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बर्फ़ीली पहाड़ियों पर तैनात एक जवान
विक्रम 21 साल का जवान था —
लंबा, काँधे चौड़े, तीखी आँखें, और चेहरे पर वो गंभीरता, जो सिर्फ़ उन्हीं को आती है, जिन्होंने मौत को आँखों देखा हो। वो भारत-पाकिस्तान सीमा पर, बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों पर तैनात था, जहाँ तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे चला जाता था, और हर साँस एक चुनौती बन जाती थी। पर विक्रम के लिए ये सब मामूली था — क्योंकि वो उस मिट्टी का बेटा था, जिसने उसे मर्द बनना सिखाया था।

उसकी टीम में हर कोई उसे "शेर-ए-पहाड़" कहता था। वो अकेला ऐसा जवान था, जो बिना राइफल के दुश्मन के सामने जा सकता था, सिर्फ़ अपने हौसले और चालाकी के दम पर। उसके साथी सिपाही उसकी बहादुरी के किस्से सुनाते-सुनाते थकते नहीं थे — और विक्रम मुस्कुराता हुआ सबको टाल देता था, मानो ये सब उसके लिए कोई बड़ी बात न हो।
घटना करीब 6 महीने पहले की थी। उनकी टुकड़ी को एक मुखबिर ने खबर दी कि दुश्मन की 20 लोगों की घातक टीम उनके कैंप से महज 2 किलोमीटर दूर छिपी हुई है। कर्नल सिंह ने तुरंत ऑपरेशन शुरू करने का आदेश दिया, मगर अंधेरे और बर्फीली घाटी में दुश्मन की गोलियाँ बारिश की तरह बरस रही थीं। बस एक पल — एक RPG ग्रेनेड सीधा कर्नल सिंह की ओर आया। सब चीख पड़े, पर विक्रम ने बिना किसी झिझक के अपने शरीर को कर्नल के ऊपर झोंक दिया। ग्रेनेड ने उनकी जीप को चकनाचूर कर दिया, पर विक्रम सिर्फ़ बाहरी चोटों के साथ बच गया, और कर्नल की जान बच गई।

उस रात विक्रम ने अकेले ही 4 दुश्मनों को मार गिराया, और बाकी को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। अगली सुबह कर्नल ने पूरी टुकड़ी के सामने विक्रम को "सौर्य चक्र" के लिए नामांकित किया और कहा — "ये जवान नहीं, शेर है… और जिस देश में ऐसे शेर हों, वो कभी हार नहीं सकता।" उस दिन पूरे कैंप में विक्रम का नाम गूँज रहा था — और वो बस चुपचाप अपनी जाँघ पर लगी पट्टी को देखता रहा, मानो ये सब कोई और कर रहा हो।
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हर सिपाही विक्रम का दीवाना था — कोई उसे अपना भाई मानता था, तो कोई अपना रोल मॉडल। एक दिन उसका साथी सिपाही रणवीर बोला, "विक्रम, चल आज रात ड्यूटी मैं संभालता हूँ…" तो दूसरा हँसते हुए बोला, "नहीं-नहीं, कल उसकी ड्यूटी है… पर भई क्या बात है, तू सच में जानवर है?" विक्रम मुस्कुराता और बोलता, "जानवर हूँ तो क्या हुआ? देश की खातिर, और अपनों के लिए।"
हर रविवार को वो अपनी टुकड़ी के लिए कहानियाँ सुनाता — गाँव की, अपनी माँ और छोटी बहन की, जो उसे पागलों की तरह मिस करती थीं। हँसते हुए वो कहता, "मेरी बहना बहुत शैतान है… माँ कहती है तेरे बिना घर सूना है… पर मैं जानता हूँ, कि मेरी वर्दी ही मेरा पहला प्यार है।"
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विक्रम की माँ एक साधारण ग्रामीण महिला थीं, जिन्होंने अपने बेटे को देश की खातिर पाला था। और उसकी छोटी बहन — 19 साल की, मासूम, शैतान, और अपने भाई की दीवानी — वो हर रात अपने भाई का पुराना फोटो देखती, और आँसू बहाती। पर वो कभी रोती नहीं थी, क्योंकि उसे पता था कि उसका भाई किसी और की मुस्कान के लिए लड़ रहा है।

विक्रम नियमित रूप से WhatsApp कॉल करता था — पर अक्सर नेटवर्क कमज़ोर होता, और वो बस अपनी माँ और बहना की आवाज़ सुनकर संतोष कर लेता था। एक दिन उसकी बहना ने वीडियो कॉल पर पूछा, "भैया… तुम कब आओगे घर?" विक्रम की आँखें नम हो गईं, पर उसने बस कहा, "जल्दी, बहना… जल्दी ही लौटूंगा।"















