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Raja thakur
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Gazab,shandar,sexy update cccccc sssiii24th Update (सेक्सी होली )
वसु: चुप कर.. तेरी भी जल्दी ही मजे होने वाले है. जब दिनेश और ऋतू वापस आ जाएंगे तो तेरी भी शादी जल्दी ही होगी उससे. फिर तू भी मजे करना. निशा भी शर्मा जाती है और प्यार से उसकी माँ वसु के गले लग जाती है. शाम के वक़्त दीपू भी जल्दी घर आ जाता है और फिर सब रात की तैयारी करते है जब वो लकड़ियां वगैरा सब इक्कट्ठा करते है जलाने के लिए...
अब आगे..
शाम को सब इकठ्ठा होकर चाय पीते है और रात की तैयारी करते है जब उन्हें साथ में होली दहन मनाना था. उसी वक़्त निशा कहती है की वो आज रात अपने दोस्तों के साथ बिताएगी और कल सुबह होली खेल कर ही आएगी.
वसु: क्यों? यहीं पर रहो और हम सब एक साथ होली खेलेंगे.
निशा: नहीं माँ.. मैं अपने दोस्तों के साथ ही होली मानूंगी. यहाँ सब आप. और दीपू को देखते हुए, मिया बीवी मस्ती करेंगे और मैं बीच में कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहती. निशा की ये बात सुनकर वसु शर्मा जाती है क्यूंकि उसे पता था की निशा क्या बात कर रही है.
दीपू: ठीक है चली जाओ.. अगले साल तू खुद ही हमारे साथ होली खेलने आओगी दिनेश के साथ. निशा फिर अपना कुछ सामान और पुराने कपडे लेकर जाने को होती है तो वसु उसे अकेले कमरे में बुलाके कहती है
वसु: कल तू अपने दोस्तों के साथ होली खेल कर दोपहर तक आ जाना.
निशा: क्यों?
वसु: इसीलिए की कल शाम को तेरे भाई और कविता की शादी करने का सोच रही हूँ. कल अच्छा दिन भी है.. लेकिन अभी ये बात तुम किसीको मत बताना और ये बात सिर्फ हम तक ही रेहनी चाहिए.
निशा: ठीक है माँ आप चिंता मत करो. मैं कल दोपहर तक आ जाऊँगी.
वसु: ठीक है और अपने दोस्तों के साथ ज़्यादा मस्ती मत करना.
निशा: ठीक है माँ और फिर निशा भी दीपू और बाकी सब को Bye बोलकर चली जाती है..
रात को सब लोग खाना खाने के बाद घर के चौखट पे दीपू सब लकड़ियां वगैरह सब अच्छे से सजाता है और बाकी सब भी आ जाते है. सब लोग एक साथ मिलकर लकड़ियां जलाते है और फिर थोड़ी पूजा भी करते है.
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फिर सब एक दुसरे को गुलाल लगाते है और बधाई देते है और वहां बैठ कर बातें करते है. दीपू वसु की गोद में सर रख कर हल्का सा सोता है.. सब बात करते रहते है तो दीपू को मस्ती सूझती है और चुपके से एक हाथ से उसकी एक चूची दबाता है. वसु को इसका एहसास नहीं था और उसकी चूची दबाने से हलकी सिसकी लेती है और दीपू की तरफ देखती है और कहती है की क्या कर रहा है? सब यहीं बैठे है.
दीपू: तो क्या हुआ? मैं तो अपनी बीवी से प्यार कर रहा हूँ और ऐसा कहते हुए अपना हाथ उसके सर के पीछे लेता हुआ वसु को झुकाता है और उसके होंठ चूम लेता है. वसु: चल बदमाश कुछ भी करता रहता है. ये सब बगल में बैठे दिव्या कविता और मीना भी देखते है लेकिन कोई कुछ नहीं कहता.
वसु अपने आप को दीपू से छुड़ाते हुए कहती है.. सुनो मैं एक बात कहना चाहती हूँ.
दिव्या: क्या?
वसु: यही की कल होली है दिन भी अच्छा है और मैं चाहती हूँ की कल दीपू कविता से शादी कर ले. वसु कविता की तरफ देख कर: आप क्या कहती हो?
कविता: मैं क्या कहूँगी.. जैसा तुम लोग सोच लो.
वसु दीपू से: तुझे कुछ कहना है क्या?
दीपू: कुछ भी नहीं और फिर कविता की तरफ देखते हुए: आप मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो.. आप अपने मन से ही इस नतीजे पर आये हो ना?
कविता: हाँ मैंने भी सोच समझ कर ही हाँ बोलै है वसु से.. अगर मेरी इच्छा नहीं होती तो मैं कभी हाँ नहीं कहती.
दीपू मीना की तरफ देख कर: मामी आपको भी कोई परेशानी नहीं है ना की आपकी माँ दूसरी शादी कर रही है?
मीना: नहीं मैं तो खुश हूँ की उनको तुम जैसा पति मिलेगा. मुझे पता है वसु और दिव्या दीदी तुमसे शादी कर के बहुत खुश है. और मैं चाहती हूँ की यही ख़ुशी तुम माँ को भी दो.
दीपू: आप उनकी चिंता मत करो. आपकी माँ यहाँ बहुत खुश रहेगी और अपनी मर्ज़ी और आज़ादी से जिंदगी जियेगी.
मीना: मैं भी यही चाहती हूँ. वसु: सुनो मैं इतना ही कहना चाहती हूँ की फिलहाल ये बात सिर्फ हमारे घर तक ही रहे. निशा को भी पता है और मैंने उसे कल दोपहर तक आने को कह दिया है. कल शाम तक इनकी शादी हो जायेगी. सब लोग इस बात को मान लेते है और फिर थोड़ी मस्ती करते हुए एक घंटे तक वहां रहते है और जब आग भी थोड़ा काम हो जाता है तो वो लोग घर के अंदर चले जाते है.
रात को सब लोग सो जाते है अपने अपने खलायों में की आगे क्या होने वाला है.
अगले दिन होली:
अगली सुबह वसु जल्दी उठ जाती है और दिव्या को भी उठा देती है. दोनों फिर अपना काम कर के किचन में चाय बनाती है तो उतने में दीपू भी उठ जाता है और फिर अपना काम कर के किचन में जाता है जहाँ दोनों बातें करते हुए चाय बना रही होती है. दीपू पहले दिव्या को पीछे से पकड़ कर उसकी चूची दबाते हुए उसे पलटा कर होली की शुबकामनाएं देता है और उसके होंठ चूम लेता है. दिव्या भी वही करती है और दीपू का साथ देती है उसके होंठ चूमने में. यही काम वो वसु के साथ भी करता है और दोनों भी एक गहरे चुम्बन के साथ होली की बधाइयां देते है. इतने में कविता और मीना के आने की आहात होती है तो वसु दीपू को अलग कर देती है.
फिर सब मिलकर चाय पीते है और फिर दीपू कमरे से गुलाल लाता है और दोनों मीना और कविता के गाल पे गुलाल लगाते हुए उन्हें भी विश करता है. कविता दीपू के गाल पे गुलाल लगा कर उसको विश करते हुए माथे को चूमती है.
दीपू भी शरारत से कविता के कान में कहता है: मुझे माथे पे नहीं... होंठ पे चाहिए. कविता ये बात सुनकर थोड़ा शर्माती है लेकिन फिर हलके से उसके होंठों पे एक चुम्बन देती है.
दीपू कविता के कान में: शादी के बाद तो आपके होंठों को चूस चूस कर पूरा रस पी लूँगा.
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है क्यूंकि उसको पता था की अगले एक दो दिनों में ऐसा ही होगा.
उन दोनों को खुसुर फुसुर बातें करते हुए देख कर वसु कहती है: क्या बातें हो रही है? कविता शर्म के मारे कुछ नहीं कहती तो दीपू कहता है: मैंने क्या कहा है इसे मैं तुम्हे अकेले में बताऊंगा.
फिर दिन ढलते ही सब लोग मस्ती करते हुए होली खेलते है जहाँ दीपू सब को खूब रंगता है और वसु और दिव्या को खूब रगड़ता है.. और सब पे पानी फेंकता है ..
उनको पता था की दीपू कुछ ऐसा ही करने वाला है तो वो थोड़े पुराने सफ़ेद कपडे पहनकर वो भी मस्ती में खेलते है. वसु भी मीना और कविता को खूब रगड़ती है.
खेलते खेलते वसु अपने कमरे में आती है और कविता को भी वहां खींच के ले जाती है और जब वो दोनों अकेले होते है तो वसु कविता को पकड़ कर एक गहरा गीला चुम्बन देती है उसके होंठों पे तो कविता भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. वो भी वसु का साथ देते हुए वो भी ऐसा ही करती है.
वसु कुछ रंग उसकी चूची पे लगाते हुए उसे मस्त दबाती है और दुसरे हाथ को उसके साडी के अंदर डाल कर उसकी चूत भी दबाती है.
कविता के मुँह से हलसी सिसकी निकल जाती है और वो भी वसु की गांड दबाते हुए अपने से चिपका लेती है और दोनों के होंठ फिर से जुड़ जाते है.
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जब वसु अपना हाथ कविता की चूत से निकालती है तो देखती है की उसका हाथ पूरे पानी से भीग गया है.
वसु अपना हाथ देख कर: तू तो बहुत पानी बहा रही है. ये पानी है की तेरी चूत का रस?
कविता: क्या करून.. जब से दीपू ने मेरे कान में कुछ कहा था.. तब से मैं गीली हो रही हूँ.
वसु: वैसे एक बात कहूँ.
कविता: हाँ बोलो ना.
वसु: कल तुम दोनों की शादी है तो मैं चाहती हूँ की तुम आज अपने मस्त जलवे दीपू को दिखाओ.. और कविता की चूची और गांड दबाते हुए..इतनी मस्त चूचियां है तुम्हारी.. दीपू को अपनी चूची और गांड के जलवे दिखाओ.. फिर देखना कल तुम्हारी सुहागरात कितनी ज़बरदस्त रहेगी की तुम उसे पूरी ज़िन्दगी याद करते हुए अपनी चूत गीली करती रहोगी. समझी.
वसु की ये बात सुनकर कविता एकदम शर्मा जाती है. उसे शर्माता देख वसु कहती है.. अब ये शर्माना छोड़ दो.. अगर ऐसे ही शर्माते रहोगी तो दीपू तुम्हे एकदम बेशरम बना देगा जैसे उसने मुझे और दिव्या को बना दिया है. अगर वो नहीं बनाया तो मैं तुम्हे ज़रूर बेशरम बना दूँगी और देखना तुम भी हमारी तरह कमरे में खुल के बात करोगी और फिर से एक बार और उसके होंठ चूम लेती है.
वसु: वैसे , क्या कहा था दीपू ने?
कविता कुछ बोलने को होती है तो उतने में उसे वहां किसीके आने की आहट होती है. वहां दीपू आ जाता है तो कविता दीपू को देख कर वहां से भाग जाती है.
वसु कविता से कहती है की उसने जो कहा था वो करे.
वसु भी जाने को होती है तो दीपू उसे पकड़ लेता है और उसकी गांड पे चपत मारता है और उसकी साडी के ऊपर अपने पंजे का चाप छोड़ देता है.
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फिर उसको पीछे से बाहों में भरके उसके गले को चूमते हुए अपना हाथ उसकी चूत पे रख कर पीछे से एक धक्का देता है और उसका लंड वसु की गांड पे धस जाता है.
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वसु भी आअह्ह्ह करती है तो दीपू उसके कान को चूमते हुए कहता है: आज रात तैयार रहना. होली स्पेशल चुदाई होगी हमारी.
वसु: ना बाबा.. आज नहीं.. आज तो तुम्हे एक नहीं चूत मिल जायेगी.. फिर मुझे क्यों याद करोगे?
दीपू: ऐसे कैसे हो सकता है.. मुझे जितनी भी चूतें मिल जाए.. लेकिन तुमसे बढ़कर कोई नहीं है.
वसु भी बहक जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए दीपू से अलग हो जाती है और उसे चिडाते हुए वहां से भाग जाती है.
ऐसे ही मस्ती करते हुए दीपू फिर वसु और दिव्या पे रंग बिरंगी पानी डालता है. पानी डालने से वसु और दिव्या लगभग एकदम नंगी नज़र आती है...दोनों की सफ़ेद साडी भीग जाती है जिससे उन दोनों की चूचियां, नाभि एकदम साफ़ नज़र आती है. उन दोनों को देख कर दीपू के मुँह में तो एकदम पानी आ जाता है क्यूंकि वो दोनों ही उतनी सेक्सी लग रही थी. उनके बदन पे कपडा था लेकिन ना के बराबर था.
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कविता दीपू से भाग कर जब कमरे में जाती है तो उसे वसु की बात याद आती है और वो कुछ सोचती है और फिर उन्ही की तरह एक एक पतली और ट्रांसपेरेंट साडी पहन लेती है और दीपू का इंतज़ार करती है क्यूंकि उसे पता था की दीपू भी उसपर पानी डालने आएगा.
दीपू जब कमरे में जाता है कविता के साथ खेलने के लिए तो उसे देख कर एकदम एकदम दांग रह जाता है क्यूंकि वसु के कहने पर कविता ने भी अपने कपडे बदल लिए थे और वो सिर्फ एक पतली और ट्रांसपेरेंट साडी पहन कर आती है जिसमें वो केहर ढा रही थी. वो सिर्फ साडी ही पहनती है और लगभग नंगी ही नज़र आती है क्यूंकि उसने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी.
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जब कविता की चूची दबाने लगता है तो कविता उससे दूर हो जाती है और कहती है की अभी और कुछ नहीं करना. जो भी हो तो शादी के बाद ही करना. कविता जब ये बात कहती है तो दीपू दुखी मन से दूर जो जाता है. कविता उसको ऐसा देख कर हस्ती है और कहती है.. तुम मुझे सिर्फ किस कर सकते हो अगर करना चाहो तो लेकिन इसके आगे और कुछ नहीं. बोलो मंज़ूर है?
कविता की ये बात सुनकर दीपू आगे आता है और अपने होंठ उसके होंठों से मिला देता है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. 2-3 min बाद कविता ही उससे अलग हो जाती है और कहती है की अभी के लिए बस इतना ही... और उसे छिडाते हुए अलग हो जाती है और कहती है की अभी सिर्फ ऊपर ही रंग लगाओ. थोड़ा इंतज़ार करो. मैं चाहती हूँ की पहले शादी हो जाए फिर मैं तुम्हे कभी नहीं रोकूंगी. दीपू भी उसकी बात मान जाता है और मस्ती के साथ कविता के साथ भी होली खेलता है और उसे भी पूरे रंग में भिगो देता है.
ऐसा ही कुछ वो मीना के साथ भी करता है. मीना भी एक सफ़ेद साडी पहनती है और अपनी माँ की तरह ही बिना ब्लाउज और ब्रा के साडी पहनती है जिसमें से उसकी चूचियां भी बाहर आने को तड़प रही थी.
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अब मीना को भी दीपू के साथ अपनी शर्म थोड़ी काम कर लेती है लेकिन वो उसे आज ज़्यादा कुछ नहीं करने देती. सिर्फ ऊपर ऊपर से ही रंग लगाना और ज़्यादा कुछ नहीं.. क्यूंकि वो सोचती है की आगे वो उसे खुद ही अपने जलवे दिखाएगी.
वहीँ दूसरी तरफ निशा भी अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती करती है और वो भी होली खूब अच्छे से खेलती है.
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वहीँ दुसरे गाँव में दिनेश और ऋतू भी मस्त होली खेलते है. होली खेलते खेलते कोई ऋतू को भी पूरे पानी से भीगा देता है जिससे ऋतू की मस्त चूचियां भी उसके गीले ब्लाउज से पूरा नज़र आता है. ठीक उसी वक़्त दिनेश भी ऋतू को देखता है और उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि उस वक़्त ऋतू की दोनों चूचियां दिख रही थी उसके गीले ब्लाउज में से.
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उसको देख कर पहली बार दिनेश के मन में उसके माँ के प्रति उसका मन बहकने लगता है और सोचता है की उसकी माँ भी कितनी सेक्सी है. फिलहाल वो ये बातें अपने मन से निकाल लेता है और अपने दोस्तों के साथ होली खेलता है.
यहाँ दीपू के घर में:
सब मस्त होली खेलते है और आखिर कार सब रंग में भीग जाते है और जब थोड़ा ठंडा हो जाता है तो सब घर आ जाते है और वैसे ही थोड़ा आराम करते है.
वसु: सब को देख कर.. चलो आज मजा तो बहुत आया.. पहले नाहा लेते है...अगर जल्दी नहीं नहाये तो रंग उतरेगा नहीं. सब लोगों भी इस बात पे हाँ कहते है और फिर पहले कविता अपनी गांड मटकाते हुए कमरे के बाथरूम में चली जाती है.
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वसु भी अपने कमरे के बाथरूम में जाने को तैयार होती है तो इससे पहले ही दिव्या चली जाती है नहाने के लिए. उसको जाता देख कर दीपू वसु को देख कर आँख मारता है और वो भी दिव्या के पीछे चला जाता है. दिव्या ये देख नहीं पाती और जब वो बाथरूम में जाकर दरवाज़ा बंद करने जाती है तो उसके पीछे दीपू भी आ जाता है और कहता है की वो दोनों साथ नहाएंगे. दिव्या नहीं मानती लेकिन दीपू को वो रोक नहीं पाती है आखिर में दोनों बाथरूम में चले जाते है. बाथरूम में दोनों एक दुसरे को रगड़ रगड़ के साफ़ करते है और जब उनके बदन से रंग पूरा उतर जाता है तो दीपू दिव्या को चूमते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रख देता है.
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दोनों चूमते रहते है और दिव्या भी उसका लंड मुठियाते रहती है. देखते ही देखते दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है और फुल फॉर्म में आ जाता है और फिर उसे वहीँ दीवार से सटा के पीछे से उसकी चुदाई करने लग जाता है.
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पहले धीरे धीरे लेकिन फिर ज़ोर पकड़ लेता है और दाना दान दिव्या को पेलने लग जाता है. उन दोनों के ऊपर पानी गिरता रहता है और दोनों मस्ती में चुदाई करते है. पहले तो दिव्या थोड़ा ना नुकुर करती है लेकिन वो भी अब मजे में चुदने लगती है और उसे भी बहुत मजा आता है.
10 Min बाद फिर से दीपू पोजीशन बदलता है और उसे इस बार बाथरूम में ही घोड़ी बना कर चोदने लगता है. दिव्या भी आअह्ह ओहओहओह करती रहती है. 15 Min तक दीपू दिव्या को मस्त चोदता है... इतने में ना जाने दिव्या कितनी बार झड़ जाती है लेकिन दीपू फिर भी लगा रहता है.
दिव्या: मैं तो बहुत थक गयी हूँ दीपू.. मुझे अब छोड़ दे.. या फिर तू भी अपना पानी निकल दे.
दीपू: ऐसे कैसे डार्लिंग.. आज इतना जल्दी पानी नहीं निकलेगा. मैंने सोचा था की रात को तुम दोनों की लूँगा लेकिन लगता है तेरी सौतन ने मना कर दिया है.
दिव्या: दीदी की वजह से मेरी जान निकल रही है और तू रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.
दीपू: तो इसमें मेरी क्या गलती है? तू ही जाकर अपनी दीदी से पूछ लेना और हस्ते हुए उसे ठोकने लगता है. ऐसे ही काफी देर तक बाथरूम में दोनों में पेलम पेलाई चलती है तो इतने में वसु बाहर से दरवाज़ा खटखटाते हुए कहती है. और कितनी देर तुम लोग नहाओगे? जल्दी बाहर आओ... मुझे भी नहाना है.
दिव्या: जल्दी करो ना.. देखो अब दीदी भी बुला रही है.
दीपू: तो क्या हुआ? उसे भी आने दो... तीनो मिलकर एक साथ नहाते है और मजा भी करते है
दिव्या: ना बाबा ना... मैं तो पहले ही बहुत थक गयी हूँ. अब तुम ही दीदी को सम्भालो.. मैं जा रही हूँ.
दीपू: ठीक है और फिर ऐसे ही 4-5 मस्त झटके मारता है और अपने लंड को दिव्या की चूत से निकल देता है.
दिव्या: तुम अब तक झड़े नहीं हो? मुझसे तो अब चला भी नहीं जाएगा.
दीपू: चिंता मत करो.. सब ठीक हो जाएगा.
दिव्या फिर एक बार और नहाती है और पानी से अपनी चूत को अच्छे से साफ़ करती है क्यूंकि वो बहुत रस बहा रही थी.
दिव्या एक टॉवल पहन कर बाहर निकल कर कमरे में थोड़ा लंगड़ाते है. उसको देख कर वसु को हसी आ जाती है तो दिव्या कहती है: तुम अब अंदर जाओ. जब तुम बाहर आओगी तो मुझसे ज़्यादा लँगड़ाओगी. तुम आगयी तो उसने मुझे छोड़ दिया. तुम तो गयी आज.. और उसे आँख मारते हुए दिव्या नए कपडे पेहेन्ने लगती है.
वसु अंदर जाती है तो दीपू उसका ही इंतज़ार कर रहा था और अपने तने हुए लंड को मसल रहा था.
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वसु उसके तने हुए लंड को देख कर मन में सोचती है की दिव्या सही कह रही थी. फिर वो भी अपने बदन को खूब रगड़ रगड़ के साफ़ करती है और उसमे दीपू भी उसकी मदत करता है.. और वसु के बदन से रंग निकालते वक़्त उसकी चूची और चूत को भी खूब दबाता है जिससे वसु की सिसकारी निकल जाती है और ना चाहते हुए भी उसकी चूत से पानी निकल जाता है. जब उसके बदन से रंग पूरा निकल जाता है तो दीपू कहता है: बहुत हो गया है जान.. इतनी देर से इंतज़ार कर रहा था की तुम अपना रंग निकल लो. अब चलो अपने दोस्त को फिर से खुश कर दो... फिर मैं तुम्हे जन्नत की सैर करता हूँ और ऐसा बोलते ही दीपू वहीँ ज़मीन पे लेट जाता है और वसु को उसके लंड पे झुका देता है और खुद उसकी चूत को चूसने लग जाता है. दोनों ज़मीन पे एक दुसरे को 69 पोजीशन में मजा देते है. दीपू का लंड तो पहले से ही तना हुआ था तो वसु को ज़्यादा मेहनत नहीं करना पड़ता. वहीँ दीपू भी वसु की चूत को पूरा चूस कर उसका पूरा रस पी जाता है जब वो उसके चूसने से झड़ जाती है.
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अब दीपू का लंड भी पूरी तरह उसे सलामी दे रहा था तो वो वसु को झुका कर पीछे से पेलने लग जाता है. वसु भी मस्त आवाज़ें निकालती रहती है जिसे दिव्या बहार बैठे सुन रही थी और मन में सोचती है की उसने अच्छा किया की वो बाहर आ गयी नहीं तो उसकी भी ऐसी ही हालत होती.
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10 Min तक वसु को चोदने के बाद वसु कहती है.. जानू यहाँ जगह काम पढ़ रही है.. जल्दी अपना पानी निकालो ना..
दीपू: तुम ठीक कह रही हो.. और फिर वसु को अपनी गोद में उठा कर बाहर आकर बिस्तर पे लिटा देता है. उस वक़्त वसु बहुत सेक्सी नज़र आ रही थी. भीगा बदन ज़ुल्फ़ें भी एकदम भीगी हुई. दीपू से रहा नहीं जाता और बिना देरी किया अपना खड़ा लंड एक बार में ही पूरा उसकी चूत में घुसा देता है. वसु आह्ह करते हुए सिसकती है. उसी वक़्त दिव्या अपने कपडे पहन कर कमरे से बाहर चले जाती है कुछ काम के लिए लेकिन उसको वसु की सिसकारियों की आवाज़ आती है तो अपने मन में हस्ती है की आज तो वसु का पूरा बंद बजने वाला है... और होता भी यही है. दीपू भी दनादन पेलते रहता है और अब उससे भी रहा नहीं जाता. वो भी आखिर कार अपना रस निकालने को होता है तो वसु कहती है की उसके मुँह में झड़ जाए. दीपू फिर ३- ४ ताकतवर शॉट मारता है. ठीक उसी वक़्त दिव्या भी वापस कमरे में आ जाती है और दीपू अपना लंड निकल लेता है और दोनों दिव्या और वसु के मुँह में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से पी लेते है. वसु के मुँह से कुछ बूँदें निकलती है तो दिव्या वसु को चूमते हुए वो बूँद भी पी जाती है..
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दूसरी तरफ..
ऋतू और दिनेश भी होली खेल कर अपने आप को ठीक करते है. दोनों भी थके होने के कारण अपने अपने कमरे में सोने चले जाते है. जहाँ दिनेश जल्दी सो जाता है वहीँ ऋतू को नींद नहीं आती और आज होली में कुछ लोगों को मस्ती करते और चूमते चाटते देखती है और उनको याद करते हुए अपनी चूत मसलती रहती है और बड़बड़ाती रहती है. उस वक़्त दिनेश उठ कर बाथरूम जाने के लिए ऋतू के कमरे से गुज़रता है और जब उसे उसके कमरे से धीमी आवाज़ आती है तो वो आज पहली बार देखता है की उसकी माँ भी कितनी प्यासी है. उसको वैसे देख कर आज दूसरी बार उसपर मन बहक जाता है और सोचता है की जब उसका दोस्त दीपू अपनी माँ से शादी कर सकता है तो वो क्यों नहीं... क्यूंकि उसकी माँ भी बहुत प्यासी थी....