Desimunda89
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Update 10
पायल....अम्मा मुझे कार में ही बैठना है मुझे बस वस से नहीं जाना है आप किसी और को बस से आने को बोलो मैं तो कार में ही बैठूंगी और पायल मुंह बनाकर अपनी जिद पर अड़ी रही तो अंत में कमला को उसकी बात माननी ही पड़ी लेकिन अब बस से किसे भेजे कमला इस सोच में पड़ जाती है।
अब आगे....
कमला...अब मैं किसे भेजूं मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा राधा और अरुणा को भी घर जल्दी ही पहुंचना पड़ेगा वो लोग भी तो रात का भोजन तैयार करेंगी हां अगर अरुणा या फिर राधा में से कोई एक दूसरे का भोजन बना ले तो ये हो सकता अभी कमला ये सोच ही रही थी की उसे अरुणा आती हुई दिखी।
अरुणा...क्या हुआ दीदी आपका मुंह ऐसे लटका हुआ क्यूं है क्या कोई बात हो गई कही सोनू की शादी.....
कमला...अरे...रे...रे...शुभ शुभ बोल ऐसा कुछ नहीं हुआ है दरअसल बात कुछ और है मैं तो वापस घर जाने के लिए परेशान हो रही थी और तू है पता नहीं क्या उल्टा सीधा सोचने लगी।
अरुणा...अरे दीदी माफ कर दो मुझे लगा चलो छोड़ो ये बताओ भला वापस जाने पर दुख कैसा?
कमला...बात ये है की गाड़ी एक और जाने वाले इतने लोग अब एक गाड़ी में इतने लोग कैसे जायेंगे मुझे तो इसी बात की चिंता लगी थी लेकिन अब तू आ गई तो मेरी चिंता अब तू ही दूर करेगी।
अरुणा...क्या मैं लेकिन कैसे???
अरुणा अपने मन में कही ऐसा तो नहीं जैसे मैं आई थी वैसे ही जाना पड़े और यही सोचकर अरुणा का शरीर कांप जाता है क्या उसे फिर से राजू के उसपे बैठना पड़ेगा नहीं नहीं ये गलत है तब मैं अनजाने में बैठ गई लेकिन तो भगवान भी आके कहे तो भी मैं राजू की गोद में नहीं बैठकर जाने वाली आई दईया उसका कितना मोटा और कितना बड़ा था मुझे अभी भी अपने वहां पर महसूस हो रहा है जैसे वह अभी भी ठोकर मार रहा हो।
और देखो तो नामुराद को मेरी उसको ही दबोच लिया क्या इसने जानबूझकर किया था या अनजाने में लेकिन अगर ये अनजाने में होता तो वह मेरी आंखों में ऐसे आंखे डालकर कभी नहीं देखता बल्कि वो तो.....
कमला अरुणा को हिलाते हुए...अरुणा ओ अरुणा अब क्या दिन में खड़े खड़े ही सोने लगी है।
अरुणा कमला के ऐसे हिलाने से होश में आती है।
अरुणा....क्या हुआ दीदी ऐसे क्यूं झंझकोर रही हो मुझे अब मैंने क्या कर दिया।
कमला...मुझे लगता है तुझे ना मेरे देवर की याद आ रही है बोल ये सच है ना अगर ऐसा है तो तू पहले चली जा और मैं सोनू के बापू से बोलकर देवर जी को पहले भिजवा दूं।
अरुणा...क्या दीदी आप भी मुझे परेशान करने लगी अब आप मुझे अपनी परेशानी बताएंगी या फिर मैं चलूं यहां से।
कमला...अरे सुन तो नाराज क्यूं होती है तू भी तो पता नहीं किसकी याद में खो गई थी इसलिए कहां अच्छा अब मेरी बात को ध्यान से सुनो।
हम सब औरते एक साथ बिना किसी मर्द की जिम्मेदारी के उस ड्राइवर पर विश्वाश नहीं कर सकते पता नही कहां मारे और कहां डारे (मारकर फेंकना)
अरुणा...दीदी जहां पर आप डलवाने की कहेंगी वही की मारेगा ना इतना बोलकर अरुणा खिलखिलाकर हसने लगी।
कमला अपना एक हाथ उठा अरुणा के सर को चपेट लगाते हुए।
कमला...अब मुझ जैसी बुड्ढी की वो भला क्या मारेगा लेकिन तू बोल अगर तेरा सच में मन चल रहा हो तो उसी ड्राइवर से ही बोल देती हूं वो मुझसे ज्यादा तेरी मारने के लिए तड़प रहा होगा।
तभी कमला को नीरज उसके पति की आवाज आती है
नीरज ताऊ....अरे पायल की अम्मा सब को भेजो ना जल्दी गाड़ी वाले को और भी कहीं जाना है।
कमला.... हां हां भेजती हूं अभी, अरुणा अब सुन अब कोई शरारत नहीं
अरुणा...ठीक है दीदी बोलो क्या बात है।
कमला... हां तो मैं क्या कह रही थी अरे..........अरे हां याद आया तो हम सब औरतों के साथ कोई मर्द होना जरूरी है लेकिन अगर कोई मर्द गाड़ी में आता है तो फिर किसी एक औरत को गाड़ी से उतरना होगा इसलिए मैं ये कह रही थी की तू माधव के साथ बस से आ जा देख तू खाना बनाने की चिंता ना कर उसके लिए मैं राधा को बोल दूंगी वह तुम दोनो के लिए खाना बनाकर रखेंगी।
अरुणा कमला की बात सुन थोड़ा सोच में पड़ जाती है और उदास भी लेकिन उसे कमला की भी बात सही लग रही थी आखिर सभी औरतों को किसी अनजान के साथ भेजना उचित नहीं और फिर जब साथ में बिन ब्याही बिटिया भी हो तब तो बिलकुल भी रिस्क नहीं ले सकते और वो ड्राइवर भी बहुत कमीना है कैसे मुझे घूर घूरकर देख रहा था।
कमला...तू फिर से कहां खो गई अरुणा...
अरुणा...मैं कही नहीं खो गई ठीक है दीदी लेकिन राधा को याद से बोल देना वरना हम दोनो मिया बीबी को रात भर भूंखे ही सोना पड़े।
कमला अरुणा की बात सुन खुश हो जाती है और उसे अपने गले से लगा लेती है।
कमला...तू बहुत अच्छी है अरुणा तूने मेरी इतनी बड़ी चिंता एक पल में खत्म कर दी मैं तो बहुत परेशान हो रही थी की किससे कहूं कही कोई बुरा ना मान जाए।
अरुणा धीरे से कमला के कान में...दीदी अब आप आगे उस ड्राइवर के बगल में ही बैठना और जहां वो डाले उसे डालने देना।
इतना बोल अरुणा कमला अलग होकर दूर हट जाती है और कमला उसे थप्पड़ मारने का इशारा करती रह जाती है।
अब अरुणा अपने पति को और जाने लगती है और कमला गाड़ी की ओर*****
अरुणा.... अजी हमारे साथ और कौन जा रहा है।
माधव...तुम्हारे साथ तो सभी लोग जा रहे है और तुम यहां क्या कर रही हो क्या तुमको गाड़ी से नहीं जाना है
अरुणा.... नहीं वो कमला दीदी ने मुझे आपके साथ आने को कहां है, और सोनू राजू किसके साथ जा रहे है
माधव...अपने साथ बस से वो भी चलेंगे।
अरुणा....और हमे बस कितनी देर बाद मिलेगी?
माधव...लास्ट बस शहर से आती है वो यहां से 7:30 पर निकलेगी तब कही वो 10 और साढ़े 10 बजे के आस पास हमे हमारे गांव उतारेगी।
अरुणा...अजी अभी तो बहुत टाइम है और इतनी देर बाद वो भी लास्ट बस तो फिर तो वो पूरी तरह भरी आती होगी।
माधव...ऐसा ही कुछ समझ लो....
तभी अरुणा को जेठ जी आते दिखे तो अरुणा ने झट से अपना चेहरा ढक लिया और चुप होकर उनके आने का इंतजार करने लगी।
नीरज....माधव सब ठीक है तो फिर अब मैं चलता हूं और बहू मुझे माफ करदो मैने तो पायल को बस से आने का कहां था लेकिन वो गाड़ी से जाने की जिद करने लगी और फिर कमला ने मुझे बताया की उसने तुम्हे बस से आने के लिए कह दिया है मुझे पता है तुम्हे बस से आने में तकलीफ होगी लेकिन अब हम कुछ कर भी नहीं सकते।
अरुणा...अरे नहीं भईया उसमे तकलीफ कैसी मैं कई बार बस का सफर कर चुकी हूं और पायल तो अभी बच्ची है उसे बस की भीड़ में खड़े खड़े आने में ज्यादा दिक्कत होती आप चिंता ना करे और मुझसे माफ़ी मांग कर मुझे लज्जित भी ना करे आप मुझसे बड़े है आपको ये सब शोभा नहीं देता।
नीरज...ठीक है बहू अच्छा अब मैं चलता हूं ड्राइवर भी हॉर्न बजा रहा है और फिर नीरज गाड़ी में बैठ जाते है
इस बार गाड़ी में ज्यादा सामान ना होने के कारण 2 लोग पीछे की सीट पर 4 लोग बीच वाली सीट पर और दो लोग आगे की सीट पर ड्राइवर के साथ बैठे थे जो थोड़ा बहुत सामान था उसे पीछे दोनो सीटों के बीच में रख दिया गया था आगे नीरज ताऊ के साथ रचना बैठी थी पीछे की सीट पर राधा और कमला और बीच वाली सीट पर चंदलेखा और उनकी दो बेटियों के साथ पायल भी दब दुबाकर बैठ गई थी और अब गाड़ी वहां से निकल चुकी थी लड़कियों ने जाते हुए बचे लोगो को bye bye बोलकर अपने पीछे राजू सोनू अरुणा और माधव को आराम से आने को कहां।
अब अरुणा अपने हाथ में बाधी घड़ी को देखती है अभी शाम के 3 बज रहे थे और बस को आने में अभी कई घंटे बाकी थे।
अरुणा...अजी अब क्या करे अभी तो बहुत समय बाकी है।
राजू...छोटी माई मैं क्या कहता हूं अब इतनी दूर आए है और अभी हमारे पास समय भी बहुत है तो क्यूं ना हम सब मूवी देखने चलते है मैने कभी थ्रेटर में मूवी भी नहीं देखी है।
अरुना राजू को देखती है और फिर कुछ सोचकर अपने पति की ओर देखने लगती है जैसे वह पूछ रही हो की क्या हमे जाना चाहिए।
माधव भी अरुणा का इशारा समझ जाता है लेकिन माधव तो कुछ और ही सोच रहा था दरसल उसे खेतो में खाद डालनी थी तो वह खाद का मूल भाव और उसका स्टॉक पता करने की सोच रहा था।
माधव...अरुणा तुम लोग जाना चाहते हो तो जाओ मुझे खेतों की खाद की जानकारी करनी थी और साधन के बारे में भी पता लगाना है।
राजू...खाद की बोरियां तो हम लोग बस से ही ले जाते है तो फिर हर बार की तरह बस में ही डालकर ले चलते है ना।
माधव...लेकिन इस बस में इतनी जगह कहां होगी वो तो हम लोग पहली नंबर की बस से हमेशा ले जाते है ये लास्ट नंबर बस है तुम देखना इसमें कितनी भीड़ होगी।
राजू...आप सिर्फ खाद की बोरियां इक्कठा करवाइए देखना ये ही बस हमारी बोरिया भी ले के जायेगी।
माधव राजू की बात पर सहमत हो जाता है और वह अरुणा और राजू को मूवी देखने के लिए बोल देता है।
वही पर सोनू का भी मन होता है थ्रेटर में मूवी देखने का तो वह भी राजू के साथ चल देता है।
अब राजू एक थ्रेटर की खिड़की के पास जाके 3 टिकट खरीद लेता है और वापस आकर अरुणा और सोनू के साथ उस मूवी थियेटर में घुस जाता है।
अभी इस थ्रिएटर में लाइट जल रही थी और लोग आकर बैठते जा रहे थे आगे की सीटें भर चुकी थी अब सिर्फ पीछे की सीटे ही बची थी की तभी सोनू को गेट से आगे तीसरे रॉ में एक सीट खाली मिल जाती है और सोनू वहां बैठने चला जाता है।
राजू...अरे भाई वहां क्यूं बैठ रहा है चल पीछे बैठते है एक साथ मूवी देखने में ज्यादा मजा आयेगा ना।
सोनू...अरे नहीं मैं यही ठीक हूं वहां से देखने में दिक्कत होगी।
राजू...चल ना भाई मजा आयेगा एक साथ सभी मिलकर देखते है।
लेकिन सोनू फिर भी नहीं आया तो राजू को अकेले ही अरुणा के साथ पीछे जाना पड़ा अब राजू को गेट से चार रॉ पीछे की सीट खाली मिली थी तो राजू और अरुणा वही पर बैठ गए।
एक मिनट मैं आप लोगो को यहां के थिएटर के बारे में बता दे इस थिएटर में कुर्सियां टेंट वाली थी और आगे मूवी एक बड़े से परदे पर चलती थी शायद कुछ लोग जानते भी हो।
ये थिएटर आज के जमाने जैसे नहीं थे ना ही आज के जैसे बड़े प्रोजेक्टर थे और ना आज के जैसी फोल्डेबल आरामदायक कुर्सियां थी।
और सबसे बड़ी बात यहां इस थिएटर की फर्श प्लेन थी
इसलिए पीछे वाले को देखने में परेशानी भी होती थी।
खैर छोड़ो ये सब अपन तो राजू की स्टोरी पर फोकस करते है अब देखते है राजू यहां पर शांति से मूवी देखता है जो शायद देखने को मिले या फिर अरुणा के साथ मस्ती करता है।
Guys main ye wala update Aruna ke sath bas ke scene ke sath Dena chahta tha lekin aap logo ke joro shoro demand ki wajah se mujhe adhura update hi Dena pad rha hai
Koi nhi aage se main pahle hi clear kar diya karunga agar mujhe mega update dalna hoga to wo weekend par aayega nhi to short update week me 2-3 aa jayenge
Next update weekend me aayega
Baki aaj mere best friend ka birthday hai so guys wish him best wishes for his best birthday his name is Suraj....
***Happy birthday dear friend Suraj***