देर बाद चला.
चाय पीकर हम तीनों एक साथ नहाने गये.
नहाने के बाद हमने नंगे ही नाश्ता किया. उसके बाद हमने मौसी को सोफ़े पर लिटा दिया और बारी बारी से उसकी चूत चूसकर उन्हे दो बार झडा दिया.
मौसाजी को काम पर जाना था इसलिये रति यहीं रोक दी गयी. उन्होंने मुझे सूचित किया की आज का पूरा दिन में चुदाई ना करूँ। उन्हों ने यह भी कहा कि मैं आज कपड़े पहना रहूँ ताकि मेरे लंड को पूरा आराम मिले. जब मौसी इस बात पर चिढ़कर चिल्लाने लगी तो अंकल उसे चूमते हुए मुस्कराकर बोले. "मेरी रानी, तुझे कोई तकलीफ़ नहीं होगी, तेरा प्यारा भाँजा तो दिन भर तेरी चूत चूस सकता है. तू मजा कर, वैसे भी तेरी बुर में इतना रस है कि चाहे जितना पियो, खतम नहीं होता."
मौसी का प्यार से चुंबन लेकर मौसाजी काम पर निकल गये. काफ़ी दिन बाद मैं घर में दिन भर कपड़े पहन कर रहा. एक तंग पेन्ट मैंने पहनी थी कि लंड दबा रहे. मौसी ने भी साड़ी और ब्लाउज़ पहन लिया, ब्रा और पेन्टी छोड दी. इससे उसकी चूत और चूचियाँ मेरे लिये हमेशा खुले थे. दिन भर मैंने कई बार उसकी बुर चूसी और मम्मे दबाकर निप्पल चूसे.
दोपहर को हम सो गये क्यों की जाते जाते अंकल यह कह गये थे कि हम खूब आराम कर ले जिससे रात को ताजे दम से रति की जा सके. हम इतनी गाढ़ी नींद सोये कि जब हम उठे तो रात हो चुकी थी. देखा कि अंकल भी सोफ़े पर सो रहे थे. काम से जल्दी आकर उन्हों ने भी एक गहरी नींद ले ली थी. खाना खाने हम बाहर गये जिससे आकर बस अपना काम शुरू किया जा सके. वापस आकर हमने साथ साथ स्नान किया
शुरू में तो मौसी और अंकल सोफ़े पर मुझे बच्चे जैसे गोद में लेकर बैठ गये और मुझे खिलाने लगे. मुझसे तो वे ऐसे खेल रहे थे जैसे मैं कोई गुड्डा हूँ. मौसी मेरे लंड को हथेली में लकर मुठिया रही थी फ़िर मौसी मेरा चुंबन लेने लगी
अब मौसाजी मौसाजी ने तुरंत उसे पकड कर उसकी जांघें खोली और उसकी बुर चूसने लगे. मौसी चुदवाना चाहती थी. "डार्लिंग, इतना मस्त खड़ा है तुम्हारा लंड, जरा चोद तो दो." अंकल नहीं माने और चूत चूसते रहे. "सब्र कर, चूत चुसवा ले पहले."
मौसी मान गयी और मौसाजी के मुंह पर बैठ कर अपनी बुर चुसवाने लगी. जब मौसी उनके मुंह पर बैठ कर चोद रही थी और मौसाजी चूतरस पी रहे थे तब उनका लौडा एकदम तन कर खड़ा हो कर हवा में हिल रहा था.
मौसी आखिर झड़ी और लस्त होकर उनके मुंह पर बैठी रही. में अपना तन्नाया लंड मुठ्ठी में लेकर उन दोनों को देखता रहा... मौसी अब धीरे से मौसाजी के मुंह से उतर गई और टांगें फैलाकर मुझे न्योता देने लगी... मैंने आव देखा न ताव... योनि रस से लसलसित मार्गे में पुचुक की आवाज के साथ मेरा लंड मौसी की चुत में घुस गया... में उनकी निप्पलों को बारी बारी चूसते हुए धनाधन धक्के लगाने लगा... मौसी की चुत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को अंदर से निचोड़ते हुए पकड़ रखा था... ऐसी स्थिति में मेरा ओर टीक पाना संभव न था... में कराहते हुए उनकी चुत के अंदर झड़ गया... हांफते हुए मैंने लंड बाहर निकाला और उनके बगल में लेट गया। थका होने से मेरी आँख लग गयी. सोते सोते मुझे याद है कि अब मौसाजी मौसी पर चढ़ कर उसे चोद रहे थे.
सुबह जब मैं उठा तो सूरज काफ़ी ऊपर आ गया था. मौसाजी उठ कर जा चुके थे, बिस्तर में मैं और मौसी ही थे. उनकी नींद पहले ही खुल गयी थी और वे मुझे बाँहों में लेकर चूम रही थी और मेरा शिश्न रगड कर उसे खड़ा कर रही थी. उनकी निप्पल तनकर खड़ी हो गई थी. बडा अच्छा लग रहा था और उनके चूमने के जवाब में मैं भी उनकी चुम्मी लेने लगा. पलट कर वे उलटी बाजू से सो गई और सिक्सटी नाइन का पोज़ बना लिया. चूसते हुए उनकी जीभ मेरे लंड को पागल कर रही थी. मैंने भी मुंह खोल कर जितना हो सकता था, उतना चुत के अंदर जीभ घुसेड़कर चूसने लगा.
मेरा लंड मस्त होकर खड़ा था और मौसी के चूसने के बाद करीब करीब कल रात जितना ही बडा हो गया था. आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेकर चूसने में मौसी को बडा मजा आ रहा था. अब उन्हों ने जरा गर्दन लम्बी की और मेरी जांघों के बीच सिर डाल कर मेरी गांड को चाटने लगी। उनकी तपती गीली जीभ मेरी गांड में घुसी और मैं आनंद से हुमक उठा. मौसी पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था. मुझे यही लगा कि शायद अब हम एक दूसरे का शरीर का रस पी कर ही उठेंगे। प्यार के अलावा मौसी के दिमाग पर वासना का शैतान भी सवार था.
सहसा मुझे सीधा लिटा कर वे मुझ पर चढ़ बैठी. मेरी समझ में आने के पहले ही उन्हों ने मेरा सुपाड़ा अपनी चुत के होंठों के बीच रखा और अपने शरीर का पूरा वज़न डाल दिया. उनकी चुत मेरी लार से पहले ही काफी चिपचिपी थी, इसलिये मेरा सुपाडा सट करके उनकी चुत में घुस गया. अब मौसी पागलों की तरह उछल उछल कर मेरे लँड पर इतनी जोर से कूदने लगी की उत्तेजित होने के बावजूद मेरे लंड में दर्द होने लगा... में चीखते हुए उन्हे रुकने के लिए कहने लगा पर उन्होंने मेरी एक न सुनी...
मौसाजी ने हल्ला सुना तो देखने को आए कि क्या गडबड चल रही है. मैंने चिल्लाते हुए उससे मौसाजी को शिकायत की. "मौसाजी, मौसी को जरा डाँटिए ना, देखो मना कर रहा हूँ फिर भी लंड पर कूदती जा रही है, बहुत दर्द हो रहा है मौसी, मैं मर जाऊंगा. "
मौसाजी ने अपने पत्नी का ही साथ दिया. वासना से भरी उनकी आँखों को चूम कर वह मेरे पास बैठ गए. वह पूरे नग्न थे. "कूदने दे बेटे, इतना चिकना लंड जब मिली है तो पूरा मजा लेंगी ही. मजे करने की चीज़ है तो मजे तो करेंगी ही ना!! चल में इसे ठंडा करने में तेरी मदद करता हूँ..” उन्होंने बैठे बैठे मौसी की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और मौसी से कहा. “पूरा मजा वसूल करना मेरी रानी. इतना मस्त छोकरा है, चुदवाकर अपनी चुत को ठंडी कर ले."
रोते बच्चों को चुप कराने के लिये जैसे औरतें करती हैं वैसे मौसी ने झुक कर मेरे मुंह में अपनी एक निप्पल दे दी ताकि मैं शांत हो जाऊँ. अब वह थोड़ा धीरे धीरे कूद रही थी इसलिए मेरा दर्द भी कम हो गया था और मुझे मजा आने लगा था. रोना बंद करके अब मैं अपने चूतड उछाल कर और जोर से मौसी की चुत मारने की कोशिश कर रहा था.
मौसाजी मेरे इस उतावलेपन पर लाड से हंसने लगे. "देख रानी, अभी तक रो रहा था बदमाश, अब कैसा मस्ती से चोद रहा है, अपने चूतड उछाल उछाल के. डार्लिंग, आज तो मैं छुट्टी ले लेता हूँ, दिन भर हम तीनों चुदाई करेंगे."
पंद्रह मिनिट तक यूं उछलने के बाद वे झड़ी और बिस्तर पर ढेर हो गई.
थोड़ी देर आराम करने के बाद मौसी ने कहा कि सब अब नहाने को चले. हम तीनों मिलकर गरम शावर लेने लगे।
मौसी अब झुक कर टब का किनारा पकड कर खड़ी हो गई. उसे कुतिया स्टाइल में चुदाना था. अंकल ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी बुर में लंड डाला और चोदने लगे. उसे उन्हों ने आधे घंटे तक चोदा और तीन चार बार झडा कर खुश कर दिया. सारे समय मैं मौसी के सामने खड़ा था और वह मेरा लंड चूस रही थी. अंकल के कहने पर मैंने उसके लटकते स्तन भी खूब दबाये. वे अंकल के झटकों से पेंडुलम जैसे हिल रहे थे.
मैं इतना उत्तेजित था कि वासना से सिसकने लगा. "मौसी, चूस ले मेरा लंड, प्लीज़, मुझसे नहीं रहा जाता." मौसी के स्तन पकड़े पकड़े ही मैं ऐसा झडा कि किलकारिया मारने लगा.
मौसी ने मन लगाकर मेरा वीर्य पान किया और इस बीच अंकल ने उसे एक बार और चोद डाला और अपना लंड बाहर निकालकर मौसी की गोल चूतड़ों पर लंड की पिचकारी दे मारी... . हम तीनों को फिर से शावर लेना पड़ा।
नहाने के बाद हम नाश्ते पर बैठे. नाश्ता खतम करके हम ड्रॉइंग रूम में गये. मुझे बाँहों में लेकर चूमते हुए वे दोनों सलाह मशवरा करने लगे कि मेरे साथ अब क्या किया जाये, जैसे मैं कोई जिंदा किशोर नहीं, उनका खिलौना हूँ जिससे चाहे जैसे खेला जा सकता है. आखिर मौसी मेरी तरफ़ दुष्ट निगाह से देखती हुई बोली. "उस दिन वीडीओ पर देखा था वही ब्लू फिल्म देखते है."
मौसाजी ने तुरंत वह वीडीओ लगाई और हम साथ बैठ कर मजा लेने लगे. फ़िल्म बिलकुल हमारी रति जैसी ही थी, फ़रक इतना था कि एक लडके के बजाय एक उन्नीस साल की लड़की अपने डैडी के साथ मजे ले रही थी. वह एक परिवार प्यार या इन्सेस्ट की कथा थी और उसमें पति-पत्नी मिलकर अपनी ही जवान किशोर बेटी को भोग रहे थे.
मौसी की चूत अब ऐसे पसीज रही थी कि पानी बाहर बहने लगा था. फ़िल्म का का सीन खतम होने पर वह हमारे सामने खड़ी हो गयी और मेरा सिर खींच कर अपनी झांटों में मेरा मुंह दबा दिया. मुझे उसने आदेश दिया कि उसकी बुर चुसूँ और वह बड़ी खुशी से मैंने किया. मेरे मुंह को वह चोदने लगी और मौसाजी उसके मम्मे दबाने लगे.
उधर पिक्चर में उस किशोरी की अम्मा आखरी सीन में अपनी बेटी से चूत चुसवा रही थी और उसके डैडी कुतिया स्टाइल मे उसकी गांड मार रहे थे. पिक्चर खतम होने तक मौसाजी ने धीरज रखा. फ़िर खिसक कर मौसी को लिये वे फ़र्श पर आ गये जहाँ पहले ही प्रिया मौसी ने इस काम के लिये एक गद्दी बिछा रखी थी. मौसी को गद्दी पर लिटाकर वे उस पर चढ़ गये और बेतहाशा उसकी चुत को चोदने लगे.
उनका लौडा अब बड़ी आसानी से उसकी मख्खन सी चिकनी और फ़ुकला हुई चुत में अंदर बाहर हो रहा था. उस मोटे लंड और सूजे सुपाड़े के घर्षण से उन्हे असहनीय सुख मिल रहा था. मेंने अपना लंड मौसी के मुंह में दे दिया और वह बड़े मजे से मेरे सुपाड़े को चूसने लगी।
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थोड़ी देर में मौसा जी झड़कर सोफ़े पर बैठ गए और अब मेरी बारी आई.. मैंने मौसी की जांघों को फैलाकर उनकी वीर्य से सनी चुत में पेल दिया... बार बार झड़ने के बावजूद मौसी की भूख कम नहीं हो रही थी... मैंने अंगूठे से उनके भगोष्ठ को रगड़ते हुए चोदना जारी रखा... कुछ ही देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए और में मौसी के दोनों स्तनों के बीच सिर रखकर लेट गया।
कुछ देर बाद सुस्ता कर जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ की हम फ़िर शुरू हो गये. दिन भर मौसी की चुदाई चलती रही. कभी में उन्हे चोदता तो कभी मौसा जी.
Sexyमेरी नींद बहुत देर से खुली. मौसी और मौसाजी के हंसने और बोलने की आवाज बाथरूम से आ रही थी. मुझे लगा कि शायद नहा रहे होंगे पर कुछ देर बाद दोनों बिलकुल नंगे बाहर आये तो बिना नहाये. मुझे अचरज लगा कि वे अंदर क्या कर रहे थे. कल भी मौसाजी वापस आने के बाद मौसी को लेकर बाथरूम में चले गये थे. दोनों काफ़ी देर एक साथ बाथरूम में थे. वे वहाँ क्या करते हैं, इस रहस्य का पता मुझे काफ़ी देर बाद चला.
चाय पीकर हम तीनों एक साथ नहाने गये.
नहाने के बाद हमने नंगे ही नाश्ता किया. उसके बाद हमने मौसी को सोफ़े पर लिटा दिया और बारी बारी से उसकी चूत चूसकर उन्हे दो बार झडा दिया.
मौसाजी को काम पर जाना था इसलिये रति यहीं रोक दी गयी. उन्होंने मुझे सूचित किया की आज का पूरा दिन में चुदाई ना करूँ। उन्हों ने यह भी कहा कि मैं आज कपड़े पहना रहूँ ताकि मेरे लंड को पूरा आराम मिले. जब मौसी इस बात पर चिढ़कर चिल्लाने लगी तो अंकल उसे चूमते हुए मुस्कराकर बोले. "मेरी रानी, तुझे कोई तकलीफ़ नहीं होगी, तेरा प्यारा भाँजा तो दिन भर तेरी चूत चूस सकता है. तू मजा कर, वैसे भी तेरी बुर में इतना रस है कि चाहे जितना पियो, खतम नहीं होता."
मौसी का प्यार से चुंबन लेकर मौसाजी काम पर निकल गये. काफ़ी दिन बाद मैं घर में दिन भर कपड़े पहन कर रहा. एक तंग पेन्ट मैंने पहनी थी कि लंड दबा रहे. मौसी ने भी साड़ी और ब्लाउज़ पहन लिया, ब्रा और पेन्टी छोड दी. इससे उसकी चूत और चूचियाँ मेरे लिये हमेशा खुले थे. दिन भर मैंने कई बार उसकी बुर चूसी और मम्मे दबाकर निप्पल चूसे.
दोपहर को हम सो गये क्यों की जाते जाते अंकल यह कह गये थे कि हम खूब आराम कर ले जिससे रात को ताजे दम से रति की जा सके. हम इतनी गाढ़ी नींद सोये कि जब हम उठे तो रात हो चुकी थी. देखा कि अंकल भी सोफ़े पर सो रहे थे. काम से जल्दी आकर उन्हों ने भी एक गहरी नींद ले ली थी. खाना खाने हम बाहर गये जिससे आकर बस अपना काम शुरू किया जा सके. वापस आकर हमने साथ साथ स्नान किया
शुरू में तो मौसी और अंकल सोफ़े पर मुझे बच्चे जैसे गोद में लेकर बैठ गये और मुझे खिलाने लगे. मुझसे तो वे ऐसे खेल रहे थे जैसे मैं कोई गुड्डा हूँ. मौसी मेरे लंड को हथेली में लकर मुठिया रही थी फ़िर मौसी मेरा चुंबन लेने लगी
अब मौसाजी मौसाजी ने तुरंत उसे पकड कर उसकी जांघें खोली और उसकी बुर चूसने लगे. मौसी चुदवाना चाहती थी. "डार्लिंग, इतना मस्त खड़ा है तुम्हारा लंड, जरा चोद तो दो." अंकल नहीं माने और चूत चूसते रहे. "सब्र कर, चूत चुसवा ले पहले."
मौसी मान गयी और मौसाजी के मुंह पर बैठ कर अपनी बुर चुसवाने लगी. जब मौसी उनके मुंह पर बैठ कर चोद रही थी और मौसाजी चूतरस पी रहे थे तब उनका लौडा एकदम तन कर खड़ा हो कर हवा में हिल रहा था.
मौसी आखिर झड़ी और लस्त होकर उनके मुंह पर बैठी रही. में अपना तन्नाया लंड मुठ्ठी में लेकर उन दोनों को देखता रहा... मौसी अब धीरे से मौसाजी के मुंह से उतर गई और टांगें फैलाकर मुझे न्योता देने लगी... मैंने आव देखा न ताव... योनि रस से लसलसित मार्गे में पुचुक की आवाज के साथ मेरा लंड मौसी की चुत में घुस गया... में उनकी निप्पलों को बारी बारी चूसते हुए धनाधन धक्के लगाने लगा... मौसी की चुत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को अंदर से निचोड़ते हुए पकड़ रखा था... ऐसी स्थिति में मेरा ओर टीक पाना संभव न था... में कराहते हुए उनकी चुत के अंदर झड़ गया... हांफते हुए मैंने लंड बाहर निकाला और उनके बगल में लेट गया। थका होने से मेरी आँख लग गयी. सोते सोते मुझे याद है कि अब मौसाजी मौसी पर चढ़ कर उसे चोद रहे थे.
सुबह जब मैं उठा तो सूरज काफ़ी ऊपर आ गया था. मौसाजी उठ कर जा चुके थे, बिस्तर में मैं और मौसी ही थे. उनकी नींद पहले ही खुल गयी थी और वे मुझे बाँहों में लेकर चूम रही थी और मेरा शिश्न रगड कर उसे खड़ा कर रही थी. उनकी निप्पल तनकर खड़ी हो गई थी. बडा अच्छा लग रहा था और उनके चूमने के जवाब में मैं भी उनकी चुम्मी लेने लगा. पलट कर वे उलटी बाजू से सो गई और सिक्सटी नाइन का पोज़ बना लिया. चूसते हुए उनकी जीभ मेरे लंड को पागल कर रही थी. मैंने भी मुंह खोल कर जितना हो सकता था, उतना चुत के अंदर जीभ घुसेड़कर चूसने लगा.
मेरा लंड मस्त होकर खड़ा था और मौसी के चूसने के बाद करीब करीब कल रात जितना ही बडा हो गया था. आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेकर चूसने में मौसी को बडा मजा आ रहा था. अब उन्हों ने जरा गर्दन लम्बी की और मेरी जांघों के बीच सिर डाल कर मेरी गांड को चाटने लगी। उनकी तपती गीली जीभ मेरी गांड में घुसी और मैं आनंद से हुमक उठा. मौसी पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था. मुझे यही लगा कि शायद अब हम एक दूसरे का शरीर का रस पी कर ही उठेंगे। प्यार के अलावा मौसी के दिमाग पर वासना का शैतान भी सवार था.
सहसा मुझे सीधा लिटा कर वे मुझ पर चढ़ बैठी. मेरी समझ में आने के पहले ही उन्हों ने मेरा सुपाड़ा अपनी चुत के होंठों के बीच रखा और अपने शरीर का पूरा वज़न डाल दिया. उनकी चुत मेरी लार से पहले ही काफी चिपचिपी थी, इसलिये मेरा सुपाडा सट करके उनकी चुत में घुस गया. अब मौसी पागलों की तरह उछल उछल कर मेरे लँड पर इतनी जोर से कूदने लगी की उत्तेजित होने के बावजूद मेरे लंड में दर्द होने लगा... में चीखते हुए उन्हे रुकने के लिए कहने लगा पर उन्होंने मेरी एक न सुनी...
मौसाजी ने हल्ला सुना तो देखने को आए कि क्या गडबड चल रही है. मैंने चिल्लाते हुए उससे मौसाजी को शिकायत की. "मौसाजी, मौसी को जरा डाँटिए ना, देखो मना कर रहा हूँ फिर भी लंड पर कूदती जा रही है, बहुत दर्द हो रहा है मौसी, मैं मर जाऊंगा. "
मौसाजी ने अपने पत्नी का ही साथ दिया. वासना से भरी उनकी आँखों को चूम कर वह मेरे पास बैठ गए. वह पूरे नग्न थे. "कूदने दे बेटे, इतना चिकना लंड जब मिली है तो पूरा मजा लेंगी ही. मजे करने की चीज़ है तो मजे तो करेंगी ही ना!! चल में इसे ठंडा करने में तेरी मदद करता हूँ..” उन्होंने बैठे बैठे मौसी की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और मौसी से कहा. “पूरा मजा वसूल करना मेरी रानी. इतना मस्त छोकरा है, चुदवाकर अपनी चुत को ठंडी कर ले."
रोते बच्चों को चुप कराने के लिये जैसे औरतें करती हैं वैसे मौसी ने झुक कर मेरे मुंह में अपनी एक निप्पल दे दी ताकि मैं शांत हो जाऊँ. अब वह थोड़ा धीरे धीरे कूद रही थी इसलिए मेरा दर्द भी कम हो गया था और मुझे मजा आने लगा था. रोना बंद करके अब मैं अपने चूतड उछाल कर और जोर से मौसी की चुत मारने की कोशिश कर रहा था.
मौसाजी मेरे इस उतावलेपन पर लाड से हंसने लगे. "देख रानी, अभी तक रो रहा था बदमाश, अब कैसा मस्ती से चोद रहा है, अपने चूतड उछाल उछाल के. डार्लिंग, आज तो मैं छुट्टी ले लेता हूँ, दिन भर हम तीनों चुदाई करेंगे."
पंद्रह मिनिट तक यूं उछलने के बाद वे झड़ी और बिस्तर पर ढेर हो गई.
थोड़ी देर आराम करने के बाद मौसी ने कहा कि सब अब नहाने को चले. हम तीनों मिलकर गरम शावर लेने लगे।
मौसी अब झुक कर टब का किनारा पकड कर खड़ी हो गई. उसे कुतिया स्टाइल में चुदाना था. अंकल ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी बुर में लंड डाला और चोदने लगे. उसे उन्हों ने आधे घंटे तक चोदा और तीन चार बार झडा कर खुश कर दिया. सारे समय मैं मौसी के सामने खड़ा था और वह मेरा लंड चूस रही थी. अंकल के कहने पर मैंने उसके लटकते स्तन भी खूब दबाये. वे अंकल के झटकों से पेंडुलम जैसे हिल रहे थे.
मैं इतना उत्तेजित था कि वासना से सिसकने लगा. "मौसी, चूस ले मेरा लंड, प्लीज़, मुझसे नहीं रहा जाता." मौसी के स्तन पकड़े पकड़े ही मैं ऐसा झडा कि किलकारिया मारने लगा.
मौसी ने मन लगाकर मेरा वीर्य पान किया और इस बीच अंकल ने उसे एक बार और चोद डाला और अपना लंड बाहर निकालकर मौसी की गोल चूतड़ों पर लंड की पिचकारी दे मारी... . हम तीनों को फिर से शावर लेना पड़ा।
नहाने के बाद हम नाश्ते पर बैठे. नाश्ता खतम करके हम ड्रॉइंग रूम में गये. मुझे बाँहों में लेकर चूमते हुए वे दोनों सलाह मशवरा करने लगे कि मेरे साथ अब क्या किया जाये, जैसे मैं कोई जिंदा किशोर नहीं, उनका खिलौना हूँ जिससे चाहे जैसे खेला जा सकता है. आखिर मौसी मेरी तरफ़ दुष्ट निगाह से देखती हुई बोली. "उस दिन वीडीओ पर देखा था वही ब्लू फिल्म देखते है."
मौसाजी ने तुरंत वह वीडीओ लगाई और हम साथ बैठ कर मजा लेने लगे. फ़िल्म बिलकुल हमारी रति जैसी ही थी, फ़रक इतना था कि एक लडके के बजाय एक उन्नीस साल की लड़की अपने डैडी के साथ मजे ले रही थी. वह एक परिवार प्यार या इन्सेस्ट की कथा थी और उसमें पति-पत्नी मिलकर अपनी ही जवान किशोर बेटी को भोग रहे थे.
मौसी की चूत अब ऐसे पसीज रही थी कि पानी बाहर बहने लगा था. फ़िल्म का का सीन खतम होने पर वह हमारे सामने खड़ी हो गयी और मेरा सिर खींच कर अपनी झांटों में मेरा मुंह दबा दिया. मुझे उसने आदेश दिया कि उसकी बुर चुसूँ और वह बड़ी खुशी से मैंने किया. मेरे मुंह को वह चोदने लगी और मौसाजी उसके मम्मे दबाने लगे.
उधर पिक्चर में उस किशोरी की अम्मा आखरी सीन में अपनी बेटी से चूत चुसवा रही थी और उसके डैडी कुतिया स्टाइल मे उसकी गांड मार रहे थे. पिक्चर खतम होने तक मौसाजी ने धीरज रखा. फ़िर खिसक कर मौसी को लिये वे फ़र्श पर आ गये जहाँ पहले ही प्रिया मौसी ने इस काम के लिये एक गद्दी बिछा रखी थी. मौसी को गद्दी पर लिटाकर वे उस पर चढ़ गये और बेतहाशा उसकी चुत को चोदने लगे.
उनका लौडा अब बड़ी आसानी से उसकी मख्खन सी चिकनी और फ़ुकला हुई चुत में अंदर बाहर हो रहा था. उस मोटे लंड और सूजे सुपाड़े के घर्षण से उन्हे असहनीय सुख मिल रहा था. मेंने अपना लंड मौसी के मुंह में दे दिया और वह बड़े मजे से मेरे सुपाड़े को चूसने लगी।
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थोड़ी देर में मौसा जी झड़कर सोफ़े पर बैठ गए और अब मेरी बारी आई.. मैंने मौसी की जांघों को फैलाकर उनकी वीर्य से सनी चुत में पेल दिया... बार बार झड़ने के बावजूद मौसी की भूख कम नहीं हो रही थी... मैंने अंगूठे से उनके भगोष्ठ को रगड़ते हुए चोदना जारी रखा... कुछ ही देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए और में मौसी के दोनों स्तनों के बीच सिर रखकर लेट गया।
कुछ देर बाद सुस्ता कर जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ की हम फ़िर शुरू हो गये. दिन भर मौसी की चुदाई चलती रही. कभी में उन्हे चोदता तो कभी मौसा जी.
Dear Napster sir,aap plz meri stories bhi padh kr dekhna. I am sure u will like.बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
बहुत जल्दी आपके कहानी पर आने की कोशिश करुगा फिलहाल वक्त बहुत कमी हैं और ऑफिस का काम बहुत ज्यादाDear Napster sir,aap plz meri stories bhi padh kr dekhna. I am sure u will like.
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Thanks a lot dearबहुत जल्दी आपके कहानी पर आने की कोशिश करुगा फिलहाल वक्त बहुत कमी हैं और ऑफिस का काम बहुत ज्यादा
लेकीन जल्दी ही आऊगा