If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.
कुछ देर बाद नेहा की आवाज़ आई, "भैया, खाना तैयार है। आ जाओ।"
मैंने फोन रखा और बिस्तर से उठ गया। सीढ़ियाँ उतरते हुए रसोई से आ रही सुगंध ने मेरा स्वागत किया—ताज़ी बनी सब्ज़ी, गरम पराठे, और दही की खुशबू। नेहा ने मेज पर सब रख दिया था। वह सामने बैठ गई, उसी ढीली कमीज़ और पजामी में, लेकिन उसके बाल अब खुले हुए थे, कंधों पर बिखरे।
हमने खाना शुरू किया। सुबह की हल्की-फुल्की बातें चलती रहीं—पापा की यात्रा, मौसम, कुछ भी। मैंने पराठे का स्वाद चखा और कहा, "वाह, नेहा। तूने तो कमाल कर दिया। ये पराठे बहुत ही स्वादिष्ट हैं।"
नेहा मुस्कुराई, उसकी आँखों में चमक और गर्व दोनों था। "तुम्हारी पसंदीदा चीज़ तो है ही। सोचा, पापा के जाने के बाद तुम्हें कुछ ख़ास मिले।"
"मिल रहा है," मैंने कहा और एक और पराठा उठाया। उसकी निगाहें मेरी तरफ थीं, और उस मुस्कान में कुछ और था—शायद वही राज़ जो हम दोनों के बीच बनता जा रहा था।
खाना खत्म करने के बाद मैंने पानी पिया और ऊपर जाने का मन बनाया। ऑफिस के लिए तैयार होने से पहले एक सिगरेट पीने की इच्छा हुई। मैं सीढ़ियाँ चढ़कर टॉप फ्लोर पर पहुँचा, जहाँ रसोई और छत की तरफ जाने वाला दरवाज़ा था। नेहा वहाँ खड़ी थी, बर्तन धो चुकी थी, हाथों को तौलिए से पोंछ रही थी।
"क्या हुआ, भैया? किधर?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
"चल, सिगरेट पी लें। तू भी चल?" मैंने उसे देखते हुए कहा। उसकी बाँहों की नर्मी, उसके बालों की खुशबू—सब कुछ मुझे उसकी तरफ खींच रहा था।
नेहा ने तौलिया रखा और सिर हिलाया। "हाँ, चलती हूँ।"
हम छत पर आ गए। सबेरे की हल्की धूप थी, लेकिन छाँव में ठंडक थी। मैंने सिगरेट निकाली, दो सुलगाए, एक उसे दे दिया। हम दोनों ने सिगरेट को होंठों से पकड़ा, पहली फुंक ली। धुआँ हवा में तैरता हुआ ऊपर उठा।
नेहा ने सिगरेट पकड़े हुए मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में शरारत थी। "भैया, तुमने कभी सुबह सिगरेट नहीं पी थी। आज पापा की गैरमौजूदगी का फायदा उठा रहे हो न?"
मैंने सिगरेट का कश लेते हुए मुस्कुराया। "हाँ, तू भी तो उठा रही है। सुबह-सुबह मेरे साथ सिगरेट पी रही है—जो पापा होते तो कभी नहीं होने देते।"
नेहा ने हल्की-सी हँसी दी। "तो क्या? हम दोनों एक जैसे ही हैं।"
मैंने उसकी तरफ झुकते हुए कहा, "तो फिर इस फायदे को पूरा लेना चाहिए। कल शाम की बातचीत तो पक्की है न? डिस्को और नाइट आउट— जो हमने प्लान किया था।"
नेहा की आँखों में उत्साह चमक गया। "हाँ भैया, बिल्कुल! सीमा भी तैयार है। मैं तो पूरे दिन से सोच रही हूँ।"
"तो चिंता मत कर। डिनर का प्लान मैंने कर लिया है—बाहर खाना, फिर पब में ड्रिंक्स, फिर डिस्को। वहाँ ड्रिंक्स महँगे होंगे, इसलिए पहले पब से सेट हो जाएँगे।"
नेहा ने सिगरेट को एक बार और खींचा, फिर मुझे देखते हुए कहा, "थैंक्यू, भैया। तुम हो तो मज़ा आता है।"
मैंने मौका देखा। उसका हाथ अभी भी सिगरेट पकड़े हुए था—दाहिने हाथ में। मैं आगे बढ़ा और उसे एक गले से लगा लिया। वह चौंकी नहीं, बल्कि उसने भी सिगरेट वाले हाथ को थोड़ा ऊपर उठाते हुए मुझे वापस गले लगा लिया। उसकी बाँहें मेरी पीठ पर आईं, उसका शरीर मेरे सीने से सट गया। उसकी कमीज़ के नीचे उसके शरीर की गर्मी मैं महसूस कर सकता था। मैंने उसे कसकर दबाया, उसके बालों की खुशबू ने मुझे घेर लिया।
फिर मैंने धीरे से कहा, "सुन, पक्का करना कि तू और सीमा वक्त पर तैयार हो जाएँ। मैं शाम को सात बजे तक घर आ जाऊँगा।"
नेहा ने अपना चेहरा मेरे कंधे से हटाया और मेरी आँखों में देखते हुए कहा, "पक्का, भैया। हम तैयार रहेंगे।"
मैंने उसे एक बार और देखा, फिर सिगरेट का अंतिम कश लेकर उसे बुझाया। "चल, मैं ऑफिस निकलता हूँ।"
मैं सीढ़ियों से नीचे उतरा, तैयार हुआ, और बाइक स्टार्ट की। पूरे रास्ते में नेहा का वह गला लगाना, उसके शरीर की नर्मी, मेरे दिमाग में घूमती रही। ऑफिस पहुँचकर भी मैं ध्यान नहीं लगा पा रहा था। बस शाम का इंतज़ार था।
लंच टाइम में मैंने फोन निकाला और नेहा के इंस्टाग्राम अकाउंट को चेक किया। उसने एक नई रील डाली थी। मेरा दिल जोर से धड़का। वीडियो में वह वही लाल पार्टी मिनी स्कर्ट ड्रेस पहने थी—स्लीवलेस, प्लंजिंग नेकलाइन, जो उसके स्तनों के उभार को साफ दिखा रही थी। वह कैमरे में मुस्कुरा रही थी, फिर थोड़ा झुककर अपनी क्लीवेज की तरफ ध्यान खींच रही थी। उसकी टाइट ड्रेस ने उसके कस्से हुए एस्सेस को और निखार दिया था।
मैंने वीडियो को बार-बार देखा। उसके हाव-भाव, उसकी आँखों की शरारत, वह सब कुछ जो वह कैमरे के सामने कर रही थी। मेरे अंदर की आग और भड़क गई। मैंने मन ही मन फैसला कर लिया—आज रात मैं मौका लेकर रहूँगा। उसके शरीर को छूने का, उसे महसूस करने का अवसर नहीं छोड़ूँगा। अगर आज नहीं तो शायद फिर कभी नहीं मिलेगा।
ऑफिस खत्म होते ही मैंने अपना बैग उठाया। फोन बजा—किरण का कॉल था। मैंने उठाया तो उसने कहा, "यार राज, आज शुक्रवार है। हमारी उसी जगह मिलते हैं। बिकाश भी आ रहा है।"
"नहीं भाई, आज नहीं। नेहा और उसकी दोस्तों ने कुछ प्लान किया है। तुम लोग जाओ, मैं किसी और दिन आ जाऊँगा," मैंने कहा और कॉल काट दी।
बाइक स्टार्ट की और घर की ओर निकल पड़ा। पूरे रास्ते मेरे दिमाग में सिर्फ नेहा का शरीर था—वह लाल ड्रेस, उसकी जाँघें, उसकी नेकलाइन, वह तरीका जो वह कैमरे में अपने आप को पेश कर रही थी। मैंने बाइक की रफ्तार बढ़ा दी।
घर पहुँचा और बेल बजाई। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई—और मैं जानता था कि आज रात कुछ बदलने वाला है।
दरवाज़ा खुला। नेहा वहीं खड़ी थी—उसके चेहरे पर वही उत्साह था जो मैंने सुबह देखा था। उसने अब अपने कपड़े बदल लिए थे, हल्का-सा टॉप और शॉर्ट्स पहने हुए थी। उसके बाल खुले हुए थे, कंधों पर बिखरे। उसकी आँखों में चमक थी।
"भैया, कितने बजे निकलना है पब के लिए?" उसने तुरंत पूछा, जैसे पूरे दिन वही सवाल उसके मन में घूम रहा हो।
मैंने दरवाज़ा बंद किया और मुस्कुराते हुए कहा, "छह बजे तक तैयार हो जाओ।"
नेहा की आँखें चमक उठीं। "ठीक है, मैं सीमा को भी इन्फॉर्म कर देती हूँ।" उसने अपना फोन निकाला और टाइप करने लगी।
"मैं थोड़ा रेस्ट करूँगा। तैयार हो जाना," मैंने कहा।
"हाँ भैया, मैं भी कमरे में ही हूँ। जब तक तैयार होना है," उसने कहा और अपने कमरे की ओर मुड़ गई।
मैं अपने कमरे में आया। दरवाज़ा बंद किया। मैंने कपड़े बदले—ढीले-ढाले शॉर्ट्स और बनियान पहन लिया। बिस्तर पर लेटते ही मेरा हाथ फोन की ओर बढ़ गया। इंस्टाग्राम खोला। नेहा का अकाउंट—स्रीया—मेरी स्क्रीन पर था।
मैंने अपने नकली नाम आदित्य से मैसेज टाइप किया: "Hello"
बस दो सेकंड में जवाब आया: "Hello"
मेरे अंदर एक हलचल हुई। वह मेरे कमरे से बस कुछ ही फीट दूर थी। दीवार के उस पार। वहीं बैठी हुई, अपने फोन पर मैसेज टाइप कर रही थी। मेरी उंगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन मैंने रुकना नहीं चाहा।
मैंने लिखा: "Kya kar rahi ho aaj shaam? Friday night ke kuch plans hain?"
जवाब आया: "Haan, pub ja rahi hoon. Aur shayad disco bhi late night."
मेरे मुँह पर मुस्कान आ गई। मैंने फिर लिखा: "Kiske saath ja rahi ho?"
"Apni bestfriend ke saath."
"Bestfriend ladka hai ya ladki?" मैंने पूछा, जानते हुए भी कि वह क्या जवाब देगी।
"Ladka hai. Aur wo bahut handsome hai." उसके जवाब ने मेरे अंदर गुदगुदी पैदा कर दी। मैं जानता था कि वह मेरे बारे में बात कर रही है, लेकिन मैं आदित्य था—उसके लिए एक अनजान व्यक्ति।
मैंने एक कदम और आगे बढ़ाया: "Achha? To kya aaj raat kiss karne wale ho? Aur baad mein kuch physical bhi?"
जवाब में एक लंबा LOL आया: " Aap toh bahut aage nikle."
"Bas poochh raha hoon. Aaj kal ke ladke toh mauka nahi chhodte," मैंने लिखा।
"Kya pata? Dekhte hain," उसने एक शरारती इमोजी के साथ जवाब दिया।
मेरा शॉर्ट्स अब तंग हो रहा था। मैंने करवट ली, दीवार की ओर मुँह करके लेट गया। मैं सुन सकता था—उसके कमरे से हल्की-सी आवाज़ें आ रही थीं। शायद वह अपने फोन पर कुछ और कर रही थी, शायद मेरा जवाब देने के लिए रुकी थी।
फिर उसने लिखा: "Chalo, ab mujhe ready hona hai. Night out ke liye taiyaari karni hai. Goodbye!"
मैंने जल्दी से लिखा: "Theek hai, good luck! Aur ek baat—rubber use karna mat bhoolna."
एक पल का सन्नाटा। फिर उसका सवाल आया: "Rubber kya hota hai?"
मेरे होठों पर मुस्कान फैल गई। वह जानबूझकर पूछ रही थी, या सच में नहीं जानती थी? मैंने सीधा जवाब दिया: "Condom."
एक बार फिर LOL का ढेर: " Aapko toh kuch aur nahi sochta. Good night!"
"Good night, Sriya," मैंने लिखा और फोन बंद कर दिया।
लेकिन मेरी आँखें बंद नहीं हो रही थीं। दीवार के उस पार वह थी। वही लाल ड्रेस पहने। वही शरीर। वही नेकलाइन। मैंने आँखें बंद कीं तो उसके शरीर की कल्पना आने लगी। उसकी जाँघें। उसके स्तन। उसकी गर्दन। मैंने अपने शॉर्ट्स में हाथ डाला और अपने उभार को सहलाया, लेकिन अभी नहीं। आज रात। मैंने फैसला किया—आज रात सब कुछ बदलने वाला है। और मैं पीछे नहीं हटूँगा।