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Incest मेरी बहन नेहाकी कातिल जवानी

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Raaj Sinha

Raaz
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मेरी बहन नेहाकी कातिल जवानी
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शुक्रवार की सुबह थी और मेरी नींद एक अजीब सी उत्तेजना के साथ खुली। दिल्ली के पास बसे इस आधुनिक शहर की भागदौड़ के बीच, मेरा घर मेरे लिए सुकून की जगह था, लेकिन आज का दिन कुछ खास था। 'गुड फ्राइडे' की शाम को दोस्तों के साथ शराब और गपशप का जो दौर चलता है, उसका इंतज़ार मुझे पूरे हफ्ते रहता है। मैं बिस्तर से उठा और अपनी एथलेटिक बॉडी को स्ट्रेच किया। आईने में खुद को देखते हुए मुझे अपनी बनावट पर गर्व महसूस हुआ—चौड़े कंधे और तराशा हुआ शरीर, जिसे मैं अपनी नियमित कसरत से बनाए रखता हूँ। नहाकर और फ्रेश होकर जब मैं अपने कमरे में व्यायाम कर रहा था, तभी नीचे रसोई से नेहा की आवाज़ आई, "भैया, चाय तैयार है!" नेहा, मेरी 23 साल की बहन, घर की जान है। माँ के जाने के बाद उसने जिस तरह से घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ संभाली हैं, वह काबिले तारीफ है। वह लंबी है, स्लिम है और उसकी फिगर किसी मॉडल जैसी है। जब वह घर के कपड़ों में भी होती है, तो उसकी मासूमियत और खूबसूरती का संगम मुझे अक्सर एक अलग तरह की कशिश महसूस कराता है, जिसे मैं दुनिया की नज़रों से, और शायद खुद से भी छिपाकर रखता हूँ। मैं नीचे गया और रसोई में रखी अपनी चाय उठाई। हमारा घर ढाई मंजिला है, जहाँ ऊपर की मंजिल पर आधा हिस्सा रसोई और आधा हिस्सा खुली छत है। मैं चाय का कप लेकर छत की ओर बढ़ा। वहाँ का नज़ारा सुकून देने वाला था। नेहा रेलिंग के पास खड़ी होकर शहर के लैंडस्केप को निहार रही थी। सुबह की हल्की धूप उसकी त्वचा पर पड़ रही थी, जिससे उसकी रंगत और भी निखर उठी थी। उसने एक हल्का सूती कुर्ता पहना था, जो उसकी पतली कमर और सुडौल शरीर को खूबसूरती से उभार रहा था। पिताजी पास ही एक कुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे। मैं उनके बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया। पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन माँ के गुज़रने के बाद वे अंदर से टूट गए थे और अब शराब का सहारा लेने लगे थे।
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"आज शाम को मैं अपने पुराने दोस्त के घर जा रहा हूँ," पिताजी ने अखबार से नज़रें हटाए बिना कहा। नेहा ने तुरंत टोकते हुए कहा, "पापा, फिर से वही? प्लीज, आज ज़्यादा मत पीना।" पिताजी हल्के से हँसे और नेहा के सिर पर हाथ फेरते हुए बोले, "अरे बेटा, बस थोड़ा सा। तू इतनी चिंता क्यों करती है?" मैंने बातचीत में कूदते हुए कहा, "मैं भी आज शाम दोस्तों के साथ हूँ, तो मैं रात 9 बजे तक घर आने की कोशिश करूँगा।" नेहा ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी शिकायत और अकेलापन था। "आप भी वही करेंगे, है ना? आप लोग बस अपनी मौज-मस्ती में रहते हैं। मैं यहाँ घर में अकेली बोर हो जाती हूँ।" उसकी आवाज़ में एक तरह की मासूमियत और तड़प थी। जब उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर मेरी तरफ देखा, तो उसकी बॉडी का कर्व साफ़ नज़र आ रहा था। समाज और परिवार के सामने मैं एक सभ्य और संस्कारी बेटा और भाई हूँ, लेकिन मेरे दिमाग के किसी कोने में पोर्न की वो तस्वीरें और कल्पनाएँ चलती रहती हैं जो मुझे अक्सर उत्तेजित कर देती हैं। नेहा का यह अकेलापन जताने का अंदाज़ मुझे अंदर से कुछ महसूस करा रहा था। पिताजी ने हँसते हुए कहा, "देख राज, तेरी बहन बोर हो रही है, तो कोशिश करना कि जल्दी लौट आए।" मैंने बस इतना कहा, "जी, मैं कोशिश करूँगा।" पिता उठकर अंदर चले गए। मैंने चाय खत्म की, नेहा से कहा, "ठीक है, मैं तैयार होता हूँ।"

वह मुस्कुराई, "जल्दी आना, भैया। रात को साथ खाएँगे।"

मैंने सिर हिलाया और नीचे अपने कमरे की ओर चल दिया। पर मन में एक हलचल थी – आज शाम को दोस्तों के साथ पीऊँगा, और उसके बाद? कौन जाने इस Friday की रात क्या मोड़ ले।
मैंने तैयार होकर बाइक स्टार्ट की और ऑफिस की ओर निकल गया। ऑफिस में हर कोई खुश-खुश नज़र आ रहा था। Good Friday का माहौल – शनिवार और रविवार की छुट्टी। उस दिन मुझे प्रोजेक्ट के कुछ काम निपटाने थे, इसलिए थोड़ा रुकना पड़ा। जैसे ही मैं ऑफिस की पार्किंग में पहुँचा, किरन का फोन आ गया।

"अबे ओए राज! कहां मर गया? हम दोनों तो अपने पुराने अड्डे पर पहुंच चुके हैं और जाम भी शुरू हो गया है," किरण ने अपनी चिर-परिचित बेबाक आवाज में कहा।

"बस पार्किंग में हूँ। निकल रहा हूँ। तुम लोग कहाँ हो?"

"उसी जगह पर, हमारी पुरानी वाली। बिकाश भी आ गया है। तू जल्दी आ। हमने तो शुरू कर दिया है।"

"आ रहा हूँ।" मैंने फोन रखा और बाइक स्टार्ट की। दिल्ली की ठंडी हवा और शुक्रवार की शाम – इससे अच्छा और क्या हो सकता है। मैंने थोड़ी रफ्तार बढ़ाई। पाँच मिनट में ही उस जगह पहुँच गया जहाँ हम तीनों कॉलेज के दिनों से बैठते हैं – एक छोटा सा ढाबा-सा रेस्टोरेंट जहाँ शराब चोरी-छिपे मिलती है, और बाहर से कोई पूछताछ नहीं।

मैंने बाइक खड़ी की और अंदर गया। किरन और बिकाश एक कोने वाली टेबल पर बैठे थे। सामने दो पेग पड़े थे – व्हिस्की का बोतल और सोडा। किरन ने हाथ हिलाकर बुलाया।

"आ जा, यार। तेरा इंतज़ार कर रहे थे।"

मैंने बैठते हुए कहा, "ऑफिस का काम थोड़ा लेट हो गया।" फिर वेटर को इशारा किया, "एक पेग ला, व्हिस्की का।"

बिकाश ने मेरा गिलास बढ़ाते हुए पूछा, "काम तो ठीक चल रहा है न?"

"हाँ, चल रहा है। बस थोड़ा लोड है। तुम्हारा कैसा है?" मैंने गिलास में दो घूँट डालकर सोडा मिलाया।

"मेरा तो सेम ऐज़ असुअल। बॉस का दिमाग खराब रहता है।"

किरन हँसा, "अरे, हर बॉस का दिमाग खराब होता है, यार। तू अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में सोच – वो तो खूबसूरत है, तेरा दिमाग ठीक रहेगा।"

बिकाश ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "हाँ, वो ठीक रखती है मेरा।"

थोड़ी देर तक ऑफिस के किस्से चले – प्रोजेक्ट की डेडलाइन, बॉस की बकवास, कुछ सहकर्मियों की चुगली। फिर बातों का रुख बदल गया। किरन ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, "सुन, राज, तू कब शादी कर रहा है? कोई गर्लफ्रेंड है तो बता? हमसे छुपाता है क्या?"

मैं मुस्कुराया और ग्लास से एक घूंट लेते हुए बोला, "यार, अभी इन सब चीजों के लिए टाइम नहीं है। मैंने सोचा है कि जब तक नेहा की शादी नहीं हो जाती, मैं शादी के बारे में नहीं सोचूंगा।"

बिकाश ने मुँह बनाया, "अरे, लेकिन तू अपनी इच्छाएँ कैसे मैनेज करेगा? इंसान हूँ, यार – भूख लगती है, प्यास लगती है, और वो भूख भी लगती है।"

किरण जोर से हंसा और बोला, "अबे, राज पक्का पोर्न देखकर हाथ चलाता होगा!"

मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया, "भाई, आजकल के जमाने में ऐसा कौन सा लड़का है जो ये नहीं करता? सब करते हैं।" हम तीनों ठहाके मारकर हंसने लगे।

बिकाश ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "सच में यार, आजकल कंट्रोल करना मुश्किल है। इंस्टाग्राम या फेसबुक खोलो, तो हजारों लड़कियां सेक्सी डांस कर रही होती हैं। वो छोटे कपड़े, वो साड़ियां... देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है।"

किरन ने अपनी पसंद बतानी शुरू की, "हाँ, और आजकल हीरोइनों में से कुछ ही हैं जो हार्ड करती हैं। जान्हवी कपूर – उसकी बॉडी, उसके कर्व्स, उसके सेक्सी बूब्स और गरम गांड – क्या माल है, यार। देखकर ही लगता है कि काश एक बार मिल जाए।"

बिकाश ने बीच में टोकते हुए कहा, "तूने सिर्फ हीरोइन्स देखी हैं, इंस्टाग्राम रील्स देख भाई। वहां ऐसी-ऐसी लड़कियां हैं जो किसी हीरोइन से कम नहीं हैं।"

मैंने चुपचाप सुना, फिर बोला, "हाँ, सब देखता हूँ। पर हाथ में टाइम कहाँ है? ऑफिस, घर – बस चलता रहता है।"

"तो वक्त निकालना पड़ता है," किरन ने फिर से पेग भरते हुए कहा, "अपने मनोरंजन के लिए। वरना बैचेनी हो जाती है।"

हमने आधा घंटा और बातें कीं – पोर्न साइट्स के नाम, कुछ एक्ट्रेसेस की बॉडी, और यहाँ तक कि कुछ इंस्टाग्राम मॉडल्स की चर्चा। बीच-बीच में बिकाश अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताता रहा – कैसे वो उसे बहुत अच्छी लगती है, पर शादी से पहले कुछ करने नहीं देती। किरन ने उसे चिढ़ाया, "अरे, अब कब तक रुकेगा? शादी कर ले न।" मैं भी हंस्ते दोनोंकी बात सुनता रहा ।

तभी मैंने घड़ी देखी – 8:40 बज रहे थे। "अरे, मुझे निकलना होगा, यार। पापा को वादा किया है कि नौ बजे तक आ जाऊँगा। और नेहा ने भी कहा था जल्दी आऊँ।"

किरन ने हाथ हिलाया, "चल, ठीक है। हम भी जल्द ही निकलेंगे। कल मिलते हैं?"

"नहीं, कल तो सोऊँगा। फिर फोन कर लो।" मैंने आखिरी घूँट पिया और उठ गया। दोनों ने हाथ मिलाकर बिदाई दी।

बाइक पर बैठकर मैंने रफ्तार पकड़ी। रास्ता खाली था – Good Friday की शाम, लोग या तो घर पर थे या बाहर मौज-मस्ती में। मैंने सोचा, घर पहुँचकर चुपके से अपने कमरे में चला जाऊँगा।

दस मिनट में घर पहुँच गया। गेट खोला, बाइक अंदर रखी और ऊपर गया। पहली मंज़िल पर नेहा के कमरे से आवाज़ आई, "भैया, आ गए?"

"हाँ, आ गया।" मैंने अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए कहा।

वहाँ से फिर आवाज़ आई, "मैंने खाना रख दिया है। सब्जी को पहले गरम कर लेना, फिर खाना। पापा नहीं आ रहे रात को – उन्होंने फोन किया था, वो अपने दोस्त के यहाँ डिनर करेंगे।"

"ठीक है नेहा," मैंने कहा और अंदर चला गया। कमरे में लाइट जलाई, फिर कपड़े बदले। मैंने घर के मुलायम कपड़े पहने और किचन की ओर चला। नेहा के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था – देखा तो वह अपने मोबाइल में कुछ देख रही थी, लेकिन मैंने जल्दी से नज़र हटा ली।

किचन में गर्म करके खाना खाया, फिर बर्तन धोए। रात का सन्नाटा था। नेहा अब शायद अपने कमरे में ही थी। मैंने अपना कमरा बंद किया और बिस्तर पर लेट गया। शराब का हल्का नशा था, पर दिमाग में उन बातों की गूँज थी जो किरन और बिकाश ने कही थीं – लड़कियों के बारे में, पोर्न के बारे में। मुझे याद आया कि मैंने कुछ दिनों से कुछ नया नहीं देखा था। फोन उठाया, लेकिन तभी पापा के घर आने की आवाज़ सुनाई दी – गेट खुला और बंद हुआ। उनके कदम आ रहे थे, और उनकी हालत से लग रहा था कि खूब पी है। उन्होंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया।

ड्रिंक्स के बाद मेरा एक पुराना रूटीन था—हस्तमैथुन करना। शराब के असर से मेरा दिमाग और शरीर दोनों उत्तेजित थे। मैंने अपना मोबाइल उठाया और पोर्न साइट्स ब्राउज़ करने लगा। तभी मुझे दोस्तों की बात याद आई। मैंने इंस्टाग्राम खोला और सर्च किया "Hot Indian Girls"।

पहली रील में एक लड़की आइटम सॉन्ग पर डांस कर रही थी – छोटी सी टॉप और नीचे उतनी ही छोटी स्कर्ट, अपने बूब्स और गांड को हिलाते हुए वो कैमरे में देखकर मुस्कुरा रही थी। मेरी पैंट के अंदर का लंड हरकत में आ गया। मैंने अगली रील स्क्रॉल की – एक और लड़की, साड़ी में, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट कि उसके दूध के उभार साफ़ दिख रहे थे। वो साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को ढकती और फिर धीरे-धीरे गर्दन से नीचे ले जाती, अपने बूब्स के बीच की गहरी नाली दिखाती हुई। मैंने जोर से साँस छोड़ी।

मैंने कमरे का दरवाज़ा कुंडी लगाकर बंद किया, फिर लाइट को धीमा कर दिया – बस एक छोटा सा नाइट लैंप जल रहा था। बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और शॉर्ट्स से अपने खड़े लंड को बाहर निकाल लिया। वह पहले से ही पूरी तरह सख्त हो चुका था – रात भर की बातों का असर। मैंने दाहिने हाथ से उसे पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया, जबकि बाएँ हाथ से फोन पकड़े रील्स स्क्रॉल करता रहा।

एक रील में लड़की देसी गाने पर थिरक रही थी – उसकी कमर पर झूलती स्कर्ट, चेहरा चंचल, और जब वो घूमती तो उसकी गांड का गोलाई साफ़ नज़र आती। मेरी हथेली लंड के ऊपर-नीचे तेज़ी से दौड़ने लगी। दूसरे हाथ में अगली रील – दो लड़कियाँ एक साथ, एक-दूसरे के बूब्स पर हाथ फेरती हुई, कपड़े फटे हुए, सिर्फ़ ब्रा में। मैंने आँखें बंद कर लीं और कल्पना की कि वो मेरे सामने हैं, मेरे लंड को चूस रही हैं।

जब बहुत ज़्यादा हो गया और मुझे लगा कि अब कभी भी फट जाऊँगा, तो मैंने रुक गया। मन में आया कि बाथरूम में जाकर पूरा करूँ – वहाँ आराम से, अकेले, बिना किसी शोर-शराबे के। मैंने लंड को शॉर्ट्स में वापस डाला, पर वह अब भी उभरा हुआ था, और कमरे का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला।

बाथरूम जाने के लिए मुझे गलियारे से होकर जाना था। नेहा का कमरा उसी फ्लोर पर था, और बाथरूम दोनों कमरों के बीच में था। जैसे ही मैं कमरे से बाहर निकला और बाथरूम की तरफ बढ़ा, नेहा वहां से बाहर आ रही थी।

हमारी नज़रें मिलीं। उसने हैरानी से पूछा, "भैया, आप सोए नहीं अभी तक?"

मैंने जल्दी से जवाब दिया, "नहीं, बस सोने जा रहा हूँ। बाथरूम जाना था।"

उसकी नज़र मेरे शॉर्ट्स के सामने वाले हिस्से पर टिक गई – जहाँ मेरा लंड अभी भी उभरा हुआ था, शॉर्ट्स पर साफ़ दिख रहा था। नेहा ने एक पल को झिझकते हुए देखा, फिर जल्दी से अपनी नज़रें हटा लीं। उसने कहा, "ओह... ठीक है। मैं अपने रूम में जा रही हूँ।"

"हाँ, तू जा। गुड नाइट।" मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में एक हल्की सी हकलाहट थी।

वह अपने कमरे में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं बाथरूम में घुसा और दरवाज़ा कुंडी लगाई। रोशनी जलाई, और फिर से अपना फोन निकाला। इंस्टाग्राम की वही रील्स – जल्दी से एक रील और खोली जहाँ एक लड़की साड़ी में अपने बूब्स को हिलाते हुए गीला हो रही थी। मैंने शॉर्ट्स से लंड निकाला और नल के पास खड़ा हो गया।

एक हाथ में फोन, दूसरे हाथ में लंड। मैंने तेज़ी से हिलाना शुरू किया, आँखें स्क्रीन पर गड़ी हुईं। लड़की की साड़ी उसके शरीर से लिपटी हुई थी, उसकी गांड और बूब्स की हरकतें मेरे दिमाग में बिजली की तरह दौड़ रही थीं। मैंने कल्पना की कि वो मेरे सामने है, अपने बूब्स मुझे दिखा रही है, और मैं उसे पीछे से पकड़ रहा हूँ।

कुछ ही पलों में मेरा शरीर झटका खा गया – मैंने आँखें बंद कीं और गर्म मलाई की धार फूट पड़ी। वह नल के सिंक में बह गई, सफ़ेद गाढ़ा तरल। मैंने कुछ पल आराम किया, फिर नल चलाकर सारा निशान धो डाला। हाथ धोए, चेहरे पर पानी के छींटे मारे, और फिर शॉर्ट्स ठीक किए।

बाथरूम से निकलते समय मैंने सोचा, "नेहा ने देखा तो ज़रूर होगा। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। अच्छा है।" कमरे में आकर मैंने दरवाज़ा बंद किया, बिस्तर पर लेट गया, और फोन स्क्रॉल करते-करते आँखें लग गईं। रात की हल्की-हल्की आवाज़ें थीं – पंखे की गुनगुनाहट और दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़। मैंने फोन बंद किया और गहरी नींद में चला गया।
 
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अपडेट : १

सुबहकी हल्की धूप मेरे कमरे की खिड़की से अंदर आ रही थी। शनिवार था, इसलिए ऑफिस जाने की जल्दी नहीं थी। मैंने आँखें खोलीं और कुछ देर तक छत को देखता रहा। कल रात की बातें — किरण की इंस्टाग्राम वाली बातें, और मेरी बाथरूम में की गई हरकत — सब याद आ गया।

"उठो भैया, चाय ठंडी होसुबह रही है," नेहा की आवाज़ दरवाज़े के बाहर से आई।

"आ रहा हूँ," मैंने कहा और उठ बैठा।

कपड़े बदले, चेहरा धोया, और नीचे आया तो देखा पिताजी पहले से मेज़ पर बैठे थे। नेहा ने तीन कप चाय रख दिए थे — पिताजी के लिए कम चीनी वाली, मेरे लिए दूध वाली, और अपने लिए बिना चीनी की।

"गुड मॉर्निंग, पिताजी," मैंने कहा और बैठ गया।

"गुड मॉर्निंग बेटा," पिताजी ने कहा, लेकिन उनकी आँखों में कल रात की थकान साफ झलक रही थी। उन्होंने चाय के साथ ओमलेट की एक प्लेट ली और चुपचाप खाने लगे।

नेहा ने मेरे सामने भी ओमलेट-ब्रेड की प्लेट रखी। "भैया, आज क्या प्लान है?"

"कुछ खास नहीं," मैंने कहा, "दोस्तों से मिलने चलेगा थोड़ी देर में। तेरा क्या?"

"मुझे शॉपिंग जाना है दोस्तों के साथ शाम को," उसने कहा।

"अच्छा," मैंने कहा और चाय पीने लगा।

पिताजी ने जल्दी-जल्दी नाश्ता खत्म किया और उठ खड़े हुए। "मैं आज दोस्तों के साथ कार्ड्स खेलने जा रहा हूँ। रात के खाने पर आ जाऊँगा," उन्होंने कहा, जैसे यह कोई सामान्य बात हो।

"ठीक है पिताजी," नेहा ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में वही थकान और चिंता थी जो हर दिन रहती है।

पिताजी बाहर चले गए। नेहा ने बर्तन उठाए और किचन में धोने लगी।

चाय की टपरी पर

सुबह करीब दस बजे मैं घर से निकला और अपने मोहल्ले की उस चाय की दुकान पर पहुँचा जहाँ हम दोस्त रोज़ मिलते हैं। सड़क किनारे एक छोटी सी टपरी, प्लास्टिक की कुर्सियाँ, और चाय की केतली हमेशा गर्म रहती है।

बिकाश पहले से बैठा था, सिगरेट फूँकते हुए। "आ जा राजा, चाय ऑर्डर कर दी है।"

"किरण नहीं आया?" मैंने पूछा।

"अरे, वो आज डेट पर जा रहा है, तैयारी में लगा है," बिकाश ने हँसते हुए कहा।

"वाह, अच्छी बात है," मैंने कहा और चाय का कप हाथ में लिया।

हमने थोड़ी देर राजनीति पर बात की — अखबारों में चल रही खबरें, नए चुनाव की तैयारियाँ, और फिर बात आई अपने-अपने काम पर।

"तेरा प्रोजेक्ट कैसा चल रहा है?" बिकाश ने पूछा।

"अच्छा चल रहा है। इस हफ्ते कुछ नए फीचर्स डिलीवर करने हैं। बस वही — कोड, मीटिंग, कोड, मीटिंग," मैंने कहा।

"और घर पर सब ठीक?" उसने पूछा, थोड़ी गंभीर आवाज़ में।

"हाँ, पिताजी का वही हाल है। नेहा सब संभालती है," मैंने कहा।

"तेरी बहन बहुत अच्छी है यार। पूरे घर की जिम्मेदारी उठा रही है। तुझे भी थोड़ी मदद करनी चाहिए," बिकाश ने कहा।

"करता हूँ, लेकिन वो खुद ही सब कर लेती है," मैंने बहाना बनाया।

हमने दो कप और चाय पी, और फिर लगभग ग्यारह बजे घर लौट आया।

घर पहुँचा तो नेहा किचन में खाना बना रही थी। पिताजी बाहर गए हुए थे — उनके जाने से पहले ही बता गए थे कि डिनर पर आएँगे।



"भैया, दो मिनट में खाना तैयार है," नेहा ने कहा। उसने सादा सूट पहना हुआ था — एक लाइट ब्लू कुर्ती और सलवार। बाल पोनीटेल में बाँधे हुए थे। वो जितनी सादगी से रहती थी, उतनी ही सुंदर लगती थी।

हमने साथ बैठकर खाना खाया — दाल, चावल, रोटी और सब्जी। नेहा ने पहले मुझे परोसा, फिर अपने लिए लिया।

"शाम को कितने बजे लौटोगी?" मैंने पूछा।

"चार बजे के आसपास," उसने कहा, "दोस्तों से कॉन्टेक्ट करना है। शायद कनॉट प्लेस जाएँगी। देर तक रुकेंगी तो मैसेज करूँगी।"

"ठीक है, संभल कर जाना। समय पर वापस आना," मैंने कहा।

"हाँ भैया," उसने मुस्कुराकर कहा।

खाना खत्म करके मैं अपने कमरे में आ गया। दोपहर के दो बज रहे थे। बाहर गर्मी थी, इसलिए पंखे की हवा में लेटना अच्छा लग रहा था। फोन हाथ में आया तो फिर से इंस्टाग्राम खुल गया।

दिमाग में कल रात के वे हीटेड मोमेंट्स ताज़ा थे। मैंने फिर से सर्च बॉक्स में "hot indian girls" टाइप किया और रील्स का तांता लग गया।

एक-एक करके रील्स स्क्रीन पर आ रही थीं। मैंने बिस्तर पर लेटते हुए पैंट की ज़िप खोल दी और अपने लिंग को बाहर निकाल लिया। वह धीरे-धीरे सख्त होने लगा था।

स्क्रीन पर एक लड़की — ब्लैक टॉप और मिनी स्कर्ट में, अपने हिप्स को कैमरे के सामने झुमका रही थी। एक और — जिम के कपड़ों में, अपने एब्स और क्लीवेज दिखाते हुए।

"भैया!" नेहा की आवाज़ नीचे से आई।

मैं चौंक गया। जल्दी से अपने लिंग को पैंट के अंदर डाला और पैंट ऊपर खींची। ज़िप बंद की और फोन की स्क्रीन बंद कर दी।

"हाँ, क्या है?" मैंने सामान्य आवाज़ में पूछा।

"अंदर आ सकती हूँ?"

"हाँ, आ जा," मैंने कहा और सीधा होकर बैठ गया।

दरवाज़ा खुला और नेहा अंदर आई।

मेरी साँसें रुक गईं।

नेहा ने अपनी सादा कुर्ती-सलवार उतार दी थी और अब वह एक बेहद आकर्षक पोशाक में थी — टाइट ब्लू जींस जो उसके पैरों और हिप्स को बिल्कुल कसकर पकड़ रही थीं, और ऊपर एक बहुत ही छोटा क्रॉप टॉप जो उसकी पतली कमर और नाभि को खुला छोड़ रहा था।

उसने अपने बाल खुले छोड़ दिए थे और हल्की लिपस्टिक लगाई थी।

"कैसा लग रहा है, भैया?" उसने हल्की शर्माते हुए पूछा।

मेरे मुँह से तो कुछ निकला नहीं। मैं उसे देखता रह गया। क्रॉप टॉप उसके स्तनों को अच्छी तरह उभार रहा था — छोटा लेकिन गोल और फर्म। जींस उसकी जाँघों और कमर पर इस तरह चिपकी थी कि हर कर्व साफ दिख रहा था।

"अच्छा... अच्छा लग रहा है," मैंने कुछ रुकते हुए कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है।"

"सच में? पहली बार ये क्रॉप टॉप पहना है घर से बाहर निकलने के लिए। सोचा थोड़ा मॉडर्न लुक ट्राई करूँ," उसने मुस्कुराकर कहा।

"हाँ, अच्छा लग रहा है। शॉपिंग पर जाएगी, तो दोस्तों को दिखा दे। लेकिन समय पर वापस आना," मैंने कहा, अपनी आवाज़ को सामान्य रखने की कोशिश करते हुए।

"हाँ भैया, मैं चलूँ। पांच बजे तक वापस आ जाऊँगी," उसने कहा और कमरे से बाहर निकलने लगी।

जब वह मुड़ी और चलने लगी, तो मेरी नज़र उसके पीछे चली गई।

उसकी टाइट जींस उसके गांड को इस तरह से पकड़ रही थी कि वे पूरी तरह आकार में दिख रहे थे — गोल, उठे हुए, हर कदम के साथ उनमें एक सुंदर सी हलचल हो रही थी। जब वह दरवाज़े से बाहर निकलकर सीढ़ियों की ओर बढ़ी तो उसके हिप्स का डोलना साफ नज़र आ रहा था।

मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मैं उसके गांड को देखता रह गया — गोल, शेप में, जींस के अंदर कसी हुई, बिल्कुल एकदम सुडौल। उसके चलने के अंदाज़ में भी एक कमाल था — हल्की सी मदमस्त चाल, जैसे वो जानती हो कि वह आकर्षक लग रही है।

लेकिन फिर अचानक मुझे एहसास हुआ — यह मेरी अपनी बहन थी। मैं उसके गांड पर बुरी नज़र डाल रहा था, उसे शारीरिक दृष्टि से देख रहा था। यह गलत था, बहुत गलत।

एक गहरी लज्जा और शर्म का एहसास मन में उठा। मैंने सिर झुका लिया और लंबी साँस ली।

"यह क्या हो रहा है मुझे?" मैंने खुद से पूछा।

गिल्त और शर्म से बचने के लिए मैंने फिर से फोन उठाया। अब जानबूझकर "hot indian girls" के बजाय "insta reels hot" सर्च किया और रील्स स्क्रॉल करने लगा।

शुरू में वही लड़कियाँ आने लगीं — टाइट ड्रेस में, डीप क्लीवेज दिखाती हुई, अपने गांड पर फोकस करती हुई। एक रील में एक लड़की बहुत छोटी शॉर्ट्स में अपने हिप्स को कैमरे की तरफ हिला रही थी। दूसरी — साड़ी में, लेकिन ब्लाउज़ इतना डीप कट था कि उसके पूरे स्तन दिखने को थे।

मैं स्क्रॉल करता रहा, अपने मन को इन्हीं में खोने की कोशिश करता रहा। कम से कम ये तो मेरी बहन नहीं थीं — ये अजनबी लड़कियाँ थीं, जिन्हें देखने में कोई बुराई नहीं थी।

एक के बाद एक रील स्क्रीन पर आती गई। मैंने एक घंटे से भी ज्यादा समय बिता दिया बस इन्हें देखते-देखते।

तभी मैं एक रील पर अटक गया।

इस रील में एक लड़की थी — जिसने मास्क पहना हुआ था। लेकिन उसने एक बहुत ही आकर्षक साड़ी पहनी थी — लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी, और ऊपर एक टाइट ब्लाउज़ जो उसके स्तनों को अच्छी तरह उभार रहा था।

रील की शुरुआत में वह अपने ब्लाउज़ पर फोकस कर रही थी — कैमरा उसके क्लीवेज के करीब लाकर, धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रहा था। फिर वह मुड़ी और अपने पीछे का दृश्य दिखाया — उसके गांड पर एकदम टाइट साड़ी का पल्लू लिपटा हुआ था, जो उसके गोल हिप्स को पूरी तरह उभार रहा था। उसने एक हाथ से पल्लू समेटा और फिर पीछे की ओर मुड़कर कैमरे को एक सेक्सी नज़र दी।

लेकिन मेरी नज़र उस लड़की पर नहीं थी — मेरी नज़र बैकग्राउंड पर थी।

कमरा मुझे परिचित लग रहा था।

नीली दीवारें — बिल्कुल वैसा ही नीला रंग जैसा नेहा के कमरे में था। पीछे की दीवार पर एक पोस्टर — बॉलीवुड का एक पोस्टर, जिसे मैंने खुद लगाया था क्योंकि नेहा को वह पसंद था। दीवार का रंग — वही हल्का पीच शेड जो उसके कमरे के कोने में था।

मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

"नहीं, यह नहीं हो सकता," मैंने मन ही मन कहा।

लेकिन मैंने और गौर से देखा। रील में दिख रही दीवार पर एक अलमारी भी थी — बिल्कुल वैसी ही दराजों वाली जो नेहा के कमरे में थी। खिड़की का फ्रेम — वही।

"यह नेहा का कमरा है," मेरे दिमाग में एक स्पष्ट आवाज़ गूँजी।

मेरा दिल धड़कना लगभग बंद हो गया। मैंने रील की लड़की को ध्यान से देखना शुरू किया — उसकी आँखें, उसके होंठ, उसके बाल, उसके कद का अंदाज़।

उस लड़की के बाल गहरे काले और लंबे थे — ठीक नेहा की तरह। उसकी आँखें बादामी — वही गहरी, बड़ी आँखें। उसका कद — पतला, लंबा, जैसे नेहा का।

भले ही चेहरे पर मास्क था, लेकिन वह नेहा ही लग रही थी।
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नेहा है," मैंने अपने होठों से फुसफुसाया।

मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने उस रील के यूज़रनेम पर टैप किया — कोई अजीब सा नाम था, "sriya_hotgirl " या ऐसा ही कुछ। मैंने उस प्रोफाइल पर क्लिक किया।

प्रोफाइल पर जाकर देखा तो वहाँ दो-तीन और रील्स थीं। सबमें वही लड़की — कभी कुर्टी और टाइट जींस में, कभी साड़ी में, कभी नाइटी में — लेकिन हर रील में चेहरे पर मास्क या किसी तरह का पर्दा था। हर रील में वही पोज़, वही हरकतें — अपने शरीर के विभिन्न अंगों को कैमरे के सामने उजागर करती हुई।

मैंने पहली रील पर क्लिक किया — एक और वीडियो जिसमें वह लड़की बेड पर लेटी हुई थी, एक टाइट नाइटी पहने, अपने पैरों को ऊपर उठाकर कैमरे को दिखाती हुई। पीछे वही नीली दीवार, वही अलमारी।

दूसरी रील — वह लड़की किचन में खड़ी थी, एक कप चाय हाथ में, लेकिन कैमरा उसके गांड पर फोकस कर रहा था। किचन — वही नीली टाइल्स, वही गैस चूल्हा, जो हमारे घर में था।

तीसरी रील — वह लड़की सीढ़ियों पर खड़ी थी, अपने पैरों को दिखाती हुई, जींस पहने, और फिर पीछे मुड़कर अपने हिप्स हिलाती हुई। वही सीढ़ियाँ — हमारे घर की।

मेरा सारा शरीर ठंडा पड़ गया।

"हे भगवान," मैंने धीमी आवाज़ में कहा, "यह मेरी बहन है। नेहा। यह उसकी रील्स हैं।"

मेरे दिमाग में हज़ारों विचार दौड़ने लगे। वह लड़की जिसे मैं कल रात देख रहा था, जिस पर मैं हस्तमैथुन कर रहा था — वह मेरी अपनी बहन निकली।

और अब, आज, जब वह शॉपिंग पर गई, तो वह उन्हीं जींस और क्रॉप टॉप में गई — वही जो उसने इन रील्स में पहने होंगे?

मैंने प्रोफाइल का नाम देखा — "sriya_hotgirl" या कुछ ऐसा। फॉलोअर्स की संख्या लगभग पाँच हज़ार थी। पोस्ट्स — चौदह। सब रील्स।

मैंने एक-एक करके सब रील्स देखीं — सबमें वही लड़की, वही कमरा, वही घर। बैकग्राउंड में कभी हमारा लिविंग रूम दिखता, कभी किचन, कभी सीढ़ियाँ, कभी नेहा का कमरा।

नेहा ने अपना असली चेहरा नहीं दिखाया था, लेकिन उसके शरीर की भाषा, उसके बाल, उसकी आँखें, उसके पोज़ — सब कुछ बता रहा था कि वही है।

मैं अपने बिस्तर पर बेहोशी से गिर गया। हाथों में फोन था, आँखों के सामने वह स्क्रीन जहाँ मेरी बहन का अश्लील कंटेंट चल रहा था।



"वह इसे क्यों कर रही है?" मैंने खुद से पूछा, "उसकी मासूमियत, उसकी सादगी — और पीछे से वह अपनी रील्स बना रही है?"

लेकिन उसी पल एक और भावना मन में उठी — एक गहरी, अंधकारमय उत्तेजना। मैं अब जानता था कि वह लड़की मेरी बहन है। और उसे इतनी बेहयाई से अपने शरीर को दिखाते हुए देखकर, मेरे अंदर एक अजीब सी आग जलने लगी।

यह गलत था। बहुत गलत। लेकिन...

मैंने फिर से वह पहली रील चलाई — जिसमें वह साड़ी में थी, अपने स्तनों और गांड पर फोकस करते हुए। अब मैं जानता था कि वह नेहा है। मेरी बहन। मासूम, सादा, घर की सारी ज़िम्मेदारी उठाने वाली नेहा — जो इंस्टाग्राम पर दूसरों के लिए ऐसे वीडियो बना रही थी।

मेरा मन अब एक कोलाहल में था — शर्म, गुस्सा, उत्तेजना, और एक गहरी जिज्ञासा।

"वह क्यों कर रही है यह?" मैंने फिर से पूछा।

कोई जवाब नहीं था। बस वही रील्स, वही तस्वीरें, और एक सवाल जो मुझे अंदर तक हिला रहा था — "अब मैं क्या करूँगा?"

शाम की धीमी रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी। मैं बिस्तर पर लेटा रहा, फोन की स्क्रीन पर वही प्रोफाइल खुली हुई थी। दिमाग में हजारों उलझनें थीं — और सबसे बड़ा सवाल: "नेहा को इस बारे में क्या बताऊँ? और क्या मुझे उसे बिल्कुल बताना चाहिए?"
 

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अपडेट २:

गिल्ट और शर्म से मेरा दिमाग घिर गया था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, फोन की स्क्रीन पर अब भी नेहा का इंस्टाग्राम प्रोफाइल खुला था। उसकी वो रील्स — वही साड़ी, वही ब्लाउज़, वही अश्लील पोज़ — मेरे दिमाग में बार-बार घूम रही थीं।

"यह गलत है," मैंने खुद से कहा, "मुझे यह सब नहीं देखना चाहिए। यह मेरी बहन है।"

लेकिन मेरा लिंग अब भी सख्त था, पैंट के अंदर उभरा हुआ।

मैंने सोचा — अगर मैं एक बार हस्तमैथुन कर लूँ, तो शायद ये गंदे विचार चले जाएँगे। यही सबसे आसान तरीका था अपने मन को शांत करने का।

मैंने अपना लैपटॉप खोला और ब्राउज़र में "pornhub" टाइप किया। साइट खुली तो हज़ारों वीडियो की सूची सामने आ गई। मैंने एक वीडियो चुनने के लिए स्क्रॉल किया, लेकिन तभी मेरी नज़र एक कैटेगरी पर पड़ी — "step-sis". सौतेली बहनों के वीडियो।

मेरा दिल धड़क गया। यह संयोग था या कुछ और? मैंने एक वीडियो पर क्लिक किया — एक लड़की अपने सौतेले भाई को बहकाती हुई, उसके सामने अपने स्तन दिखाती हुई। मैंने अपनी पैंट उतारी, लिंग को बाहर निकाला और हाथ में ले लिया।

धीरे-धीरे मैंने स्ट्रोक करना शुरू किया, लेकिन मेरा दिमाग उस वीडियो पर नहीं था। बार-बार नेहा की वो रील्स सामने आ रही थीं — वही साड़ी, वही नितंब, वही गोल हिप्स, वही मास्क के पीछे की आँखें।

"नहीं, यह काम नहीं करेगा," मैंने हाथ रोकते हुए कहा।

मैंने लैपटॉप बंद कर दिया और फोन पर फिर से नेहा का प्रोफाइल खोला। एक-एक करके सारी रील्स देखीं — और हर बार एक ही ख्याल आया: "क्या सच में यह नेहा है?"

मुझे पक्का करना था। मैं उठा और अपने कमरे से बाहर निकला। सीढ़ियाँ पार करके नेहा के कमरे के सामने पहुँचा। दरवाज़ा बंद था। मैंने हैंडल घुमाया — लॉक था।

"धत् तेरी," मैंने मन ही मन कहा।

पहले तो मैं वापस लौटने लगा, लेकिन अंदर की जिज्ञासा और उत्तेजना मुझे खींच रही थी। मुझे उस कमरे में जाना था। मुझे अपनी आँखों से देखना था कि वही जगह है जो रील्स में दिख रही है।

तभी मुझे याद आया — पिताजी के पास घर की सभी चाबियों का एक सेट रहता है। वह उसे अपने कमरे की दराज में रखते हैं, ताकि कभी चाबी खो जाए तो काम आ सके।

मैं नीचे की ओर गया। पिताजी का कमरा — उनका बेडरूम — नीचे की मंज़िल पर था। मैंने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की — वह खुल गया। पिताजी जाते-जाते ताला लगाना शायद भूल गए थे। शायद वह अपने दोस्तों के साथ कार्ड्स और ड्रिंक्स के उत्साह में थे, और उन्होंने सोचा कि राज और नेहा घर पर ही हैं, तो कोई बात नहीं।

मैं अंदर गया। कमरा साफ-सुथरा था, लेकिन पिताजी के बिस्तर पर शराब की बोतल और गिलास रखे हुए थे। मैंने दराज़ खोली — वहाँ एक छोटी सी डिब्बी में चाबियों का गुच्छा था। मैंने उसे उठाया और ऊपर की ओर बढ़ गया।

मेरा दिल ढोल की तरह बज रहा था। हाथ काँप रहे थे। मैंने चाबियों के गुच्छे से नेहा के कमरे की चाबी निकाली और ताले में डाली। एक क्लिक की आवाज़ आई — दरवाज़ा खुल गया।

मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा। कमरा वैसा ही था जैसा रील्स में दिखता था — नीली दीवारें, बॉलीवुड का पोस्टर, खिड़की का फ्रेम, और बिस्तर पर वही चादर जो उसने रील में डाली थी। कोने में अलमारी थी, और उसके पास एक छोटा सा ड्रेस रैक।

मैंने ड्रेस रैक के पास जाकर देखा — वहाँ वही कपड़े लटके हुए थे जो उसने रील्स में पहने थे। वही लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी, वही टाइट ब्लाउज़, वही जींस और क्रॉप टॉप,वही मास्क। ड्रेस रैक के नीचे एक गोल ट्यूब लाइट स्टैंड रखा हुआ था — वही जो उसने रील्स में बैकग्राउंड लाइटिंग के लिए इस्तेमाल किया था।

अब मुझे कोई संदेह नहीं रहा। वह नेहा ही थी।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। शर्म और गिल्ट के साथ-साथ एक अजीब सी उत्तेजना भी उठ रही थी। मैंने चारों ओर देखा — बिस्तर के पास एक छोटी सी बास्केट थी जिसमें नेहा अपने इस्तेमाल किए हुए कपड़े डालती थी। वहाँ एक ब्रा का स्ट्रैप दिख रहा था, और उसके ऊपर एक पैंटी का कोना।

मैंने गहरी साँस ली। मुझे पता था कि यह गलत है, बहुत गलत है, लेकिन मेरे हाथ अपने आप उस बाल्टी की ओर बढ़ गए।

मैंने झाँका — अंदर एक ब्लैक ब्रा, एक नेवी ब्लू पैंटी, एक योगा पैंट, और एक टी-शर्ट थी। सब कुछ इस्तेमाल किया हुआ, गंदा — नेहा के शरीर से निकले हुए कपड़े।

मेरा लिंग पैंट के अंदर सख्त हो गया, लगभग दर्द करने लगा। मैंने पैंटी को उठाया — हल्की नीली, सूती, लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा गीला सा लग रहा था। मैंने इसे अपनी नाक के पास लाया — एक हल्की सी गंध, जो नेहा के शरीर की थी, मुझे और उत्तेजित कर गई।

फिर मैंने ब्रा उठाई — एक ब्लैक कलरकी ब्रा जो उसकी सुडौल स्तनों को पकड़ती थी। मैंने इसे अपने हाथों में लिया और कल्पना की कि यह नेहा के स्तनों पर कसकर लिपटी हुई है।

मैंने नेहा का कमरा बंद किया, चाबी वापस रखी, और अपने कमरे के बगल वाले शौचालय में चला गया।

हाथों में नेहा की ब्रा और पैंटी थी। मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दिया, मेरा लिंग पूरी तरह सख्त हो चुका था — गीला, उभरा हुआ, लगभग सात इंच लंबा।

मैंने पहले ब्रा को अपने मुँह में लिया — कपों को अपने होठों से छुआ, कल्पना की कि यह नेहा के स्तनों को छू रहा है। फिर मैंने उसे सूँघा — वहाँ परफ्यूम और पसीने का एक हल्का मिश्रण था, जो नेहा के शरीर की खुशबू थी।

फिर मैंने पैंटी उठाई। मैंने उसे अपनी नाक से लगाया और गहरी साँस ली — उसके गुप्तांगों की हल्की, तीखी गंध मेरे नथुनों में भर गई। मैंने पैंटी को अपने लिंग पर रगड़ना शुरू किया, उसके गीले हिस्से को अपने लिंग के सिरे पर फेरा।

मैंने फोन निकाला और नेहा का इंस्टाग्राम प्रोफाइल खोला। उसकी वही रील चलाई — जहाँ वह साड़ी में अपने गांड को हिला रही थी।
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मैंने अपने लिंग को हाथ में लिया और धीरे-धीरे स्ट्रोक करना शुरू किया। मेरी आँखें स्क्रीन पर थीं, मेरा मुँह नेहा की ब्रा से भरा हुआ था, और मेरा दूसरा हाथ उसकी पैंटी को पकड़े हुए था, बारी-बारी से सूँघ रहा था।

मैंने कल्पना की — नेहा अपनी रील में जो हरकतें कर रही थी, वह मेरे लिए कर रही है। वह मुझे बहका रही है, मुझे अपने स्तन दिखा रही है, मुझे अपने नितंब हिला रही है। मैंने कल्पना की कि मैं उसके स्तनों को पकड़ूँ, उसके निप्पल्स को चूसूँ, उसके गोल गांड पर हाथ फेरूँ।

"हाँ, नेहा... मुझे दिखा... अपने चुचे दिखा..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

मेरी स्ट्रोकिंग तेज़ होने लगी। मेरा लिंग सख्त, गीला, और लाल हो चुका था। मैंने पैंटी को अपने लिंग पर कसकर रखा और उसे रगड़ते हुए स्ट्रोक करने लगा — मानो वह नेहा का मखमली चूत हो।

रील में नेहा मुड़कर अपने नितंब दिखा रही थी — वही गोल, टाइट, जींस में लिपटे हुए गांड जो मैंने आज देखे थे।

मेरी स्ट्रोकिंग पागलों जैसी हो गई — तेज़, उन्मत्त, बेकाबू। मैंने अपनी आँखें बंद कीं और नेहा के शरीर की कल्पना की — उसके स्तन, उसके नितंब, उसकी पतली कमर, उसके लंबे पैर।

एक पल में मेरा पूरा शरीर काँप उठा। मैंने आँखें खोलीं और चिल्लाया — "नेहा!" — और उसी पल मेरा वीर्य एक धार की तरह बाहर निकला, सीधे शौचालय की दीवार पर जा लगा।

एक बार, दो बार, तीन बार — वीर्य की गर्म धार दीवार से टपकने लगी।

मैं हाँफ रहा था, पसीने से तर। हाथ में नेहा की ब्रा और पैंटी अब भी थे, और मेरा लिंग धीरे-धीरे नरम हो रहा था।

लेकिन मेरे दिमाग में अब एक ही बात थी — "मैंने अपनी बहन का नाम लेकर हस्तमैथुन किया। मैं उसके कपड़ों का इस्तेमाल किया। मैं और गिर गया हूँ।"

मैंने दीवार से वीर्य साफ किया,और शौचालय से बाहर निकला। मैंने नेहा के अंडरगारमेंट्स उसके कमरे में लॉन्ड्री बास्केट में इतने ध्यान से रखे कि उसे कुछ पता न चले। दरवाज़ा बंद किया, ताला लगाया और चाबियाँ उसी दराज में रख दीं जहाँ से मैंने उठाई थीं।घड़ी में शाम के पाँच बज रहे थे। नेहा शॉपिंग से लौटने वाली थी।

घड़ी की सुइयाँ चल रही थीं, और मैं अपने भविष्य के फैसले की प्रतीक्षा में बैठा था — एक ऐसा फैसला जो हमारी ज़िंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकता था।

मैं लिविंग रूम के सोफ़े पर बैठा फ़ोन स्क्रॉल कर रहा था तभी दरवाज़े की घंटी बजी। घड़ी पर शाम के पाँच बजकर तैंतीस मिनट हो रहे थे — नेहा वापस आ गई थी।

मैंने उठकर दरवाज़ा खोला। सामने नेहा खड़ी थी, दो बड़े शॉपिंग बैग हाथों में लटकाए। उसके चेहरे पर थकान और उत्साह का मिश्रण था।

"वापस आ गई? बहुत सारा समान ले आई," मैंने मुस्कुराकर कहा और बैग्स उठाने के लिए हाथ बढ़ाया।

"हाँ भैया, एक नई दुकान खुली है मार्केट में — फ्लैट पचास परसेंट ऑफ़। बहुत मज़ा आया," उसने कहा और मुझे बैग्स पकड़ाते हुए अंदर आ गई।

मैंने बैग्स सोफ़े पर रख दिए और उसकी तरफ़ देखा। वह जूते उतार रही थी, फिर सीधी सीढ़ियों की ओर बढ़ी। "पहले कपड़े रख दूँ, फिर चाय बनाती हूँ," उसने पीछे मुड़कर कहा और सीढ़ियाँ चढ़ने लगी।

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मेरी नज़र अपने-आप उसके पीछे चली गई। टाइट ब्लू जींस में लिपटी उसकी गांड — गोल, उठी हुई, हर कदम के साथ हिलती हुई। जैसे-जैसे वह ऊपर जा रही थी, उसके गांडकी हरकत और साफ़ नज़र आ रही थी। एक सीढ़ी चढ़ते हुए, एक हाथ रेलिंग पर, दूसरे हाथ में बैग — और वह गांड जो जींस के नीचे से सख्त और उभरी नज़र आ रही थी। मैंने गहरी साँस ली।

मेरे पैंट में लंड फिरसे हरकत में आ गया था। मैंने जल्दी से सोफ़े पर बैठकर अपनी पैंट को ढीला करने की कोशिश की। "अरे, यार, क्या हो रहा है मुझे?" मैंने मन ही मन कहा। लेकिन उसके उठते-गिरते गांड की छवि मेरे दिमाग में चिपक गई थी।

उसी समय मेरे फ़ोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर "किरण" का नाम चमक रहा था। मैंने कॉल रिसीव किया।

"यो राज! आज शनिवार है, याद है? कुछ दोस्त आ रहे हैं ढाबे पर — चल बियर के लिए। थोड़ी देर में निकल ले," किरण ने उत्साह से कहा।

मैंने नीचे की ओर देखा — अपने पैंट में उभरे हुए लंड को। "हाँ यार, अच्छा आइडिया है। मैं आ रहा हूँ," मैंने कहा। मुझे भी लगा कि घर से निकलना ही बेहतर होगा — वरना नेहा के आसपास मेरी हालत ख़राब हो जाती।

फ़ोन रखते ही मैं उठा और नीचे किचन की ओर गया। नेहा उतर चुकी थी और फ्रिज खोलकर पानी निकाल रही थी। "भैया, चाय बनाऊँ?" उसने पूछा।



"नहीं, रहने दे। किरण ने बुलाया है — कुछ दोस्तों के साथ ढाबे पर जा रहा हूँ। रात का खाना मेरा मत रखना," मैंने कहा और अपने जूते पहनने लगा।

"अच्छा, मज़ा करो। लेकिन ज़्यादा देर मत करना," उसने मुस्कुराकर कहा।

मैंने सिर हिलाया और बाहर निकल गया। दरवाज़ा बंद होते ही मैंने गहरी साँस ली। उसके गांड की छवि अभी भी मेरी आँखों के सामने थी — लेगिंग्स में लिपटी वो गोल गांड, सीढ़ियों पर हिलती हुई। मेरा लंड अब भी सख्त था, पैंट में दब रहा था। "कहीं और जाकर शांत करूँगा," मैंने सोचा और ऑटो रिक्शा की तरफ़ बढ़ गया।

ढाबे पर किरण और बिकाश के साथ बियर के पेग चल रहे थे। पहली बोतल खत्म होते-होते बातें गर्म हो गई थीं। किरण अपने फोन पर इंस्टाग्राम रील्स दिखा रहा था — कोई लड़की रेड ड्रेस में हिप्स हिला रही थी, तो कोई जिम में स्क्वाट करते हुए अपना एब्स दिखा रही थी।

"यार, देखो इसको — क्या माल है! बस चूसता रहूँ," बिकाश ने हँसते हुए कहा और एक और पेग उड़ा दिया।

मैं देख तो रहा था, लेकिन मेरे दिमाग में नेहा थी। वही गोल नितंब, वही लेगिंग्स में लिपटी जांघें, वही सीढ़ियों पर चढ़ते समय का वो मूवमेंट। मैं अपने गिलास में बची बियर को देखता रहा — और उसके शरीर का हर इंच मेरी आँखों के सामने था।

"राज, क्या हुआ? चुप क्यों है?" किरण ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।

"कुछ नहीं यार, बस थकान है," मैंने मुस्कुराकर कहा और एक और घूँट भर लिया।

हमने फिर काफी सारें बातें की । रात नौ बज चुके थे जब हम उठे। काफी बोतलें खाली हो चुकी थीं। बिकाश और किरण ऑटो में बैठकर चले गए, मैंभी घर की ओर निकल पड़ा।

हवा में ठंडक थी, लेकिन मेरे अंदर गर्मी उबल रही थी। पैंट में लंड थोड़ा सख्त हो गया था — सिर्फ बियर के नशे की वजह से नहीं। नेहा के बारे में सोचते-सोचते मैं गली के कोने पर पहुँच गया।

घर पहुँचने पर मैंने देखा — मेन गेट बंद था, अंदर लाइटें बुझी हुई थीं। पापा सो चुके होंगे। मैंने नेहा का नंबर मिलाया। तीन बार रिंग हुई, फिर उसने उठाया।

"हैलो? भैया, इतनी रात?" उसकी नींद भरी आवाज़ थी।

"हाँ, गेट खोल दो। पापा को जगाना नहीं चाहता," मैंने कहा।

दो मिनट बाद अंदर से पैरों की आहट आई। दरवाज़ा खुला, और सामने नेहा खड़ी थी — सफेद टाइट कमीज़ और सफेद टाइट शॉर्ट्स में। कमीज़ का बटन थोड़ा खुला हुआ था, और उसकी गर्दन से नीचे उतरती हुई क्लीवेज साफ़ दिख रही थी। व्हाइट शॉर्ट्स उसकी जांघों के ऊपर तक आ रहे थे, जांघों का ऊपरी हिस्सा — गोरा, चिकना — पूरी तरह नंगा। मेरी नज़र वहीं ठहर गई।
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"भैया, इतनी देर! मैंने सोचा तुम खाना खा लोगे, लेकिन तो आए ही नहीं," उसने आँखें मलते हुए कहा। "पापा भी एक घंटा पहले सो गए थे — आज भी पी रखी थी।"

"हाँ, दोस्तों के साथ थोड़ी और हो गई। चल, कमरे चलते हैं," मैंने कहा और अंदर कदम रखा।

मैंने जूते उतारे और सीढ़ियों की ओर बढ़ा। नेहा मेरे आगे-आगे चलने लगी। सीढ़ियाँ चढ़ते समय उसकी सफेद शॉर्ट्स में लिपटी जांघों के पिछले हिस्से — वो उभार, वो गोलाई — हर कदम के साथ मेरी आँखों को लुभा रहे थे।

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ऊपर पहुँचकर वह अपने कमरे के दरवाज़े पर रुक गई। मुड़ी और मुस्कुराई — "गुडनाइट भैया। कल सुबह चाय बनाऊँगी, लेकिन तुम जल्दी उठना।"

"गुडनाइट नेहा," मैंने कहा और अपना दरवाज़ा खोला।

अंदर आते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया और कमरे की लाइट ऑन की। बिस्तर पर बैठते ही पैंट की ज़िप खोल दी। मेरा लंड पूरी तरह सख्त था — सिर से पैर तक नसें उभरी हुईं। मैंने फोन निकाला और इंस्टाग्राम खोला। वही अकाउंट — नेहा का सीक्रेट रील्स अकाउंट।

स्क्रीन पर उसकी रील्स लोड होने लगीं। पहली रील में वह ब्लैक लेगिंग्स और क्रॉप टॉप में थी, कैमरे की ओर हिप्स हिलाते हुए। दूसरी में रेड ड्रेस में, अपने क्लीवेज दिखाते हुए, हाथों से अपने स्तनों को दबाते हुए। तीसरी में वह बिस्तर पर लेटी थी, पीठ ऊपर करके, शॉर्ट्स में, अपने नितंबों को कैमरे के सामने हिलाते हुए।

मैंने पैंट से लंड बाहर निकाला — मोटा, सख्त, सिर पर पहले से ही पारदर्शी तरल चमक रहा था। मैंने अपने हाथ से लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। आँखें फोन की स्क्रीन पर गड़ी हुई थीं — नेहा की वो रील्स, उसके नितंब, उसकी जांघें, उसके स्तन।

मैंने रील्स को बदलना शुरू किया — एक के बाद एक, उसकी हर एक रील। उसके लिप्स, उसकी नज़रें, वो मासूमियत और अश्लीलता का मिश्रण। मैं अपनी कल्पना में उसे अपने सामने ला रहा था — काश वह यहाँ होती, काश मैं उसे छू पाता, उसकी जांघों को थपथपा पाता, उसके गांड को दबा पाता।

हाथ की गति तेज़ हो गई। मैंने अपनी बायीं ओर रखी गंदी कपड़ों की टोकरी की ओर देखा —मैंने टोकरी से एक सफेद टी-शर्ट निकाली ।मैंने टी-शर्ट को अपने लंड के सिरे पर लपेट दिया और जोर-जोर से मसलने लगा। नेहा — सिर्फ नेहा — उसकी जांघें, उसका नितंब, उसकी क्लीवेज, उसकी आवाज़ — "गुडनाइट भैया।"

"हाँ, गुडनाइट नेहा," मैंने फुसफुसाया और आखिरी धक्का दिया।

वीर्य जोर से फूटा — गरम, चिपचिपा, सफेद धार। पहला स्पर्ट टी-शर्ट पर छिटक गया, दूसरा मेरे हाथों पर। मैंने आँखें बंद कर लीं और हाँफता रहा। फिर वही गिल्ट — लेकिन संतुष्टि ज्यादा थी।

मैंने टी-शर्ट वापस टोकरी में रख दी, लंड को पैंट में डाला और बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया। आँखें बंद होते-होते नेहा का शरीर मेरे सामने था — सफेद शॉर्ट्स में लिपटी उसकी गांड, उसकी जांघों की चमक, उसका क्लीवेज, उसकी मुस्कान।

मैं सो गया — उसके बारे में सोचते हुए, उसकी हर एक इंच को याद करते हुए।
 

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अपडेट ३:

सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी। शनिवार था, लेकिन मेरी आँखें जल्दी खुल गईं। कल रात की वो घटना — नेहा के सफेद शॉर्ट्स में लिपटी जांघें, उसकी कमीज़ में झाँकती क्लीवेज — सब ताज़ा था।

मैं उठा और बाथरूम की ओर बढ़ा। हाथ दरवाज़े के हैंडल पर था कि अंदर से पानी की आवाज़ आई। दरवाज़ा थोड़ा खुला था — नेहा अंदर थी।

वह सिंक के सामने खड़ी थी, वही सफेद टाइट शॉर्ट्स और सफेद कमीज़ पहने हुए। शॉर्ट्स उसकी जांघों के ऊपर तक आए हुए थे, गोरी जांघों का ऊपरी हिस्सा साफ़ दिख रहा था। कमीज़ के बटन उसकी छाती पर तन गए थे, हर हरकत के साथ उसके स्तन हिलते हुए।

वह ब्रश कर रही थी। ब्रश के ऊपर-नीचे होने पर उसके स्तन उसी लय में हिलते — ऊपर उठते, नीचे आते। मेरी नज़र उन पर गड़ गई। मेरा लंड पजामे में उभरने लगा — सुबह की सख्ती और नेहा के शरीर का नज़ारा, दोनों का संगम।
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"ओह, भैया, तुम उठ गए?" उसने शीशे में मेरा प्रतिबिंब देखते हुए कहा, ब्रश मुँह में ही था।

"हाँ, जल्दी उठना होता है," मैंने अपनी आवाज़ को सामान्य रखने की कोशिश की। "थोड़ी जगह दो, मुझे भी ब्रश करना है।"

उसने अपने बगल में थोड़ी जगह बनाई — बस इतनी कि दो लोग मुश्किल से खड़े हो सकें। मैंने पास्ट लगाया, ब्रश पकड़ा और उसके बगल में खड़ा हो गया।

जगह इतनी संकरी थी कि मेरा बायाँ कंधा उसकी पीठ से छू रहा था। मैंने ब्रश करना शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे अपने शरीर को उसकी ओर थोड़ा सरका दिया। मेरा सख्त लंड — पजामे के नीचे उभरा हुआ — उसके गांड की कोमलता को छू गया।

एक पल के लिए मेरी साँसें थम गईं। उसके नितंबों का स्पर्श, वह गोलाई, वह नरमाहट — मैं और करीब सरक गया। अब मेरा लंड उसके शॉर्ट्स से ढके बट के बीच में दबा हुआ था। मैं ब्रश करता रहा, जैसे कुछ हुआ ही न हो। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी — शायद उसने महसूस नहीं किया, या महसूस करके अनदेखा कर दिया।
कुछ पल बाद उसने मुँह धोया और माउथवॉश किया। फिर वह झुकी — सिंक पर झुककर अपना चेहरा धोने लगी।

"थोड़ी जगह दो भैया," उसने कहा।

मैंने एक कदम पीछे लिया। वह झुकी — और शीशे में उसकी कमीज़ के अंदर का नज़ारा साफ़ दिखाई दिया। उसके स्तन — दो गोरे, गोल, पूरी तरह गठे हुए — कमीज़ के नीचे झूल रहे थे। क्लीवेज इतनी गहरी थी कि उसके स्तनों का भीतरी हिस्सा, गोलाई का ऊपरी भाग और नीचे की ओर उतरता वक्र — सब साफ़ नज़र आ रहा था।

मैं वहीं ठिठक गया। ब्रश मेरे हाथ में लटका हुआ था, मैं बस घूरता रहा। उसके स्तन कितने परफेक्ट थे — सफेद, चिकने, गोल, बिल्कुल गठे हुए, जैसे किसी मूर्तिकार ने तराशे हों। मैं अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा था।

उसने चेहरा धोया, तौलिये से पोंछा और सीधी हुई। "भैया, तुम ब्रश कर लो, मैं जा रही हूँ अपने रूम में," उसने मुस्कुराकर कहा और बाहर चली गई।

मैं वहीं खड़ा रह गया। हाथ में ब्रश था, लेकिन दिमाग में सिर्फ नेहा थी — सफेद शॉर्ट्स में उसका बट, लंड का वह स्पर्श, शीशे में दिखी वह क्लीवेज।

क्या उसने महसूस किया? क्या उसे पता चला? मेरे दिमाग में सवाल थे, लेकिन मैंने उन्हें दबा दिया। मैंने जल्दी से ब्रश किया, चेहरा धोया और अपने कमरे में लौट आया।

कमरे में आकर मैंने अपनी रूटीन एक्सरसाइज शुरू की — पुश-अप्स, स्क्वाट्स, स्ट्रेचिंग। दिमाग को शांत करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नेहा का शरीर मेरी आँखों के सामने था।

" भैया! चाय के लिए आ जाओ!" नेहाकी किचनसे आवाज़ आई।

"आ रहा हूँ!" मैंने कहा और जल्दी से एक्सरसाइज खत्म की। टी-शर्ट पहनी और नीचे आ गया।

किचन में नेहा ने तीन कप चाय रख दी थी। उसने कपड़े बदल लिए थे — अब उसने टाइट व्हाइट लेगिंग्स और व्हाइट कुर्ता पहन रखा था। लेगिंग्स उसकी पतली कमर और गोल नितंबों पर इस तरह चिपकी हुई थीं जैसे उसकी त्वचा का हिस्सा हों। कुर्ता उसकी छाती पर तना हुआ था, हर उभार को उजागर कर रहा था।

हम सब मेज़ पर बैठ गए।

"तो आज क्या प्लान है, राज?" पिताजी ने पूछा।

"कुछ खास नहीं, पापा। ऑफिस का काम है, शाम तक निपट जाऊँगा," मैंने कहा।

"और तुम, नेहा? आज क्या कर रही हो?" पिताजी ने उसकी ओर देखा।

"हाँ, पापा, एक दोस्त के घर जाना है, लेकिन शाम तक वापस आ जाऊँगी," उसने चाय की चुस्की लेते हुए कहा। उसके होंठ कप के किनारे पर टिके थे, उसकी जीभ हल्की बाहर आई — मेरी नज़र वहीं थम गई।

मैंने उसे देखा — उसकी हर हरकत, हर मूवमेंट। जब वह चाय पी रही थी, तो उसके स्तन हल्के से हिल रहे थे। जब उसने कप नीचे रखा और अपने बालों को पीछे किया, तो उसकी बगल का हिस्सा और कुर्ते के नीचे उसकी कमर का हिस्सा दिखाई दिया। मैं अपनी कल्पना में उसके कपड़े उतार रहा था — उसकी लेगिंग्स को नीचे खींचते हुए, उसके गोरे नितंबों को नंगा करते हुए, उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए, उसके स्तनों को मुँह में लेते हुए।

"राज, क्या हुआ? खाना नहीं खा रहे?" पिताजी ने पूछा।

"हाँ, पापा, बस सोच रहा था," मैंने जल्दी से पराठा तोड़ा और खाने लगा।

मैंने मन में तय किया — मुझे नेहा के और करीब जाना है। उसे सिर्फ एक बहन की तरह नहीं, बल्कि और कुछ — एक औरत के रूप में — देखना है। मुझे उसे सिड्यूस करना है, उसे अपने कमरे में लाना है, उसके शरीर की हर इंच को छूना है।

"नेहा, मैं ऑफिस जा रहा हूँ। अपना ख्याल रखना, और घर का भी," मैंने उठते हुए कहा।

"हाँ भैया, तुम भी ध्यान रखना। शाम को जल्दी आना," उसने मुस्कुराकर कहा, और मेरे दिल में वह मुस्कान गूँज गई।

पिताजी भी तैयार हो रहे थे। मैंने बैग उठाया और ऑफिस के लिए निकल गया।

ऑफिस में दिन सामान्य रूप से बीता। मैंने अपना काम निपटाया — फाइलें देखीं, मीटिंग में बैठा, लंच ब्रेक में अपनी डेस्क पर अकेला बैठकर खाना खाया। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ नेहा थी।

उसके चेहरे की मासूमियत, उसके शरीर की बनावट, उसके बाल, उसकी आवाज़ — सब कुछ। मैंने सोचा — वह आजकल की लड़कियों की तरह प्रोग्रेसिव है, मॉडर्न है। वह इंस्टाग्राम पर रील्स डालती है, उसे पता है कि उसका शरीर कितना आकर्षक है। शायद वह सिर्फ अटेंशन चाहती है। या शायद और भी कुछ।

लंच के बाद मैंने अपना फोन निकाला। इंस्टाग्राम ऐप खोला और एक नया अकाउंट बनाया — फेक नाम, फेक एड्रेस, कोई प्रोफाइल पिक्चर नहीं। "Aaditya_Sinha_hansy99" — एक साधारण सा नाम।

पहले मैंने रैंडम हॉट गर्ल्स की रील्स स्क्रॉल कीं और फॉलो रिक्वेस्ट भेजनी शुरू कीं। फिर मैंने नेहा का अकाउंट सर्च किया — वही अकाउंट जिस पर वह अपनी बोल्ड रील्स डालती थी।

"फॉलो करें" पर क्लिक किया। फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।

"देखते हैं," मैंने खुद से कहा और फोन बंद कर दिया।

शाम को ऑफिस खत्म हुआ। मैंने बाइक स्टार्ट की और घर की ओर निकल पड़ा। रास्ते में फोन चेक किया — नेहा ने अभी तक रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं किया था। शायद वह बिजी थी।

घर पहुँचा तो मेन गेट खुला था। बाइक अंदर रखी और ऊपर गया। नेहा नीचे ड्रॉइंग रूम में टीवी देख रही थी।

"भैया, आ गए?" उसने मुस्कुराकर कहा।

"हाँ, तुम कब आई?"

"एक घंटा पहले। पापा अभी तक नहीं आए, लगता है शाम को आएँगे," उसने कहा। उसने लूज कुर्ता और लेग्गिंग्स पहन रखा था ।

"मैं ऊपर जा रहा हूँ," मैंने कहा और अपने कमरे में चला गया।

आपके फॉलो रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया है।"

बिंगो!

मैंने तुरंत उसकी प्रोफाइल खोली। वहाँ एक नई रील थी — आज ही डाली गई थी। थंबनेल में वह ब्लैक बैकलेस टॉप और सफेद मिनी स्कर्ट में थी।

मैंने रील चलाई।

वह एक कमरे में थी — शायद उसकी सहेली का कमरा। बैकलेस टॉप ने उसकी पीठ का पूरा हिस्सा और कंधे नंगे कर दिए थे। मिनी स्कर्ट उसकी जांघों के बीच तक आई हुई थी, उसकी गोरी जाँघें पूरी तरह दिख रही थीं। वह कैमरे की ओर हिप्स हिला रही थी — धीरे-धीरे, एक ताल में — हाथों को अपने बालों में ले जाते हुए, फिर अपने कूल्हों पर।

एक मूव में वह कैमरे की ओर झुकी — उसकी क्लीवेज साफ़ दिखाई दी, टॉप के नीचे उसके स्तनों का ऊपरी हिस्सा उभरा हुआ। वह मुस्कुराई, अपने होंठों को चाटा, और फिर पीठ करके मुड़ गई — स्कर्ट उसके बट पर चिपक गई, वह धीरे-धीरे नीचे झुकी, कैमरे को एक लास्ट लुक दिया।

मैंने पैंट की ज़िप खोल दी। मेरा लंड पहले से ही सख्त था — सिर पर पारदर्शी तरल चमक रहा था। मैंने उसे बाहर निकाला और रील को फिर से लूप किया।

वह झुकी — स्कर्ट उसके बट पर चढ़ गई — मैंने अपने लंड को पकड़ा। वह मुड़ी — उसकी क्लीवेज — मैंने हाथ ऊपर-नीचे किया। वह मुस्कुराई — उसके होंठ — मैंने गति तेज़ की।

मैं उसे घूर रहा था — उसके बट, उसके स्तन, उसकी जाँघें, उसकी कमर — सब मेरी आँखों के सामने था। मैं अपनी कल्पना में उस स्कर्ट को उतार रहा था, उस टॉप को फाड़ रहा था, उसे अपने बिस्तर पर लिटा रहा था।

अचानक नेहाकी रूमकी से दरवाजा खुलने की आवाज़ आई ।



मैंने जल्दी से लंड को पैंट में डाला, ज़िप बंद की, और बाहर आ गया।



"चाय पियोगे? मैं बना रही हूँ," उसने पूछा।

"हाँ, मैं छत पर आता हूँ," मैंने कहा।

ऊपर की मंज़िल पर आधा हिस्सा किचन था, आधा छत। मैं छत पर गया और एक कुर्सी पर बैठ गया। शाम की हल्की ठंडी हवा चल रही थी। कुछ देर बाद नेहा दो कप चाय लेकर आई — उसने एक कप मुझे दिया और सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।

"बहुत दिनों बाद हम दोनों साथ बैठे हैं," मैंने चाय की चुस्की लेते हुए कहा।

"हाँ भैया, तुम हमेशा बिजी रहते हो," उसने मुस्कुराकर कहा।

"अब नहीं। मैं तुम्हारे साथ और समय बिताऊँगा," मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। "तुम जानती हो, मैं तुम्हारी हर चीज़ की अप्प्रीसियेत करता हूँ। तुम इस घर की रानी हो।"

उसकी आँखों में चमक आ गई। "सच में, भैया?"

"हाँ, बिल्कुल। और मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। जो भी चाहिए, बस बताना," मैंने कहा।

वह शर्मा गई, लेकिन खुश थी। हमने बातें कीं — उसके दोस्तों के बारे में, उसके शौक के बारे में, उसकी पसंद के बारे में। मैंने उसे सुना, मैंने उसे महसूस किया। मैं दोस्ताना और सपोर्टिव बन रहा था — और वह इसे पसंद कर रही थी।

रात को डिनर के बाद पिताजी सो गए। नेहा अपने कमरे में गई।

मैं अपने कमरे में लेटा, फोन निकाला। इंस्टाग्राम खोला — आदित्य सिन्हाका अकाउंट। नेहा की प्रोफाइल खोली।

एक गहरी साँस ली। फिर टाइप किया:

"Hello Beautiful, nice reel. ❤️" भेज दिया।

अब इंतज़ार था मेरा रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करनेका।
 
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Raaj Sinha

Raaz
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अपडेट ४:

अगली सुबह मेरी आँखें खुलीं तो फोन पर पहली नज़र पड़ी। इंस्टाग्राम का नोटिफिकेशन था — "आपका मैसेज देख चुके हैं"। नेहा ने मेरा "Hello Beautiful, nice reel" पढ़ लिया था, लेकिन कोई जवाब नहीं। मैंने गहरी साँस ली — अच्छा है, जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। शायद वह सोच रही है, या शायद उसने अनदेखा कर दिया।

मैं उठा और कमरे से बाहर निकला। ठीक उसी वक्त नेहा अपने कमरे से बाहर आ रही थी। उसने नहा लिया था — बाल अभी भी गीले थे, उनमें से शैम्पू की हल्की खुशबू आ रही थी। उसने हल्का पिंक कुर्ता और व्हाइट लेगिंग्स पहन रखी थी। कुर्ता की चिप्पियों के बीच से काली ब्रा की पतली पट्टियाँ झाँक रही थीं। लेगिंग्स उसकी पतली कमर और गोल कूल्हों पर कसी हुई थीं।

"गुड मॉर्निंग भैया," उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

"गुड मॉर्निंग," मैंने कहा और अपनी नज़रें उसके बट से हटा लीं। वह मुड़ी और किचन की ओर बढ़ गई — एकदम सामने से उसके नितंबों का दृश्य दिखा। वह संकरे गलियारे से जा रही थी, और हर कदम के साथ उसके गाल ऊपर-नीचे हो रहे थे, आपस में रगड़ खा रहे थे। मेरा दिल धड़क गया — उस सफेद लेगिंग्स में लिपटे उसके गोल, मजबूत नितंब जैसे मुझे बुला रहे थे।

"भैया, जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं नाश्ता बना रही हूँ," उसने पीछे मुड़कर कहा।

"हाँ, पाँच मिनट में आया," मैंने कहा और बाथरूम में घुस गया। लेकिन दिमाग में सिर्फ उसके नितंब थे — उनकी गोलाई, वह कोमलता जो कल सुबह मेरे लंड को छू चुकी थी। मैंने जल्दी से दाँत साफ किए, चेहरा धोया, और कमरे में आकर टी-शर्ट पहन ली।

नीचे किचन में पिताजी पहले से बैठे थे। नेहा पराठे बेल रही थी — उसका हाथ बेलन पर चल रहा था, और हर बार जब वह जोर लगाती, उसके स्तन कुर्ते के नीचे हिलते। मैंने अपनी नज़रें संभालीं और मेज़ पर बैठ गया।

ऑफिस और दिनचर्याकी बाते और इधरउधरकी बातें करने लगे ।
"हाँ, इस हफ्ते जब मैं टूर पर जानेका प्लान बन रहा है। नेहा अकेली रहेगी तो तुम्हें उसका ध्यान रखना होगा," पिताजी ने मुड़कर नेहा की ओर देखा। "बेटा, तुम अकेली हो, कोई तकलीफ हो तो राज को बताना।"

"पापा, राज भैया बहुत हेल्पफुल हैं। पिछले कुछ दिनों से वह मेरी बहुत मदद कर रहे हैं," नेहा ने पराठा पलटते हुए कहा। "घर का काम भी करते हैं, बर्तन भी धोते हैं। मुझे कोई तकलीफ नहीं है।"

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "पापा, आप चिंता मत कीजिए। मैंने अपने दोस्तों के साथ समय कम कर दिया है। ऑफिस का काम भी है, और सोचता हूँ घर पर ज्यादा रहूँगा। नेहा का पूरा ध्यान रखूँगा।"

पिताजी संतुष्ट दिखे। "बहुत अच्छा। दोस्त 3-4 दिन का प्लान बना रहे हैं। जब फाइनल होगा तो बता दूंगा। तुम दोनों सावधान रहना।"

नाश्ते के दौरान सब सामान्य रहा। हमने खाना खाया, हँसी-मज़ाक किया। लेकिन मेरे दिमाग पर नेहा का शरीर छाया हुआ था। उसकी हर हरकत, हर मुस्कान, हर झुकना — सब मेरी कल्पना में नंगा हो रहा था।

ऑफिस में दिन बीता। मैंने अपना काम निपटाया, मीटिंग अटेंड की, लेकिन दिमाग घर पर था। उसके नितंबों की गोलाई, उसके स्तनों का झूलना, उसकी गीली बालों की खुशबू — सब याद आ रहा था।

शाम को ऑफिस से निकलते ही मैंने बाइक रोड पर मोड़ दी। रास्ते में एक कॉफी शॉप आया — "ब्रीज़ कैफे"। मैंने अंदर जाकर एक कप कॉफी ऑर्डर किया और कोने की टेबल पर बैठ गया। फोन निकाला, इंस्टाग्राम खोला।

आदित्य सिन्हा के अकाउंट से मैंने नेहा को एक नया मैसेज टाइप किया:

"Hi! I am from Mumbai. I like your reels very much. I am your big fan. Can I be your friend? 😊"
घर पहुँचा तो ड्रॉइंग रूम में टीवी चल रहा था। नेहा सोफे पर बैठी कोई साउथ इंडियन मूवी देख रही थी। उसने कपड़े बदल लिए थे — अब उसने एक हल्का सलवार कमीज़ पहन रखा था, हल्के ब्लू रंग का, जो उसके शरीर पर ढीला-ढाला था लेकिन फिर भी उसके उभार दबा रहा था।

"भैया, आ गए? चाय पियोगे?" उसने टीवी से नज़रें हटाए बिना पूछा।

"नहीं, ऑफिस के साथियों के साथ कॉफी पी ली," मैंने कहा और ऊपर चला गया।

अपने कमरे में आकर मैंने कपड़े बदले — शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहन ली। फोन चेक किया। इंस्टाग्राम पर एक नोटिफिकेशन था। नेहा ने जवाब दिया था!

"Sure! but no sex texts and only friend. What is your Name?" 😊

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। बिंगो! उसने बात शुरू कर दी थी। मैंने तुरंत जवाब टाइप किया:

"Thank you! I am Aditya, 25 years old, working as a Programmer at an IT firm in Mumbai. I really loved your style and confidence. What is your name?"

थोड़ी देर में उसका जवाब आया: "I am Sriya. I am from Delhi but currently staying with family. I make reels just for fun. Nice to meet you, Aditya."

मैं मुस्कुराया — "Sriya"! उसने झूठा नाम बताया था। वह नेहा नहीं बल्कि "Sriya" बन गई थी। मुझे उसकी यह झूठ बोलने की कला पर हैरानी भी हुई और मज़ा भी आया। अच्छा है — हम दोनों फेक नाम से खेल रहे थे।

"Nice to meet you too, Sriya. So tell me, what inspired you to start making such amazing reels? Your expressions are really captivating."

हमने बातचीत शुरू कर दी। उसने अपने रील्स के बारे में बताया — कैसे वह अलग-अलग आउटफिट्स ट्राई करती है, कैसे वह खुद को क्रिएटिव तरीके से एक्सप्रेस करती है। मैंने उसकी तारीफ़ की — "तुम्हारी ब्यूटी नैचुरल है, तुम्हारे कर्व्स तुम्हें अलग बनाते हैं, तुम बहुत आकर्षक लगती हो।"



नेहाने जवाब दिया — "Thank you, Aditya. You are very sweet."
मैंने भेज दिया और फोन बंद कर दिया। कॉफी पी, बिल चुकाया, और घर के लिए निकल गया।
हमने लगभग आधे घंटे बात की। मैंने जानबूझकर बात को खत्म किया — "I have to go now. It's getting late. Talk to you later, Sriya. It was really nice chatting with you."

"Goodbye, Aditya. Talk to you later too. Take care."

सही समय पर बात खत्म करना ज़रूरी था। जल्द ही उसे डिनर बनाने जाना था। मैंने फोन रखा और छत पर छत पर चला गया।

ठंडी हवा चल रही थी। मैंने वहाँ खड़े होकर कुछ देर सोचा — कितनी आसानी से वह बात कर रही थी। एक अजनबी के साथ इतनी सहजता? शायद उसे अटेंशन पसंद है। या शायद वह भी मेरी तरह कुछ और चाहती है।

कुछ देर बाद किचन से आवाज़ आई — नेहा ने लाइट जला दी थी। मैं गया और किचन के दरवाज़े पर खड़ा हो गया।

"भैया, अंदर आओ। मैं सब्ज़ी काट रही हूँ," उसने मुस्कुराकर कहा। उसने अब कुर्ता बदल लिया था — शायद खाना बनाने के लिए अलग कपड़े पहने थे। एक टाइट ब्लू कुर्ता जो उसकी छाती पर कसा हुआ था, और नीचे लेगिंग्स।

"मैं तुम्हारी मदद करता हूँ," मैंने कहा और अंदर घुस गया। "क्या काटना है?"

"प्याज़ और टमाटर," उसने प्याज मेरी ओर बढ़ाया। "तुम सिर्फ प्याज़ छिल दो"

मैं प्याज़ छील रहा था और आँखें नम थीं — लेकिन नमी का एक कारण और भी था। नेहा, जब भी टमाटर काटने के लिए झुकती, उसके कुर्ते की गर्दन से उसके स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिखाई देता। काले ब्रा के पतले लेस वाली किनारी उसके स्तनों को अंदर समेटे हुए थी।

वह झुकी — स्तन नीचे लटके, उनकी सफेद गोलाई, उनके बीच की गहरी नाली — मेरी नज़र वहीं थम गई। उसके निप्पल? शायद ब्रा के नीचे सख्त हो चुके थे, लेकिन मैं केवल कल्पना कर सकता था।

प्याज और टमाटर कत्तिंग के बाद वह मुड़ी — अब मुझसे पीठ करके खड़ी थी। लेगिंग्स में लिपटा उसका बट ठीक मेरी आँखों के सामने था। वह चूल्हे पर कढ़ाई रखने के लिए झुकी — और उसके नितंब उभर कर सामने आ गए। मैंने अपनी साँस रोक ली। कितना परफेक्ट! बिल्कुल गोल, मजबूत, लेगिंग्स के नीचे उनका हर इंच उभरा हुआ। मैंने अपनी कल्पना में हाथ बढ़ाकर उन्हें दबाया — उनकी कोमलता, उनकी गर्माहट — मेरा लंड शॉर्ट्स के नीचे सख्त होने लगा।

"भैया, तुम आज बहुत चुप हो," उसने पीछे मुड़कर कहा। उसकी नज़र मेरे शॉर्ट्स पर पड़ी — लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

"बस ऑफिस का काम सोच रहा था," मैंने बहाना बनाया। "खाना क्या बना रही हो?"

"पनीर मसाला और रोटी। पापा को पसंद है," उसने कहा। "और तुम्हारे लिए मैंने अचार वाला पनीर बनाने का सोचा है।"

मैं मुस्कुराया — वह मेरा ख्याल रखती है। लेकिन यह ख्याल अब मेरे लिए काफी नहीं था। मुझे और चाहिए था।

हमने साथ में खाना बनाया। वह बोलती रही — अपनी सहेलियों के बारे में, अपने शौक के बारे में। मैं सुनता रहा, लेकिन मेरी नज़रें उसके शरीर पर ही थीं। हर बार जब वह स्टोव पर झुकती, मैं उसके कुर्ते की गर्दन से दिखती उसकी क्लीवेज पर नज़रें गड़ा देता। वह समोसे के आकार के दूधिया स्तन, काले ब्रा से कसे हुए, हर हरकत के साथ उछल रहे थे।

आधे घंटे बाद खाना तैयार था। नेहा ने प्लेट्स सजाईं, और ठीक उसी वक्त गेट खुला — पिताजी आ गए थे।

"वाह, क्या खुशबू है!" पिताजी ने रसोई में आते हुए कहा। "नेहा, तूने आज क्या बनाया है?"

"पनीर मसाला और रोटी, पापा," उसने मुस्कुराकर कहा। "और राज भैया ने भी मेरी मदद की।"

पिताजी ने मेरी ओर देखा और संतुष्टि से सिर हिलाया। शाम को डिनर टेबल पर पिताजी ने एलान किया, "मैंने अपने दोस्तों के साथ टूर का प्लान पक्का कर लिया है। सुक्रवारकी सुबह निकल जाऊँगा।"

"कहाँ जा रहे हैं, पापा?" नेहा ने रोटी तोड़ते हुए पूछा।

"राजस्थान। दो-तीन दिन का ट्रिप है," पिताजी ने कहा। "तुम दोनों का ध्यान रखना। राज, नेहा को अकेला मत छोड़ना। शाम को जल्दी आना।"

"जी पापा," मैंने कहा। अंदर ही अंदर मैं खुश था — दो-तीन दिन घर पर सिर्फ हम दोनों। कोई नहीं होगा। यह मौका मेरे लिए सुनहरा था।

डिनर के बाद हम तीनों थोड़ी देर बैठे। फिर पिताजी जल्दी सो गए ।



कमरे में आकर मैंने लैपटॉप खोला और YouTube पर कुछ देर स्क्रॉल किया। दिमाग में नेहा और "Sriya" के बीच का खेल चल रहा था। मैं उसके मैसेज का इंतज़ार कर रहा था ।

लेकिन शायद वो अपने दोस्तों के साथ मोबाइल पर बिज़ी है या थककर सो गई होगी। मैंने फोन चेक किया — इंस्टाग्राम पर कोई नोटिफिकेशन नहीं। शायद वह सो गई। मैंने भी आँखें बंद कीं, लेकिन नींद आने में देर नहीं लगी — थकान थी और दिन लंबा था।

गहरी नींद में मैं सो गया, लेकिन सपनों में नेहा थी — वही टाइट कुर्ता, वही लही झुकती हुई क्लीवेज, वही लेगिंग्स में लिपटे नितंब।
 

Raaj Sinha

Raaz
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262
54
अपडेट ५:

मैं कुछ देर सोया ही था की शायद एक घंटे बाद, पेशाब की प्रेशरसे जागा। मैं बिस्तर से उठा और बाथरूम गया। नेहा के कमरे से हल्का संगीत आ रहा था। शायद वह अभी तक सोई नहीं थी। अपने कमरे में वापस आने के बाद, मैंने मोबाइल चेक किया। उसने 'हैलो' मैसेज भेजा था। उसका मैसेज पाकर मैं रोमांचित हो गया। मेरा दिल धड़क गया। यह वही पल था जिसका मैं इंतजार कर रहा था।

कुछ देर इंतजार करके मैंने उसे जवाब दिया।

आदित्य: हैलो श्रिया।

कोई जवाब नहीं।

आदित्य: क्या तुम सो गई हो?

नेहा ने जवाब दिया।

श्रिया: हाय। मुझे लगा तुम सो गए हो। जवाब देने में बहुत समय लगाया।

आदित्य: मैं अभी घर आया हूँ। दोस्तों के साथ पब गया था कुछ ड्रिंक्स के लिए।

आदित्य: कैसी हो? आज दिन कैसा गुज़रा?

श्रिया: मैं ठीक हूँ। दिन तो वैसे ही बीता, ऑफिस का काम, घर के काम। तुम सुनाओ?

आदित्य: बस यार, तुम्हारी नई रील देखी। गाना बहुत अच्छा चुना है, और तुम उसमें बहुत खूबसूरत लग रही थी।

श्रिया: अरे शुक्रिया! तुमने देख ली? मुझे लगा तुमने नोटिस नहीं किया।

आदित्य: कैसे ना देखता? तुम्हारी हर पोस्ट मैं देखता हूँ। तुम्हारी आँखों में एक अलग ही चमक है, और वो मुस्कान... दिल चुरा लेती है।

श्रिया: (हँसती इमोजी) तुम तो बड़े चापलूस निकले, आदित्य।

आदित्य: सच कह रहा हूँ। और उस रील में तुमने जो ग्रीन टॉप पहना था, उसमें तुम्हारी फिगर बहुत अच्छी दिख रही थी। कहीं जिम जाती हो?

श्रिया: हाँ, थोड़ा-बहुत कर लेती हूँ। घर पर ही एक्सरसाइज करती हूँ। पर तुम तो बहुत ध्यान से देखते हो मेरी रीलें।

आदित्य: क्योंकि तुम हर रील में और भी खूबसूरत दिखती हो। तुम्हारे बाल, तुम्हारी गर्दन, तुम्हारी... हर चीज़।

मैंने धीरे-धीरे बात को मोड़ना शुरू किया। उसकी रील में उसके क्लीवेज पर भी मैंने गौर किया था, लेकिन सीधे कहने की बजाय, मैंने उसके शरीर के बारे में सामान्य तारीफ करनी शुरू की।

आदित्य: वीकेंड पर क्या करती हो? कोई प्लान?

श्रिया: कुछ खास नहीं। मूवी देखती हूँ घर पर, या सोशल मीडिया पर समय बिताती हूँ।

आदित्य: तुम जैसी हॉट गर्ल को तो नाइटलाइफ़ एंजॉय करनी चाहिए। पब, डिस्को – वहाँ जाओ, डांस करो, मज़े करो।

श्रिया: अरे नहीं, फैमिली अलाउ नहीं करेगी। इंडियन घरों में ऐसी चीज़ें थोड़ी अलाउ होती हैं।

आदित्य: सुनो श्रिया, शादी से पहले ज़िंदगी एंजॉय करो। शादी के बाद तो पति और सास-ससुर और भी ज्यादा रोकेंगे। अभी तुम जवान हो, खूबसूरत हो, अपनी ज़िंदगी जियो।

श्रिया: तुम सही कहते हो, पर डर लगता है। कभी किसी ने देख लिया तो?

आदित्य: तुम होशियार हो। अगर कोई सही आदमी हो जो तुम्हारा ख्याल रखे, तो कोई डर नहीं। वैसे भी, तुम अकेली हो या किसी को डेट कर रही हो?

श्रिया: मैं सिंगल हूँ। पहले एक लड़का था, पर उसने मुझे चीट किया। तब से ब्रेकअप हो गया।

आदित्य: ओह, सॉरी यार। पर तुम तो बहुत अच्छी हो, कैसे कोई तुम्हें चीट कर सकता है? तुम्हें कैसा लड़का पसंद है?

श्रिया: हैंडसम, केयरिंग, और अंडरस्टैंडिंग। जो चीट ना करे। बस यही चाहिए।

आदित्य: तो फिर तो मैं भी वही हूँ। मैं भी हाल ही में ब्रेकअप से गुज़रा हूँ। अब एक ऐसी लड़की ढूँढ रहा हूँ जो प्यार करे, समझे, और हॉट भी हो – तुम्हारी तरह, श्रिया। सेक्सी फिगर, खूबसूरत चेहरा, और अंदर से प्यारी।

श्रिया: (शर्माती इमोजी) तुम तो बहुत क्यूट हो, आदित्य। अगर तुम मेरे शहर में होते तो क्या करते?

आदित्य: मैं तुम्हें डिस्को ले जाता। नाइटलाइफ़ एंजॉय करवाता। तुम्हारे साथ डांस करता, तुम्हें हैंडल करता।

मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, और बस कुछ ही दूरी पर नेहा अपने कमरे में थी। मुझे पता था कि वह श्रिया बनकर मुझसे बात कर रही है – मेरी अपनी बहन। इस बात ने मुझे अंदर से हिला दिया था। मेरी पैंट में जोरों से खड़ा हो गया था। मैं जानता था कि यह गलत है, लेकिन इसी गलत होने की वजह से मुझे और भी एक्साइटमेंट मिल रही थी।

श्रिया: और अगर तुम मुझे इम्प्रेस करना चाहो तो और क्या करोगे?

आदित्य: सबसे पहले तो तुम्हें डिनर पर ले जाऊँगा। कोई अच्छी रेस्टोरेंट में। फिर डिस्को। और वहाँ तुम्हें कुछ सेक्सी डांस मूव्स सिखाऊँगा।

श्रिया: कैसे सेक्सी डांस मूव्स? मुझे बताओ।

आदित्य: मैं तुम्हें पीछे से होल्ड करूँगा, तुम्हारी कमर पर हाथ रखूँगा, और तुम्हारे साथ धीमी धुन पर झूलूँगा। तुम्हारी सेक्सी हिप्स को महसूस करूँगा। फिर धीरे से तुम्हारी गर्दन पर एक सॉफ्ट किस करूँगा।

श्रिया: (सिर्फ एक स्माइली इमोजी भेजा)

वह चुप हो गई। मुझे लगा कि वह हिचक रही है। मैंने बात को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

आदित्य: अगर तुम किसी आदमी को सेड्यूस करना चाहो, तो तुम क्या करोगी?

श्रिया: वक़्त बताएगा... पर अभी के लिए, मैं उसे पूरे बदन पर किस करूँगी।

आदित्य: मतलब नीचे भी?

श्रिया: (शरमाती इमोजी) हाँ, नीचे भी।

मेरी साँस रुक गई। मेरी बहन ने यह लिखा था। मैंने अपनी पैंट का बटन खोल दिया।

आदित्य: वो आदमी बहुत लकी होगा जिसे एक हॉट और सेक्सी गर्ल से स्वीट बी.जे. मिले। तुम तो मास्टर लगती हो।

श्रिया: यह तो सच है।

आदित्य: सुनो श्रिया, तुम्हारे साथ इस सेक्सी बातचीत ने मुझे बहुत हॉर्नी कर दिया है। मुझे हिलानेका मन कर रहा है।

श्रिया: तो क्यों नहीं कर लेते? जाओ और करो।

आदित्य: मैं तुम्हारी रील देखकर करूँगा।

श्रिया: (LOL इमोजी) गुडनाइट, आदित्य।

आदित्य: नहीं, प्लीज़ और बात करो। मुझे तुमसे बात करनी है।

श्रिया: बाद में बात करते हैं, हॉर्नी बॉय।

मैंने मोबाइल रख दिया। मेरे हाथ काँप रहे थे। उसके कमरे की तरफ देखा। नेहा वहाँ थी, सो रही होगी, या शायद मुस्कुरा रही होगी। मैंने आँखें बंद कीं और उसकी आखिरी वाली बातों को दोहराया। मेरी साँसें भारी हो गईं। मैंने अपनी पैंट उतार दी और वही किया जो मैंने उससे कहा था – उसकी रील देखते हुए, उसके चेहरे को, उसके शरीर को याद करते हुए।

रात भर मैं सो नहीं पाया। मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी – मैं अपनी बहन को बहका रहा था, और वह मजे ले रही थी। यह गलत था, लेकिन यह मुझे रोमांचित कर रहा था। और मुझे पता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी।
 

Premkumar65

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अपडेट : १

सुबहकी हल्की धूप मेरे कमरे की खिड़की से अंदर आ रही थी। शनिवार था, इसलिए ऑफिस जाने की जल्दी नहीं थी। मैंने आँखें खोलीं और कुछ देर तक छत को देखता रहा। कल रात की बातें — किरण की इंस्टाग्राम वाली बातें, और मेरी बाथरूम में की गई हरकत — सब याद आ गया।

"उठो भैया, चाय ठंडी होसुबह रही है," नेहा की आवाज़ दरवाज़े के बाहर से आई।

"आ रहा हूँ," मैंने कहा और उठ बैठा।

कपड़े बदले, चेहरा धोया, और नीचे आया तो देखा पिताजी पहले से मेज़ पर बैठे थे। नेहा ने तीन कप चाय रख दिए थे — पिताजी के लिए कम चीनी वाली, मेरे लिए दूध वाली, और अपने लिए बिना चीनी की।

"गुड मॉर्निंग, पिताजी," मैंने कहा और बैठ गया।

"गुड मॉर्निंग बेटा," पिताजी ने कहा, लेकिन उनकी आँखों में कल रात की थकान साफ झलक रही थी। उन्होंने चाय के साथ ओमलेट की एक प्लेट ली और चुपचाप खाने लगे।

नेहा ने मेरे सामने भी ओमलेट-ब्रेड की प्लेट रखी। "भैया, आज क्या प्लान है?"

"कुछ खास नहीं," मैंने कहा, "दोस्तों से मिलने चलेगा थोड़ी देर में। तेरा क्या?"

"मुझे शॉपिंग जाना है दोस्तों के साथ शाम को," उसने कहा।

"अच्छा," मैंने कहा और चाय पीने लगा।

पिताजी ने जल्दी-जल्दी नाश्ता खत्म किया और उठ खड़े हुए। "मैं आज दोस्तों के साथ कार्ड्स खेलने जा रहा हूँ। रात के खाने पर आ जाऊँगा," उन्होंने कहा, जैसे यह कोई सामान्य बात हो।

"ठीक है पिताजी," नेहा ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में वही थकान और चिंता थी जो हर दिन रहती है।

पिताजी बाहर चले गए। नेहा ने बर्तन उठाए और किचन में धोने लगी।

चाय की टपरी पर

सुबह करीब दस बजे मैं घर से निकला और अपने मोहल्ले की उस चाय की दुकान पर पहुँचा जहाँ हम दोस्त रोज़ मिलते हैं। सड़क किनारे एक छोटी सी टपरी, प्लास्टिक की कुर्सियाँ, और चाय की केतली हमेशा गर्म रहती है।

बिकाश पहले से बैठा था, सिगरेट फूँकते हुए। "आ जा राजा, चाय ऑर्डर कर दी है।"

"किरण नहीं आया?" मैंने पूछा।

"अरे, वो आज डेट पर जा रहा है, तैयारी में लगा है," बिकाश ने हँसते हुए कहा।

"वाह, अच्छी बात है," मैंने कहा और चाय का कप हाथ में लिया।

हमने थोड़ी देर राजनीति पर बात की — अखबारों में चल रही खबरें, नए चुनाव की तैयारियाँ, और फिर बात आई अपने-अपने काम पर।

"तेरा प्रोजेक्ट कैसा चल रहा है?" बिकाश ने पूछा।

"अच्छा चल रहा है। इस हफ्ते कुछ नए फीचर्स डिलीवर करने हैं। बस वही — कोड, मीटिंग, कोड, मीटिंग," मैंने कहा।

"और घर पर सब ठीक?" उसने पूछा, थोड़ी गंभीर आवाज़ में।

"हाँ, पिताजी का वही हाल है। नेहा सब संभालती है," मैंने कहा।

"तेरी बहन बहुत अच्छी है यार। पूरे घर की जिम्मेदारी उठा रही है। तुझे भी थोड़ी मदद करनी चाहिए," बिकाश ने कहा।

"करता हूँ, लेकिन वो खुद ही सब कर लेती है," मैंने बहाना बनाया।

हमने दो कप और चाय पी, और फिर लगभग ग्यारह बजे घर लौट आया।

घर पहुँचा तो नेहा किचन में खाना बना रही थी। पिताजी बाहर गए हुए थे — उनके जाने से पहले ही बता गए थे कि डिनर पर आएँगे।



"भैया, दो मिनट में खाना तैयार है," नेहा ने कहा। उसने सादा सूट पहना हुआ था — एक लाइट ब्लू कुर्ती और सलवार। बाल पोनीटेल में बाँधे हुए थे। वो जितनी सादगी से रहती थी, उतनी ही सुंदर लगती थी।

हमने साथ बैठकर खाना खाया — दाल, चावल, रोटी और सब्जी। नेहा ने पहले मुझे परोसा, फिर अपने लिए लिया।

"शाम को कितने बजे लौटोगी?" मैंने पूछा।

"चार बजे के आसपास," उसने कहा, "दोस्तों से कॉन्टेक्ट करना है। शायद कनॉट प्लेस जाएँगी। देर तक रुकेंगी तो मैसेज करूँगी।"

"ठीक है, संभल कर जाना। समय पर वापस आना," मैंने कहा।

"हाँ भैया," उसने मुस्कुराकर कहा।

खाना खत्म करके मैं अपने कमरे में आ गया। दोपहर के दो बज रहे थे। बाहर गर्मी थी, इसलिए पंखे की हवा में लेटना अच्छा लग रहा था। फोन हाथ में आया तो फिर से इंस्टाग्राम खुल गया।

दिमाग में कल रात के वे हीटेड मोमेंट्स ताज़ा थे। मैंने फिर से सर्च बॉक्स में "hot indian girls" टाइप किया और रील्स का तांता लग गया।

एक-एक करके रील्स स्क्रीन पर आ रही थीं। मैंने बिस्तर पर लेटते हुए पैंट की ज़िप खोल दी और अपने लिंग को बाहर निकाल लिया। वह धीरे-धीरे सख्त होने लगा था।

स्क्रीन पर एक लड़की — ब्लैक टॉप और मिनी स्कर्ट में, अपने हिप्स को कैमरे के सामने झुमका रही थी। एक और — जिम के कपड़ों में, अपने एब्स और क्लीवेज दिखाते हुए।

"भैया!" नेहा की आवाज़ नीचे से आई।

मैं चौंक गया। जल्दी से अपने लिंग को पैंट के अंदर डाला और पैंट ऊपर खींची। ज़िप बंद की और फोन की स्क्रीन बंद कर दी।

"हाँ, क्या है?" मैंने सामान्य आवाज़ में पूछा।

"अंदर आ सकती हूँ?"

"हाँ, आ जा," मैंने कहा और सीधा होकर बैठ गया।

दरवाज़ा खुला और नेहा अंदर आई।

मेरी साँसें रुक गईं।

नेहा ने अपनी सादा कुर्ती-सलवार उतार दी थी और अब वह एक बेहद आकर्षक पोशाक में थी — टाइट ब्लू जींस जो उसके पैरों और हिप्स को बिल्कुल कसकर पकड़ रही थीं, और ऊपर एक बहुत ही छोटा क्रॉप टॉप जो उसकी पतली कमर और नाभि को खुला छोड़ रहा था।

उसने अपने बाल खुले छोड़ दिए थे और हल्की लिपस्टिक लगाई थी।

"कैसा लग रहा है, भैया?" उसने हल्की शर्माते हुए पूछा।

मेरे मुँह से तो कुछ निकला नहीं। मैं उसे देखता रह गया। क्रॉप टॉप उसके स्तनों को अच्छी तरह उभार रहा था — छोटा लेकिन गोल और फर्म। जींस उसकी जाँघों और कमर पर इस तरह चिपकी थी कि हर कर्व साफ दिख रहा था।

"अच्छा... अच्छा लग रहा है," मैंने कुछ रुकते हुए कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है।"

"सच में? पहली बार ये क्रॉप टॉप पहना है घर से बाहर निकलने के लिए। सोचा थोड़ा मॉडर्न लुक ट्राई करूँ," उसने मुस्कुराकर कहा।

"हाँ, अच्छा लग रहा है। शॉपिंग पर जाएगी, तो दोस्तों को दिखा दे। लेकिन समय पर वापस आना," मैंने कहा, अपनी आवाज़ को सामान्य रखने की कोशिश करते हुए।

"हाँ भैया, मैं चलूँ। पांच बजे तक वापस आ जाऊँगी," उसने कहा और कमरे से बाहर निकलने लगी।

जब वह मुड़ी और चलने लगी, तो मेरी नज़र उसके पीछे चली गई।

उसकी टाइट जींस उसके गांड को इस तरह से पकड़ रही थी कि वे पूरी तरह आकार में दिख रहे थे — गोल, उठे हुए, हर कदम के साथ उनमें एक सुंदर सी हलचल हो रही थी। जब वह दरवाज़े से बाहर निकलकर सीढ़ियों की ओर बढ़ी तो उसके हिप्स का डोलना साफ नज़र आ रहा था।

मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मैं उसके गांड को देखता रह गया — गोल, शेप में, जींस के अंदर कसी हुई, बिल्कुल एकदम सुडौल। उसके चलने के अंदाज़ में भी एक कमाल था — हल्की सी मदमस्त चाल, जैसे वो जानती हो कि वह आकर्षक लग रही है।

लेकिन फिर अचानक मुझे एहसास हुआ — यह मेरी अपनी बहन थी। मैं उसके गांड पर बुरी नज़र डाल रहा था, उसे शारीरिक दृष्टि से देख रहा था। यह गलत था, बहुत गलत।

एक गहरी लज्जा और शर्म का एहसास मन में उठा। मैंने सिर झुका लिया और लंबी साँस ली।

"यह क्या हो रहा है मुझे?" मैंने खुद से पूछा।

गिल्त और शर्म से बचने के लिए मैंने फिर से फोन उठाया। अब जानबूझकर "hot indian girls" के बजाय "insta reels hot" सर्च किया और रील्स स्क्रॉल करने लगा।

शुरू में वही लड़कियाँ आने लगीं — टाइट ड्रेस में, डीप क्लीवेज दिखाती हुई, अपने गांड पर फोकस करती हुई। एक रील में एक लड़की बहुत छोटी शॉर्ट्स में अपने हिप्स को कैमरे की तरफ हिला रही थी। दूसरी — साड़ी में, लेकिन ब्लाउज़ इतना डीप कट था कि उसके पूरे स्तन दिखने को थे।

मैं स्क्रॉल करता रहा, अपने मन को इन्हीं में खोने की कोशिश करता रहा। कम से कम ये तो मेरी बहन नहीं थीं — ये अजनबी लड़कियाँ थीं, जिन्हें देखने में कोई बुराई नहीं थी।

एक के बाद एक रील स्क्रीन पर आती गई। मैंने एक घंटे से भी ज्यादा समय बिता दिया बस इन्हें देखते-देखते।

तभी मैं एक रील पर अटक गया।

इस रील में एक लड़की थी — जिसने मास्क पहना हुआ था। लेकिन उसने एक बहुत ही आकर्षक साड़ी पहनी थी — लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी, और ऊपर एक टाइट ब्लाउज़ जो उसके स्तनों को अच्छी तरह उभार रहा था।

रील की शुरुआत में वह अपने ब्लाउज़ पर फोकस कर रही थी — कैमरा उसके क्लीवेज के करीब लाकर, धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रहा था। फिर वह मुड़ी और अपने पीछे का दृश्य दिखाया — उसके गांड पर एकदम टाइट साड़ी का पल्लू लिपटा हुआ था, जो उसके गोल हिप्स को पूरी तरह उभार रहा था। उसने एक हाथ से पल्लू समेटा और फिर पीछे की ओर मुड़कर कैमरे को एक सेक्सी नज़र दी।

लेकिन मेरी नज़र उस लड़की पर नहीं थी — मेरी नज़र बैकग्राउंड पर थी।

कमरा मुझे परिचित लग रहा था।

नीली दीवारें — बिल्कुल वैसा ही नीला रंग जैसा नेहा के कमरे में था। पीछे की दीवार पर एक पोस्टर — बॉलीवुड का एक पोस्टर, जिसे मैंने खुद लगाया था क्योंकि नेहा को वह पसंद था। दीवार का रंग — वही हल्का पीच शेड जो उसके कमरे के कोने में था।

मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

"नहीं, यह नहीं हो सकता," मैंने मन ही मन कहा।

लेकिन मैंने और गौर से देखा। रील में दिख रही दीवार पर एक अलमारी भी थी — बिल्कुल वैसी ही दराजों वाली जो नेहा के कमरे में थी। खिड़की का फ्रेम — वही।

"यह नेहा का कमरा है," मेरे दिमाग में एक स्पष्ट आवाज़ गूँजी।

मेरा दिल धड़कना लगभग बंद हो गया। मैंने रील की लड़की को ध्यान से देखना शुरू किया — उसकी आँखें, उसके होंठ, उसके बाल, उसके कद का अंदाज़।

उस लड़की के बाल गहरे काले और लंबे थे — ठीक नेहा की तरह। उसकी आँखें बादामी — वही गहरी, बड़ी आँखें। उसका कद — पतला, लंबा, जैसे नेहा का।

भले ही चेहरे पर मास्क था, लेकिन वह नेहा ही लग रही थी।
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नेहा है," मैंने अपने होठों से फुसफुसाया।

मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने उस रील के यूज़रनेम पर टैप किया — कोई अजीब सा नाम था, "sriya_hotgirl " या ऐसा ही कुछ। मैंने उस प्रोफाइल पर क्लिक किया।

प्रोफाइल पर जाकर देखा तो वहाँ दो-तीन और रील्स थीं। सबमें वही लड़की — कभी कुर्टी और टाइट जींस में, कभी साड़ी में, कभी नाइटी में — लेकिन हर रील में चेहरे पर मास्क या किसी तरह का पर्दा था। हर रील में वही पोज़, वही हरकतें — अपने शरीर के विभिन्न अंगों को कैमरे के सामने उजागर करती हुई।

मैंने पहली रील पर क्लिक किया — एक और वीडियो जिसमें वह लड़की बेड पर लेटी हुई थी, एक टाइट नाइटी पहने, अपने पैरों को ऊपर उठाकर कैमरे को दिखाती हुई। पीछे वही नीली दीवार, वही अलमारी।

दूसरी रील — वह लड़की किचन में खड़ी थी, एक कप चाय हाथ में, लेकिन कैमरा उसके गांड पर फोकस कर रहा था। किचन — वही नीली टाइल्स, वही गैस चूल्हा, जो हमारे घर में था।

तीसरी रील — वह लड़की सीढ़ियों पर खड़ी थी, अपने पैरों को दिखाती हुई, जींस पहने, और फिर पीछे मुड़कर अपने हिप्स हिलाती हुई। वही सीढ़ियाँ — हमारे घर की।

मेरा सारा शरीर ठंडा पड़ गया।

"हे भगवान," मैंने धीमी आवाज़ में कहा, "यह मेरी बहन है। नेहा। यह उसकी रील्स हैं।"

मेरे दिमाग में हज़ारों विचार दौड़ने लगे। वह लड़की जिसे मैं कल रात देख रहा था, जिस पर मैं हस्तमैथुन कर रहा था — वह मेरी अपनी बहन निकली।

और अब, आज, जब वह शॉपिंग पर गई, तो वह उन्हीं जींस और क्रॉप टॉप में गई — वही जो उसने इन रील्स में पहने होंगे?

मैंने प्रोफाइल का नाम देखा — "sriya_hotgirl" या कुछ ऐसा। फॉलोअर्स की संख्या लगभग पाँच हज़ार थी। पोस्ट्स — चौदह। सब रील्स।

मैंने एक-एक करके सब रील्स देखीं — सबमें वही लड़की, वही कमरा, वही घर। बैकग्राउंड में कभी हमारा लिविंग रूम दिखता, कभी किचन, कभी सीढ़ियाँ, कभी नेहा का कमरा।

नेहा ने अपना असली चेहरा नहीं दिखाया था, लेकिन उसके शरीर की भाषा, उसके बाल, उसकी आँखें, उसके पोज़ — सब कुछ बता रहा था कि वही है।

मैं अपने बिस्तर पर बेहोशी से गिर गया। हाथों में फोन था, आँखों के सामने वह स्क्रीन जहाँ मेरी बहन का अश्लील कंटेंट चल रहा था।



"वह इसे क्यों कर रही है?" मैंने खुद से पूछा, "उसकी मासूमियत, उसकी सादगी — और पीछे से वह अपनी रील्स बना रही है?"

लेकिन उसी पल एक और भावना मन में उठी — एक गहरी, अंधकारमय उत्तेजना। मैं अब जानता था कि वह लड़की मेरी बहन है। और उसे इतनी बेहयाई से अपने शरीर को दिखाते हुए देखकर, मेरे अंदर एक अजीब सी आग जलने लगी।

यह गलत था। बहुत गलत। लेकिन...

मैंने फिर से वह पहली रील चलाई — जिसमें वह साड़ी में थी, अपने स्तनों और गांड पर फोकस करते हुए। अब मैं जानता था कि वह नेहा है। मेरी बहन। मासूम, सादा, घर की सारी ज़िम्मेदारी उठाने वाली नेहा — जो इंस्टाग्राम पर दूसरों के लिए ऐसे वीडियो बना रही थी।

मेरा मन अब एक कोलाहल में था — शर्म, गुस्सा, उत्तेजना, और एक गहरी जिज्ञासा।

"वह क्यों कर रही है यह?" मैंने फिर से पूछा।

कोई जवाब नहीं था। बस वही रील्स, वही तस्वीरें, और एक सवाल जो मुझे अंदर तक हिला रहा था — "अब मैं क्या करूँगा?"

शाम की धीमी रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी। मैं बिस्तर पर लेटा रहा, फोन की स्क्रीन पर वही प्रोफाइल खुली हुई थी। दिमाग में हजारों उलझनें थीं — और सबसे बड़ा सवाल: "नेहा को इस बारे में क्या बताऊँ? और क्या मुझे उसे बिल्कुल बताना चाहिए?"
Bahut si masoom ladkiyon ke pichhe bahut se raj chhipe hote hain.
 
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