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Incest लालटेन 2.0

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Ajju Landwalia

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Update 10


पायल....अम्मा मुझे कार में ही बैठना है मुझे बस वस से नहीं जाना है आप किसी और को बस से आने को बोलो मैं तो कार में ही बैठूंगी और पायल मुंह बनाकर अपनी जिद पर अड़ी रही तो अंत में कमला को उसकी बात माननी ही पड़ी लेकिन अब बस से किसे भेजे कमला इस सोच में पड़ जाती है।

अब आगे....

कमला...अब मैं किसे भेजूं मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा राधा और अरुणा को भी घर जल्दी ही पहुंचना पड़ेगा वो लोग भी तो रात का भोजन तैयार करेंगी हां अगर अरुणा या फिर राधा में से कोई एक दूसरे का भोजन बना ले तो ये हो सकता अभी कमला ये सोच ही रही थी की उसे अरुणा आती हुई दिखी।

अरुणा...क्या हुआ दीदी आपका मुंह ऐसे लटका हुआ क्यूं है क्या कोई बात हो गई कही सोनू की शादी.....

कमला...अरे...रे...रे...शुभ शुभ बोल ऐसा कुछ नहीं हुआ है दरअसल बात कुछ और है मैं तो वापस घर जाने के लिए परेशान हो रही थी और तू है पता नहीं क्या उल्टा सीधा सोचने लगी।

अरुणा...अरे दीदी माफ कर दो मुझे लगा चलो छोड़ो ये बताओ भला वापस जाने पर दुख कैसा?

कमला...बात ये है की गाड़ी एक और जाने वाले इतने लोग अब एक गाड़ी में इतने लोग कैसे जायेंगे मुझे तो इसी बात की चिंता लगी थी लेकिन अब तू आ गई तो मेरी चिंता अब तू ही दूर करेगी।

अरुणा...क्या मैं लेकिन कैसे???

अरुणा अपने मन में कही ऐसा तो नहीं जैसे मैं आई थी वैसे ही जाना पड़े और यही सोचकर अरुणा का शरीर कांप जाता है क्या उसे फिर से राजू के उसपे बैठना पड़ेगा नहीं नहीं ये गलत है तब मैं अनजाने में बैठ गई लेकिन तो भगवान भी आके कहे तो भी मैं राजू की गोद में नहीं बैठकर जाने वाली आई दईया उसका कितना मोटा और कितना बड़ा था मुझे अभी भी अपने वहां पर महसूस हो रहा है जैसे वह अभी भी ठोकर मार रहा हो।

और देखो तो नामुराद को मेरी उसको ही दबोच लिया क्या इसने जानबूझकर किया था या अनजाने में लेकिन अगर ये अनजाने में होता तो वह मेरी आंखों में ऐसे आंखे डालकर कभी नहीं देखता बल्कि वो तो.....

कमला अरुणा को हिलाते हुए...अरुणा ओ अरुणा अब क्या दिन में खड़े खड़े ही सोने लगी है।

अरुणा कमला के ऐसे हिलाने से होश में आती है।

अरुणा....क्या हुआ दीदी ऐसे क्यूं झंझकोर रही हो मुझे अब मैंने क्या कर दिया।

कमला...मुझे लगता है तुझे ना मेरे देवर की याद आ रही है बोल ये सच है ना अगर ऐसा है तो तू पहले चली जा और मैं सोनू के बापू से बोलकर देवर जी को पहले भिजवा दूं।

अरुणा...क्या दीदी आप भी मुझे परेशान करने लगी अब आप मुझे अपनी परेशानी बताएंगी या फिर मैं चलूं यहां से।

कमला...अरे सुन तो नाराज क्यूं होती है तू भी तो पता नहीं किसकी याद में खो गई थी इसलिए कहां अच्छा अब मेरी बात को ध्यान से सुनो।

हम सब औरते एक साथ बिना किसी मर्द की जिम्मेदारी के उस ड्राइवर पर विश्वाश नहीं कर सकते पता नही कहां मारे और कहां डारे (मारकर फेंकना)

अरुणा...दीदी जहां पर आप डलवाने की कहेंगी वही की मारेगा ना इतना बोलकर अरुणा खिलखिलाकर हसने लगी।

कमला अपना एक हाथ उठा अरुणा के सर को चपेट लगाते हुए।

कमला...अब मुझ जैसी बुड्ढी की वो भला क्या मारेगा लेकिन तू बोल अगर तेरा सच में मन चल रहा हो तो उसी ड्राइवर से ही बोल देती हूं वो मुझसे ज्यादा तेरी मारने के लिए तड़प रहा होगा।

तभी कमला को नीरज उसके पति की आवाज आती है

नीरज ताऊ....अरे पायल की अम्मा सब को भेजो ना जल्दी गाड़ी वाले को और भी कहीं जाना है।

कमला.... हां हां भेजती हूं अभी, अरुणा अब सुन अब कोई शरारत नहीं

अरुणा...ठीक है दीदी बोलो क्या बात है।

कमला... हां तो मैं क्या कह रही थी अरे..........अरे हां याद आया तो हम सब औरतों के साथ कोई मर्द होना जरूरी है लेकिन अगर कोई मर्द गाड़ी में आता है तो फिर किसी एक औरत को गाड़ी से उतरना होगा इसलिए मैं ये कह रही थी की तू माधव के साथ बस से आ जा देख तू खाना बनाने की चिंता ना कर उसके लिए मैं राधा को बोल दूंगी वह तुम दोनो के लिए खाना बनाकर रखेंगी।

अरुणा कमला की बात सुन थोड़ा सोच में पड़ जाती है और उदास भी लेकिन उसे कमला की भी बात सही लग रही थी आखिर सभी औरतों को किसी अनजान के साथ भेजना उचित नहीं और फिर जब साथ में बिन ब्याही बिटिया भी हो तब तो बिलकुल भी रिस्क नहीं ले सकते और वो ड्राइवर भी बहुत कमीना है कैसे मुझे घूर घूरकर देख रहा था।

कमला...तू फिर से कहां खो गई अरुणा...

अरुणा...मैं कही नहीं खो गई ठीक है दीदी लेकिन राधा को याद से बोल देना वरना हम दोनो मिया बीबी को रात भर भूंखे ही सोना पड़े।

कमला अरुणा की बात सुन खुश हो जाती है और उसे अपने गले से लगा लेती है।

कमला...तू बहुत अच्छी है अरुणा तूने मेरी इतनी बड़ी चिंता एक पल में खत्म कर दी मैं तो बहुत परेशान हो रही थी की किससे कहूं कही कोई बुरा ना मान जाए।

अरुणा धीरे से कमला के कान में...दीदी अब आप आगे उस ड्राइवर के बगल में ही बैठना और जहां वो डाले उसे डालने देना।

इतना बोल अरुणा कमला अलग होकर दूर हट जाती है और कमला उसे थप्पड़ मारने का इशारा करती रह जाती है।

अब अरुणा अपने पति को और जाने लगती है और कमला गाड़ी की ओर*****

अरुणा.... अजी हमारे साथ और कौन जा रहा है।

माधव...तुम्हारे साथ तो सभी लोग जा रहे है और तुम यहां क्या कर रही हो क्या तुमको गाड़ी से नहीं जाना है

अरुणा.... नहीं वो कमला दीदी ने मुझे आपके साथ आने को कहां है, और सोनू राजू किसके साथ जा रहे है

माधव...अपने साथ बस से वो भी चलेंगे।

अरुणा....और हमे बस कितनी देर बाद मिलेगी?

माधव...लास्ट बस शहर से आती है वो यहां से 7:30 पर निकलेगी तब कही वो 10 और साढ़े 10 बजे के आस पास हमे हमारे गांव उतारेगी।

अरुणा...अजी अभी तो बहुत टाइम है और इतनी देर बाद वो भी लास्ट बस तो फिर तो वो पूरी तरह भरी आती होगी।

माधव...ऐसा ही कुछ समझ लो....

तभी अरुणा को जेठ जी आते दिखे तो अरुणा ने झट से अपना चेहरा ढक लिया और चुप होकर उनके आने का इंतजार करने लगी।

नीरज....माधव सब ठीक है तो फिर अब मैं चलता हूं और बहू मुझे माफ करदो मैने तो पायल को बस से आने का कहां था लेकिन वो गाड़ी से जाने की जिद करने लगी और फिर कमला ने मुझे बताया की उसने तुम्हे बस से आने के लिए कह दिया है मुझे पता है तुम्हे बस से आने में तकलीफ होगी लेकिन अब हम कुछ कर भी नहीं सकते।

अरुणा...अरे नहीं भईया उसमे तकलीफ कैसी मैं कई बार बस का सफर कर चुकी हूं और पायल तो अभी बच्ची है उसे बस की भीड़ में खड़े खड़े आने में ज्यादा दिक्कत होती आप चिंता ना करे और मुझसे माफ़ी मांग कर मुझे लज्जित भी ना करे आप मुझसे बड़े है आपको ये सब शोभा नहीं देता।

नीरज...ठीक है बहू अच्छा अब मैं चलता हूं ड्राइवर भी हॉर्न बजा रहा है और फिर नीरज गाड़ी में बैठ जाते है
इस बार गाड़ी में ज्यादा सामान ना होने के कारण 2 लोग पीछे की सीट पर 4 लोग बीच वाली सीट पर और दो लोग आगे की सीट पर ड्राइवर के साथ बैठे थे जो थोड़ा बहुत सामान था उसे पीछे दोनो सीटों के बीच में रख दिया गया था आगे नीरज ताऊ के साथ रचना बैठी थी पीछे की सीट पर राधा और कमला और बीच वाली सीट पर चंदलेखा और उनकी दो बेटियों के साथ पायल भी दब दुबाकर बैठ गई थी और अब गाड़ी वहां से निकल चुकी थी लड़कियों ने जाते हुए बचे लोगो को bye bye बोलकर अपने पीछे राजू सोनू अरुणा और माधव को आराम से आने को कहां।

अब अरुणा अपने हाथ में बाधी घड़ी को देखती है अभी शाम के 3 बज रहे थे और बस को आने में अभी कई घंटे बाकी थे।

अरुणा...अजी अब क्या करे अभी तो बहुत समय बाकी है।

राजू...छोटी माई मैं क्या कहता हूं अब इतनी दूर आए है और अभी हमारे पास समय भी बहुत है तो क्यूं ना हम सब मूवी देखने चलते है मैने कभी थ्रेटर में मूवी भी नहीं देखी है।

अरुना राजू को देखती है और फिर कुछ सोचकर अपने पति की ओर देखने लगती है जैसे वह पूछ रही हो की क्या हमे जाना चाहिए।

माधव भी अरुणा का इशारा समझ जाता है लेकिन माधव तो कुछ और ही सोच रहा था दरसल उसे खेतो में खाद डालनी थी तो वह खाद का मूल भाव और उसका स्टॉक पता करने की सोच रहा था।

माधव...अरुणा तुम लोग जाना चाहते हो तो जाओ मुझे खेतों की खाद की जानकारी करनी थी और साधन के बारे में भी पता लगाना है।

राजू...खाद की बोरियां तो हम लोग बस से ही ले जाते है तो फिर हर बार की तरह बस में ही डालकर ले चलते है ना।

माधव...लेकिन इस बस में इतनी जगह कहां होगी वो तो हम लोग पहली नंबर की बस से हमेशा ले जाते है ये लास्ट नंबर बस है तुम देखना इसमें कितनी भीड़ होगी।

राजू...आप सिर्फ खाद की बोरियां इक्कठा करवाइए देखना ये ही बस हमारी बोरिया भी ले के जायेगी।

माधव राजू की बात पर सहमत हो जाता है और वह अरुणा और राजू को मूवी देखने के लिए बोल देता है।

वही पर सोनू का भी मन होता है थ्रेटर में मूवी देखने का तो वह भी राजू के साथ चल देता है।

अब राजू एक थ्रेटर की खिड़की के पास जाके 3 टिकट खरीद लेता है और वापस आकर अरुणा और सोनू के साथ उस मूवी थियेटर में घुस जाता है।

अभी इस थ्रिएटर में लाइट जल रही थी और लोग आकर बैठते जा रहे थे आगे की सीटें भर चुकी थी अब सिर्फ पीछे की सीटे ही बची थी की तभी सोनू को गेट से आगे तीसरे रॉ में एक सीट खाली मिल जाती है और सोनू वहां बैठने चला जाता है।

राजू...अरे भाई वहां क्यूं बैठ रहा है चल पीछे बैठते है एक साथ मूवी देखने में ज्यादा मजा आयेगा ना।

सोनू...अरे नहीं मैं यही ठीक हूं वहां से देखने में दिक्कत होगी।

राजू...चल ना भाई मजा आयेगा एक साथ सभी मिलकर देखते है।

लेकिन सोनू फिर भी नहीं आया तो राजू को अकेले ही अरुणा के साथ पीछे जाना पड़ा अब राजू को गेट से चार रॉ पीछे की सीट खाली मिली थी तो राजू और अरुणा वही पर बैठ गए।

एक मिनट मैं आप लोगो को यहां के थिएटर के बारे में बता दे इस थिएटर में कुर्सियां टेंट वाली थी और आगे मूवी एक बड़े से परदे पर चलती थी शायद कुछ लोग जानते भी हो।

ये थिएटर आज के जमाने जैसे नहीं थे ना ही आज के जैसे बड़े प्रोजेक्टर थे और ना आज के जैसी फोल्डेबल आरामदायक कुर्सियां थी।

और सबसे बड़ी बात यहां इस थिएटर की फर्श प्लेन थी
इसलिए पीछे वाले को देखने में परेशानी भी होती थी।

खैर छोड़ो ये सब अपन तो राजू की स्टोरी पर फोकस करते है अब देखते है राजू यहां पर शांति से मूवी देखता है जो शायद देखने को मिले या फिर अरुणा के साथ मस्ती करता है।

Guys main ye wala update Aruna ke sath bas ke scene ke sath Dena chahta tha lekin aap logo ke joro shoro demand ki wajah se mujhe adhura update hi Dena pad rha hai

Koi nhi aage se main pahle hi clear kar diya karunga agar mujhe mega update dalna hoga to wo weekend par aayega nhi to short update week me 2-3 aa jayenge


Next
update weekend me aayega



Baki aaj mere best friend ka birthday hai so guys wish him best wishes for his best birthday his name is Suraj....

***Happy birthday dear friend Suraj***

Bahut hi badhiya update he fuckerg Bhai,

Raju ab theater me aruna se jarur kuch na kuch pange lega...............aur bus ka scene bhi baaki he abhi..........

Agle update ki pratiksha rahegi Bhai
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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fuckerg

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Update 11




अब तक सभी लोग थिएटर में आ चुके थे और गेट भी बंद हो चुका था अब थिएटर के बड़े पर्दे पर अंग्रेजी में लिखा हुआ डिस्क्लेमर लिखा हुआ दिख रहा था और उसके बाद डी जे वाले बड़े से स्पीकर से मूवी के शुरू होने की आवाज आती है और परदे पर डायरेक्टर के ब्रांड के लोगो की वीडियो चल रही होती हैं।

इधर राजू अरुणा के साथ मूवी देखने के लिए बहुत एक्साइटेड हो रहा था उसे ये तो नहीं पता था की कौन सी मूवी आने वाली है लेकिन आज वह थिएटर में मूवी देखने आया था उसे इस बात की बहुत खुशी थी।

राजू...छोटी माई अगर आपको दिख ना रहा हो तो मेरी कुर्सी पर आ जाना

अरुणा अपने मन में...राजू तू एक दिन में कितना बदल गया है जहां तू पहले मुझसे बात करने में भी डरता था आज बिना डरे कुछ भी बोल देता है अगर मुझे पता होता की मेरे वहां बैठने से ऐसा होगा तो मैं बहुत पहले ही वहां बैठ जाती और अरुणा ये सोचकर शर्मा जाती हाय ये मुझे क्या हो रहा है मैं भी तबसे उसी के बारे में सोच रही हूं कितना बड़ा और कितना मोटा होगा क्या राजू ने उसे अब तक किसी के अंदर डाला होगा अगर डाला होगा तो वो तो बेचारी मर ही गई होगी मैं तो कभी ना लूं इतना बड़ा और मोटा अपने अंदर मेरी तो फट ही जायेगी.... धत ये तू क्या सोचने लगी अरुणा वो तेरी जेठानी का बेटा राजू है जिसे तू खुद अपना बेटा मानती है और तू अपने बेटे बारे में इतनी गन्दी सोच आखिर कैसे....अब अरुणा थोड़ी सी मायूस हो जाती है और एक बार राजू को देखती है और फिर मूवी की ओर देखने लगती है लेकिन उसकी हाइट कम होने के कारण उसे बहुत कम ही दिख रहा था।

वही राजू बड़े ध्यान से मूवी देखने में मस्त था और आगे सोनू भी लेकिन अरुणा को सिर्फ आवाज ही सुनाई पड़ रही थी अब अरुणा सोच में पड़ जाती है क्या उसे राजू की गोद में फिर से बैठना चाहिए लेकिन इतने लोगो के सामने नहीं नहीं मैं अब वहां नहीं बैठ सकती देखा नहीं था कैसे पूरी तरह उससे चिपका हुआ था हाय आज मुझे क्या हो गया है राजू तेरा लण्ड मुझे पागल करके ही मानेगा।

वही अभी मूवी को चले कुछ ही देर हुई होगी की अरुणा के बगल में बैठा एक प्रेमी जोड़ा आपस में चोंच लड़ाने लगते है वो दोनो एक दूसरे को किस कर रहे होते है जिसे देख अरुणा का ध्यान अब मूवी से हटकर उन पर आ जाता है अब अरुणा बैठे बैठे अपने चारो ओर देखने लगती है कही उसे कोई उन्हें देखते हुए देख तो नही रहा लेकिन अभी सब मूवी में मगन थे किसी का ध्यान उस प्रेमी जोड़ों की तरफ नहीं गया था और अब अरुणा भी बेफिक्र होके उन दोनो प्रेमी जोड़ों को देखने लगती है।

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वे दोनो एक दूसरे में समाए जा रहे थे वही प्रेमी के हाथ प्रेमिका की पीठ पर उसकी पीठ को सहलाए जा रहे थे

अरुणा उन दोनो को देखने में ऐसे मगन हुई की उसे होश ही नहीं रहा और वह अब खुद को और राजू को उस जोड़े की जगह महसूस कर रही थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे राजू उसके होंटो को चूम रहा हो और राजू के हाथ उसे अपनी बैक पर महसूस हो रहे थे जिस कारण अरुणा की खुमारी बढ़ती ही जा रही थी जिसका असर ये होता है की अरुणा को एक बार फिर से राजू के लण्ड की याद आने लगती है और उसे फिर से अपनी गांड़ के नीचे राजू का लण्ड महसूस होने लगता है।

लेकिन कुछ ही देर में अरुणा की ममता एक बार फिर से अरुणा पर हावी हो जाती है और अरुणा की आंखे फिर से बड़ी हो जाती है जो अभी कुछ देर पहले हवस की खुमारी में बंद होने लगी थी।

अरुणा... नहीं नहीं तू अरुणा ये गलत है तू बहक नहीं सकती वह तेरा बेटा है तुझे अपने आप पर काबू करना चाहिए अरुणा नहीं तो बहुत गलत हो जायेगा।

अब अरुणा वहां पर और अधिक नहीं बैठना चाहती थी वह वहां से निकलना चाहती थी।

इसलिए वह अंतिम बार उस जोड़े की तरफ देखने लगती है अब वहां पर वह प्रेमिका अपनी कुर्सी से उठकर अपने प्रेमी की कुर्सी के पास नीचे बैठ जाती है।

अरुणा को कुछ भी समझ नहीं आता की अब ये दोनो आगे क्या करने वाले है अरुणा के दिल की धड़कन किसी बुलेट ट्रेन सी चल रही होती है"

वही पर वो प्रेमिका अपने प्रेमी के पैरों के पास बैठकर उसके पैंट की जिप खोलकर उसके लण्ड को बाहर निकाल लेती है और अपने हांथ से उसे ऊपर नीचे कर सहलाने लगती है।

ये सब देख अब अरुणा और भी परेशान हो जाती है उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगती है अब अरुणा कभी राजू की तरफ तो कभी उन दोनो को देखने लगती है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो करे तो क्या करे अब अगर अरुणा खड़ी भी होती है तो राजू इस ओर जरूर देखेगा और अरुणा नही चाहती थी की उसके वहां होते हुए राजू उन दोनो को देखे अरुणा शर्म और हया से मरी जा रही थी।

अरुणा अपने मन में...ये कैसा दिन है आज का मेरा जब घर से निकली तो राजू के साथ वो हादसा और अब जब मूवी देखने आई तो ये लोग....

अरुणा अब तिरछी निगाह से उन दोनो को देखने लगती है जहां अब वह लड़की अपने प्रेमी के लण्ड को अपने मुंह में अंदर ले लेती है और उसे किसी लोलीपॉप की तरह चूसने लगती है जिसे देख अरुणा की आंखे फैल जाती है।

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अरुणा...ये तो यही शुरू हो गई अगर राजू ने इसे देख लिया तो क्या होगा मैं भी कहां इनके बगल में आ फसी अरुणा ये सोचते हुए राजू की तरफ देखने लगती है तो उसे एक और झटका लगता है जो उसने सोचा था वही हुआ राजू बड़े ध्यान से उस लड़की को घूर रहा था।

और जैसे अरुणा राजू को देखती है तो राजू की भी नजर अरुणा से मिल जाती है जिससे अरुणा बुरी तरह शर्मा जाती है और अरुणा शर्म के कारण अपनी गर्दन झुका लेती है और जमीन की ओर देखने लगती है और सोचने लगती की काश अगर अभी जमीन फट जाए तो वह उसमे समा जाए।

वही पर राजू उस लड़की को देखकर बोल पड़ता है....

राजू... छी कितनी गंदी लड़की है इतनी गन्दी चीज को मुंह में छी...और इतना कह कर राजू फिर से मूवी देखने लगता है।

लेकिन जैसे ही अरुणा राजू की ये बाते सुनती है तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वह सोचने लगती है।

अरुणा...इसका मतलब राजू अभी तक कुआरा ही है तो फिर गाड़ी में इसने मेरी बुर को कैसे पकड़ा.....इसका मतलब क्या राजू चुदायी के बारे में जानता है लेकिन अगर जानता होता तो वह इस लड़की को छी क्यूं कहता है।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।

वही अरुणा फिर से तिरछी नजर से राजू को देखती है तो पाती है की वह कभी मूवी को तो कभी उस लड़की को घूर रहा होता है और फिर अरुणा लड़की की ओर देखती है तो पाती है की वह अपने प्रेमी के पूरे लण्ड को जड़ तक लेके चूसे जा रही थी और उसका प्रेमी अब अपनी प्रेमिका का मूंह पकड़कर उसे अपने लण्ड पर जोर जोर से ऊपर नीचे कर रहा था जिससे उस लड़की की मुंह से गू गू गू की आवाजे आ रही थी जो थिएटर की आवाज में मिल रही थी।

वही राजू एक बार अरुणा को देखता है और फिर धीरे से अपना एक हाथ अरुणा की जांघ पर रख उसे धीरे से दवाते हुए पूछता है "छोटी माई देखना नहीं है क्या"...

जिसे सुन अरुणा सिर्फ ना में अपनी गर्दन हिला देती है अरुणा को ऐसा लग रहा था जैसे राजू ने उसे उस लड़की को देखने के लिए पूछ रहा है।

राजू...अपने हाथ को थोड़ा आगे खिसकाते हुए छोटी माई बहुत मजेदार है देखो ना

अरुणा एक बार राजू की आंखों में देखती है तो उसे राजू की आंखों में शरारत साफ नजर आती है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान होती है।

जिससे अरुणा फिर से अपनी गर्दन झुका लेती है और राजू के हाथ को अपने ऊपर से हटा देती है।

और फिर अरुणा तब तक ऊपर नहीं देखती जब तक इंटरवल नहीं हो जाता और जैसे ही इंटरवल होता है अरुणा वहां से निकल आती है और फिर वह थिएटर जाने से मना कर देती है।

लेकिन समय तो अभी भी बहुत बचा हुआ था और सोनू तो मूवी के लिए जिद कर रहा था तो सोनू को बस स्टैंड पर मिलने का बोल राजू और अरुणा वहां से निकल जाते है।


अरुणा और राजू कुछ दूर जाते है तो अरुणा को एक लेडीज शॉप दिख जाती है तो अरुणा राजू को वही शॉप के बाहर रुकने का बोल उस शॉप के अंदर चली जाती है। जबकी राजू वही शॉप के आस पास ही टहलता रहता है। वही अंदर अरुणा एक लेडीज से अपने साइज की ब्रा पैंटी का सेट देखने लगती है।

तभी वो लेडीज राजू को देखकर अरुणा से बोलती है।

लेडीज...मैडम आपके पति तो बहुत यंग और हैंडसम लग रहे है आपकी शादी को कितने साल हुए है।

अरुणा उस लेडीज की बात सुन दंग रह जाती है उसे विश्वास ही नहीं होता की वो लेडीज राजू को अरुणा का पति मान रही थी।

लेडीज...क्या हुआ मैडम मैंने कुछ गलत कह दिया।

जिस पर अरुणा मुस्कुराती है और बोलती है...

वैसे आपको क्या लगता है कितने साल हुए होंगे हमारी शादी को अब क्या करे ये कभी बूढ़े ही नहीं होते।

लेडीज...मुझे तो लगता है आपकी शादी अभी कभी हुई है अच्छा दीदी आपके मिस्टर आपको प्यार भी बहुत करते है देखो कैसे तब से दुकान के चक्कर लगाए जा रहे है।

अरुणा इस बार की बात पर शर्मा जाती है और फिर बोलती है हाय मेरी बहना तेरे जीजा तो इतना प्यार करते है की रात को सही से सोने भी नहीं देते।

लेडीज...सही कह रही है दीदी उनका प्यार नजर भी आ रहा है और वह लेडीज अरुणा की चुचियों को घूरने लगती है जिसे देख अरुणा बुरी तरह शर्मा जाती है और फिर पैसे दे कर हस्ते हुए बाहर आने लगती है।

अब अरुणा अपने मन में...क्या सच में ये मेरा पति लगता है या फिर वो मेरी खिल्ली उड़ा रही थी और फिर अरुणा राजू को देखते हुए "हाय री मर जावा काश तू सच में मेरा पति होता तो रात भर मैं खुद तुझे सोने ना देती"

अब अरुणा हाथ में एक थैला लिए उस शॉप से बाहर आती है जिसे देख राजू अरुणा से पूछता है।

राजू...माई इस थैले में क्या लाई हो।

अरुणा...कुछ खास नहीं है, सुनो ना जी

अभी अरुणा इतना ही बोली थी की अरुणा ने लास्ट में जो कहां और जब उसके कानो ने खुद से कहे हुए अपने शब्द सुने तो अरुणा का मूंह खुला का खुला रह गया।

वही राजू भी अरुणा के ये शब्द सुन हैरत से अरुणा को देखने लगा जिससे अरुणा एक बार फिर से मारे शर्म के पानी पानी हो गई।

लेकिन हद तो तब हो गई जब राजू ने भी अरुणा को उसका जवाब देते हुए कहा।

राजू...बोलो ना प्रिये आखिर क्या कहना चाहती है मेरी जान...

अरुणा राजू का जवाब सुन पहले तो राजू को घूरने लगती है और फिर खिलखिलाकर हसने लगती है।

अरुणा...अजी मुझे बहुत जोरो से भूँख लगी है कुछ अपनी प्रिये को खिला दो।

राजू भी कहां रुकने वाला था उसने अपनी पांचों ऊंगली को अरुणा की उंगलियों से क्रास करवाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और बोला...बोलो मेरी जान आज क्या खाना पसंद करोगी आज तुम्हारा पति तुम्हे अपने हाथों से खिलाएगा।

राजू की इस बात पर अरुणा राजू की आंखों में घुसकर देखने लगती है जैसे वह राजू की सच्चाई को जानना चाहती हो की कहीं सच में राजू उसका पति तो नहीं बनना चाहता।


अब अरुणा चुपचाप एक रिस्ट्रोरेंट में जाती है और फिर अपने और राजू के लिए कुछ खाने का ऑर्डर कर देती है, अरुणा अभी भी राजू की उस बात को याद कर राजू को ही देख रही थी और राजू भी अरुणा को ही देख रहा था दोनो एक दूसरे की आंखों में ऐसे खोए थे जैसे पहली बार मिले हो।


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तब तक वेटर उनका ऑर्डर लेके आ जाता है।

वेटर के आने पर अरुणा को होश आता है तो वह अपने चारों तरफ़ देखने लगती है तो पाती है सभी अपने में मस्त होते है तब अरुणा को राहत मिलती है और उसके बाद अब दोनो जल्दी से अपना ऑर्डर किया हुआ खाना खाने लगते है।

उसके बाद राजू और अरुणा दोनो माधव के पास चले जाते है तो देखते है की माधव अकेले ही बोरिया एक जगह इक्कठा कर रहा था तो राजू भी माधव के साथ मिलकर बोरियां दुकान से बाहर निकाल लाता है।

फिर कोई 1 घंटा इंतजार करने के बाद बस आ जाती है बस अभी ज्यादा भरी नहीं थी राजू सबसे पहले कंडक्टर से बात करता है और उसे ज्यादा रुपए देने की बात करता है जिससे कंडक्टर मान जाता है और खुद से मिलकर उन 12 बोरिया को बस में पीछे चढ़वा देता है बस में सीट तो कोई भी खाली नहीं होती जिस कारण अरुणा और राजू बस के बीचों बीच आके खड़े हो जाते है और माधव और सोनू बस में पीछे बोरियो के पास खड़े हो जाते है।

अब जैसे जैसे बस आगे बढ़ रही थी वैसे ही बस में भीड़ भी बढ़ती जा रही थी और कोई आधे घंटे के बाद बस में भीड़ इस कदर बढ़ी की लोग इधर से उधर भी नहीं आ जा सकते थे वही राजू और अरुणा भी दोनो उस भीड़ में दबे हुए थे अरुणा राजू के आगे बस के पोल को पकड़े खड़ी थी और राजू अरुणा के पीछे खड़ा था अब बस की लाइट बंद हो चुकी थी।

बस में जैसे ही लाइट बंद हुई की लोगो ने शिकार ढूढना शुरू कर दिया जो औरते मर्दों के बीच फस गई अब उनकी सिसकियां निकलनी शुरू हो गई थी वही इस भीड़ में मनचले लोग बार बार पीछे से धक्का मुक्की देने लगे जिससे अब राजू को भी धक्का लगता है जिससे राजू अब अरुणा की गांड़ से चिपक जाता है

और जैसे ही राजू को अरुणा की बड़ी गांड़ महसूस होती है उसका लण्ड फिर से अपनी औकात पर आने लगता है वही अरुणा को भी राजू के लण्ड का एहसास उसे अपनी गांड़ पर होने लगता है जिसे महसूस कर अरुणा कांप जाती है लेकिन वह भीड़ में इस कदर दबी थी की ना तो वो आगे जा सकती थी और ना ही पीछे

अरुणा आज के दिन को एक बार फिर से कोसने लगती है आज उसके और राजू के बीच कुछ भी अच्छा नही हो रहा था।

अब अरुणा अपने मन में....मत कर राजू ऐसा ये गलत है मैं तेरी माई हूं मान जा राजू ये जो तू कर रहा है अगर किसी ने देख लिया तो तेरे चाचा की क्या इज्जत रह जायेगी मैं बदनाम हो जाऊंगी और किसी को अपना मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाऊंगी।

लेकिन राजू को तो आज बिन मांगे मुराद मिल गई थी जिसे आज वह पूरी करने में लगा हुआ था।


अब राजू का लण्ड अपनी पूरी औकात में आ चुका था और जैसे ही धक्के की लहर पीछे से आती है तो राजू का भी धक्का अरुणा की गांड़ को लगता है और अरुणा को अपनी गांड़ में राजू के लण्ड की ठोकर महसूस होती है राजू का लण्ड अरुणा की मोटी गांड़ में घुस जाता है और उसे अपने सुराख में ठोकर सी महसूस होती है जिससे अरुणा की सिसकी निकल जाती है और अरुणा आगे को गिरने को होती है तो राजू अपना हाथ बढ़ाकर उसके पेट पर रख देता है और उसे अपनी ओर खींच लेता है अरुणा किसी नागिन की तरह राजू के सीने से चिपक जाती है।

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अब अरुणा धीरे धीरे मदहोश होने लगती है उसकी आंखे नशीली होने लगती है और उसके होठ फड़फड़ाने लगते है जिसे वह अपने दांतो तले भींचकर दवा लेती है।

अरुणा जब से थिएटर गई थी तब से उसकी बुर बराबर रोए जा रही थी अब अरुणा को एक धमाकेदार चुदायी की आवश्यकता थी उसका बदन खुद से हिलने लगा था और अरुणा की कमर अब थोड़ा राजू की ओर झुक गई थी।

वही एक बार फिर से करारा धक्का उसे अपने उसी छेद पर महसूस होता है जिससे अरुणा की बुर अब बुरी तरह रोने लगती है अब अरुणा की हालत खराब होती जा रही थी।

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वही राजू भी अरुणा की हालत देख मुस्कुरा रहा था और अब उसने अपने हाथ की एक ऊंगली को अरुणा की नाभी में घुसा दिया और उससे अरुणा की नाभी को कुरेदने लगा जिससे अरुणा के शरीर में मस्ती भरी लहर दौड़ गई वह राजू को रोकना चाहती थी लेकिन उसका शरीर अब उसे ऐसा करने से मना कर रहा था उसका शरीर और उसकी मोटी गांड़ राजू के मोटे लण्ड का मजा लेने लगी थी।

और फिर कुछ 10 से 15 धक्कों में अरुणा का शरीर अकड़ जाता है और अरुणा बस के खंबे को पकड़ वही झड़ने लगती है आज उसकी बुर ने दूसरी बार ढेर सारा पानी बहाया था अब अरुणा किसी दौड़ में भागे प्रतियोगी की तरह हाफने लगती है।

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वही राजू अरुणा की हालत देख मुस्कुराने लगता है।

लेकिन अभी तो ये शुरुआत थी अभी तो पूरा सफर बाकी ही था अभी अरुणा की बुर पानी से सूख भी नहीं पाई थी की राजू के धक्के फिर से उसे अपनी गांड़ पर उसी सुराख के पास महसूस होने लगते है।

लेकिन इस बार अरुणा राजू को रोकने की सोचती है और वह राजू से कहती है की वह थोड़ा दूर होकर खड़ा हो जाए तो राजू भी अरुणा की बात मानकर थोड़ी दूरी बना लेता है लेकिन अगले ही पल राजू को पीछे से एक बार फिर से धक्का लगता है और इस बार भी वही होता है राजू का घोड़े जैसा लण्ड सरसराता हुआ अरुणा की गांड़ में घुस जाता है।

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वही राजू अब आगे बढ़ता है और अरुणा के कान के पास आकर उसके कान में बोलता है।

राजू...माई इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।

अरुणा..वहां से अपनी उंगली निकालो...

राजू...माई आपकी गहराई कितनी है मेरा पूरा चला जाता है।

अरुणा राजू की बात सुन शर्मा जाती है लेकिन उसे एक चीज समझ नहीं आती की राजू उससे किस गहराई की बात कर रहा है कहीं वो मेरी गांड़ के बारे में तो नहीं कह रहा लेकिन मैने तो इससे अपनी नाभी से उसकी उंगली हटाने को कहां था जरूर ये मेरी गांड़ के बारे ही कह रहा है इसका घोड़े जैसा मोटा लण्ड भी तो मेरी गांड़ में घुसा हुआ है।

और जैसे अरुणा को पक्का यकीन हो जाता है अरुणा मारे शर्म के अपने मन में बोल पड़ती है हाय राम क्या ये मेरी गांड़ की बात कर रहा है वो अपनी माई से बोल रहा है कितना बड़ा कमीना है।

राजू अभी इतना ही बोला था की एक बार फिर से धक्का लगा और अरुणा की सिसकारी छुट गई उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे राजू का लण्ड आज उसकी साड़ी को फाड़कर उसकी गांड़ में घुस के ही मानेगा।

अब राजू अरुणा की गर्दन पर अपने होठ रख उसे किश करने लगता है जिससे अरुणा की बुर एक बार फिर से फुदकने लगती है अब वह पहले से भी अधिक रोने लगती है और अरुणा के दिल की धड़कन की रफ्तार बढ़ जाती है, उसका शरीर बुरी तरह कांप जाता है और उसकी सिसकारियों की गूंज छुट जाती जिसे राजू अच्छी तरह सुनता रहता है।

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और इसी तरह अरुणा अपनी गांड़ पर राजू मोटे लण्ड से धक्के खा खाकर दो बार और झड़ जाती है।

अब अरुणा की टांगे कांपने लगती है और अब अरुणा की हालत इस कदर हो जाती है की वह राजू की कटपुली बन जाती है उसे खुद के बारे में कोई होश ही नहीं रहता।


अब राजू अरुणा को पलट देता है लेकिन बस में अंधेरा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा होता है अब राजू अरुणा के होटों से अपने होठ जोड उसे पहला किश करने लगता है वही अरुणा भी ना चाहते हुए उसका किश में साथ देने लगती है


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अब राजू पैंट से अपना मोटा लण्ड बाहर निकाल लेता है और अरुणा के हाथ में पकड़ा देता है जैसे ही अरुणा को राजू के लण्ड का आभास होता है वह अपना हाथ हटाने लगती है लेकिन राजू तो जैसे जानता था की अरुणा इतनी जल्दी उसका लण्ड नही पकड़ेगी इसलिए वह अरुणा को हाथ नहीं हटाने देता और अपने हाथो से अरुणा के हाथ को पकड़े हुए अपने लण्ड को हिलाने लगता है।

फिर कुछ देर बाद राजू जब अरुणा खुद से उसका लण्ड हिलाने लगती है तब वह अपना हाथ हटाकर अरुणा की बुर पर रख देता है अब अरुणा के हाथ राजू के लण्ड पर ऊपर से नीचे चल रहे थे और राजू अरुणा के होठों का रसपान किए जा रहा था उसे जितना अपनी माई के सिर्फ होटों को चूसने में मज़ा मिल रहा था उतना तो सोनम और मधु को चोदने में भी नहीं आया था

अब राजू अरुणा की बुर को साड़ी के ऊपर से ही मसलने लगता है जिससे अरुणा एक बार फिर से कसमसाने लगती है और उसकी बुर फिर से उत्तेजित होने लगती है अब तक अरुणा बस में तीन बार झड़ चुकी थी और राजू अभी तक नहीं झड़ा था लेकिन अब राजू का भी लण्ड पैंट के अंदर पड़े पड़े दर्द करने लगा था जिस कारण उसने उसे बाहर निकल अरुणा को उसकी मालिश करने के लिए दे दिया।

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अरुणा भी अब पूरी लगन से राजू के लण्ड को हिलाकर उसकी अच्छे से मालिश करने लगी थी।


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अरुणा आखिरी बार राजू से मिन्नते करते हुए कहती है....... आह राजू प्लीज अब मान जा नहीं तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जायेगा तू हमेशा के लिए अपनी छोटी माई को खो देगा प्लीज भगवान के लिए इसे यही रोक दे......अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है और साथ में राजू के लण्ड को खुद से हिलाए भी जा रही होती है।

अब दोनो पूरे जोश में थे शायद जवानी का जोश इसी को कहते है....

राजू...कुछ नहीं होगा माई बस तू ऐसे ही खड़ी रह बहुत मजा आ रहा आह माई कितनी सॉफ्ट सॉफ्ट है तेरी चूचियां आह कितनी मुलायम आह माई मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

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अब अरुणा राजू के ऐसे आक्रामक हमले को नहीं रोक पाती और वो भी मस्ती में फिर से खोने लगती है और मां बेटे के रिश्ते को सूली चढ़ा देती है अब उससे और बर्दास्त नही हो पाता जिससे अब अरुणा राजू को खुद से पकड़ उसे जोरो से किस करने लगती है।

राजू....अरुणा मेरी जान बहुत मजा आ रहा है, बस ऐसे ही क्या होठ है कितना भी चूसो इनका रस खत्म होने का सवाल ही नहीं हो रहा है।

अरुणा भी राजू के कान में आकर बोलती है.....
आह राजू मेरी जान अब मुझसे बर्दास्त नही हो रहा है कुछ करो और अरुणा खुद से राजू का हाथ पकड़ उसे अपनी बुर पर रख देती है और राजू भी अरुणा की बुर को दोबारा से साडी के ऊपर से ही मसलने लगता है।

अब अरुणा राजू से उसे चोदने के लिए भी बोलने लगती है..
आह राजू प्लीज राजू अब मुझसे और बर्दास्त नही होगा प्लीज अपना मोटा लण्ड मेरी बुर में घुसा दो और अपनी माई की बुर को चोद चोदकर मादरचोद बन जाओ प्लीज राजू अपनी माई की बुर चोद दो।

अरुणा हवस की आग में राजू से क्या क्या कहे जा रही थी शायद होश में आते ही अपनी गलती का पछतावा भी हो लेकिन अभी अरुणा हवस में अंधी हो चुकी थी।

वही राजू भी अब अरुणा की साड़ी को आगे उठा देता है और अंधेरे में ही अपनी माई की बुर को पकड़ने चलता है तो उसके हाथ में पैंटी आ जाती है जिसे राजू एक पल भी बिना गवाए नीचे खिसका देता है और अब राजू अरुणा की नंगी बुर को अपने हाथो से दबोच लेता है और फिर अरुणा की बुर को मसलने लगता है राजू को अरुणा की बुर पर हल्के हल्के बाल महसूस होते है राजू को ये थोड़ा अजीब लगता है क्यूंकि उसने अभी तक जंगली बुर चोदी थी।

अब अरुणा की टांगे एक बार फिर से कांपने लगती है और उसकी कमर अपने आप हिलने लगती है।

वही राजू अब अपनी दो उंगली को अरुणा की बुर में डाल उसे आगे पीछे करने लगता है जिससे अरुणा की जोरदार सिसकियां निकलने लगती है अब अरुणा बहुत ही मुस्किल से खड़ी हो पा रही थी अगर उसने बस की ऊपर वाली रोड ना पकड़ी होती तो वो कबका गिर गई होती।

राजू.... आह अरुणा मेरी जान मजा आ रहा है देख तेरी बुर कैसे मेरी उंगलियां लिए जा रही है।

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अरुणा राजू के मुंह से अपना नाम सुनकर और भी गर्म हो जाती है और वह भी अब राजू के लण्ड के ऊपरी नोक को अपने अंगूठे से रगड़ने लगती है जिससे राजू के पूरे शरीर में एक बिजली जैसे करंट के झटके लगने लगते है।

अब अरुणा अपने मन में....राजू तुम्हारा लण्ड कितना मोटा है अब इसे तो मैं पक्का चुदने वाली हूं आह राजू काश तू पहले।मिल गया होता तो अब तक मैं तेरे बच्चे की मां भी बन जाती लेकिन कोई नहीं अब मुझे मां बनने से कोई नहीं रोक सकता।

और फिर राजू कुछ देर तक और अरुणा की बुर में उंगली करता है जिससे अरुणा की बुर एक बार फिर से झड़ने लगती है वही राजू भी अरुणा के लण्ड को उसकी नोक पर सहलाने से अब उसका भी पानी निकल जाता है।

अब दोनो ही एक दूसरे से चिपके अपनी सांसों पर काबू पाने लगते है राजू की दो उंगलियां अभी भी अरुणा की बुर में होती है और अरुणा ने भी अभी तक राजू का लण्ड पकड़ा हुआ होता है लेकिन जैसे दोनो होश में आते है अरुणा राजू के लण्ड को छोड़ देती है और खुद से अपनी बुर में से राजू का हाथ हटा देती है जिससे राजू की उंगलियां बाहर आ जाती है और अरुणा की सिसकी निकल जाती है।

वही राजू...अरुणा मेरी जान i love you तुम्हारी जैसी बात तो किसी में भी नही है क्या बुर है तेरी मजा आ गया i love you

अरुणा अब एक बार फिर से पानी पानी हो जाती है जब वह अपने बेटे के मुंह से अपनी बुर की तारीफ सुनती है लेकिन अब उसे भी अच्छा लगने लगता है।

और फिर कोई 15 मिनट के सफर के बाद राजू का स्टाफ आ जाता है और जैसे बस की लाइट जलती है तो राजू और अरुणा की नजर एक होती दोनो एक दूसरे को ऐसे घुरकर देखते है जैसे इसे पहले कभी नहीं देखा हो और फिर राजू की नजर अरुणा की हालत पर जाती है तो वह उसे इशारा करता है वही अरुणा भी अपनी हालत देख शर्मा जाती है और फिर राजू अरुणा को लेके नीचे उतर आता है लेकिन अरुणा को उतरते हुए कोई उसके चूची पकड़कर मसलता है तो कोई उसकी बुर को और कोई तो उसे चोदने को भी बोलता है लेकिन अब अरुणा को इस सब में बहुत मजा भी आता है।

वही राजू भी जल्दी से मिलकर सभी खाद की बोरियां नीचे उतरवाता है और फिर बस वहां से आगे के लिए निकल जाती है।

अभी यहां से राजू का घर कोई 500 मीटर की दूरी पर था तो माधव अरुणा को लेके घर की ओर निकल जाता है और राजू को वही पर रुकने का बोल देता है।
 
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Enjoywuth

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Bahut hi kumuk aur utejak update... Bus ab aruna ka jamir nahi jagna chaiye.. Nahin toh woh kabhi maa nahi ban payegi...

Usse raju ke sath aage badna chaiye par usko aage padne kaa aur accha aadmi banane ke liye prothsban bhi karna chaiye.. Ab bur milegi toh ho sakta hai rajju sab karne ko tyar ho jaye
 
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