SANJU ( V. R. )
Divine
जैसा अंदेशा था वैसा ही रेखा के साथ हुआ। खुबसूरत लड़की के एक इशारे पर मर्द तो सात समंदर पार उसके पहलू मे पहुंच जाए जबकि यहां , रेखा तो पके आम की तरह अपने जीजा जी के गोद मे जा टपकी थी। कोई सिद्ध महात्मा ही होगा जो ऐसे चीजों को नजरअंदाज करेगा।
खैर , जीजा - साली के अंतरंग संबंध को काफी विस्तृत और बेहद ही इरोटिक अंदाज मे प्रस्तुत किया आपने। बहुत जबरदस्त लिखा आपने।
शायद कुछ रीडर्स ने इस कहानी को किसी अन्य लेखक का नकल बताया। वैसे नकल भी किसी खास या फेमस चीज की ही होती है और नकल मे भी अकल की जरूरत पड़ती है।
अगर स्टोरी कोपी पेस्ट नही है तो फिर इन सब चीजों पर चर्चा करना बेमानी और बकवास ही है।
मनू भाई ने कुछ फिल्मों के एग्जाम्पल दिए है और उन्ही की बात को मै भी आगे बढ़ा रहा हूं।
विमल राय साहब ने दिलिप कुमार और वैजयंती माला को लेकर एक फिल्म " मधुमती " बनाई थी। इसी थीम पर राजेश खन्ना और हेमा मालिनी की " महबूबा " आई थी। और फिर इसी का नकल फराह खान ने शाहरुख खान और दीपका पादुकोण को लेकर " ओम शान्त ओम " मे किया था।
इसी तरह दिलिप कुमार, वहिदा रहमान और मुमताज की एक फिल्म " राम और श्याम " आई थी। इसके बाद इसी थीम पर धर्मेंद्र , संजीव कुमार और हेमा मालिनी की फिल्म " सीता और गीता " आई थी। फिर सन्नी देवोल , रजनीकांत और श्रीदेवी अभिनीत " चालबाज " आई थी। और फिर इसी का नकल अनिल कपूर और शिल्पा शिरोडकर अभिनीत " किशन कन्हैया " फिल्म था। और यह सभी फिल्म बहुत बड़ी हीट फिल्म थी।
जो चीज नकल लायक होती है , उसी की नकल भी होती है। बेबुनियाद नेगेटिव कमेन्ट कर राइटर्स को हतोत्साहित करना बहुत ही बुरी बात है।
आप बहुत ही बढ़िया लिख रही है Rekha rani जी। बहुत कम लोग है जो आपकी तरह विस्तृत अपडेट और उम्दा इरोटिका लिख सकते है।
खैर , जीजा - साली के अंतरंग संबंध को काफी विस्तृत और बेहद ही इरोटिक अंदाज मे प्रस्तुत किया आपने। बहुत जबरदस्त लिखा आपने।
शायद कुछ रीडर्स ने इस कहानी को किसी अन्य लेखक का नकल बताया। वैसे नकल भी किसी खास या फेमस चीज की ही होती है और नकल मे भी अकल की जरूरत पड़ती है।
अगर स्टोरी कोपी पेस्ट नही है तो फिर इन सब चीजों पर चर्चा करना बेमानी और बकवास ही है।
मनू भाई ने कुछ फिल्मों के एग्जाम्पल दिए है और उन्ही की बात को मै भी आगे बढ़ा रहा हूं।
विमल राय साहब ने दिलिप कुमार और वैजयंती माला को लेकर एक फिल्म " मधुमती " बनाई थी। इसी थीम पर राजेश खन्ना और हेमा मालिनी की " महबूबा " आई थी। और फिर इसी का नकल फराह खान ने शाहरुख खान और दीपका पादुकोण को लेकर " ओम शान्त ओम " मे किया था।
इसी तरह दिलिप कुमार, वहिदा रहमान और मुमताज की एक फिल्म " राम और श्याम " आई थी। इसके बाद इसी थीम पर धर्मेंद्र , संजीव कुमार और हेमा मालिनी की फिल्म " सीता और गीता " आई थी। फिर सन्नी देवोल , रजनीकांत और श्रीदेवी अभिनीत " चालबाज " आई थी। और फिर इसी का नकल अनिल कपूर और शिल्पा शिरोडकर अभिनीत " किशन कन्हैया " फिल्म था। और यह सभी फिल्म बहुत बड़ी हीट फिल्म थी।
जो चीज नकल लायक होती है , उसी की नकल भी होती है। बेबुनियाद नेगेटिव कमेन्ट कर राइटर्स को हतोत्साहित करना बहुत ही बुरी बात है।
आप बहुत ही बढ़िया लिख रही है Rekha rani जी। बहुत कम लोग है जो आपकी तरह विस्तृत अपडेट और उम्दा इरोटिका लिख सकते है।