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Incest सबकी प्यारी..गरिमा हमारी

Dirty_mind

Love sex without any cast , color, age or taboo
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Update 13-पापा की परी–D
पिछले अपडेट में आपने बताया कि गरिमा ने पहली बार अपने पापा का लंड चूस कर उसका पानी निकाल दिया। दोनों के बीच सेक्स का खेल शुरू हो चुका था लेकिन खुल कर एक दूसरे का सामना करने से दोनों कतरा रहे थे

अब आगे…
अगले दिन सोकर उठी तो देखा 9 बज चुके थे।
मैंने हाथ मुंह धोये और नीचे गई.
तो देखा कि मम्मी रसोई में हैं और नानी बाहर कमरे में सोफे पर बैठ कर पेपर पढ़ रही हैं।
पापा कहीं नहीं दिख रहे थे.


मैंने रसोई में जाकर मम्मी से पूछा- पापा कहां हैं?
तो वे बोली- ऑफिस से फोन आ गया था तो उन्हें जल्दी जाना पड़ गया।

दिन भर मेरे दिमाग में कल रात की बात चलती रही।
मैं सोच रही थी कि आज रात में कैसे क्या होगा!

फिर दिमाग में आया कि अगर पापा फिर कल रात की तरह मजे लेना चाहेंगे तो आज भी खाने के बाद पहले सोने चले जायेंगे और मुझसे पानी लाने को कहेंगे जरूर!

मैंने सोचा कि अगर आज भी वही हुआ तो आज मैं भी पूरी तैयारी से जाऊंगी।
क्योंकि कल तो इस तरह के मामले का पहला दिन था, मैं भी थोड़ी घबराई हुई थी और शर्मा रही थी और वहीं पापा भी थोड़े घबरा रहे होंगे।
इसी चक्कर में वे जल्दी झड़ भी गए और मैंने भी बस जल्दी-जल्दी लंड चूस लिया और पापा के झड़ते ही चली आई।

मैंने सोचा था कि अगर आज भी पापा का लंड चूसने का मौका मिल जाए तो मैं आज पापा को सरप्राइज दूंगी।

यहीं सब सोचते-सोचते शाम हो गई।

शाम को जब भी पापा ऑफिस से आते थे तो चाय मैं ही उनको देती थी।
मगर आज भी मैं उन्हें चाय देने में थोड़ी हिचकिचा रही थी।


पापा समझ गए कि मैं शरमा रही हूँ।
तो उन्होंने नॉर्मल करने के लिए मुझे आवाज देकर कहा- बेटा चाय देना … सिर में दर्द हो रहा है।
फिर वे मम्मी से बोले- आज ऑफिस में बहुत काम था।


उन्हें मैं चाय देने गई तो वे मम्मी ऑफिस से बात कर रहे थे।


मैं भी थोड़ी अब नॉर्मल हो गई थी।
मैंने उनको चाय दी और इधर-उधर की बात कर अपने कमरे में चली आयी और बस जल्दी से रात होने का इंतज़ार करने लगी।


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करीब 9.30 बजे के करीब मम्मी ने जगह से आवाज दी- आकर खाना खा लो।
मैं गई तो डाइनिंग टेबल पर खाना लग चुका था … मैं बैठ गई.

खाना खाते-खाते करीब 10 बज गए।

उसके बाद पापा टीवी पर न्यूज़ वगैरह देखने लगे और मैं रसोई में मम्मी की मदद करने चली गई।

करीब 10.30 बजे पापा ने टीवी बंद कर दिया।
जैसे ही उन्होंने टीवी बंद किया मेरी धड़कन बढ़ गई।

मैं प्रतीक्षा करने लगी कि पापा अब क्या करते हैं।

अभी मैं रसोई में ही थी मम्मी के साथ!

तभी पापा ने मम्मी से कहा- मैं जा रहा हूं सोने बहुत थक गया हूं और नींद भी आ रही है।
और पापा ऊपर जाने लगे.

अभी दो-चार सीधी चढ़े तभी पापा की आवाज आई- बेटा ऊपर आना तो पानी लेती आना!
यह कहकर वे ऊपर कमरे में चले गए।

पापा के मुझसे पानी लेने की बात सुनते ही मेरी धड़कन बढ़ गई।
मैं भी आज तैयार बैठी थी।


खैर … रसोई का सारा काम निपटाने के बाद मम्मी और नानी दोनों कमरे में चली गई।
तब तक 11 बज चुके थे।


मैं थोड़ी देर के लिए टीवी देखने लगी।
जानबूझ कर मैं थोड़ी देर कर रही थी।
मैं चाह रही थी कि मम्मी और नानी पूरी तरह सो जाएं, तब मैं ऊपर जाऊंगी।

करीब 11.15 पर मैंने टीवी बंद कर मम्मी के कमरे में गई तो देखा कि मम्मी और नानी दोनों बिस्तर पर लेटी हुई हैं और आपस में धीरे-धीरे बातें कर रही हैं।
मैं भी जाकर उनके पास बैठ गई और नानी के दवाई के बारे में पूछा कि उन्होंने दवाई ठीक से ली है या नहीं।

करीब 10 मिनट बाद मैंने मम्मी से कहा- मैं सोने जा रही हूं कुछ चाहिए तो नहीं?
मम्मी बोली- नहीं.. बस लाइट बंद करती जाना और पापा का पानी लेती जाना!
मैंने कहा- ठीक है!

मैंने कमरे की बत्ती बन्द की और दरवाजा बंद कर बाहर आ गई।
फिर मैं रसोई में गई और पापा के लिए एक गिलास पानी लिया और ऊपर आने लगी।

मैं समझ रही थी कि पापा मेरा इंतजार कर रहे होंगे।

ऊपर आने के बाद मैं उनके कमरे में जाने के बजाय धीरे से अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद कर दिया।
उसके बाद मैंने अपने कपड़े चेंज किए.
मैंने लोअर और टी-शर्ट पहना हुआ था; लोअर और पैंटी उतार कर सिर्फ स्कर्ट पहनी और टी-शर्ट निकाल कर अपनी ब्रा उतारी और फिर वापस टी-शर्ट पहन लिया।

अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टीशर्ट में थी जिसके नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी।

फिर मैंने पानी का गिलास उठाया और कमरा खोल कर बाहर आई और पापा के दरवाजे के पास आ गई।
दरवाजा बंद था.

मैंने दरवाजा खोलने से पहले हल्का सा नॉक कर पापा को आवाज दी ताकि पापा भी अंदर तैयार हो जाएं।


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करीब 5-10 सेकेण्ड रुकने के बाद मैंने दरवाजा धीरे से खोला तो देखा कि नाइट बल्ब जल रहा था और पापा बेड पर किनारे लेटे हुए थे।
कल की तरह अपने हाथ को मोड़ कर आँख पर रखा हुआ था।

मेरी निगाह जैसी ही नीचे गयी तो मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई।
पापा का लंड लुंगी से बाहर निकल कर एकदम टाइट खड़ा था।

कल तो लंड में थोड़ा बहुत ही तनाव था और लुंगी से हल्का सा बाहर निकला था।
मगर आज तो पापा ने लुंगी एकदम अगल बगल कर दी थी और बीच में लंड पूरा खुला हुआ टाइट खड़ा था।


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मुझे लग रहा था कि मेरा इंतज़ार करते हुए पापा शायद लंड को सहला रहे होंगे तभी लंड इतना टाइट था।

दरअसल अब हमारे और पापा के बीच सब कुछ खुल कर हो रहा था; फर्क बस इतना था कि बस हम एक-दूसरे से कुछ कहे बिना रात में मजे ले रहे थे और दिन भर अनजान बनाने का नाटक कर रहे थे।

अब हम दोनों बाप-बेटी के बीच बस यही बचा कि अभी तक, मेरी चूत या गांड में उनका लंड नहीं गया था और दूसरे हम एक-दूसरे से इस बारे में बात नहीं करते थे … सब कुछ मौन सहमति से हो रहा था।

खैर … मैं कमरे के अंदर आ गई और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया.

फिर मैंने पापा को आवाज दी- पापा … पापा!

मगर पापा बिना कुछ बोले उसी तरह लेटे रहे।

मैंने पानी का गिलास टेबल पर रखा और बिस्तर के पास आकर खड़ी हो गई।

मेरी निगाह पापा के लंड पर थी।

चूंकि पापा और मैं दोनों जान रहे थे कि आगे क्या होना है इसलिए आज मुझे कोई घबराहट नहीं हो रही थी।
अभी एक दिन पहले मुझे ये सब करते वक्त थोड़ा बहुत डर और शर्म दोनों आ रही थी मगर आज न तो कोई डर था और न ही शर्म!

बल्कि पापा का लंड देख कर मेरी चूत और मुंह दोनों में पानी आ रहा था।
मैं लंड के पास बेड के बगल घुटनों के बल बैठ गई … फिर एक हाथ से पापा के लंड को पकड़ लिया।


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पापा का लंड एकदम सख्त और गर्म था।

मैं लंड को मुट्ठी में पकड़ कर धीरे-धीरे हिलाने लगी।
करीब 15-20 सेकंड तक हिलाने के बाद लण्ड की चमड़ी को पूरा नीचे खींच दिया और लंड के सुपारे पर जीभ को ऐसे फेरा जैसे आइसक्रीम चाटी जाती है।

मैं आज पूरी चुदासी मूड में थी।

करीब 1 मिनट तक आइसक्रीम की तरह लण्ड को चाटने के बाद मैंने सुपारे को पूरा मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
साथ ही एक हाथ से धीरे-धीरे लंड को सहला भी रही थी।

बीच-बीच में मेरे लंड को मुंह से निकल कर फिर जीभ फेरने लगती थी और फिर मुंह में भरकर चूसने लगती थी।
मैं जान रही थी कि पापा ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे और झड़ जाएंगे.

इसी तरह लंड चूसते हुए करीब 2-3 मिनट बीते थे कि पापा हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाने लगे।

मैं समझ गई कि पापा अब झड़ने वाले हैं; मैं और तेजी से अपने सिर को आगे-पीछे कर के लंड को चूसने लगी।

फिर अचानक पापा का शरीर अकड़ गया और वे तेजी से अपनी कमर को हिलाते हुए मेरे मुंह में झड़ गए।


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पापा के लंड से तेज पिचकारी की तरह गाढ़े-गाढ़े वीर्य की पहली धार तो सीधा मेरे गले में चली गई, जिसे मैं गटक गई।

उसके बाद कमर को हल्का-हल्का झटका देते हुए 2-3 बार में पापा ने लंड का सारा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया।
जिसका थोड़ा बहुत पानी बाहर निकल गया, बाकी सब मैं पी गई।

पापा के लंड का सारा पानी पीने के बाद मैंने उनके लंड को लुंगी से साफ किया और अपने मुंह पर भी जो वीर्य लगा था, उसे साफ किया।

अब मैं जान रही थी कि पापा यही सोच रहे होंगे कि मैं अब अपने कमरे में चली जाऊंगी।

मगर सरप्राइज तो अब शुरू होना था।

पानी निकल जाने के बाद पापा का लंड ढीला हो गया था।
मैंने फिर से लंड को पकड़ा और उसकी चमड़ी को पूरा पीछे खींच कर सुपारे को मुंह में लेकर दोबारा चूसना शुरू कर दिया।

पापा को इसकी उम्मीद नहीं रही होगी।
वे अभी भी उसी तरह आंख बंद कर चुपचाप लेटे थे।


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लंड चूसने के साथ-साथ मैंने एक हाथ से अब अपनी चूत को भी सहलाना शुरू कर दिया।
इसीलिये मैं पहले ही अपनी पैंटी और ब्रा उतारकर आयी थी।
मैं आज सोच कर आयी थी कि पापा का लंड चूसते-चूसते ही अपनी चूत का पानी निकालूंगी।

करीब 2-3 मिनट तक चूसने के बाद पापा के लंड में दोबारा तनाव आने लगा।
और फिर कुछ ही देर में वह लोहे की तरह टाइट हो गया।

पापा का लंड जब पूरा तरह खड़ा हो गया तो मैंने मुंह से लंड को बाहर निकाला तो देखा कि मेरे थूक से लंड का गुलाबी सुपारा चिकना होकर चमक रहा था


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अब यहां पर पापा को एक और सरप्राइज मिलने जा रहा था।
मैंने अपनी टी-शर्ट को ऊपर उठाया और मोड़ कर चूचियों को ऊपर कंधे तक कर दिया।

ब्रा मैंने पहले ही उतार दिया था जिसे मेरी बड़ी सी गोल-गोल चूचियाँ एकदम नंगी हो गई थीं।


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अब मैंने चूत सहलाना छोड़ कर एक हाथ से पापा के लंड को और थूक से गीले और चिकने हो चुके सुपारे को चूची की निप्पल से रगड़ने लगी।

जैसे ही मैंने ये किया, पापा के शरीर में हल्की सी कम्पन हुई।
शायद वे उत्तेजित हो गए थे।

मैं बारी-बारी से दोनों चूचियों की निप्पल से लंड के सुपारे को रगड़ रही थी।
यह मैं जानती थी कि पापा अभी एक बार झड़ चुके हैं तो दोबारा जल्दी नहीं झड़ेंगे।

करीब 2 मिनट तक रगड़ने के बाद मैंने अपने दोनों चूचियों को हाथ से पकड़ा और झुककर पापा के लंड को उन दोनों के बीच दबा दिया और चूची की चुदाई करने लगी।

पापा का शरीर उत्तेजना में हल्का-हल्का कांपने लगा था।
मुझे लगने लगा कि अब कुछ देर और इसी तरह किया तो पापा चूचियों पर ही झड़ जाएंगे।
इसलिए मैं चूचियों की चुदाई छोड़ कर सुपारे को मुंह में लेकर दोबारा चूसने लगी।

उधर मेरी चूत में भयानक कुलबुलाहट होने लगी थी।
मैं एक हाथ से अपनी चूत को तेज-तेज रगड़ने लगी और इसी के साथ अपने मुंह को भी तेजी से आगे पीछे कर पापा का लंड चूसने लगी।


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उधर पापा भी अब अपनी कमर को हल्का-हल्का हिलाते हुए लंड चुसवा रहे थे।

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मेरा चेहरा एकदम गर्म हो गया था।

मैं तेजी के साथ अपनी चूत को रगड़ने लगी।
साथ ही मैं पापा के लंड को भी एक हाथ पकड़ कर तेजी से हिला- हिला कर चूसती जा रही थी।

पापा से खेल में मेरी चूत का पानी निकलने वाला था।

तभी अचानक पापा ने अपना एक हाथ बढ़ाकर मेरे सिर को पकड़ लिया और तेजी से अपनी कमर को हिलाने लगे।


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उनके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकलने लगी- आआआ आअह्ह ह्हह … आआ आआ आआह्ह ह!
मैं समझ गई कि वे झड़ने वाले हैं।

इधर मेरी चूत का पानी भी निकलने वाला था।

मैंने एक उंगली चूत में डाल कर तेजी से हिलाने लगी और फिर अचानक मैंने पापा के लंड को मुंह में भींच लिया और मेरी कमर तेजी के साथ झटका लेने लगी और चूत का पानी निकल गया।

अभी मेरी चूत से पानी निकला ही था कि पापा के मुंह से भी तेज सिसकारी निकली- आआ आआ आआह हह हहह!
और फिर उनके लण्ड से भी तेज धार के साथ पानी निकला जो सीधा मेरे गले में उतर गया। जिसे मैं जल्दी से घोंट गयी और लण्ड को मुंह निकल कर अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करने लगी।

मेरी चूत से भी बहुत पानी निकला था … ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने शरीर का सारा पानी निचोड़ लिया हो!
मैं एकदम थक गई थी।

उधर पापा ने अपने हाथ को मेरे सिर से हटा लिया था और चुपचाप आंखें बंद कर हल्का-हल्का हांफ रहे थे।

मैंने टी-शर्ट से अपना मुंह पूछा और उसे नीचे कर चूचियों का ढका और खड़ी हो गयी।

फिर पापा के लंड को बिना साफ किए कमरे से बाहर आ गई और अपने कमरे में आकर दरवाजा अंदर से लॉक कर आँख बंद कर सीधा बेड पर लेट गयी।
मेरी सांस अभी तेज चल रही थी।


लेटे-लेटे कब नींद आ गई मुझे पता ही नहीं चला।


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arushi_dayal

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Update 19-ननद से मेल जोल


पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि शादी के बाद मैं ससुराल में आ गयी और अपने पति से चुद गयी, और फ़िर ट्रेन में हनीमून की शुरुआत हुई…

अब आगे….
हनीमून के दौरान भी रोहित ने मेरी खूब जमकर चुदाई की। कमरे का हर कोना, बाथरूम सोफा हमारी चुदाई का साथी बना! रोहित दिन में तीन से बार मेरी ठुकाई तो अवश्य करता। हनीमून के दौरन ही रोहित ने मेरी पहली बार गांड भी मारी!


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हनीमून के ही दौरान मुझे रोहित के बारे में कुछ बातें पता चलीं। जिनमें पहला तो यह कि रोहित बाइ-सेक्सुअल भी हैं। क्योंकि हनीमून में जब पहली बार रोहित ने मेरी गांड मारी थी।उस दिन वो मेडिकल स्टोर से एनेस्थेटिक स्प्रे लेकर आये थे।

जब मैंने पूछा- ये क्या है?
रोहित बोले- आज गांड में डालूंगा. तो दर्द न हो इसके लिए लेकर आया हूँ।

मैंने कहा- इससे दर्द नहीं होता क्या?
रोहित बोले- अरे हॉस्टल में लड़के अक्सर मजे के लिए कभी-कभी एक दूसरे की गांड मारते थे तो बाजार से यही लेकर आते थे क्योंकि पहली बार गांड मरवाने पर थोड़ा दर्द होता है।

मैंने उस समय तो कुछ नहीं कहा और चुप रही।

फिर उस रात में रोहित ने मुझे दर्द न हो इसके लिए पहले गांड की छेद पर थोड़ा स्प्रे किया और फिर मेरी गांड मारी।
हालांकि उसके बाद मैंने रोहित से कुछ नहीं कहा.

लेकिन मुझे सोनू की बात याद आ गयी कि वह भी जब से हॉस्टल में रहने लगा था तो वो भी बाइ-सेक्सुअल हो गया था।
इसलिए मुझे शक हुआ कि रोहित भी बाइ-सेक्सुअल हैं।

हालांकि रोहित के बाइ-सेक्सुअल बात तब कन्फर्म हो गयी जब पायल (मेरी ननद) ने खुद मुझे ये बताया।

वैसे तो मैं खुद भी बाइसेक्सुअल थी क्योंकि मैं अपनी सहेली ज्योति के साथ ये सब करती थी.
तो मुझे रोहित के बाइ-सेक्सुअल होने से कोई दिक्कत भी नहीं थी।

रोहित के बारे में दूसरी बात जो मैंने जानी वो यह थी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।
दरअसल हनीमून के दौरान कई बार ऐसा भी हुआ था कि हम जब साथ में पॉर्न मूवी देखते थे तो मैंने देखा था कि रोहित कभी-कभी बाइसेक्सुअल पॉर्न मूवी के साथ ही फेमिली सेक्स या टैबू सेक्स मूवी भी देखते थे।

लेकिन फिर शायद मेरी वजह से कि मैं क्या सोचूँगी … वे तुरंत कोई दूसरी पॉर्न मूवी चला देते थे।


वैसे तो मैं रोहित का मोबाइल या लैपटॉप कभी नहीं देखती थी लेकिन कन्फर्म होने के लिए एक दिन होटल में जब रोहित बाथरूम में थे तो मैंने उनका मोबाइल चेक किया तो ब्राउज़र हिस्ट्री में पाया कि उसमें पॉर्न मूवी की साइट्स पर काफी विजिट किया गया था।
हालांकि उसमें कई मूवी तो ऐसी थीं जो हमने साथ ही देखी थीं।

लेकिन उसके अलावा कई पॉर्न मूवी थी जो या तो फेमिली सेक्स की थीं या फिर बाइ-सेक्सुअल मूवी थीं।
फेमिली सेक्स मूवी में भाई-बहन की चुदाई की मूवी ज्यादा थी।


मैं समझ गयी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।

वैसे सच कहूँ तो यह जानकर मैं मन ही मन खुश भी हो गयी थी।

हालांकि मैं रोहित से इन चीजों को लेकर कभी बात नहीं करती थी।
उसकी एक वजह तो नयी-नयी शादी थी.
और दूसरी वजह यह थी कि मैं रोहित को कभी यह नहीं महसूस होने देती थी कि मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी है।

बस वे जैसा कहते जाते थे, मैं वैसा करती जाती थी।
मूवी भी वही देखती थी जो वो दिखाते थे।

हालांकि रोहित चाहते थे कि सेक्स को लेकर मैं भी उनसे थोड़ा खुलूँ और अपनी इच्छा ज़ाहिर करूँ।
सेक्स में मेरी पसंद और नापसंद का भी वे ख्याल रखते थे।

दरअसल शुरुआत में सेक्स के दौरान एक ऐसा काम जो मुझे नहीं पसंद था, जो रोहित मुझसे कभी-कभी करवाते थे, वो था मुझसे अपनी गांड चटवाना।

दरअसल हनीमून के दौरान भी और उसके बाद भी 3 – 4 चार बार रोहित मुझसे अपनी गांड चटवा चुके थे।
मैंने ये कभी किया नहीं था और ना ही मुझे ये करना जरा भी पसंद था इसलिए बेमन से मैं सिर्फ रोहित के ज्यादा जोर देने पर कर देती थी।


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हालांकि बाद में जब रोहित को लगने लगा कि मुझे ये पसंद नहीं है तो उन्होंने ये करवाना बंद कर दिया।

वहीं रोहित कई बार मुझे अकेले ही बेड पर छोड़ देते थे.
वे मुझे खुद ही अपनी चूची सहलाने, चूत में ऊंगली करने और सहलाने को बोलते थे और खुद कुर्सी पर बैठकर मुझे देखते हुए मुठ मारते थे।

इसके अलावा रोहित मेरे लिए स्कर्ट लेकर आये थे।
पूरे हनीमून में बाहर घूमने के दौरान ज्यादातर मैं स्कर्ट और टीशर्ट ही पहनती थी।


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उन्हें मेरा हमेशा स्कर्ट में रहना बहुत पसंद था। वैसे तो हम दोनों अक्सर नंगे होकर चुदाई का खेल खेलते थे लेकिन रोहित कई बार स्कर्ट में ही मेरी चुदाई करते थे।

यहाँ तक कि हनीमून से घर वापस लौटने के बाद भी रोहित ने मुझसे कह रखा था कि रात में अपने कमरे में हमेशा स्कर्ट पहना करो।

मुझे भी स्कर्ट पहनना अच्छा लगता था तो मैं रात खाने और सारा काम निपटाने के बाद कमरे में आते ही सलवार-कुर्ती उतार कर स्कर्ट और टीशर्ट में आ जाती थी।


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खैर … करीब एक सप्ताह बाद हम हनीमून मनाकर लौटे।
तब बस एक बड़ी बुआ को छोड़कर सभी रिश्तेदार जा चुके थे।

बड़ी बुआ जी मेरे ससुर जी से भी काफी बड़ी थीं।
उनकी उम्र करीब 65 के आसपास थी।

चूंकि मेरी सास नहीं थीं और मेरी नयी-नयी शादी हुई थी तो ज्यादातर रिश्तेदारों ने कहा कि बड़ी बुआ एक-दो महीने के लिए यहाँ रुक जाएं ताकि घर में मुझे कोई दिक्कत न हो.
इसलिए बुआ रुक गयी थीं।

नयी-नयी शादी हुई थी तो शुरुआत में तो मैं दिन भर साड़ी पहने रहती थी.
फिर एक दिन बुआ जी बोली- बेटा, दिन भर हमेशा साड़ी पहनने की ज़रूरत नहीं है; सलवार-कुर्ते भी पहना लिया कर!

मुझे तो वैसे ही साड़ी में थोड़ी दिक्कत होती थी इसलिए उस दिन के बाद से मैं अधिकतर सलवार कुर्ता ही पहनने लगी थी।

अब घर में सिर्फ हम पाँच लोग ही थे।
मैं, रोहित (मेरे पति), पायल (मेरी ननद, जो ग्रेजुएशन में कर रही थी), मेरे ससुर और बड़ी बुआ।

नीचे ड्राइंग रूम के अलावा चार कमरे थे,
तो एक कमरे में बड़ी बुआ के रहने का इंतजाम कर दिया गया था।

घर बड़ा था तो ग्राउण्ड फ्लोर चार कमरे थे और ऊपर दो कमरे बने थे.
बाकी बड़ी सी छत थी।

ऊपर के कमरे में रिश्तेदार आने पर रुकते थे।

जैसा कि मैंने आपको पिछली अपडेट में बताया था कि मेरे ससुर जी ने मेरी शादी से पहले ही अपना ट्रांसफर इसी शहर में करवा लिया था।
वहीं मेरे पति की पहली पोस्टिंग भी पास के ही शहर में हुई थी जहाँ पर आने-जाने में दो-ढाई घण्टे ही लगते थे तो उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं थी।

लेकिन उनकी ड्यूटी ट्रेन में लगती थी तो वो अक्सर हफ्ते में 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

इस बीच शादी की गहमागहमी और घर में आये रिश्तेदारों और मेहमानों की वजह से और फिर कुछ दिन तक बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से ससुर जी मुझसे ज्यादा बात नहीं करते थे।
चूंकि नयी-नयी शादी हुई थी तो मैं भी उनके सामने ज्यादा नहीं जा रही थी।

वैसे ससुर जी अक्सर मुझे चोरी से देखने का मौका नहीं छोड़ते थे।
जैसे ही हमारी नज़र मिलती तो हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते थे।

सच कहूँ तो पहले रिश्तेदारों की वजह से और फिर बड़ी बुआ और पायल की वजह से मैं ससुर जी से ज्यादा खुलकर बात नहीं कर पाती थी।
क्योंकि उन्हें खाना देना या खाने के लिए बुलाना या फिर किसी काम से उनके कमरे में जाना … ये सब शादी से पहले पायल ही करती थी।
तो अभी भी ये सारा काम वही कर रही थी।

पिछली अपडेट में मैंने ये भी बताया था कि शादी से पहले ससुर जी मेरे कामुक बदन के दीवाने हो चुके थे।
यहाँ तक कि अपने ही चक्कर में उन्होंने मेरी शादी भी जल्दी-जल्दी अपने बेटे से करवायी थी।

अब जब सबकुछ हो गया तो वे बस मौके की तलाश में थे कि कैसे वो मेरी जवानी का रसपान कर सकें।
मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी।
मेरे लिए तो अच्छा ही था कि पति के अलावा एक और लण्ड का जुगाड़ घर में रहेगा।

ससुर जी किसी न किसी बहाने से अक्सर मेरे सामने आने लगे।
या मौका मिलने पर बात करने की कोशिश करने लगे थे।

लेकिन बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से वहीं पायल कॉलेज से आने के बाद ज्यादातर घर में ही रहती थी तो ससुर जी को ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा था।

खैर … धीरे-धीरे सब कुछ रूटीन में आने लगा था।
ससुर जी ऑफिस चले जाते थे।
पायल भी अपने कॉलेज चली जाती थी।
रोहित भी 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

शादी को करीब डेढ़ महीना हो चुका था और अब ससुराल थोड़ा बोरिंग लगने लगा था।
सब कुछ एक रूटीन में चल रहा था।

जब पति घर होते तो हम दोनों रात में चुदाई करते और सो जाते।

फिर अगले दिन से वही दिन में काम, रात में फिर चुदाई और फिर अगले दिन वही रूटीन!

हालांकि रोहित के साथ भी सेक्स लाइफ अच्छी थी।
शुरुआत में तो नहीं लेकिन धीरे-धीरे वे भी सेक्स में खुल रहे थे और नये-नये पोजिशन से चुदाई करते थे।


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लेकिन जिन्दगी से वो नमकीन स्वाद गायब था जो शादी के पहले था।

शादी के पहले जहाँ मम्मी-पापा से छुपकर भाई के साथ चुदाई का खेल होता था।
ज्योति के घर पर उसके पापा के साथ चुदाई जिसमें ज्योति और उसकी मम्मी भी शामिल रहती थीं।

फिर वहीं घर में मम्मी से छुपकर पापा से चुदवाना, कभी छुपकर बुआ और पापा की चुदाई देखना, इन सबमें अलग ही मजा आता था।

हालांकि ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।


अब मेरी जवानी मेरे ससुर की नज़रों को भा रही थी.
मुझे भी उस दिन का इन्तजार था जब मैं ससुराल में दूसरा लंड लूंगी.
ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।

अपने पापा और ज्योति के पापा के साथ चुदाई के खेल के बाद इतना तो समझ चुकी थी कि अनुभवी और बड़ी उम्र के आदमी सेक्स में भरपूर मजा देते हैं।

चूंकि ससुर जी भी करीब-करीब मेरे पापा की उम्र के ही थे।
तो मजा वे भी उतना ही देंगे, यह मैं समझ रही थी।

लेकिन मुझे पता था कि जब तक बड़ी बुआ घर में हैं, तब तक तो कहीं से मौका मिलना थोड़ा मुश्किल है।
वैसे भी दिन में ससुर जी ऑफिस में रहते थे और शाम के बाद तो बुआ जी और पायल दोनों घर में रहती थीं तो बस हम दोनों को बात को आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

जब रोहित ड्यूटी पर रहते थे तो पायल मेरे साथ सोती थी।

फिर मेरे दिमाग में एक आइ़डिया आया।
मैंने सोचा क्यों न मायके वाला माहौल यहीं ससुराल में ही तैयार किया जाए।

फिर मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।मैंने सोचा कि जब तक बड़ी बुआ हैं घर में तो वैसे भी ससुर जी से आमना-सामना होना मुश्किल है।
रोहित की कुछ छुपी हुई फैंटेसी तो मैं जान ही गयी थी।

मैंने सोचा क्यों न तब तक पायल को ही पहले अपने फंदे में फंसाया जाए।
क्योंकि अगर वह फंस गयी तो मेरे दो काम एक साथ हो जाएंगे।

पहला तो बुआ जी के जाने के बाद फिर घर में किसी बात का डर नहीं रहेगा और दूसरा ये कि कभी चूत चाटने या चटवाने का मन हुआ तो वो भी हो जाएगा।

धीरे-धीरे मैंने पायल को फंसाने के प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।

एक दिन बाद ही रोहित को ड्यूटी पर जाना था।
मैं जानती थी कि इन 3 या 4 दिनों के लिए पायल रात में मेरे साथ ही सोएगी।

वैसे पायल के बारे में आप लोगों को बता दूँ।
पायल की उम्र 19 साल की गोरी-चिट्टी और सुंदर थी।
हाइट करीब-करीब मेरे बराबर थी 5 फीट 2 या 3 इंच के करीब।

उसका शरीर भी मेरी तरह ही मांसल था।
अगर हम दोनों एक दूसरे के कपड़े पहन लें तो पीछे से देखने पर एक बार तो लोग मेरे और पायल में कन्फ्यूज हो जाएंगे।

पायल बेहद चुलबुली थी और घर में खूब हंसी-मजाक करना उसकी आदत थी।
चाहे ससुर जी हों या रोहित … दिन भर सबसे पटर-पटर उसकी जुबान चलती रहती थी।

रोहित से तो उसकी मजाक वाली नोकझोंक हमेशा चलती रहती थी।

वह रोहित को जब ज्यादा चिढ़ाती थी या मजाक करती थी तो रोहित उसके बाल पकड़ कर नोच देते थे, फिर वह भी रोहित के साथ यही करती।
वे दोनों आपस में बच्चों का सा झगड़ा करते थे कभी-कभी।

वहीं वह ससुर जी को भी नहीं छोड़ती थी।
उनके साथ भी उसका खूब-हंसी मजाक करती रहती थी।

यहाँ तक कि कभी-कभी जब मेरे घर से पापा-मम्मी का फोन आता था तो ससुर जी भी उनसे बात करते थे।

मम्मी की थोड़ा लंबा बात करने की आदत थी तो उसका भी वह मजाक बनाती और ससुर जी से हंसते हुए कहती- पापा, आप अपनी समधन से इतनी देर-देर तक क्या बात करते हैं, कुछ हम लोगों को भी बताइये।
ससुर जी भी बस हंस देते थे और कोई जवाब नहीं देते थे।


हालांकि उसे सब घर की शेरनी बोलते थे.
वजह यह थी कि वह जितना शरारत और बोलना घर में करती थी, वहीं बाहर उसकी बोलती बंद रहती थी।
कॉलेज में वह एकदम शर्मीली और अन्तर्मुखी इनोसेंट टीन गर्ल थी।

घर वालों के अलावा वो किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थी।
उसके ज्यादा दोस्त भी नहीं थे.
लड़के तो एक भी नहीं!
और जो एक-दो लड़कियाँ उसकी सहेलियां थीं, उनसे भी सिर्फ कॉलेज और पढ़ाई तक ही दोस्ती थी।


घर में ससुर जी और रोहित सब उसे मानते थे।
रोहित तो हमेशा उसके लिए कुछ न कुछ लेकर आते थे।

जैसे मैं शादी से पहले घर में अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट पहनती थी, पायल भी उसी तरह अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट में रहती थी।
कभी-कभी कुर्ती और लेगिंग भी पहन लिया करती थी।

पायल की चूचियों को मैंने तो कपड़ों के ऊपर से ही देखा था लेकिन उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी तो नहीं थीं लेकिन गोल और सुडौल थीं।
उसकी शायद वजह ये भी थी कि उसकी चूचियों पर किसी लड़के ने हाथ नहीं फेरा था।

जींस में उसकी सुडौल जांघों के ऊपर गोल-गोल गांड अच्छी लगती थी।
भरा और मांसल शरीर होने की वजह से गांड बड़ी और मस्त लगती थी।

वैसे तो पायल और मेरी खूब पटती थी एकदम एक दोस्त की तरह!
पायल मेरे ऊपर बहुत भरोसा भी करती थी, कुछ भी छुपाती नहीं थी मुझसे!

हम एक-दूसरे खूब हंसी मजाक भी करती थी लेकिन सारी बातें एक सीमा के अंदर होती थीं।

खैर … अगले दिन रोहित दोपहर बाद ड्यूटी पर चले गये।
जब रोहित नहीं होते थे तो मैं रात 8 या साढ़े आठ बजे तक ही खाना वगैरह बना खाकर अपने कमरे में आ जाती थी।


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रात का खाना खाने के बाद रात करीब साढ़े पौने दस बजे के करीब पायल मेरे रूम में आ गयी।
फिर हम रोज़ की तरह इधर-उधर की बातें करने लगी।

मैं तो बस किसी तरह अपने मुद्दे पर आना चाह रही थी।

बातों-बातों में मैंने पायल से पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेण्ड है?

पायल मुस्कुराती हुई बोली- अरे भाभी, जिस दिन बीएफ बनाया न … उसी दिन यहां पापा-भैया से लेकर शहर में सारे रिश्तेदारों को खबर हो जाएगी।
मैंने हैरानी से पूछा- वो कैसे?

पायल- भाभी, जिस कॉलेज में हूँ, उसके फाउण्डर दादा जी के दोस्त हैं. और जो कॉलेज के प्रिंसिपल हैं वो और पापा साथ ही पढ़े हैं। वैसे भी यहाँ हर मोहल्ले में तो कहीं न कहीं या तो रिश्तेदार रहते हैं, या पापा के दोस्त या फिर भैया के दोस्त!

फिर वह हंसती हुई बोली- तो समझीं आप … यहां जिस दिन बॉयफ्रेण्ड बनाया, उसी दिन कॉलेज से पढ़ाई छुड़ाकर घर बैठा दी जाऊंगी।

मैंने हंसते हुए पायल के गाल पर चिकोटी काटी और कहा- ओहो … मतलब मेरी प्यारी और सुंदर सी ननद के जवान शरीर को किसी लड़के ने अभी तक छुआ भी नहीं है।
पायल मेरी इस बात पर मुझे शरमा कर थप्पड़ मारते हुए मुस्कुरा कर बोली- क्या भाभी … आप भी?

मैंने पायल से कहा- चल बात शुरू ही हुई है तो मस्ती की बातें ही करते हैं।
फिर मैंने आँख मारते हुए पूछा- अच्छा ये बता, कभी कोई पॉर्न मूवी देखी है? सच सच बताना!
पायल शरमाते हुए बोली- क्या भाभी, आप भी कैसी-कैसी बातें कर रही हैं।

मैं समझ रही थी कि पायल जल्दी खुलने वाली नहीं है क्योंकि इस तरह की बातें वो शायद कभी नहीं की थी।
लेकिन मुझे पता था कि कुछ देर और बहला-फुसला कर या दोस्त की तरह बनकर बात करुंगी तो वो धीरे-धीरे अपने राज़ ज़रूर खोलेगी मुझसे!

मैंने फिर मुस्कुराते हुए कहा- अरे शरमा क्यों रही है। मैं कौन तेरे भैया से बताने जा रही हूँ। वैसे भी मुझे अपनी भाभी के साथ ही दोस्त भी समझ! दो ही साल तो बड़ी हूँ तुझसे!
फिर मैंने आँख मारते हुए कहा- वैसे मुझे अपना दोस्त बनाकर बड़ी फायदे में रहेगी तू! हर बात में तेरी मदद करुंगी और तुझे खूब मजे दूंगी … पक्का वादा है मेरा!
पायल मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा! तो जरा मुझे भी बताइये कि कैसी मदद करेंगी और कैसे मजे देंगी आप मुझे?

मैं समझ रही थी कि पायल अब धीरे-धीरे लाइन पर आ रही थी।

मैंने आँख मारते हुए कहा- अरे एक बार बनाकर तो देख … फिर पता चलेगा तुझे!
पायल हंसती हुई बोली- तो चलिए, आज से आप मेरी भाभी और दोस्त दोनों हैं।


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मैंने कहा- ये हुई ना बात … तो चल अब इसी बात पर बता कि कभी पॉर्न मूवी देखी है या नहीं?
पायल मुस्कुराती हुई बोली- लेकिन एक शर्त पर बताऊंगी … आपको भी सब सच बताना होगा जो मैं पूछूँगी।
मैंने कहा- बिलकुल बताऊंगी।

फिर पायल थोड़ा शरमाती हुई बोली- हाँ, देखी है।
मैंने हंसते हुए कहा- अरे वाह मेरी रानी… कब देखती है रात में सोते समय?

पायल बोली- अरे भाभी … रोज-रोज थोड़ी न देखती हूँ. कभी-कभार मन करता है तो देखती हूँ। अच्छा अब आप बताइये … आपने देखी है पॉर्न मूवी?
मैं हंसते हुए बोली- अरे मुझे क्या ज़रूरत है ये सब देखने की! जब तेरे भैया रहते हैं तो वैसे ही मैं तो रोज रात में पॉर्न मूवी की हिरोइन बनती हूं और तेरे भैया हीरो!

मेरी इस बात पर पायल मुझे हंसकर थप्पड़ मारती हुई बोली- सच में भाभी, आप तो बड़ी बेशर्म हैं। मेरा मतलब था शादी के पहले देखती थीं या नहीं!
मैंने कहा- देखती थी … और देखकर रात में उंगली भी करती थी। सच में बड़ा मजा आता था।

पायल शरमाती हुई बोली- सच में भाभी? आप ये भी करती थीं?
मैंने कहा- क्यों तूने नहीं किया है क्या कभी? किया तो होगा ही क्यों? सच सच बता न … अब तो दोस्त बन गये हैं अब क्या छुपाना!

पायल थोड़ा रुकी और फिर मुस्कुराती हुई शरमा कर बोली- हां भाभी, करती हूँ कभी कभी!


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मैंने पायल की शरम को खत्म करने के लिए कहा- अरे इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है यार … सब लड़के-लड़कियाँ करते हैं ये! मैं भी करती थी, मेरी सखी थी, वह भी करती थी।

फिर मैंने जानबूझकर एक बात और बोली- अरे कभी कभी तो मैं और मेरी सहेली अपने कमरे में साथ ही ये सब करती थी।
पायल हैरानी से बोली- अपनी सहेली के साथ करती थीं आप?

मैं अब धीरे-धीरे बात को घुमाती हुई अपने टॉपिक पर ला रही थी.
इसलिए मैंने बात को और आगे बढ़ाते हुए कहा- हाँ तो क्या हुआ … हम साथ ही पॉर्न मूवी देखती थी तो साथ ही उंगली भी कर लेती थी। क्यों तुमने अपनी किसी फ्रेण्ड के साथ नहीं मजे लिए इसके?

पायल बोली- न बाबा, मैं तो अपनी सहेलियों के साथ इस टॉपिक पर बात भी नहीं करती।

मैंने थोड़ा छेड़ते हुए कहा- हम्म्म्म … चल कोई नहीं … आज मैं तुझे पॉर्न मूवी दिखाती हूँ।
पायल थोड़ा हड़बड़ाती हुई बोली- क्या! सच में?

मैंने हंसते हुए कहा- अरे तू तो ऐसे घबरा रही है जैसे में तेरा रेप करने जा रही हूँ। मैं बस मूवी देखने की बात कर रही हूँ।

इनोसेंट टीन गर्ल पायल को भी अब मेरी बातों में थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था।
वो मुस्कुराती हुई बोली- अरे मैंने कब कह रही हूँ कि मेरा रेप करने जा रही हैं आप!

मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- वैसे … तेरी मासूमियत देखकर मन तो कर रहा है कि तेरा रेप कर दूँ।
पायल हंसती हुई बोली- अच्छा … मतलब आप जैसी खूबसूरत और भोली सूरत वाली लड़की ये भी कर सकती है?

फिर हम दोनों हंस पड़ी।

हांलाकि मैं और बात को आगे बढ़ाना चाह रही थी.
लेकिन डर था कि कहीं पहले दिन ही ज्यादा बात बढ़ाने से कहीं मामला उल्टा ना हो जाए।

वैसे भी मैंने जितना सोचा था पहले दिन उससे कहीं ज्यादा तक बात हो चुकी थी।
इसलिए फिर थोड़ी देर और हल्का-फुल्का मजाक करने के बाद हम सो गई।
 

Seema P Love

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Update 19-ननद से मेल जोल


पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि शादी के बाद मैं ससुराल में आ गयी और अपने पति से चुद गयी, और फ़िर ट्रेन में हनीमून की शुरुआत हुई…

अब आगे….
हनीमून के दौरान भी रोहित ने मेरी खूब जमकर चुदाई की। कमरे का हर कोना, बाथरूम सोफा हमारी चुदाई का साथी बना! रोहित दिन में तीन से बार मेरी ठुकाई तो अवश्य करता। हनीमून के दौरन ही रोहित ने मेरी पहली बार गांड भी मारी!


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हनीमून के ही दौरान मुझे रोहित के बारे में कुछ बातें पता चलीं। जिनमें पहला तो यह कि रोहित बाइ-सेक्सुअल भी हैं। क्योंकि हनीमून में जब पहली बार रोहित ने मेरी गांड मारी थी।उस दिन वो मेडिकल स्टोर से एनेस्थेटिक स्प्रे लेकर आये थे।

जब मैंने पूछा- ये क्या है?
रोहित बोले- आज गांड में डालूंगा. तो दर्द न हो इसके लिए लेकर आया हूँ।

मैंने कहा- इससे दर्द नहीं होता क्या?
रोहित बोले- अरे हॉस्टल में लड़के अक्सर मजे के लिए कभी-कभी एक दूसरे की गांड मारते थे तो बाजार से यही लेकर आते थे क्योंकि पहली बार गांड मरवाने पर थोड़ा दर्द होता है।

मैंने उस समय तो कुछ नहीं कहा और चुप रही।

फिर उस रात में रोहित ने मुझे दर्द न हो इसके लिए पहले गांड की छेद पर थोड़ा स्प्रे किया और फिर मेरी गांड मारी।
हालांकि उसके बाद मैंने रोहित से कुछ नहीं कहा.

लेकिन मुझे सोनू की बात याद आ गयी कि वह भी जब से हॉस्टल में रहने लगा था तो वो भी बाइ-सेक्सुअल हो गया था।
इसलिए मुझे शक हुआ कि रोहित भी बाइ-सेक्सुअल हैं।

हालांकि रोहित के बाइ-सेक्सुअल बात तब कन्फर्म हो गयी जब पायल (मेरी ननद) ने खुद मुझे ये बताया।

वैसे तो मैं खुद भी बाइसेक्सुअल थी क्योंकि मैं अपनी सहेली ज्योति के साथ ये सब करती थी.
तो मुझे रोहित के बाइ-सेक्सुअल होने से कोई दिक्कत भी नहीं थी।

रोहित के बारे में दूसरी बात जो मैंने जानी वो यह थी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।
दरअसल हनीमून के दौरान कई बार ऐसा भी हुआ था कि हम जब साथ में पॉर्न मूवी देखते थे तो मैंने देखा था कि रोहित कभी-कभी बाइसेक्सुअल पॉर्न मूवी के साथ ही फेमिली सेक्स या टैबू सेक्स मूवी भी देखते थे।

लेकिन फिर शायद मेरी वजह से कि मैं क्या सोचूँगी … वे तुरंत कोई दूसरी पॉर्न मूवी चला देते थे।


वैसे तो मैं रोहित का मोबाइल या लैपटॉप कभी नहीं देखती थी लेकिन कन्फर्म होने के लिए एक दिन होटल में जब रोहित बाथरूम में थे तो मैंने उनका मोबाइल चेक किया तो ब्राउज़र हिस्ट्री में पाया कि उसमें पॉर्न मूवी की साइट्स पर काफी विजिट किया गया था।
हालांकि उसमें कई मूवी तो ऐसी थीं जो हमने साथ ही देखी थीं।

लेकिन उसके अलावा कई पॉर्न मूवी थी जो या तो फेमिली सेक्स की थीं या फिर बाइ-सेक्सुअल मूवी थीं।
फेमिली सेक्स मूवी में भाई-बहन की चुदाई की मूवी ज्यादा थी।


मैं समझ गयी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।

वैसे सच कहूँ तो यह जानकर मैं मन ही मन खुश भी हो गयी थी।

हालांकि मैं रोहित से इन चीजों को लेकर कभी बात नहीं करती थी।
उसकी एक वजह तो नयी-नयी शादी थी.
और दूसरी वजह यह थी कि मैं रोहित को कभी यह नहीं महसूस होने देती थी कि मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी है।

बस वे जैसा कहते जाते थे, मैं वैसा करती जाती थी।
मूवी भी वही देखती थी जो वो दिखाते थे।

हालांकि रोहित चाहते थे कि सेक्स को लेकर मैं भी उनसे थोड़ा खुलूँ और अपनी इच्छा ज़ाहिर करूँ।
सेक्स में मेरी पसंद और नापसंद का भी वे ख्याल रखते थे।

दरअसल शुरुआत में सेक्स के दौरान एक ऐसा काम जो मुझे नहीं पसंद था, जो रोहित मुझसे कभी-कभी करवाते थे, वो था मुझसे अपनी गांड चटवाना।

दरअसल हनीमून के दौरान भी और उसके बाद भी 3 – 4 चार बार रोहित मुझसे अपनी गांड चटवा चुके थे।
मैंने ये कभी किया नहीं था और ना ही मुझे ये करना जरा भी पसंद था इसलिए बेमन से मैं सिर्फ रोहित के ज्यादा जोर देने पर कर देती थी।


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हालांकि बाद में जब रोहित को लगने लगा कि मुझे ये पसंद नहीं है तो उन्होंने ये करवाना बंद कर दिया।

वहीं रोहित कई बार मुझे अकेले ही बेड पर छोड़ देते थे.
वे मुझे खुद ही अपनी चूची सहलाने, चूत में ऊंगली करने और सहलाने को बोलते थे और खुद कुर्सी पर बैठकर मुझे देखते हुए मुठ मारते थे।

इसके अलावा रोहित मेरे लिए स्कर्ट लेकर आये थे।
पूरे हनीमून में बाहर घूमने के दौरान ज्यादातर मैं स्कर्ट और टीशर्ट ही पहनती थी।


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उन्हें मेरा हमेशा स्कर्ट में रहना बहुत पसंद था। वैसे तो हम दोनों अक्सर नंगे होकर चुदाई का खेल खेलते थे लेकिन रोहित कई बार स्कर्ट में ही मेरी चुदाई करते थे।

यहाँ तक कि हनीमून से घर वापस लौटने के बाद भी रोहित ने मुझसे कह रखा था कि रात में अपने कमरे में हमेशा स्कर्ट पहना करो।

मुझे भी स्कर्ट पहनना अच्छा लगता था तो मैं रात खाने और सारा काम निपटाने के बाद कमरे में आते ही सलवार-कुर्ती उतार कर स्कर्ट और टीशर्ट में आ जाती थी।


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खैर … करीब एक सप्ताह बाद हम हनीमून मनाकर लौटे।
तब बस एक बड़ी बुआ को छोड़कर सभी रिश्तेदार जा चुके थे।

बड़ी बुआ जी मेरे ससुर जी से भी काफी बड़ी थीं।
उनकी उम्र करीब 65 के आसपास थी।

चूंकि मेरी सास नहीं थीं और मेरी नयी-नयी शादी हुई थी तो ज्यादातर रिश्तेदारों ने कहा कि बड़ी बुआ एक-दो महीने के लिए यहाँ रुक जाएं ताकि घर में मुझे कोई दिक्कत न हो.
इसलिए बुआ रुक गयी थीं।

नयी-नयी शादी हुई थी तो शुरुआत में तो मैं दिन भर साड़ी पहने रहती थी.
फिर एक दिन बुआ जी बोली- बेटा, दिन भर हमेशा साड़ी पहनने की ज़रूरत नहीं है; सलवार-कुर्ते भी पहना लिया कर!

मुझे तो वैसे ही साड़ी में थोड़ी दिक्कत होती थी इसलिए उस दिन के बाद से मैं अधिकतर सलवार कुर्ता ही पहनने लगी थी।

अब घर में सिर्फ हम पाँच लोग ही थे।
मैं, रोहित (मेरे पति), पायल (मेरी ननद, जो ग्रेजुएशन में कर रही थी), मेरे ससुर और बड़ी बुआ।

नीचे ड्राइंग रूम के अलावा चार कमरे थे,
तो एक कमरे में बड़ी बुआ के रहने का इंतजाम कर दिया गया था।

घर बड़ा था तो ग्राउण्ड फ्लोर चार कमरे थे और ऊपर दो कमरे बने थे.
बाकी बड़ी सी छत थी।

ऊपर के कमरे में रिश्तेदार आने पर रुकते थे।

जैसा कि मैंने आपको पिछली अपडेट में बताया था कि मेरे ससुर जी ने मेरी शादी से पहले ही अपना ट्रांसफर इसी शहर में करवा लिया था।
वहीं मेरे पति की पहली पोस्टिंग भी पास के ही शहर में हुई थी जहाँ पर आने-जाने में दो-ढाई घण्टे ही लगते थे तो उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं थी।

लेकिन उनकी ड्यूटी ट्रेन में लगती थी तो वो अक्सर हफ्ते में 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

इस बीच शादी की गहमागहमी और घर में आये रिश्तेदारों और मेहमानों की वजह से और फिर कुछ दिन तक बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से ससुर जी मुझसे ज्यादा बात नहीं करते थे।
चूंकि नयी-नयी शादी हुई थी तो मैं भी उनके सामने ज्यादा नहीं जा रही थी।

वैसे ससुर जी अक्सर मुझे चोरी से देखने का मौका नहीं छोड़ते थे।
जैसे ही हमारी नज़र मिलती तो हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते थे।

सच कहूँ तो पहले रिश्तेदारों की वजह से और फिर बड़ी बुआ और पायल की वजह से मैं ससुर जी से ज्यादा खुलकर बात नहीं कर पाती थी।
क्योंकि उन्हें खाना देना या खाने के लिए बुलाना या फिर किसी काम से उनके कमरे में जाना … ये सब शादी से पहले पायल ही करती थी।
तो अभी भी ये सारा काम वही कर रही थी।

पिछली अपडेट में मैंने ये भी बताया था कि शादी से पहले ससुर जी मेरे कामुक बदन के दीवाने हो चुके थे।
यहाँ तक कि अपने ही चक्कर में उन्होंने मेरी शादी भी जल्दी-जल्दी अपने बेटे से करवायी थी।

अब जब सबकुछ हो गया तो वे बस मौके की तलाश में थे कि कैसे वो मेरी जवानी का रसपान कर सकें।
मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी।
मेरे लिए तो अच्छा ही था कि पति के अलावा एक और लण्ड का जुगाड़ घर में रहेगा।

ससुर जी किसी न किसी बहाने से अक्सर मेरे सामने आने लगे।
या मौका मिलने पर बात करने की कोशिश करने लगे थे।

लेकिन बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से वहीं पायल कॉलेज से आने के बाद ज्यादातर घर में ही रहती थी तो ससुर जी को ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा था।

खैर … धीरे-धीरे सब कुछ रूटीन में आने लगा था।
ससुर जी ऑफिस चले जाते थे।
पायल भी अपने कॉलेज चली जाती थी।
रोहित भी 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

शादी को करीब डेढ़ महीना हो चुका था और अब ससुराल थोड़ा बोरिंग लगने लगा था।
सब कुछ एक रूटीन में चल रहा था।

जब पति घर होते तो हम दोनों रात में चुदाई करते और सो जाते।

फिर अगले दिन से वही दिन में काम, रात में फिर चुदाई और फिर अगले दिन वही रूटीन!

हालांकि रोहित के साथ भी सेक्स लाइफ अच्छी थी।
शुरुआत में तो नहीं लेकिन धीरे-धीरे वे भी सेक्स में खुल रहे थे और नये-नये पोजिशन से चुदाई करते थे।


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लेकिन जिन्दगी से वो नमकीन स्वाद गायब था जो शादी के पहले था।

शादी के पहले जहाँ मम्मी-पापा से छुपकर भाई के साथ चुदाई का खेल होता था।
ज्योति के घर पर उसके पापा के साथ चुदाई जिसमें ज्योति और उसकी मम्मी भी शामिल रहती थीं।

फिर वहीं घर में मम्मी से छुपकर पापा से चुदवाना, कभी छुपकर बुआ और पापा की चुदाई देखना, इन सबमें अलग ही मजा आता था।

हालांकि ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।


अब मेरी जवानी मेरे ससुर की नज़रों को भा रही थी.
मुझे भी उस दिन का इन्तजार था जब मैं ससुराल में दूसरा लंड लूंगी.
ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।

अपने पापा और ज्योति के पापा के साथ चुदाई के खेल के बाद इतना तो समझ चुकी थी कि अनुभवी और बड़ी उम्र के आदमी सेक्स में भरपूर मजा देते हैं।

चूंकि ससुर जी भी करीब-करीब मेरे पापा की उम्र के ही थे।
तो मजा वे भी उतना ही देंगे, यह मैं समझ रही थी।

लेकिन मुझे पता था कि जब तक बड़ी बुआ घर में हैं, तब तक तो कहीं से मौका मिलना थोड़ा मुश्किल है।
वैसे भी दिन में ससुर जी ऑफिस में रहते थे और शाम के बाद तो बुआ जी और पायल दोनों घर में रहती थीं तो बस हम दोनों को बात को आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

जब रोहित ड्यूटी पर रहते थे तो पायल मेरे साथ सोती थी।

फिर मेरे दिमाग में एक आइ़डिया आया।
मैंने सोचा क्यों न मायके वाला माहौल यहीं ससुराल में ही तैयार किया जाए।

फिर मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।मैंने सोचा कि जब तक बड़ी बुआ हैं घर में तो वैसे भी ससुर जी से आमना-सामना होना मुश्किल है।
रोहित की कुछ छुपी हुई फैंटेसी तो मैं जान ही गयी थी।

मैंने सोचा क्यों न तब तक पायल को ही पहले अपने फंदे में फंसाया जाए।
क्योंकि अगर वह फंस गयी तो मेरे दो काम एक साथ हो जाएंगे।

पहला तो बुआ जी के जाने के बाद फिर घर में किसी बात का डर नहीं रहेगा और दूसरा ये कि कभी चूत चाटने या चटवाने का मन हुआ तो वो भी हो जाएगा।

धीरे-धीरे मैंने पायल को फंसाने के प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।

एक दिन बाद ही रोहित को ड्यूटी पर जाना था।
मैं जानती थी कि इन 3 या 4 दिनों के लिए पायल रात में मेरे साथ ही सोएगी।

वैसे पायल के बारे में आप लोगों को बता दूँ।
पायल की उम्र 19 साल की गोरी-चिट्टी और सुंदर थी।
हाइट करीब-करीब मेरे बराबर थी 5 फीट 2 या 3 इंच के करीब।

उसका शरीर भी मेरी तरह ही मांसल था।
अगर हम दोनों एक दूसरे के कपड़े पहन लें तो पीछे से देखने पर एक बार तो लोग मेरे और पायल में कन्फ्यूज हो जाएंगे।

पायल बेहद चुलबुली थी और घर में खूब हंसी-मजाक करना उसकी आदत थी।
चाहे ससुर जी हों या रोहित … दिन भर सबसे पटर-पटर उसकी जुबान चलती रहती थी।

रोहित से तो उसकी मजाक वाली नोकझोंक हमेशा चलती रहती थी।

वह रोहित को जब ज्यादा चिढ़ाती थी या मजाक करती थी तो रोहित उसके बाल पकड़ कर नोच देते थे, फिर वह भी रोहित के साथ यही करती।
वे दोनों आपस में बच्चों का सा झगड़ा करते थे कभी-कभी।

वहीं वह ससुर जी को भी नहीं छोड़ती थी।
उनके साथ भी उसका खूब-हंसी मजाक करती रहती थी।

यहाँ तक कि कभी-कभी जब मेरे घर से पापा-मम्मी का फोन आता था तो ससुर जी भी उनसे बात करते थे।

मम्मी की थोड़ा लंबा बात करने की आदत थी तो उसका भी वह मजाक बनाती और ससुर जी से हंसते हुए कहती- पापा, आप अपनी समधन से इतनी देर-देर तक क्या बात करते हैं, कुछ हम लोगों को भी बताइये।
ससुर जी भी बस हंस देते थे और कोई जवाब नहीं देते थे।


हालांकि उसे सब घर की शेरनी बोलते थे.
वजह यह थी कि वह जितना शरारत और बोलना घर में करती थी, वहीं बाहर उसकी बोलती बंद रहती थी।
कॉलेज में वह एकदम शर्मीली और अन्तर्मुखी इनोसेंट टीन गर्ल थी।

घर वालों के अलावा वो किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थी।
उसके ज्यादा दोस्त भी नहीं थे.
लड़के तो एक भी नहीं!
और जो एक-दो लड़कियाँ उसकी सहेलियां थीं, उनसे भी सिर्फ कॉलेज और पढ़ाई तक ही दोस्ती थी।


घर में ससुर जी और रोहित सब उसे मानते थे।
रोहित तो हमेशा उसके लिए कुछ न कुछ लेकर आते थे।

जैसे मैं शादी से पहले घर में अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट पहनती थी, पायल भी उसी तरह अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट में रहती थी।
कभी-कभी कुर्ती और लेगिंग भी पहन लिया करती थी।

पायल की चूचियों को मैंने तो कपड़ों के ऊपर से ही देखा था लेकिन उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी तो नहीं थीं लेकिन गोल और सुडौल थीं।
उसकी शायद वजह ये भी थी कि उसकी चूचियों पर किसी लड़के ने हाथ नहीं फेरा था।

जींस में उसकी सुडौल जांघों के ऊपर गोल-गोल गांड अच्छी लगती थी।
भरा और मांसल शरीर होने की वजह से गांड बड़ी और मस्त लगती थी।

वैसे तो पायल और मेरी खूब पटती थी एकदम एक दोस्त की तरह!
पायल मेरे ऊपर बहुत भरोसा भी करती थी, कुछ भी छुपाती नहीं थी मुझसे!

हम एक-दूसरे खूब हंसी मजाक भी करती थी लेकिन सारी बातें एक सीमा के अंदर होती थीं।

खैर … अगले दिन रोहित दोपहर बाद ड्यूटी पर चले गये।
जब रोहित नहीं होते थे तो मैं रात 8 या साढ़े आठ बजे तक ही खाना वगैरह बना खाकर अपने कमरे में आ जाती थी।


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रात का खाना खाने के बाद रात करीब साढ़े पौने दस बजे के करीब पायल मेरे रूम में आ गयी।
फिर हम रोज़ की तरह इधर-उधर की बातें करने लगी।

मैं तो बस किसी तरह अपने मुद्दे पर आना चाह रही थी।

बातों-बातों में मैंने पायल से पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेण्ड है?

पायल मुस्कुराती हुई बोली- अरे भाभी, जिस दिन बीएफ बनाया न … उसी दिन यहां पापा-भैया से लेकर शहर में सारे रिश्तेदारों को खबर हो जाएगी।
मैंने हैरानी से पूछा- वो कैसे?

पायल- भाभी, जिस कॉलेज में हूँ, उसके फाउण्डर दादा जी के दोस्त हैं. और जो कॉलेज के प्रिंसिपल हैं वो और पापा साथ ही पढ़े हैं। वैसे भी यहाँ हर मोहल्ले में तो कहीं न कहीं या तो रिश्तेदार रहते हैं, या पापा के दोस्त या फिर भैया के दोस्त!

फिर वह हंसती हुई बोली- तो समझीं आप … यहां जिस दिन बॉयफ्रेण्ड बनाया, उसी दिन कॉलेज से पढ़ाई छुड़ाकर घर बैठा दी जाऊंगी।

मैंने हंसते हुए पायल के गाल पर चिकोटी काटी और कहा- ओहो … मतलब मेरी प्यारी और सुंदर सी ननद के जवान शरीर को किसी लड़के ने अभी तक छुआ भी नहीं है।
पायल मेरी इस बात पर मुझे शरमा कर थप्पड़ मारते हुए मुस्कुरा कर बोली- क्या भाभी … आप भी?

मैंने पायल से कहा- चल बात शुरू ही हुई है तो मस्ती की बातें ही करते हैं।
फिर मैंने आँख मारते हुए पूछा- अच्छा ये बता, कभी कोई पॉर्न मूवी देखी है? सच सच बताना!
पायल शरमाते हुए बोली- क्या भाभी, आप भी कैसी-कैसी बातें कर रही हैं।

मैं समझ रही थी कि पायल जल्दी खुलने वाली नहीं है क्योंकि इस तरह की बातें वो शायद कभी नहीं की थी।
लेकिन मुझे पता था कि कुछ देर और बहला-फुसला कर या दोस्त की तरह बनकर बात करुंगी तो वो धीरे-धीरे अपने राज़ ज़रूर खोलेगी मुझसे!

मैंने फिर मुस्कुराते हुए कहा- अरे शरमा क्यों रही है। मैं कौन तेरे भैया से बताने जा रही हूँ। वैसे भी मुझे अपनी भाभी के साथ ही दोस्त भी समझ! दो ही साल तो बड़ी हूँ तुझसे!
फिर मैंने आँख मारते हुए कहा- वैसे मुझे अपना दोस्त बनाकर बड़ी फायदे में रहेगी तू! हर बात में तेरी मदद करुंगी और तुझे खूब मजे दूंगी … पक्का वादा है मेरा!
पायल मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा! तो जरा मुझे भी बताइये कि कैसी मदद करेंगी और कैसे मजे देंगी आप मुझे?

मैं समझ रही थी कि पायल अब धीरे-धीरे लाइन पर आ रही थी।

मैंने आँख मारते हुए कहा- अरे एक बार बनाकर तो देख … फिर पता चलेगा तुझे!
पायल हंसती हुई बोली- तो चलिए, आज से आप मेरी भाभी और दोस्त दोनों हैं।


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मैंने कहा- ये हुई ना बात … तो चल अब इसी बात पर बता कि कभी पॉर्न मूवी देखी है या नहीं?
पायल मुस्कुराती हुई बोली- लेकिन एक शर्त पर बताऊंगी … आपको भी सब सच बताना होगा जो मैं पूछूँगी।
मैंने कहा- बिलकुल बताऊंगी।

फिर पायल थोड़ा शरमाती हुई बोली- हाँ, देखी है।
मैंने हंसते हुए कहा- अरे वाह मेरी रानी… कब देखती है रात में सोते समय?

पायल बोली- अरे भाभी … रोज-रोज थोड़ी न देखती हूँ. कभी-कभार मन करता है तो देखती हूँ। अच्छा अब आप बताइये … आपने देखी है पॉर्न मूवी?
मैं हंसते हुए बोली- अरे मुझे क्या ज़रूरत है ये सब देखने की! जब तेरे भैया रहते हैं तो वैसे ही मैं तो रोज रात में पॉर्न मूवी की हिरोइन बनती हूं और तेरे भैया हीरो!

मेरी इस बात पर पायल मुझे हंसकर थप्पड़ मारती हुई बोली- सच में भाभी, आप तो बड़ी बेशर्म हैं। मेरा मतलब था शादी के पहले देखती थीं या नहीं!
मैंने कहा- देखती थी … और देखकर रात में उंगली भी करती थी। सच में बड़ा मजा आता था।

पायल शरमाती हुई बोली- सच में भाभी? आप ये भी करती थीं?
मैंने कहा- क्यों तूने नहीं किया है क्या कभी? किया तो होगा ही क्यों? सच सच बता न … अब तो दोस्त बन गये हैं अब क्या छुपाना!

पायल थोड़ा रुकी और फिर मुस्कुराती हुई शरमा कर बोली- हां भाभी, करती हूँ कभी कभी!


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मैंने पायल की शरम को खत्म करने के लिए कहा- अरे इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है यार … सब लड़के-लड़कियाँ करते हैं ये! मैं भी करती थी, मेरी सखी थी, वह भी करती थी।

फिर मैंने जानबूझकर एक बात और बोली- अरे कभी कभी तो मैं और मेरी सहेली अपने कमरे में साथ ही ये सब करती थी।
पायल हैरानी से बोली- अपनी सहेली के साथ करती थीं आप?

मैं अब धीरे-धीरे बात को घुमाती हुई अपने टॉपिक पर ला रही थी.
इसलिए मैंने बात को और आगे बढ़ाते हुए कहा- हाँ तो क्या हुआ … हम साथ ही पॉर्न मूवी देखती थी तो साथ ही उंगली भी कर लेती थी। क्यों तुमने अपनी किसी फ्रेण्ड के साथ नहीं मजे लिए इसके?

पायल बोली- न बाबा, मैं तो अपनी सहेलियों के साथ इस टॉपिक पर बात भी नहीं करती।

मैंने थोड़ा छेड़ते हुए कहा- हम्म्म्म … चल कोई नहीं … आज मैं तुझे पॉर्न मूवी दिखाती हूँ।
पायल थोड़ा हड़बड़ाती हुई बोली- क्या! सच में?

मैंने हंसते हुए कहा- अरे तू तो ऐसे घबरा रही है जैसे में तेरा रेप करने जा रही हूँ। मैं बस मूवी देखने की बात कर रही हूँ।

इनोसेंट टीन गर्ल पायल को भी अब मेरी बातों में थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था।
वो मुस्कुराती हुई बोली- अरे मैंने कब कह रही हूँ कि मेरा रेप करने जा रही हैं आप!

मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- वैसे … तेरी मासूमियत देखकर मन तो कर रहा है कि तेरा रेप कर दूँ।
पायल हंसती हुई बोली- अच्छा … मतलब आप जैसी खूबसूरत और भोली सूरत वाली लड़की ये भी कर सकती है?

फिर हम दोनों हंस पड़ी।

हांलाकि मैं और बात को आगे बढ़ाना चाह रही थी.
लेकिन डर था कि कहीं पहले दिन ही ज्यादा बात बढ़ाने से कहीं मामला उल्टा ना हो जाए।

वैसे भी मैंने जितना सोचा था पहले दिन उससे कहीं ज्यादा तक बात हो चुकी थी।
इसलिए फिर थोड़ी देर और हल्का-फुल्का मजाक करने के बाद हम सो गई।
Bahut hi majedar....❤️
 

komaalrani

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komaalrani

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Update 19-ननद से मेल जोल


पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि शादी के बाद मैं ससुराल में आ गयी और अपने पति से चुद गयी, और फ़िर ट्रेन में हनीमून की शुरुआत हुई…

अब आगे….
हनीमून के दौरान भी रोहित ने मेरी खूब जमकर चुदाई की। कमरे का हर कोना, बाथरूम सोफा हमारी चुदाई का साथी बना! रोहित दिन में तीन से बार मेरी ठुकाई तो अवश्य करता। हनीमून के दौरन ही रोहित ने मेरी पहली बार गांड भी मारी!


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हनीमून के ही दौरान मुझे रोहित के बारे में कुछ बातें पता चलीं। जिनमें पहला तो यह कि रोहित बाइ-सेक्सुअल भी हैं। क्योंकि हनीमून में जब पहली बार रोहित ने मेरी गांड मारी थी।उस दिन वो मेडिकल स्टोर से एनेस्थेटिक स्प्रे लेकर आये थे।

जब मैंने पूछा- ये क्या है?
रोहित बोले- आज गांड में डालूंगा. तो दर्द न हो इसके लिए लेकर आया हूँ।

मैंने कहा- इससे दर्द नहीं होता क्या?
रोहित बोले- अरे हॉस्टल में लड़के अक्सर मजे के लिए कभी-कभी एक दूसरे की गांड मारते थे तो बाजार से यही लेकर आते थे क्योंकि पहली बार गांड मरवाने पर थोड़ा दर्द होता है।

मैंने उस समय तो कुछ नहीं कहा और चुप रही।

फिर उस रात में रोहित ने मुझे दर्द न हो इसके लिए पहले गांड की छेद पर थोड़ा स्प्रे किया और फिर मेरी गांड मारी।
हालांकि उसके बाद मैंने रोहित से कुछ नहीं कहा.

लेकिन मुझे सोनू की बात याद आ गयी कि वह भी जब से हॉस्टल में रहने लगा था तो वो भी बाइ-सेक्सुअल हो गया था।
इसलिए मुझे शक हुआ कि रोहित भी बाइ-सेक्सुअल हैं।

हालांकि रोहित के बाइ-सेक्सुअल बात तब कन्फर्म हो गयी जब पायल (मेरी ननद) ने खुद मुझे ये बताया।

वैसे तो मैं खुद भी बाइसेक्सुअल थी क्योंकि मैं अपनी सहेली ज्योति के साथ ये सब करती थी.
तो मुझे रोहित के बाइ-सेक्सुअल होने से कोई दिक्कत भी नहीं थी।

रोहित के बारे में दूसरी बात जो मैंने जानी वो यह थी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।
दरअसल हनीमून के दौरान कई बार ऐसा भी हुआ था कि हम जब साथ में पॉर्न मूवी देखते थे तो मैंने देखा था कि रोहित कभी-कभी बाइसेक्सुअल पॉर्न मूवी के साथ ही फेमिली सेक्स या टैबू सेक्स मूवी भी देखते थे।

लेकिन फिर शायद मेरी वजह से कि मैं क्या सोचूँगी … वे तुरंत कोई दूसरी पॉर्न मूवी चला देते थे।


वैसे तो मैं रोहित का मोबाइल या लैपटॉप कभी नहीं देखती थी लेकिन कन्फर्म होने के लिए एक दिन होटल में जब रोहित बाथरूम में थे तो मैंने उनका मोबाइल चेक किया तो ब्राउज़र हिस्ट्री में पाया कि उसमें पॉर्न मूवी की साइट्स पर काफी विजिट किया गया था।
हालांकि उसमें कई मूवी तो ऐसी थीं जो हमने साथ ही देखी थीं।

लेकिन उसके अलावा कई पॉर्न मूवी थी जो या तो फेमिली सेक्स की थीं या फिर बाइ-सेक्सुअल मूवी थीं।
फेमिली सेक्स मूवी में भाई-बहन की चुदाई की मूवी ज्यादा थी।


मैं समझ गयी कि रोहित के अंदर भी फेमिली सेक्स की फैंटेसी है।

वैसे सच कहूँ तो यह जानकर मैं मन ही मन खुश भी हो गयी थी।

हालांकि मैं रोहित से इन चीजों को लेकर कभी बात नहीं करती थी।
उसकी एक वजह तो नयी-नयी शादी थी.
और दूसरी वजह यह थी कि मैं रोहित को कभी यह नहीं महसूस होने देती थी कि मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी है।

बस वे जैसा कहते जाते थे, मैं वैसा करती जाती थी।
मूवी भी वही देखती थी जो वो दिखाते थे।

हालांकि रोहित चाहते थे कि सेक्स को लेकर मैं भी उनसे थोड़ा खुलूँ और अपनी इच्छा ज़ाहिर करूँ।
सेक्स में मेरी पसंद और नापसंद का भी वे ख्याल रखते थे।

दरअसल शुरुआत में सेक्स के दौरान एक ऐसा काम जो मुझे नहीं पसंद था, जो रोहित मुझसे कभी-कभी करवाते थे, वो था मुझसे अपनी गांड चटवाना।

दरअसल हनीमून के दौरान भी और उसके बाद भी 3 – 4 चार बार रोहित मुझसे अपनी गांड चटवा चुके थे।
मैंने ये कभी किया नहीं था और ना ही मुझे ये करना जरा भी पसंद था इसलिए बेमन से मैं सिर्फ रोहित के ज्यादा जोर देने पर कर देती थी।


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हालांकि बाद में जब रोहित को लगने लगा कि मुझे ये पसंद नहीं है तो उन्होंने ये करवाना बंद कर दिया।

वहीं रोहित कई बार मुझे अकेले ही बेड पर छोड़ देते थे.
वे मुझे खुद ही अपनी चूची सहलाने, चूत में ऊंगली करने और सहलाने को बोलते थे और खुद कुर्सी पर बैठकर मुझे देखते हुए मुठ मारते थे।

इसके अलावा रोहित मेरे लिए स्कर्ट लेकर आये थे।
पूरे हनीमून में बाहर घूमने के दौरान ज्यादातर मैं स्कर्ट और टीशर्ट ही पहनती थी।


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उन्हें मेरा हमेशा स्कर्ट में रहना बहुत पसंद था। वैसे तो हम दोनों अक्सर नंगे होकर चुदाई का खेल खेलते थे लेकिन रोहित कई बार स्कर्ट में ही मेरी चुदाई करते थे।

यहाँ तक कि हनीमून से घर वापस लौटने के बाद भी रोहित ने मुझसे कह रखा था कि रात में अपने कमरे में हमेशा स्कर्ट पहना करो।

मुझे भी स्कर्ट पहनना अच्छा लगता था तो मैं रात खाने और सारा काम निपटाने के बाद कमरे में आते ही सलवार-कुर्ती उतार कर स्कर्ट और टीशर्ट में आ जाती थी।


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खैर … करीब एक सप्ताह बाद हम हनीमून मनाकर लौटे।
तब बस एक बड़ी बुआ को छोड़कर सभी रिश्तेदार जा चुके थे।

बड़ी बुआ जी मेरे ससुर जी से भी काफी बड़ी थीं।
उनकी उम्र करीब 65 के आसपास थी।

चूंकि मेरी सास नहीं थीं और मेरी नयी-नयी शादी हुई थी तो ज्यादातर रिश्तेदारों ने कहा कि बड़ी बुआ एक-दो महीने के लिए यहाँ रुक जाएं ताकि घर में मुझे कोई दिक्कत न हो.
इसलिए बुआ रुक गयी थीं।

नयी-नयी शादी हुई थी तो शुरुआत में तो मैं दिन भर साड़ी पहने रहती थी.
फिर एक दिन बुआ जी बोली- बेटा, दिन भर हमेशा साड़ी पहनने की ज़रूरत नहीं है; सलवार-कुर्ते भी पहना लिया कर!

मुझे तो वैसे ही साड़ी में थोड़ी दिक्कत होती थी इसलिए उस दिन के बाद से मैं अधिकतर सलवार कुर्ता ही पहनने लगी थी।

अब घर में सिर्फ हम पाँच लोग ही थे।
मैं, रोहित (मेरे पति), पायल (मेरी ननद, जो ग्रेजुएशन में कर रही थी), मेरे ससुर और बड़ी बुआ।

नीचे ड्राइंग रूम के अलावा चार कमरे थे,
तो एक कमरे में बड़ी बुआ के रहने का इंतजाम कर दिया गया था।

घर बड़ा था तो ग्राउण्ड फ्लोर चार कमरे थे और ऊपर दो कमरे बने थे.
बाकी बड़ी सी छत थी।

ऊपर के कमरे में रिश्तेदार आने पर रुकते थे।

जैसा कि मैंने आपको पिछली अपडेट में बताया था कि मेरे ससुर जी ने मेरी शादी से पहले ही अपना ट्रांसफर इसी शहर में करवा लिया था।
वहीं मेरे पति की पहली पोस्टिंग भी पास के ही शहर में हुई थी जहाँ पर आने-जाने में दो-ढाई घण्टे ही लगते थे तो उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं थी।

लेकिन उनकी ड्यूटी ट्रेन में लगती थी तो वो अक्सर हफ्ते में 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

इस बीच शादी की गहमागहमी और घर में आये रिश्तेदारों और मेहमानों की वजह से और फिर कुछ दिन तक बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से ससुर जी मुझसे ज्यादा बात नहीं करते थे।
चूंकि नयी-नयी शादी हुई थी तो मैं भी उनके सामने ज्यादा नहीं जा रही थी।

वैसे ससुर जी अक्सर मुझे चोरी से देखने का मौका नहीं छोड़ते थे।
जैसे ही हमारी नज़र मिलती तो हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते थे।

सच कहूँ तो पहले रिश्तेदारों की वजह से और फिर बड़ी बुआ और पायल की वजह से मैं ससुर जी से ज्यादा खुलकर बात नहीं कर पाती थी।
क्योंकि उन्हें खाना देना या खाने के लिए बुलाना या फिर किसी काम से उनके कमरे में जाना … ये सब शादी से पहले पायल ही करती थी।
तो अभी भी ये सारा काम वही कर रही थी।

पिछली अपडेट में मैंने ये भी बताया था कि शादी से पहले ससुर जी मेरे कामुक बदन के दीवाने हो चुके थे।
यहाँ तक कि अपने ही चक्कर में उन्होंने मेरी शादी भी जल्दी-जल्दी अपने बेटे से करवायी थी।

अब जब सबकुछ हो गया तो वे बस मौके की तलाश में थे कि कैसे वो मेरी जवानी का रसपान कर सकें।
मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी।
मेरे लिए तो अच्छा ही था कि पति के अलावा एक और लण्ड का जुगाड़ घर में रहेगा।

ससुर जी किसी न किसी बहाने से अक्सर मेरे सामने आने लगे।
या मौका मिलने पर बात करने की कोशिश करने लगे थे।

लेकिन बड़ी बुआ के घर में होने की वजह से वहीं पायल कॉलेज से आने के बाद ज्यादातर घर में ही रहती थी तो ससुर जी को ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा था।

खैर … धीरे-धीरे सब कुछ रूटीन में आने लगा था।
ससुर जी ऑफिस चले जाते थे।
पायल भी अपने कॉलेज चली जाती थी।
रोहित भी 3-4 दिन बाहर ही रहते थे।

शादी को करीब डेढ़ महीना हो चुका था और अब ससुराल थोड़ा बोरिंग लगने लगा था।
सब कुछ एक रूटीन में चल रहा था।

जब पति घर होते तो हम दोनों रात में चुदाई करते और सो जाते।

फिर अगले दिन से वही दिन में काम, रात में फिर चुदाई और फिर अगले दिन वही रूटीन!

हालांकि रोहित के साथ भी सेक्स लाइफ अच्छी थी।
शुरुआत में तो नहीं लेकिन धीरे-धीरे वे भी सेक्स में खुल रहे थे और नये-नये पोजिशन से चुदाई करते थे।


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लेकिन जिन्दगी से वो नमकीन स्वाद गायब था जो शादी के पहले था।

शादी के पहले जहाँ मम्मी-पापा से छुपकर भाई के साथ चुदाई का खेल होता था।
ज्योति के घर पर उसके पापा के साथ चुदाई जिसमें ज्योति और उसकी मम्मी भी शामिल रहती थीं।

फिर वहीं घर में मम्मी से छुपकर पापा से चुदवाना, कभी छुपकर बुआ और पापा की चुदाई देखना, इन सबमें अलग ही मजा आता था।

हालांकि ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।


अब मेरी जवानी मेरे ससुर की नज़रों को भा रही थी.
मुझे भी उस दिन का इन्तजार था जब मैं ससुराल में दूसरा लंड लूंगी.
ससुर जी के साथ कुछ मामला आगे बढ़ता तो एक बार फिर वही नमकीन स्वाद जिंदगी में आने की उम्मीद थी।

अपने पापा और ज्योति के पापा के साथ चुदाई के खेल के बाद इतना तो समझ चुकी थी कि अनुभवी और बड़ी उम्र के आदमी सेक्स में भरपूर मजा देते हैं।

चूंकि ससुर जी भी करीब-करीब मेरे पापा की उम्र के ही थे।
तो मजा वे भी उतना ही देंगे, यह मैं समझ रही थी।

लेकिन मुझे पता था कि जब तक बड़ी बुआ घर में हैं, तब तक तो कहीं से मौका मिलना थोड़ा मुश्किल है।
वैसे भी दिन में ससुर जी ऑफिस में रहते थे और शाम के बाद तो बुआ जी और पायल दोनों घर में रहती थीं तो बस हम दोनों को बात को आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

जब रोहित ड्यूटी पर रहते थे तो पायल मेरे साथ सोती थी।

फिर मेरे दिमाग में एक आइ़डिया आया।
मैंने सोचा क्यों न मायके वाला माहौल यहीं ससुराल में ही तैयार किया जाए।

फिर मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।मैंने सोचा कि जब तक बड़ी बुआ हैं घर में तो वैसे भी ससुर जी से आमना-सामना होना मुश्किल है।
रोहित की कुछ छुपी हुई फैंटेसी तो मैं जान ही गयी थी।

मैंने सोचा क्यों न तब तक पायल को ही पहले अपने फंदे में फंसाया जाए।
क्योंकि अगर वह फंस गयी तो मेरे दो काम एक साथ हो जाएंगे।

पहला तो बुआ जी के जाने के बाद फिर घर में किसी बात का डर नहीं रहेगा और दूसरा ये कि कभी चूत चाटने या चटवाने का मन हुआ तो वो भी हो जाएगा।

धीरे-धीरे मैंने पायल को फंसाने के प्लान पर काम करना शुरू कर दिया।

एक दिन बाद ही रोहित को ड्यूटी पर जाना था।
मैं जानती थी कि इन 3 या 4 दिनों के लिए पायल रात में मेरे साथ ही सोएगी।

वैसे पायल के बारे में आप लोगों को बता दूँ।
पायल की उम्र 19 साल की गोरी-चिट्टी और सुंदर थी।
हाइट करीब-करीब मेरे बराबर थी 5 फीट 2 या 3 इंच के करीब।

उसका शरीर भी मेरी तरह ही मांसल था।
अगर हम दोनों एक दूसरे के कपड़े पहन लें तो पीछे से देखने पर एक बार तो लोग मेरे और पायल में कन्फ्यूज हो जाएंगे।

पायल बेहद चुलबुली थी और घर में खूब हंसी-मजाक करना उसकी आदत थी।
चाहे ससुर जी हों या रोहित … दिन भर सबसे पटर-पटर उसकी जुबान चलती रहती थी।

रोहित से तो उसकी मजाक वाली नोकझोंक हमेशा चलती रहती थी।

वह रोहित को जब ज्यादा चिढ़ाती थी या मजाक करती थी तो रोहित उसके बाल पकड़ कर नोच देते थे, फिर वह भी रोहित के साथ यही करती।
वे दोनों आपस में बच्चों का सा झगड़ा करते थे कभी-कभी।

वहीं वह ससुर जी को भी नहीं छोड़ती थी।
उनके साथ भी उसका खूब-हंसी मजाक करती रहती थी।

यहाँ तक कि कभी-कभी जब मेरे घर से पापा-मम्मी का फोन आता था तो ससुर जी भी उनसे बात करते थे।

मम्मी की थोड़ा लंबा बात करने की आदत थी तो उसका भी वह मजाक बनाती और ससुर जी से हंसते हुए कहती- पापा, आप अपनी समधन से इतनी देर-देर तक क्या बात करते हैं, कुछ हम लोगों को भी बताइये।
ससुर जी भी बस हंस देते थे और कोई जवाब नहीं देते थे।


हालांकि उसे सब घर की शेरनी बोलते थे.
वजह यह थी कि वह जितना शरारत और बोलना घर में करती थी, वहीं बाहर उसकी बोलती बंद रहती थी।
कॉलेज में वह एकदम शर्मीली और अन्तर्मुखी इनोसेंट टीन गर्ल थी।

घर वालों के अलावा वो किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थी।
उसके ज्यादा दोस्त भी नहीं थे.
लड़के तो एक भी नहीं!
और जो एक-दो लड़कियाँ उसकी सहेलियां थीं, उनसे भी सिर्फ कॉलेज और पढ़ाई तक ही दोस्ती थी।


घर में ससुर जी और रोहित सब उसे मानते थे।
रोहित तो हमेशा उसके लिए कुछ न कुछ लेकर आते थे।

जैसे मैं शादी से पहले घर में अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट पहनती थी, पायल भी उसी तरह अक्सर स्कर्ट और टीशर्ट में रहती थी।
कभी-कभी कुर्ती और लेगिंग भी पहन लिया करती थी।

पायल की चूचियों को मैंने तो कपड़ों के ऊपर से ही देखा था लेकिन उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी तो नहीं थीं लेकिन गोल और सुडौल थीं।
उसकी शायद वजह ये भी थी कि उसकी चूचियों पर किसी लड़के ने हाथ नहीं फेरा था।

जींस में उसकी सुडौल जांघों के ऊपर गोल-गोल गांड अच्छी लगती थी।
भरा और मांसल शरीर होने की वजह से गांड बड़ी और मस्त लगती थी।

वैसे तो पायल और मेरी खूब पटती थी एकदम एक दोस्त की तरह!
पायल मेरे ऊपर बहुत भरोसा भी करती थी, कुछ भी छुपाती नहीं थी मुझसे!

हम एक-दूसरे खूब हंसी मजाक भी करती थी लेकिन सारी बातें एक सीमा के अंदर होती थीं।

खैर … अगले दिन रोहित दोपहर बाद ड्यूटी पर चले गये।
जब रोहित नहीं होते थे तो मैं रात 8 या साढ़े आठ बजे तक ही खाना वगैरह बना खाकर अपने कमरे में आ जाती थी।


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रात का खाना खाने के बाद रात करीब साढ़े पौने दस बजे के करीब पायल मेरे रूम में आ गयी।
फिर हम रोज़ की तरह इधर-उधर की बातें करने लगी।

मैं तो बस किसी तरह अपने मुद्दे पर आना चाह रही थी।

बातों-बातों में मैंने पायल से पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेण्ड है?

पायल मुस्कुराती हुई बोली- अरे भाभी, जिस दिन बीएफ बनाया न … उसी दिन यहां पापा-भैया से लेकर शहर में सारे रिश्तेदारों को खबर हो जाएगी।
मैंने हैरानी से पूछा- वो कैसे?

पायल- भाभी, जिस कॉलेज में हूँ, उसके फाउण्डर दादा जी के दोस्त हैं. और जो कॉलेज के प्रिंसिपल हैं वो और पापा साथ ही पढ़े हैं। वैसे भी यहाँ हर मोहल्ले में तो कहीं न कहीं या तो रिश्तेदार रहते हैं, या पापा के दोस्त या फिर भैया के दोस्त!

फिर वह हंसती हुई बोली- तो समझीं आप … यहां जिस दिन बॉयफ्रेण्ड बनाया, उसी दिन कॉलेज से पढ़ाई छुड़ाकर घर बैठा दी जाऊंगी।

मैंने हंसते हुए पायल के गाल पर चिकोटी काटी और कहा- ओहो … मतलब मेरी प्यारी और सुंदर सी ननद के जवान शरीर को किसी लड़के ने अभी तक छुआ भी नहीं है।
पायल मेरी इस बात पर मुझे शरमा कर थप्पड़ मारते हुए मुस्कुरा कर बोली- क्या भाभी … आप भी?

मैंने पायल से कहा- चल बात शुरू ही हुई है तो मस्ती की बातें ही करते हैं।
फिर मैंने आँख मारते हुए पूछा- अच्छा ये बता, कभी कोई पॉर्न मूवी देखी है? सच सच बताना!
पायल शरमाते हुए बोली- क्या भाभी, आप भी कैसी-कैसी बातें कर रही हैं।

मैं समझ रही थी कि पायल जल्दी खुलने वाली नहीं है क्योंकि इस तरह की बातें वो शायद कभी नहीं की थी।
लेकिन मुझे पता था कि कुछ देर और बहला-फुसला कर या दोस्त की तरह बनकर बात करुंगी तो वो धीरे-धीरे अपने राज़ ज़रूर खोलेगी मुझसे!

मैंने फिर मुस्कुराते हुए कहा- अरे शरमा क्यों रही है। मैं कौन तेरे भैया से बताने जा रही हूँ। वैसे भी मुझे अपनी भाभी के साथ ही दोस्त भी समझ! दो ही साल तो बड़ी हूँ तुझसे!
फिर मैंने आँख मारते हुए कहा- वैसे मुझे अपना दोस्त बनाकर बड़ी फायदे में रहेगी तू! हर बात में तेरी मदद करुंगी और तुझे खूब मजे दूंगी … पक्का वादा है मेरा!
पायल मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा! तो जरा मुझे भी बताइये कि कैसी मदद करेंगी और कैसे मजे देंगी आप मुझे?

मैं समझ रही थी कि पायल अब धीरे-धीरे लाइन पर आ रही थी।

मैंने आँख मारते हुए कहा- अरे एक बार बनाकर तो देख … फिर पता चलेगा तुझे!
पायल हंसती हुई बोली- तो चलिए, आज से आप मेरी भाभी और दोस्त दोनों हैं।


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मैंने कहा- ये हुई ना बात … तो चल अब इसी बात पर बता कि कभी पॉर्न मूवी देखी है या नहीं?
पायल मुस्कुराती हुई बोली- लेकिन एक शर्त पर बताऊंगी … आपको भी सब सच बताना होगा जो मैं पूछूँगी।
मैंने कहा- बिलकुल बताऊंगी।

फिर पायल थोड़ा शरमाती हुई बोली- हाँ, देखी है।
मैंने हंसते हुए कहा- अरे वाह मेरी रानी… कब देखती है रात में सोते समय?

पायल बोली- अरे भाभी … रोज-रोज थोड़ी न देखती हूँ. कभी-कभार मन करता है तो देखती हूँ। अच्छा अब आप बताइये … आपने देखी है पॉर्न मूवी?
मैं हंसते हुए बोली- अरे मुझे क्या ज़रूरत है ये सब देखने की! जब तेरे भैया रहते हैं तो वैसे ही मैं तो रोज रात में पॉर्न मूवी की हिरोइन बनती हूं और तेरे भैया हीरो!

मेरी इस बात पर पायल मुझे हंसकर थप्पड़ मारती हुई बोली- सच में भाभी, आप तो बड़ी बेशर्म हैं। मेरा मतलब था शादी के पहले देखती थीं या नहीं!
मैंने कहा- देखती थी … और देखकर रात में उंगली भी करती थी। सच में बड़ा मजा आता था।

पायल शरमाती हुई बोली- सच में भाभी? आप ये भी करती थीं?
मैंने कहा- क्यों तूने नहीं किया है क्या कभी? किया तो होगा ही क्यों? सच सच बता न … अब तो दोस्त बन गये हैं अब क्या छुपाना!

पायल थोड़ा रुकी और फिर मुस्कुराती हुई शरमा कर बोली- हां भाभी, करती हूँ कभी कभी!


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मैंने पायल की शरम को खत्म करने के लिए कहा- अरे इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है यार … सब लड़के-लड़कियाँ करते हैं ये! मैं भी करती थी, मेरी सखी थी, वह भी करती थी।

फिर मैंने जानबूझकर एक बात और बोली- अरे कभी कभी तो मैं और मेरी सहेली अपने कमरे में साथ ही ये सब करती थी।
पायल हैरानी से बोली- अपनी सहेली के साथ करती थीं आप?

मैं अब धीरे-धीरे बात को घुमाती हुई अपने टॉपिक पर ला रही थी.
इसलिए मैंने बात को और आगे बढ़ाते हुए कहा- हाँ तो क्या हुआ … हम साथ ही पॉर्न मूवी देखती थी तो साथ ही उंगली भी कर लेती थी। क्यों तुमने अपनी किसी फ्रेण्ड के साथ नहीं मजे लिए इसके?

पायल बोली- न बाबा, मैं तो अपनी सहेलियों के साथ इस टॉपिक पर बात भी नहीं करती।

मैंने थोड़ा छेड़ते हुए कहा- हम्म्म्म … चल कोई नहीं … आज मैं तुझे पॉर्न मूवी दिखाती हूँ।
पायल थोड़ा हड़बड़ाती हुई बोली- क्या! सच में?

मैंने हंसते हुए कहा- अरे तू तो ऐसे घबरा रही है जैसे में तेरा रेप करने जा रही हूँ। मैं बस मूवी देखने की बात कर रही हूँ।

इनोसेंट टीन गर्ल पायल को भी अब मेरी बातों में थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था।
वो मुस्कुराती हुई बोली- अरे मैंने कब कह रही हूँ कि मेरा रेप करने जा रही हैं आप!

मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- वैसे … तेरी मासूमियत देखकर मन तो कर रहा है कि तेरा रेप कर दूँ।
पायल हंसती हुई बोली- अच्छा … मतलब आप जैसी खूबसूरत और भोली सूरत वाली लड़की ये भी कर सकती है?

फिर हम दोनों हंस पड़ी।

हांलाकि मैं और बात को आगे बढ़ाना चाह रही थी.
लेकिन डर था कि कहीं पहले दिन ही ज्यादा बात बढ़ाने से कहीं मामला उल्टा ना हो जाए।

वैसे भी मैंने जितना सोचा था पहले दिन उससे कहीं ज्यादा तक बात हो चुकी थी।
इसलिए फिर थोड़ी देर और हल्का-फुल्का मजाक करने के बाद हम सो गई।

कहानी में कहानी से कहानी निकालने की कला आपसे ज्यादा कोई नहीं जानता, और जब आपने रोहित की फेमली फैंटेसी की बात की तभी कुछ सुनगुन तो मिल गयी थी रोहित के साथ क्या होने वाला था,

लेकिन शादी के बाद पति पत्नी के बाद अगर सबसे मीठा रिश्ता है, सम्भावनाओ से भरा वो है ननद भाभी का और ये में और मेरी कहानियों से ज्यादा कम लोग जानते हैं

सिर्फ आप अपवाद है और इस कहानी में जिस तरह पायल के साथ छेड़खानी हुयी, रिश्तों को गरमाया जा रहा है वो पढ़ के सच में मजा आ गया

सेक्स से ज्यादा मजा अगर किसी में है तो वो सेक्स के बारे में बाते कर के और ननद भाभी के रिश्ते में तो कितने पन्ने खुलते हैं

सबसे पहले तो अपने मरद को उसके ऊपर चढाने का मजा, फिर मरद के बाद भाई का नमबर और भाई से गुड्डे गुड़िया का खेल हो चूका है तो कहना ही क्या। गरिमा से तो उसके भाई ने एडवांस में उसकी ननद की बुकिंग करवाई थी

और खुद से भी जब मरद न हो तो लेस्बो सीन और ननद भाभी के हसीन रिश्तों की जबरदस्त शरुआत आपने इस पार्ट में कर दी

बहुत ही बढ़िया ढंग से


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rajkomal

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yeh mera pahla comment h apki post par. aap to excellent Poet h. me aapki poem ka one of zabra fan hu. aapki post Komal Ji ki story me dikhti thi. wah kya likhti ho. story bhi achchi likhti ho. maja aa gaya. ab is forum par achche writer judne lage h. pahle comment nai bhi kiya to bhi acha hi likhti ho aap.
 
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