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मेरी बहन नेहाकी कातिल जवानी
शुक्रवार की सुबह थी और मेरी नींद एक अजीब सी उत्तेजना के साथ खुली। दिल्ली के पास बसे इस आधुनिक शहर की भागदौड़ के बीच, मेरा घर मेरे लिए सुकून की जगह था, लेकिन आज का दिन कुछ खास था। 'गुड फ्राइडे' की शाम को दोस्तों के साथ शराब और गपशप का जो दौर चलता है, उसका इंतज़ार मुझे पूरे हफ्ते रहता है। मैं बिस्तर से उठा और अपनी एथलेटिक बॉडी को स्ट्रेच किया। आईने में खुद को देखते हुए मुझे अपनी बनावट पर गर्व महसूस हुआ—चौड़े कंधे और तराशा हुआ शरीर, जिसे मैं अपनी नियमित कसरत से बनाए रखता हूँ। नहाकर और फ्रेश होकर जब मैं अपने कमरे में व्यायाम कर रहा था, तभी नीचे रसोई से नेहा की आवाज़ आई, "भैया, चाय तैयार है!" नेहा, मेरी 23 साल की बहन, घर की जान है। माँ के जाने के बाद उसने जिस तरह से घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ संभाली हैं, वह काबिले तारीफ है। वह लंबी है, स्लिम है और उसकी फिगर किसी मॉडल जैसी है। जब वह घर के कपड़ों में भी होती है, तो उसकी मासूमियत और खूबसूरती का संगम मुझे अक्सर एक अलग तरह की कशिश महसूस कराता है, जिसे मैं दुनिया की नज़रों से, और शायद खुद से भी छिपाकर रखता हूँ। मैं नीचे गया और रसोई में रखी अपनी चाय उठाई। हमारा घर ढाई मंजिला है, जहाँ ऊपर की मंजिल पर आधा हिस्सा रसोई और आधा हिस्सा खुली छत है। मैं चाय का कप लेकर छत की ओर बढ़ा। वहाँ का नज़ारा सुकून देने वाला था। नेहा रेलिंग के पास खड़ी होकर शहर के लैंडस्केप को निहार रही थी। सुबह की हल्की धूप उसकी त्वचा पर पड़ रही थी, जिससे उसकी रंगत और भी निखर उठी थी। उसने एक हल्का सूती कुर्ता पहना था, जो उसकी पतली कमर और सुडौल शरीर को खूबसूरती से उभार रहा था। पिताजी पास ही एक कुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे। मैं उनके बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया। पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन माँ के गुज़रने के बाद वे अंदर से टूट गए थे और अब शराब का सहारा लेने लगे थे।
"आज शाम को मैं अपने पुराने दोस्त के घर जा रहा हूँ," पिताजी ने अखबार से नज़रें हटाए बिना कहा। नेहा ने तुरंत टोकते हुए कहा, "पापा, फिर से वही? प्लीज, आज ज़्यादा मत पीना।" पिताजी हल्के से हँसे और नेहा के सिर पर हाथ फेरते हुए बोले, "अरे बेटा, बस थोड़ा सा। तू इतनी चिंता क्यों करती है?" मैंने बातचीत में कूदते हुए कहा, "मैं भी आज शाम दोस्तों के साथ हूँ, तो मैं रात 9 बजे तक घर आने की कोशिश करूँगा।" नेहा ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी शिकायत और अकेलापन था। "आप भी वही करेंगे, है ना? आप लोग बस अपनी मौज-मस्ती में रहते हैं। मैं यहाँ घर में अकेली बोर हो जाती हूँ।" उसकी आवाज़ में एक तरह की मासूमियत और तड़प थी। जब उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर मेरी तरफ देखा, तो उसकी बॉडी का कर्व साफ़ नज़र आ रहा था। समाज और परिवार के सामने मैं एक सभ्य और संस्कारी बेटा और भाई हूँ, लेकिन मेरे दिमाग के किसी कोने में पोर्न की वो तस्वीरें और कल्पनाएँ चलती रहती हैं जो मुझे अक्सर उत्तेजित कर देती हैं। नेहा का यह अकेलापन जताने का अंदाज़ मुझे अंदर से कुछ महसूस करा रहा था। पिताजी ने हँसते हुए कहा, "देख राज, तेरी बहन बोर हो रही है, तो कोशिश करना कि जल्दी लौट आए।" मैंने बस इतना कहा, "जी, मैं कोशिश करूँगा।" पिता उठकर अंदर चले गए। मैंने चाय खत्म की, नेहा से कहा, "ठीक है, मैं तैयार होता हूँ।"
वह मुस्कुराई, "जल्दी आना, भैया। रात को साथ खाएँगे।"
मैंने सिर हिलाया और नीचे अपने कमरे की ओर चल दिया। पर मन में एक हलचल थी – आज शाम को दोस्तों के साथ पीऊँगा, और उसके बाद? कौन जाने इस Friday की रात क्या मोड़ ले।
मैंने तैयार होकर बाइक स्टार्ट की और ऑफिस की ओर निकल गया। ऑफिस में हर कोई खुश-खुश नज़र आ रहा था। Good Friday का माहौल – शनिवार और रविवार की छुट्टी। उस दिन मुझे प्रोजेक्ट के कुछ काम निपटाने थे, इसलिए थोड़ा रुकना पड़ा। जैसे ही मैं ऑफिस की पार्किंग में पहुँचा, किरन का फोन आ गया।
"अबे ओए राज! कहां मर गया? हम दोनों तो अपने पुराने अड्डे पर पहुंच चुके हैं और जाम भी शुरू हो गया है," किरण ने अपनी चिर-परिचित बेबाक आवाज में कहा।
"बस पार्किंग में हूँ। निकल रहा हूँ। तुम लोग कहाँ हो?"
"उसी जगह पर, हमारी पुरानी वाली। बिकाश भी आ गया है। तू जल्दी आ। हमने तो शुरू कर दिया है।"
"आ रहा हूँ।" मैंने फोन रखा और बाइक स्टार्ट की। दिल्ली की ठंडी हवा और शुक्रवार की शाम – इससे अच्छा और क्या हो सकता है। मैंने थोड़ी रफ्तार बढ़ाई। पाँच मिनट में ही उस जगह पहुँच गया जहाँ हम तीनों कॉलेज के दिनों से बैठते हैं – एक छोटा सा ढाबा-सा रेस्टोरेंट जहाँ शराब चोरी-छिपे मिलती है, और बाहर से कोई पूछताछ नहीं।
मैंने बाइक खड़ी की और अंदर गया। किरन और बिकाश एक कोने वाली टेबल पर बैठे थे। सामने दो पेग पड़े थे – व्हिस्की का बोतल और सोडा। किरन ने हाथ हिलाकर बुलाया।
"आ जा, यार। तेरा इंतज़ार कर रहे थे।"
मैंने बैठते हुए कहा, "ऑफिस का काम थोड़ा लेट हो गया।" फिर वेटर को इशारा किया, "एक पेग ला, व्हिस्की का।"
बिकाश ने मेरा गिलास बढ़ाते हुए पूछा, "काम तो ठीक चल रहा है न?"
"हाँ, चल रहा है। बस थोड़ा लोड है। तुम्हारा कैसा है?" मैंने गिलास में दो घूँट डालकर सोडा मिलाया।
"मेरा तो सेम ऐज़ असुअल। बॉस का दिमाग खराब रहता है।"
किरन हँसा, "अरे, हर बॉस का दिमाग खराब होता है, यार। तू अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में सोच – वो तो खूबसूरत है, तेरा दिमाग ठीक रहेगा।"
बिकाश ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "हाँ, वो ठीक रखती है मेरा।"
थोड़ी देर तक ऑफिस के किस्से चले – प्रोजेक्ट की डेडलाइन, बॉस की बकवास, कुछ सहकर्मियों की चुगली। फिर बातों का रुख बदल गया। किरन ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, "सुन, राज, तू कब शादी कर रहा है? कोई गर्लफ्रेंड है तो बता? हमसे छुपाता है क्या?"
मैं मुस्कुराया और ग्लास से एक घूंट लेते हुए बोला, "यार, अभी इन सब चीजों के लिए टाइम नहीं है। मैंने सोचा है कि जब तक नेहा की शादी नहीं हो जाती, मैं शादी के बारे में नहीं सोचूंगा।"
बिकाश ने मुँह बनाया, "अरे, लेकिन तू अपनी इच्छाएँ कैसे मैनेज करेगा? इंसान हूँ, यार – भूख लगती है, प्यास लगती है, और वो भूख भी लगती है।"
किरण जोर से हंसा और बोला, "अबे, राज पक्का पोर्न देखकर हाथ चलाता होगा!"
मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया, "भाई, आजकल के जमाने में ऐसा कौन सा लड़का है जो ये नहीं करता? सब करते हैं।" हम तीनों ठहाके मारकर हंसने लगे।
बिकाश ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "सच में यार, आजकल कंट्रोल करना मुश्किल है। इंस्टाग्राम या फेसबुक खोलो, तो हजारों लड़कियां सेक्सी डांस कर रही होती हैं। वो छोटे कपड़े, वो साड़ियां... देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है।"
किरन ने अपनी पसंद बतानी शुरू की, "हाँ, और आजकल हीरोइनों में से कुछ ही हैं जो हार्ड करती हैं। जान्हवी कपूर – उसकी बॉडी, उसके कर्व्स, उसके सेक्सी बूब्स और गरम गांड – क्या माल है, यार। देखकर ही लगता है कि काश एक बार मिल जाए।"
बिकाश ने बीच में टोकते हुए कहा, "तूने सिर्फ हीरोइन्स देखी हैं, इंस्टाग्राम रील्स देख भाई। वहां ऐसी-ऐसी लड़कियां हैं जो किसी हीरोइन से कम नहीं हैं।"
मैंने चुपचाप सुना, फिर बोला, "हाँ, सब देखता हूँ। पर हाथ में टाइम कहाँ है? ऑफिस, घर – बस चलता रहता है।"
"तो वक्त निकालना पड़ता है," किरन ने फिर से पेग भरते हुए कहा, "अपने मनोरंजन के लिए। वरना बैचेनी हो जाती है।"
हमने आधा घंटा और बातें कीं – पोर्न साइट्स के नाम, कुछ एक्ट्रेसेस की बॉडी, और यहाँ तक कि कुछ इंस्टाग्राम मॉडल्स की चर्चा। बीच-बीच में बिकाश अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताता रहा – कैसे वो उसे बहुत अच्छी लगती है, पर शादी से पहले कुछ करने नहीं देती। किरन ने उसे चिढ़ाया, "अरे, अब कब तक रुकेगा? शादी कर ले न।" मैं भी हंस्ते दोनोंकी बात सुनता रहा ।
तभी मैंने घड़ी देखी – 8:40 बज रहे थे। "अरे, मुझे निकलना होगा, यार। पापा को वादा किया है कि नौ बजे तक आ जाऊँगा। और नेहा ने भी कहा था जल्दी आऊँ।"
किरन ने हाथ हिलाया, "चल, ठीक है। हम भी जल्द ही निकलेंगे। कल मिलते हैं?"
"नहीं, कल तो सोऊँगा। फिर फोन कर लो।" मैंने आखिरी घूँट पिया और उठ गया। दोनों ने हाथ मिलाकर बिदाई दी।
बाइक पर बैठकर मैंने रफ्तार पकड़ी। रास्ता खाली था – Good Friday की शाम, लोग या तो घर पर थे या बाहर मौज-मस्ती में। मैंने सोचा, घर पहुँचकर चुपके से अपने कमरे में चला जाऊँगा।
दस मिनट में घर पहुँच गया। गेट खोला, बाइक अंदर रखी और ऊपर गया। पहली मंज़िल पर नेहा के कमरे से आवाज़ आई, "भैया, आ गए?"
"हाँ, आ गया।" मैंने अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए कहा।
वहाँ से फिर आवाज़ आई, "मैंने खाना रख दिया है। सब्जी को पहले गरम कर लेना, फिर खाना। पापा नहीं आ रहे रात को – उन्होंने फोन किया था, वो अपने दोस्त के यहाँ डिनर करेंगे।"
"ठीक है नेहा," मैंने कहा और अंदर चला गया। कमरे में लाइट जलाई, फिर कपड़े बदले। मैंने घर के मुलायम कपड़े पहने और किचन की ओर चला। नेहा के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था – देखा तो वह अपने मोबाइल में कुछ देख रही थी, लेकिन मैंने जल्दी से नज़र हटा ली।
किचन में गर्म करके खाना खाया, फिर बर्तन धोए। रात का सन्नाटा था। नेहा अब शायद अपने कमरे में ही थी। मैंने अपना कमरा बंद किया और बिस्तर पर लेट गया। शराब का हल्का नशा था, पर दिमाग में उन बातों की गूँज थी जो किरन और बिकाश ने कही थीं – लड़कियों के बारे में, पोर्न के बारे में। मुझे याद आया कि मैंने कुछ दिनों से कुछ नया नहीं देखा था। फोन उठाया, लेकिन तभी पापा के घर आने की आवाज़ सुनाई दी – गेट खुला और बंद हुआ। उनके कदम आ रहे थे, और उनकी हालत से लग रहा था कि खूब पी है। उन्होंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया।
ड्रिंक्स के बाद मेरा एक पुराना रूटीन था—हस्तमैथुन करना। शराब के असर से मेरा दिमाग और शरीर दोनों उत्तेजित थे। मैंने अपना मोबाइल उठाया और पोर्न साइट्स ब्राउज़ करने लगा। तभी मुझे दोस्तों की बात याद आई। मैंने इंस्टाग्राम खोला और सर्च किया "Hot Indian Girls"।
पहली रील में एक लड़की आइटम सॉन्ग पर डांस कर रही थी – छोटी सी टॉप और नीचे उतनी ही छोटी स्कर्ट, अपने बूब्स और गांड को हिलाते हुए वो कैमरे में देखकर मुस्कुरा रही थी। मेरी पैंट के अंदर का लंड हरकत में आ गया। मैंने अगली रील स्क्रॉल की – एक और लड़की, साड़ी में, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट कि उसके दूध के उभार साफ़ दिख रहे थे। वो साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को ढकती और फिर धीरे-धीरे गर्दन से नीचे ले जाती, अपने बूब्स के बीच की गहरी नाली दिखाती हुई। मैंने जोर से साँस छोड़ी।
मैंने कमरे का दरवाज़ा कुंडी लगाकर बंद किया, फिर लाइट को धीमा कर दिया – बस एक छोटा सा नाइट लैंप जल रहा था। बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और शॉर्ट्स से अपने खड़े लंड को बाहर निकाल लिया। वह पहले से ही पूरी तरह सख्त हो चुका था – रात भर की बातों का असर। मैंने दाहिने हाथ से उसे पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया, जबकि बाएँ हाथ से फोन पकड़े रील्स स्क्रॉल करता रहा।
एक रील में लड़की देसी गाने पर थिरक रही थी – उसकी कमर पर झूलती स्कर्ट, चेहरा चंचल, और जब वो घूमती तो उसकी गांड का गोलाई साफ़ नज़र आती। मेरी हथेली लंड के ऊपर-नीचे तेज़ी से दौड़ने लगी। दूसरे हाथ में अगली रील – दो लड़कियाँ एक साथ, एक-दूसरे के बूब्स पर हाथ फेरती हुई, कपड़े फटे हुए, सिर्फ़ ब्रा में। मैंने आँखें बंद कर लीं और कल्पना की कि वो मेरे सामने हैं, मेरे लंड को चूस रही हैं।
जब बहुत ज़्यादा हो गया और मुझे लगा कि अब कभी भी फट जाऊँगा, तो मैंने रुक गया। मन में आया कि बाथरूम में जाकर पूरा करूँ – वहाँ आराम से, अकेले, बिना किसी शोर-शराबे के। मैंने लंड को शॉर्ट्स में वापस डाला, पर वह अब भी उभरा हुआ था, और कमरे का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला।
बाथरूम जाने के लिए मुझे गलियारे से होकर जाना था। नेहा का कमरा उसी फ्लोर पर था, और बाथरूम दोनों कमरों के बीच में था। जैसे ही मैं कमरे से बाहर निकला और बाथरूम की तरफ बढ़ा, नेहा वहां से बाहर आ रही थी।
हमारी नज़रें मिलीं। उसने हैरानी से पूछा, "भैया, आप सोए नहीं अभी तक?"
मैंने जल्दी से जवाब दिया, "नहीं, बस सोने जा रहा हूँ। बाथरूम जाना था।"
उसकी नज़र मेरे शॉर्ट्स के सामने वाले हिस्से पर टिक गई – जहाँ मेरा लंड अभी भी उभरा हुआ था, शॉर्ट्स पर साफ़ दिख रहा था। नेहा ने एक पल को झिझकते हुए देखा, फिर जल्दी से अपनी नज़रें हटा लीं। उसने कहा, "ओह... ठीक है। मैं अपने रूम में जा रही हूँ।"
"हाँ, तू जा। गुड नाइट।" मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में एक हल्की सी हकलाहट थी।
वह अपने कमरे में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं बाथरूम में घुसा और दरवाज़ा कुंडी लगाई। रोशनी जलाई, और फिर से अपना फोन निकाला। इंस्टाग्राम की वही रील्स – जल्दी से एक रील और खोली जहाँ एक लड़की साड़ी में अपने बूब्स को हिलाते हुए गीला हो रही थी। मैंने शॉर्ट्स से लंड निकाला और नल के पास खड़ा हो गया।
एक हाथ में फोन, दूसरे हाथ में लंड। मैंने तेज़ी से हिलाना शुरू किया, आँखें स्क्रीन पर गड़ी हुईं। लड़की की साड़ी उसके शरीर से लिपटी हुई थी, उसकी गांड और बूब्स की हरकतें मेरे दिमाग में बिजली की तरह दौड़ रही थीं। मैंने कल्पना की कि वो मेरे सामने है, अपने बूब्स मुझे दिखा रही है, और मैं उसे पीछे से पकड़ रहा हूँ।
कुछ ही पलों में मेरा शरीर झटका खा गया – मैंने आँखें बंद कीं और गर्म मलाई की धार फूट पड़ी। वह नल के सिंक में बह गई, सफ़ेद गाढ़ा तरल। मैंने कुछ पल आराम किया, फिर नल चलाकर सारा निशान धो डाला। हाथ धोए, चेहरे पर पानी के छींटे मारे, और फिर शॉर्ट्स ठीक किए।
बाथरूम से निकलते समय मैंने सोचा, "नेहा ने देखा तो ज़रूर होगा। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। अच्छा है।" कमरे में आकर मैंने दरवाज़ा बंद किया, बिस्तर पर लेट गया, और फोन स्क्रॉल करते-करते आँखें लग गईं। रात की हल्की-हल्की आवाज़ें थीं – पंखे की गुनगुनाहट और दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़। मैंने फोन बंद किया और गहरी नींद में चला गया।
शुक्रवार की सुबह थी और मेरी नींद एक अजीब सी उत्तेजना के साथ खुली। दिल्ली के पास बसे इस आधुनिक शहर की भागदौड़ के बीच, मेरा घर मेरे लिए सुकून की जगह था, लेकिन आज का दिन कुछ खास था। 'गुड फ्राइडे' की शाम को दोस्तों के साथ शराब और गपशप का जो दौर चलता है, उसका इंतज़ार मुझे पूरे हफ्ते रहता है। मैं बिस्तर से उठा और अपनी एथलेटिक बॉडी को स्ट्रेच किया। आईने में खुद को देखते हुए मुझे अपनी बनावट पर गर्व महसूस हुआ—चौड़े कंधे और तराशा हुआ शरीर, जिसे मैं अपनी नियमित कसरत से बनाए रखता हूँ। नहाकर और फ्रेश होकर जब मैं अपने कमरे में व्यायाम कर रहा था, तभी नीचे रसोई से नेहा की आवाज़ आई, "भैया, चाय तैयार है!" नेहा, मेरी 23 साल की बहन, घर की जान है। माँ के जाने के बाद उसने जिस तरह से घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ संभाली हैं, वह काबिले तारीफ है। वह लंबी है, स्लिम है और उसकी फिगर किसी मॉडल जैसी है। जब वह घर के कपड़ों में भी होती है, तो उसकी मासूमियत और खूबसूरती का संगम मुझे अक्सर एक अलग तरह की कशिश महसूस कराता है, जिसे मैं दुनिया की नज़रों से, और शायद खुद से भी छिपाकर रखता हूँ। मैं नीचे गया और रसोई में रखी अपनी चाय उठाई। हमारा घर ढाई मंजिला है, जहाँ ऊपर की मंजिल पर आधा हिस्सा रसोई और आधा हिस्सा खुली छत है। मैं चाय का कप लेकर छत की ओर बढ़ा। वहाँ का नज़ारा सुकून देने वाला था। नेहा रेलिंग के पास खड़ी होकर शहर के लैंडस्केप को निहार रही थी। सुबह की हल्की धूप उसकी त्वचा पर पड़ रही थी, जिससे उसकी रंगत और भी निखर उठी थी। उसने एक हल्का सूती कुर्ता पहना था, जो उसकी पतली कमर और सुडौल शरीर को खूबसूरती से उभार रहा था। पिताजी पास ही एक कुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे। मैं उनके बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया। पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन माँ के गुज़रने के बाद वे अंदर से टूट गए थे और अब शराब का सहारा लेने लगे थे।
"आज शाम को मैं अपने पुराने दोस्त के घर जा रहा हूँ," पिताजी ने अखबार से नज़रें हटाए बिना कहा। नेहा ने तुरंत टोकते हुए कहा, "पापा, फिर से वही? प्लीज, आज ज़्यादा मत पीना।" पिताजी हल्के से हँसे और नेहा के सिर पर हाथ फेरते हुए बोले, "अरे बेटा, बस थोड़ा सा। तू इतनी चिंता क्यों करती है?" मैंने बातचीत में कूदते हुए कहा, "मैं भी आज शाम दोस्तों के साथ हूँ, तो मैं रात 9 बजे तक घर आने की कोशिश करूँगा।" नेहा ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी शिकायत और अकेलापन था। "आप भी वही करेंगे, है ना? आप लोग बस अपनी मौज-मस्ती में रहते हैं। मैं यहाँ घर में अकेली बोर हो जाती हूँ।" उसकी आवाज़ में एक तरह की मासूमियत और तड़प थी। जब उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर मेरी तरफ देखा, तो उसकी बॉडी का कर्व साफ़ नज़र आ रहा था। समाज और परिवार के सामने मैं एक सभ्य और संस्कारी बेटा और भाई हूँ, लेकिन मेरे दिमाग के किसी कोने में पोर्न की वो तस्वीरें और कल्पनाएँ चलती रहती हैं जो मुझे अक्सर उत्तेजित कर देती हैं। नेहा का यह अकेलापन जताने का अंदाज़ मुझे अंदर से कुछ महसूस करा रहा था। पिताजी ने हँसते हुए कहा, "देख राज, तेरी बहन बोर हो रही है, तो कोशिश करना कि जल्दी लौट आए।" मैंने बस इतना कहा, "जी, मैं कोशिश करूँगा।" पिता उठकर अंदर चले गए। मैंने चाय खत्म की, नेहा से कहा, "ठीक है, मैं तैयार होता हूँ।"
वह मुस्कुराई, "जल्दी आना, भैया। रात को साथ खाएँगे।"
मैंने सिर हिलाया और नीचे अपने कमरे की ओर चल दिया। पर मन में एक हलचल थी – आज शाम को दोस्तों के साथ पीऊँगा, और उसके बाद? कौन जाने इस Friday की रात क्या मोड़ ले।
मैंने तैयार होकर बाइक स्टार्ट की और ऑफिस की ओर निकल गया। ऑफिस में हर कोई खुश-खुश नज़र आ रहा था। Good Friday का माहौल – शनिवार और रविवार की छुट्टी। उस दिन मुझे प्रोजेक्ट के कुछ काम निपटाने थे, इसलिए थोड़ा रुकना पड़ा। जैसे ही मैं ऑफिस की पार्किंग में पहुँचा, किरन का फोन आ गया।
"अबे ओए राज! कहां मर गया? हम दोनों तो अपने पुराने अड्डे पर पहुंच चुके हैं और जाम भी शुरू हो गया है," किरण ने अपनी चिर-परिचित बेबाक आवाज में कहा।
"बस पार्किंग में हूँ। निकल रहा हूँ। तुम लोग कहाँ हो?"
"उसी जगह पर, हमारी पुरानी वाली। बिकाश भी आ गया है। तू जल्दी आ। हमने तो शुरू कर दिया है।"
"आ रहा हूँ।" मैंने फोन रखा और बाइक स्टार्ट की। दिल्ली की ठंडी हवा और शुक्रवार की शाम – इससे अच्छा और क्या हो सकता है। मैंने थोड़ी रफ्तार बढ़ाई। पाँच मिनट में ही उस जगह पहुँच गया जहाँ हम तीनों कॉलेज के दिनों से बैठते हैं – एक छोटा सा ढाबा-सा रेस्टोरेंट जहाँ शराब चोरी-छिपे मिलती है, और बाहर से कोई पूछताछ नहीं।
मैंने बाइक खड़ी की और अंदर गया। किरन और बिकाश एक कोने वाली टेबल पर बैठे थे। सामने दो पेग पड़े थे – व्हिस्की का बोतल और सोडा। किरन ने हाथ हिलाकर बुलाया।
"आ जा, यार। तेरा इंतज़ार कर रहे थे।"
मैंने बैठते हुए कहा, "ऑफिस का काम थोड़ा लेट हो गया।" फिर वेटर को इशारा किया, "एक पेग ला, व्हिस्की का।"
बिकाश ने मेरा गिलास बढ़ाते हुए पूछा, "काम तो ठीक चल रहा है न?"
"हाँ, चल रहा है। बस थोड़ा लोड है। तुम्हारा कैसा है?" मैंने गिलास में दो घूँट डालकर सोडा मिलाया।
"मेरा तो सेम ऐज़ असुअल। बॉस का दिमाग खराब रहता है।"
किरन हँसा, "अरे, हर बॉस का दिमाग खराब होता है, यार। तू अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में सोच – वो तो खूबसूरत है, तेरा दिमाग ठीक रहेगा।"
बिकाश ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "हाँ, वो ठीक रखती है मेरा।"
थोड़ी देर तक ऑफिस के किस्से चले – प्रोजेक्ट की डेडलाइन, बॉस की बकवास, कुछ सहकर्मियों की चुगली। फिर बातों का रुख बदल गया। किरन ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, "सुन, राज, तू कब शादी कर रहा है? कोई गर्लफ्रेंड है तो बता? हमसे छुपाता है क्या?"
मैं मुस्कुराया और ग्लास से एक घूंट लेते हुए बोला, "यार, अभी इन सब चीजों के लिए टाइम नहीं है। मैंने सोचा है कि जब तक नेहा की शादी नहीं हो जाती, मैं शादी के बारे में नहीं सोचूंगा।"
बिकाश ने मुँह बनाया, "अरे, लेकिन तू अपनी इच्छाएँ कैसे मैनेज करेगा? इंसान हूँ, यार – भूख लगती है, प्यास लगती है, और वो भूख भी लगती है।"
किरण जोर से हंसा और बोला, "अबे, राज पक्का पोर्न देखकर हाथ चलाता होगा!"
मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया, "भाई, आजकल के जमाने में ऐसा कौन सा लड़का है जो ये नहीं करता? सब करते हैं।" हम तीनों ठहाके मारकर हंसने लगे।
बिकाश ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "सच में यार, आजकल कंट्रोल करना मुश्किल है। इंस्टाग्राम या फेसबुक खोलो, तो हजारों लड़कियां सेक्सी डांस कर रही होती हैं। वो छोटे कपड़े, वो साड़ियां... देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है।"
किरन ने अपनी पसंद बतानी शुरू की, "हाँ, और आजकल हीरोइनों में से कुछ ही हैं जो हार्ड करती हैं। जान्हवी कपूर – उसकी बॉडी, उसके कर्व्स, उसके सेक्सी बूब्स और गरम गांड – क्या माल है, यार। देखकर ही लगता है कि काश एक बार मिल जाए।"
बिकाश ने बीच में टोकते हुए कहा, "तूने सिर्फ हीरोइन्स देखी हैं, इंस्टाग्राम रील्स देख भाई। वहां ऐसी-ऐसी लड़कियां हैं जो किसी हीरोइन से कम नहीं हैं।"
मैंने चुपचाप सुना, फिर बोला, "हाँ, सब देखता हूँ। पर हाथ में टाइम कहाँ है? ऑफिस, घर – बस चलता रहता है।"
"तो वक्त निकालना पड़ता है," किरन ने फिर से पेग भरते हुए कहा, "अपने मनोरंजन के लिए। वरना बैचेनी हो जाती है।"
हमने आधा घंटा और बातें कीं – पोर्न साइट्स के नाम, कुछ एक्ट्रेसेस की बॉडी, और यहाँ तक कि कुछ इंस्टाग्राम मॉडल्स की चर्चा। बीच-बीच में बिकाश अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताता रहा – कैसे वो उसे बहुत अच्छी लगती है, पर शादी से पहले कुछ करने नहीं देती। किरन ने उसे चिढ़ाया, "अरे, अब कब तक रुकेगा? शादी कर ले न।" मैं भी हंस्ते दोनोंकी बात सुनता रहा ।
तभी मैंने घड़ी देखी – 8:40 बज रहे थे। "अरे, मुझे निकलना होगा, यार। पापा को वादा किया है कि नौ बजे तक आ जाऊँगा। और नेहा ने भी कहा था जल्दी आऊँ।"
किरन ने हाथ हिलाया, "चल, ठीक है। हम भी जल्द ही निकलेंगे। कल मिलते हैं?"
"नहीं, कल तो सोऊँगा। फिर फोन कर लो।" मैंने आखिरी घूँट पिया और उठ गया। दोनों ने हाथ मिलाकर बिदाई दी।
बाइक पर बैठकर मैंने रफ्तार पकड़ी। रास्ता खाली था – Good Friday की शाम, लोग या तो घर पर थे या बाहर मौज-मस्ती में। मैंने सोचा, घर पहुँचकर चुपके से अपने कमरे में चला जाऊँगा।
दस मिनट में घर पहुँच गया। गेट खोला, बाइक अंदर रखी और ऊपर गया। पहली मंज़िल पर नेहा के कमरे से आवाज़ आई, "भैया, आ गए?"
"हाँ, आ गया।" मैंने अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए कहा।
वहाँ से फिर आवाज़ आई, "मैंने खाना रख दिया है। सब्जी को पहले गरम कर लेना, फिर खाना। पापा नहीं आ रहे रात को – उन्होंने फोन किया था, वो अपने दोस्त के यहाँ डिनर करेंगे।"
"ठीक है नेहा," मैंने कहा और अंदर चला गया। कमरे में लाइट जलाई, फिर कपड़े बदले। मैंने घर के मुलायम कपड़े पहने और किचन की ओर चला। नेहा के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था – देखा तो वह अपने मोबाइल में कुछ देख रही थी, लेकिन मैंने जल्दी से नज़र हटा ली।
किचन में गर्म करके खाना खाया, फिर बर्तन धोए। रात का सन्नाटा था। नेहा अब शायद अपने कमरे में ही थी। मैंने अपना कमरा बंद किया और बिस्तर पर लेट गया। शराब का हल्का नशा था, पर दिमाग में उन बातों की गूँज थी जो किरन और बिकाश ने कही थीं – लड़कियों के बारे में, पोर्न के बारे में। मुझे याद आया कि मैंने कुछ दिनों से कुछ नया नहीं देखा था। फोन उठाया, लेकिन तभी पापा के घर आने की आवाज़ सुनाई दी – गेट खुला और बंद हुआ। उनके कदम आ रहे थे, और उनकी हालत से लग रहा था कि खूब पी है। उन्होंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया।
ड्रिंक्स के बाद मेरा एक पुराना रूटीन था—हस्तमैथुन करना। शराब के असर से मेरा दिमाग और शरीर दोनों उत्तेजित थे। मैंने अपना मोबाइल उठाया और पोर्न साइट्स ब्राउज़ करने लगा। तभी मुझे दोस्तों की बात याद आई। मैंने इंस्टाग्राम खोला और सर्च किया "Hot Indian Girls"।
पहली रील में एक लड़की आइटम सॉन्ग पर डांस कर रही थी – छोटी सी टॉप और नीचे उतनी ही छोटी स्कर्ट, अपने बूब्स और गांड को हिलाते हुए वो कैमरे में देखकर मुस्कुरा रही थी। मेरी पैंट के अंदर का लंड हरकत में आ गया। मैंने अगली रील स्क्रॉल की – एक और लड़की, साड़ी में, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट कि उसके दूध के उभार साफ़ दिख रहे थे। वो साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को ढकती और फिर धीरे-धीरे गर्दन से नीचे ले जाती, अपने बूब्स के बीच की गहरी नाली दिखाती हुई। मैंने जोर से साँस छोड़ी।
मैंने कमरे का दरवाज़ा कुंडी लगाकर बंद किया, फिर लाइट को धीमा कर दिया – बस एक छोटा सा नाइट लैंप जल रहा था। बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और शॉर्ट्स से अपने खड़े लंड को बाहर निकाल लिया। वह पहले से ही पूरी तरह सख्त हो चुका था – रात भर की बातों का असर। मैंने दाहिने हाथ से उसे पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया, जबकि बाएँ हाथ से फोन पकड़े रील्स स्क्रॉल करता रहा।
एक रील में लड़की देसी गाने पर थिरक रही थी – उसकी कमर पर झूलती स्कर्ट, चेहरा चंचल, और जब वो घूमती तो उसकी गांड का गोलाई साफ़ नज़र आती। मेरी हथेली लंड के ऊपर-नीचे तेज़ी से दौड़ने लगी। दूसरे हाथ में अगली रील – दो लड़कियाँ एक साथ, एक-दूसरे के बूब्स पर हाथ फेरती हुई, कपड़े फटे हुए, सिर्फ़ ब्रा में। मैंने आँखें बंद कर लीं और कल्पना की कि वो मेरे सामने हैं, मेरे लंड को चूस रही हैं।
जब बहुत ज़्यादा हो गया और मुझे लगा कि अब कभी भी फट जाऊँगा, तो मैंने रुक गया। मन में आया कि बाथरूम में जाकर पूरा करूँ – वहाँ आराम से, अकेले, बिना किसी शोर-शराबे के। मैंने लंड को शॉर्ट्स में वापस डाला, पर वह अब भी उभरा हुआ था, और कमरे का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला।
बाथरूम जाने के लिए मुझे गलियारे से होकर जाना था। नेहा का कमरा उसी फ्लोर पर था, और बाथरूम दोनों कमरों के बीच में था। जैसे ही मैं कमरे से बाहर निकला और बाथरूम की तरफ बढ़ा, नेहा वहां से बाहर आ रही थी।
हमारी नज़रें मिलीं। उसने हैरानी से पूछा, "भैया, आप सोए नहीं अभी तक?"
मैंने जल्दी से जवाब दिया, "नहीं, बस सोने जा रहा हूँ। बाथरूम जाना था।"
उसकी नज़र मेरे शॉर्ट्स के सामने वाले हिस्से पर टिक गई – जहाँ मेरा लंड अभी भी उभरा हुआ था, शॉर्ट्स पर साफ़ दिख रहा था। नेहा ने एक पल को झिझकते हुए देखा, फिर जल्दी से अपनी नज़रें हटा लीं। उसने कहा, "ओह... ठीक है। मैं अपने रूम में जा रही हूँ।"
"हाँ, तू जा। गुड नाइट।" मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में एक हल्की सी हकलाहट थी।
वह अपने कमरे में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं बाथरूम में घुसा और दरवाज़ा कुंडी लगाई। रोशनी जलाई, और फिर से अपना फोन निकाला। इंस्टाग्राम की वही रील्स – जल्दी से एक रील और खोली जहाँ एक लड़की साड़ी में अपने बूब्स को हिलाते हुए गीला हो रही थी। मैंने शॉर्ट्स से लंड निकाला और नल के पास खड़ा हो गया।
एक हाथ में फोन, दूसरे हाथ में लंड। मैंने तेज़ी से हिलाना शुरू किया, आँखें स्क्रीन पर गड़ी हुईं। लड़की की साड़ी उसके शरीर से लिपटी हुई थी, उसकी गांड और बूब्स की हरकतें मेरे दिमाग में बिजली की तरह दौड़ रही थीं। मैंने कल्पना की कि वो मेरे सामने है, अपने बूब्स मुझे दिखा रही है, और मैं उसे पीछे से पकड़ रहा हूँ।
कुछ ही पलों में मेरा शरीर झटका खा गया – मैंने आँखें बंद कीं और गर्म मलाई की धार फूट पड़ी। वह नल के सिंक में बह गई, सफ़ेद गाढ़ा तरल। मैंने कुछ पल आराम किया, फिर नल चलाकर सारा निशान धो डाला। हाथ धोए, चेहरे पर पानी के छींटे मारे, और फिर शॉर्ट्स ठीक किए।
बाथरूम से निकलते समय मैंने सोचा, "नेहा ने देखा तो ज़रूर होगा। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। अच्छा है।" कमरे में आकर मैंने दरवाज़ा बंद किया, बिस्तर पर लेट गया, और फोन स्क्रॉल करते-करते आँखें लग गईं। रात की हल्की-हल्की आवाज़ें थीं – पंखे की गुनगुनाहट और दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़। मैंने फोन बंद किया और गहरी नींद में चला गया।
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