"मुझे पता नहीं था कि आप ...." इतने में आदित्य रुक गया ।
"अरे इसमें आपको थोड़ी ना पता होगा । में वैसे भी देखना चाहती आपकी teaching skill इसीलिए बिना कुछ बताए student बनकर आए गई ।" जानकी ने मुस्कुराके कहा।
"मेरी बात का बुरा तो नहीं लगा ना आपको ?" आदित्य ने हिचकिचाते हुए पूछा ।
"इसमें बुरा किस बात का लगे ? अपने पर्सनल interest से कहा । टाइम पे आने के बारे में सभी प्रोफेसर्स नहीं बोलते ।
"Thank you so much ma'am."
"तो क्या आप तैयार है आनेवाले lectures के लिए ?"
"मतलब क्या ने इस job के लिए qualify hoon?"
"हां आप qualify है ।"
"लेकिन ma'am आपने मेरी certificate या फिर graduation degree Kuch भी नहीं देखा और फिर भी मुझे इस job के लिए हा कर दिया ?"
"में अच्छे से आपको । आप मेजर आदित्य सिंह है ना जिसे president के हाथो से वीर चक्र मिला अपनी ईमानदारी और बहादुरी के लिए ?" जानकी ने बड़ी जिज्ञासा से पूछा ।

"जी हां । लेकिन अजीब बात है । देश के लोग हम फौजियों को पहचानते है ।" आदित्य भावुक होकर कहा ।
"आप हम जैसे लोगों के लिए मिसाल है । तो कहिए क्या आप तैयार है इस job के लिए ?"
"जी मेरी खुश किस्मत होगी ।
"So welcome to this college ." जानकी ने आदित्य की तरफ हाथ आगे बढ़ाया । आदित्य ने भी हाथ आगे बढ़ाया । दोनों ने हाथ मिलाया ।
"एक सवाल पूछना है आपसे । आप कमांडो थे then why you didn't applied for sports subject ?"
" ma'am. ये सब्जेक्ट मेरा नहीं है । ये तो किसी sportsman Ka subject है । वैसे भी मैंने commerce me पढ़ाई की है तो इसका मुझे पूरा ज्ञान है ना कि sports का । अच्छा ही है कि कोई sportsman ही ये काम करे जिससे उसके talent ki इज्जत हो और ना आगे जाकर कोई sportsman किसी भी छोटे काम करने के लिए मजबूर हो ।"
"That's so nice of you."
"अच्छा ma'am तो कब next lecture हैै मेरा ?"
"कल से । See you around."
दोनों वहा से अलग हुए । आदित्य को अच्छा लगा कि ये job उसे मिल गई । वैसे भी pension से कब तक खाली बैठा रहता ? कम से कम अपने लायक कोई काम तो मिला ।
वैसे जानकी एक successful economic professor है । अपने कई सारे theory भी पब्लिश की । चेन्नई यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट है । पढ़ाई में काफी अच्छी रही । पिछले साल अपना P.H.D पूरा किया । अब तक शादी नहीं हुई क्योंकि अपने पापा की तरह आगे बढ़कर लोगो को पढ़ना था । पिताजी तो नहीं थे इस दुनिया में । पिताजी के गुजर जाने के बाद चाचा ने कॉलेज के ट्रस्टी बने । चाचा का नाम महेश पांडे है । मतलब अपने भी का जायदाद के मालिक । जानकी के चाचा बहुत नेक दिल और अच्छे व्यक्ति है । बचपन से जानकी को बेटी जैसा माना । कभी किसी चीजों की कमी नहीं होने दी । करोड़ों की जायदाद लेकिन कोई घमंड नहीं ।
रही बात आदित्य की तो वो भी शादी नहीं किया । फौज में होने की वजह से जरूरत नहीं पड़ी । बचपन से अकेला और तन्हा इंसान । ज़िन्दगी ने अजीब का जुल्म किया उसपे । सिर से मां बाप का साया हट गया था । पिता फौज में थे इसीलिए शुरुआत की जिंदगी कुचभद तक अच्छी रही ।
घर पहुंचते ही खुद के लिए कॉफी बनाया । कॉफ़ी के बाद workout स्टार्ट किया । अपने शरीर की काफी अच्छे से maintain किया हुआ है ।

जानकी रोज की तरह दोपहर को घर वापिस लोटी ।
"Hi चाचू ।" जानकी अपने चाचा से गले लगते हुए कहा ।
"Hi बेटा । तो बताओ कैसा रहा आज का दिन ?"
"अच्छा ।" अपने सामान को रखते हुए आंख बंद करके बैठ गई ।
"काफी थक गई हो बेटा । थोड़ा कम stress लिया करो । Common कल से कुछ दिनों कि छुट्टी ले लो ।"
"नो चाचा । ये वक़्त नहीं है छुट्टी लेने का । बहुत काम बाकी है college का ।"
"बेटा stress से तबीयत खराब हो जाएगी ।"
"आप जानते हो ना मेरी stress Ka इलाज ।"
"Yes I know fear."
"शाम को मिलूंगी बाय ।" जानकी ने चाचा को कहा ।
जानकी चली गई बाहर घूमने । वैसे शिमला की एक बात खास है । गर्मी हो या सर्दी का मौसम , इस शहर की खूबसूरती में कोई गिरावट नहीं आती । ये शहर की रचना जी कुछ ऐसी हुई। आज सुबह जानलेवा ठंडी तो दोपहर सूरज के आने से थोड़ी हल्की जी गर्माहट का इजाफा हुआ । जानकी बिना स्वेटर के बाहर चली गई । बाहर चलते चलते कुदरत की गोद में झूलते हुए वो पहुंची नदी के पास कहा सूरज की हल्की सी तेज बेहती नदी की सुंदरता को अलग का विवरण दिए जा रहा था । वो शुद्ध जल बेहतर हुए नजने किस मंज़िल की ओर जा रहा था । कोई शोर गुल नहीं ना कोई चिंता । जानकी की थकान जैसे जाती जा रही थी ।
जानकी नदी के पास शांति से बैठी । वहा उसकी नजर थोड़े दूर एक आदमी पे पड़ा । वो कोई और नहीं बल्कि आदित्य था । उस वक़्त आदित्य running कर रहा था । दौड़ते दौड़ते वो रुक गया । अपने stop watch को बंद करते हुए रिलैक्स करने लगा। Relax करने के बाद वो आगे बढ़ा तो सामने जानकी को देखा । जानकी की नजर आदित्य पे गई । दोनों एक दूसरे को देखकर स्माइल किया ।
"Ma'am आप यह ?" आदित्य ने मुस्कुराते हुए पूछा ।

"मैं बस थोड़ा घूम रही थी । By the way nice to see you again." जानकी भी जवाब देते हुए मुस्कुरा दी ।

"ये जगह बहुत अच्छी है ।" आदित्य ने कहा ।
"ये शिमला की सबसे खूबसूरत जगह है । यह अक्सर लोग मन को शांत करने आते है ।"
"मेरे लिए exercise करने की अच्छी जगह है ।"
"हा वो दिख रहा है । Hard exercise कर रहे है आप ।"
"बिल्कुल। अच्छा ma'am मै चलता हूं । See you tomorrow." इतना कहकर आदित्य आगे चला गया और जानकी वहा ही आराम से बैठ गई ।
"अरे इसमें आपको थोड़ी ना पता होगा । में वैसे भी देखना चाहती आपकी teaching skill इसीलिए बिना कुछ बताए student बनकर आए गई ।" जानकी ने मुस्कुराके कहा।
"मेरी बात का बुरा तो नहीं लगा ना आपको ?" आदित्य ने हिचकिचाते हुए पूछा ।
"इसमें बुरा किस बात का लगे ? अपने पर्सनल interest से कहा । टाइम पे आने के बारे में सभी प्रोफेसर्स नहीं बोलते ।
"Thank you so much ma'am."
"तो क्या आप तैयार है आनेवाले lectures के लिए ?"
"मतलब क्या ने इस job के लिए qualify hoon?"
"हां आप qualify है ।"
"लेकिन ma'am आपने मेरी certificate या फिर graduation degree Kuch भी नहीं देखा और फिर भी मुझे इस job के लिए हा कर दिया ?"
"में अच्छे से आपको । आप मेजर आदित्य सिंह है ना जिसे president के हाथो से वीर चक्र मिला अपनी ईमानदारी और बहादुरी के लिए ?" जानकी ने बड़ी जिज्ञासा से पूछा ।

"जी हां । लेकिन अजीब बात है । देश के लोग हम फौजियों को पहचानते है ।" आदित्य भावुक होकर कहा ।
"आप हम जैसे लोगों के लिए मिसाल है । तो कहिए क्या आप तैयार है इस job के लिए ?"
"जी मेरी खुश किस्मत होगी ।
"So welcome to this college ." जानकी ने आदित्य की तरफ हाथ आगे बढ़ाया । आदित्य ने भी हाथ आगे बढ़ाया । दोनों ने हाथ मिलाया ।
"एक सवाल पूछना है आपसे । आप कमांडो थे then why you didn't applied for sports subject ?"
" ma'am. ये सब्जेक्ट मेरा नहीं है । ये तो किसी sportsman Ka subject है । वैसे भी मैंने commerce me पढ़ाई की है तो इसका मुझे पूरा ज्ञान है ना कि sports का । अच्छा ही है कि कोई sportsman ही ये काम करे जिससे उसके talent ki इज्जत हो और ना आगे जाकर कोई sportsman किसी भी छोटे काम करने के लिए मजबूर हो ।"
"That's so nice of you."
"अच्छा ma'am तो कब next lecture हैै मेरा ?"
"कल से । See you around."
दोनों वहा से अलग हुए । आदित्य को अच्छा लगा कि ये job उसे मिल गई । वैसे भी pension से कब तक खाली बैठा रहता ? कम से कम अपने लायक कोई काम तो मिला ।
वैसे जानकी एक successful economic professor है । अपने कई सारे theory भी पब्लिश की । चेन्नई यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट है । पढ़ाई में काफी अच्छी रही । पिछले साल अपना P.H.D पूरा किया । अब तक शादी नहीं हुई क्योंकि अपने पापा की तरह आगे बढ़कर लोगो को पढ़ना था । पिताजी तो नहीं थे इस दुनिया में । पिताजी के गुजर जाने के बाद चाचा ने कॉलेज के ट्रस्टी बने । चाचा का नाम महेश पांडे है । मतलब अपने भी का जायदाद के मालिक । जानकी के चाचा बहुत नेक दिल और अच्छे व्यक्ति है । बचपन से जानकी को बेटी जैसा माना । कभी किसी चीजों की कमी नहीं होने दी । करोड़ों की जायदाद लेकिन कोई घमंड नहीं ।
रही बात आदित्य की तो वो भी शादी नहीं किया । फौज में होने की वजह से जरूरत नहीं पड़ी । बचपन से अकेला और तन्हा इंसान । ज़िन्दगी ने अजीब का जुल्म किया उसपे । सिर से मां बाप का साया हट गया था । पिता फौज में थे इसीलिए शुरुआत की जिंदगी कुचभद तक अच्छी रही ।
घर पहुंचते ही खुद के लिए कॉफी बनाया । कॉफ़ी के बाद workout स्टार्ट किया । अपने शरीर की काफी अच्छे से maintain किया हुआ है ।

जानकी रोज की तरह दोपहर को घर वापिस लोटी ।
"Hi चाचू ।" जानकी अपने चाचा से गले लगते हुए कहा ।
"Hi बेटा । तो बताओ कैसा रहा आज का दिन ?"
"अच्छा ।" अपने सामान को रखते हुए आंख बंद करके बैठ गई ।
"काफी थक गई हो बेटा । थोड़ा कम stress लिया करो । Common कल से कुछ दिनों कि छुट्टी ले लो ।"
"नो चाचा । ये वक़्त नहीं है छुट्टी लेने का । बहुत काम बाकी है college का ।"
"बेटा stress से तबीयत खराब हो जाएगी ।"
"आप जानते हो ना मेरी stress Ka इलाज ।"
"Yes I know fear."
"शाम को मिलूंगी बाय ।" जानकी ने चाचा को कहा ।
जानकी चली गई बाहर घूमने । वैसे शिमला की एक बात खास है । गर्मी हो या सर्दी का मौसम , इस शहर की खूबसूरती में कोई गिरावट नहीं आती । ये शहर की रचना जी कुछ ऐसी हुई। आज सुबह जानलेवा ठंडी तो दोपहर सूरज के आने से थोड़ी हल्की जी गर्माहट का इजाफा हुआ । जानकी बिना स्वेटर के बाहर चली गई । बाहर चलते चलते कुदरत की गोद में झूलते हुए वो पहुंची नदी के पास कहा सूरज की हल्की सी तेज बेहती नदी की सुंदरता को अलग का विवरण दिए जा रहा था । वो शुद्ध जल बेहतर हुए नजने किस मंज़िल की ओर जा रहा था । कोई शोर गुल नहीं ना कोई चिंता । जानकी की थकान जैसे जाती जा रही थी ।
जानकी नदी के पास शांति से बैठी । वहा उसकी नजर थोड़े दूर एक आदमी पे पड़ा । वो कोई और नहीं बल्कि आदित्य था । उस वक़्त आदित्य running कर रहा था । दौड़ते दौड़ते वो रुक गया । अपने stop watch को बंद करते हुए रिलैक्स करने लगा। Relax करने के बाद वो आगे बढ़ा तो सामने जानकी को देखा । जानकी की नजर आदित्य पे गई । दोनों एक दूसरे को देखकर स्माइल किया ।
"Ma'am आप यह ?" आदित्य ने मुस्कुराते हुए पूछा ।

"मैं बस थोड़ा घूम रही थी । By the way nice to see you again." जानकी भी जवाब देते हुए मुस्कुरा दी ।

"ये जगह बहुत अच्छी है ।" आदित्य ने कहा ।
"ये शिमला की सबसे खूबसूरत जगह है । यह अक्सर लोग मन को शांत करने आते है ।"
"मेरे लिए exercise करने की अच्छी जगह है ।"
"हा वो दिख रहा है । Hard exercise कर रहे है आप ।"
"बिल्कुल। अच्छा ma'am मै चलता हूं । See you tomorrow." इतना कहकर आदित्य आगे चला गया और जानकी वहा ही आराम से बैठ गई ।

